श्रावण मास सोमवार व्रत एवं पूजन 2026
सनातन धर्म का परम कल्याणकारी श्रावण महीना
आदिदेव महादेव भगवान शिव का पूजन एवं रुद्राभिषेक का शास्त्रीय विधान
प्रस्तावना
सत्य सनातन धर्म के अनुसार 12 महीनानों में श्रावण महीना परम कल्याणकारी ब्रह्मांड की परम रहस्यमई ऊर्जा और ऐसी चेतना से अपने भक्तों को जोड़ता है। जिससे भक्ति भाव से विभोर होकर कदम-कदम पर उन्हें आत्म शुद्धि तपबल प्राप्त होता है। शिवलिंग एक प्रतीक के रूप में है, जो व्यक्ति श्रद्धा भक्ति भाव से विश्वास के साथ उनकी अर्चना पूजा करता है। उसे यह शिवलिंग रिसीवर की तरह रिसीव कर लेता है तथा ब्रह्मांड से कल्याणकारी और गोपनीय ऊर्जा को उसके हित में लगा देता है। जिससे व्यक्ति के रोग पीड़ा बीमारी दुख दरिद्र दूर होते हैं, इसमें कोई शंका नहीं है। शिव के इस श्रावण मास में प्रकृति की घटा बड़ी ही अनुपम और निराली हो जाती है। भगवान शिव को रुद्राभिषेक अत्यंत प्रिय होता है।
कृपया 01141114242 पर कॉल करें, (पहली कॉल 3 मिनट के लिए निःशुल्क है।)
इसलिए घनघोर काली घटाएं कही भयंकर वर्षा करती हुई तो, कहीं अविरल रिमझिम बारिश से आदि देव महादेव का अनवरत रूप से बिना रुके अभिषेक करती रहती है। भगवान महादेव के इस अभिषेक उत्सव में संपूर्ण प्रकृति भाव भक्ति से विभोर होकर शामिल हो जाती है, जहां मयूर नृत्य करने लगता है तथा हवाएं बिल्कुल सर्द और ठंडी कई बार बहने लगती है। नील गगन के नीचे और सूखी हुई धरती हरी भरी हो जाती है। कई जल स्रोत जो सूख चुके होते हैं। वह पुनः अपने अनुपात के हिसाब से विशाल जल राशि को संग्रहित कर लेते हैं।
श्रावण मास का पौराणिक महत्व
आदित्य भगवान महादेव शिव के संदर्भ में पौराणिक कथन जो सबसे सटीक और प्रामाणिक मिलता है, वह शिव महापुराण प्रमुख स्रोत है। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय होता है और यह आदि देव महादेव और पार्वती आदिशक्ति की पूजा अर्चना और आराधना के लिए बहुत ही शुभ और शानदार माना गया है। शिव पुराण में शिव भगवान के विषय में और उनके विविध तरह के लिंग उनका क्या अर्थ है और उनकी पूजा अर्चना कैसे करनी चाहिए तथा शिवलिंग का प्रादुर्भाव इस जगत के कल्याण मात्र के लिए हुआ है। उमा महेश्वर संहिता में भी इसका उल्लेख मिलता है। शिवलिंग में कौन-कौन से देवता वास करते हैं और उनका पूजन का विधान और फल आदि क्या है? यह सब कुछ विस्तृत वर्णन पौराणिक कथा में बहुत ही सारगर्भित तरीके से प्राप्त होता है।
शिव की सर्वज्ञता सहित अनेक कथानक मनुष्य के कल्याण के लिए शिव पार्वती संवाद के अंतर्गत मिल जाते हैं। जो केवल कथा मात्र नहीं है, बल्कि दुर्लभ और अमृत पौराणिक भक्ति पूर्ण मार्ग है। जिससे सभी का परम कल्याण होता है।
तो आइए आचार्य अंकुश के साथ मंगल भवन के इस लेख में जानते हैं कि, श्रावण मास के सोमवार के व्रत कैसे करने चाहिए और उसका क्या महत्व है। इसको हम जानेंगे। अतः हमारे आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें। जिससे पार्ट वन में सावन के दो सोमवार और पार्ट 2 में अगले 2 सोमवार के व्रत और पूजन रुद्राभिषेक आदि का वर्णन आपको मिलेगा।
श्रावण महीने में पड़ने वाले सोमवारों का ज्योतिषीय महत्व:
इस श्रावण महीने संवत 2083 शकसंवत 1948 तथा ईस्वी संवत 2026 में श्रवण मास का प्रारंभ 30 जुलाई 2026 दिन बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है तथा इसका समापन रक्षाबंधन पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त 2026 को होगा। इस महा कल्याणकारी मास में इस वर्ष कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं। इन चारों सोमवारों का इस महा पवित्र मास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां ऋतु को देने वाले भगवान श्री सूर्य नारायण ने इन चारों सोमवारों को इस बार धर्म अर्थ काम और मोक्ष से जोड़ दिया है जो, मनुष्य के जीवन के चतुर्विध पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाले माने जाते हैं।
श्रावण मास कृष्ण पक्ष पहले दो सोमवार तिथि और तारीख सहित श्रावण के सोमवार:
श्रावण का पहला सोमवार 3 अगस्त उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में पड़ रहा है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस दिन नाग पंचमी का उत्सव बंगाल में मनाया जाता है। दूसरा सोमवार 10 अगस्त द्वादशी तिथि में पड़ रहा है। इस सोमवार में सोम प्रदोष व्रत है। इस दिन जो नक्षत्र पड़ रहा है वह आद्रा नक्षत्र है, जिसके स्वामी भगवान शिव है, इस हिसाब से इस दूसरे सोमवार का ज्योतिषीय आधार पर बहुत बड़ा महत्व हो जाता है। यानी यहां पर भगवान त्रिनेत्र धारी शिव का तिगड़ी वाला मेल बन रहा है। जिसमें सावन का महीना दिन सोमवार आद्रा नक्षत्र पहले तो यह बन रहा है और सोम प्रदोष व्रत को जोड़ लेने से इस सोमवार के दूसरे व्रत में चतुर विधि पुरुषार्थ मनुष्य के सिद्ध होते हैं। यानी इन सोमवारों का व्रत इस वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है, कई गुना फल को बढ़ाने वाला और पॉजिटिव एनर्जी को देने वाला है। क्योंकि इस वर्ष 2026 के जो श्रावण मास है, वह साधारण मास नहीं, बल्कि धर्म अर्थ और काम तथा मोक्ष को देने वाला कह गया हैं। अन्य दिनों की पूजा आराधना और व्रत तथा उपवास तथा रुद्राभिषेक से यह कई सहस्रों गुना अधिक सकारात्मक शुभ और कल्याणकारी फल को देने वाला हैं।
प्रथम सोमवार श्रावण मास:
3 अगस्त 2026 पंचमी तिथि उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र जो अत्यंत महत्वपूर्ण है, यह ऐसा संयोग है कि, सोमवार का व्रत करने वाले स्त्री पुरुषों को सुख शांति ऐश्वर्य कीर्ति वैभव और जीवन में ख्याति प्राप्त होती है। विशेष रूप से श्रावण महीने के जो सोमवार के व्रत हैं, वह अत्यंत प्रसिद्ध और विख्यात है। जिन्हें कुंवारी कन्याएं और महिलाएं अपने सौभाग्य सुख शांति की प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ करती है। सोमवार के व्रत का प्रचलन इतना है कि 16 सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ और सकारात्मक फल देने वाला माना जाता है। स्कंद पुराण में सोमवार व्रत कथा के विस्तार के संबंध में वर्णन मिलता है। व्रत और भगवान शिव का पूजन प्रत्येक मनुष्य का कल्याण करने वाला है उसके जीवन में शारीरिक और मानसिक शक्ति को देने वाला बौद्धिकता धन ज्ञान को देने वाला होता है। जिससे आरोग्यता और दीर्घायु तथा मनवांछित फल मिलते हैं।
श्रावण मास द्वितीय सोमवार का महासंयोग:
इस श्रवण के महीने में जो दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, यह अत्यंत शुभ संयोग है। श्रावण कृष्ण पक्ष तिथि त्रयोदशी दिन सोमवार और आर्द्रा नक्षत्र रहेगा।
यह नक्षत्र भगवान आदि देव महा रूद्र को अत्यंत प्रिय होता है। इस नक्षत्र के स्वामी भी यही माने जाते हैं। जो धार्मिक और आध्यात्मिक कई मामलों में अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ सोमवार का महासंयोग इस श्रावण मास 2026 में बन रहा है।
यानी इस सोमवार में जो सबसे महत्वपूर्ण और खास बात है पहले तो, श्रावण महीना दूसरा कृष्ण पक्ष तीसरा त्रयोदशी तिथि चौथा आद्रा नक्षत्र और पांचवा सोम प्रदोष व्रत, इस प्रकार से यह पंचवक्र भगवान आदि देव महादेव के लिए अत्यंत प्रिय और मनोवांछित फल भक्तों को देने वाला सोमवार सिद्ध होगा। सोमवार प्रदोष व्रत होने के कारण इस सोमवार को भगवान शिव की अर्चना और पूजा प्रातः और संध्या दोनों कालों में होती है, जो बहुत ही दुर्लभ तथा शुभ और सकारात्मक परिणाम को देने वाली कही गई है। भगवान शिव को बेलपत्र शमी पत्र मंदार पुष्प धतूर के पुष्प आदि पुष्प बहुत प्रिय होते हैं। इस सोमवार को जो महा संयोग बना रहा है, शिव की परम कृपा इस योग में बरस रही है। जो मनुष्य के सभी रोग दुख पीड़ाओं को दूर करने वाला होगा।
श्रावण सोमवार का व्रत विधान:
किसी भी स्त्री पुरुष को इस व्रत को करने के लिए रविवार के दिन से ही सोमवार व्रत के विधान के पालन हेतु मंगलाचरण यानी पहली शुरुआत कर देना चाहिए। हल्का भोजन तथा सोने से पहले भगवान शिव को प्रणाम और मानसिक संकल्प तथा भक्ति भावपूर्ण निवेदन की है प्रभु आदि देव महादेव में श्रावण सोमवार का व्रत करने जा रहा हूं या जा रही हूं। ऐसा मानसिक संकल्प करते हुए उन्हें प्रणाम करना चाहिए। तथा विशेष रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तामसिक आहारों के प्रयोग से दूर रहना चाहिए।
पूजन विधि:
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान के नाम का स्मरण तथा आधार शक्ति पृथ्वी को प्रणाम करते हुए, शौचादिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें। तथा एक आसन पर बैठकर अपने ऊपर जल के छीटें लगाकर ऐसी कामना करें कि, आप सभी तरह से पवित्र हैं। और तीन बार आचमन कर लें तथा आसन को भी पवित्र कर लें। एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें रोली तथा सुगंधित पुष्प डालकर पूर्वाभिमुख होकर भगवान सूर्य देव को सर्वप्रथम जल दें। इसके बाद यदि आपको मंत्र आते हो तो, पांच उपचार या फिर और भी आगे मंत्र आते हो तो, षोडशोपचार पूजन अपने घर में या शिवालय में जाकर करें या करवायें। पहले भगवान गणपति की पूजा, फिर मां गौरी की पूजा करें। इस प्रकार से संपूर्ण शिव परिवार सहित भगवान शिव की पूजा अर्चना करें और उनका अभिषेक भी करें। भगवान के रुद्राभिषेक के समय जिस भी पदार्थ या द्रव्य से आप अभिषेक कर रहे हैं, जैसे दूध घी शहद गन्ने का रस उसकी धारा को अविच्छिन्न भगवान शिव के ऊपर चलाते रहे और रुद्री पाठ जब तक संपूर्ण ना हो जाए तब तक इस द्रव को श्रृंगी में डालते रहें और भगवान शिव का ध्यान लगाए रहें।
भगवान शिव का उत्तर पूजन:
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है, जब भगवान शिव का रुद्राभिषेक पूर्ण हो जाता है। उसके पश्चात उन्हें पुनः शुद्ध जल और गंगाजल आदि से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उनका शानदार श्रृंगार किया जाता है। जिसमें श्वेत चंदन और वस्त्र आभूषण आदि भगवान शिव के अनुरूप उन्हें अर्पित किए जाते हैं, जो भगवान महा रुद्र के रूप को अच्छा लगता है।
यह भी जरुर पढ़ें- साप्ताहिक राशिफल 26 जुलाई-1 अगस्त 2026: मेष से कन्या
भगवान शिव को प्रिय लगने वाले पुष्प और अन्य पूजन सामग्री रुद्राभिषेक हेतु:
आदि देव महादेव को मंदार के पुष्प कनेर के पुष्प धतूर के पुष्प श्वेत रंग के खुशबू वाले पुष्प जैसे मोगरा आदि के पुष्प बहुत प्रिय होते हैं। इसी प्रकार बेलपत्र भी उन्हें अत्यंत प्रिय होता है, जल में गंगाजल दूध में गाय का दूध और मेवे तथा पंचामृत आदि भी उन्हें अत्यंत प्रिय होते हैं। इसी तरह भगवान शिव की पूजा में सुगंधित इत्र सुगंधित द्रव्य का प्रयोग किया जाता है। जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होते हैं। भगवान शिव को सुगंधित माल्यागिर चंदन अत्यंत प्रिय होता है। अतः प्रयत्न करके हर व्यक्ति को भगवान शिव को असली माल्या गिरि चंदन जरूर अर्पित करना चाहिए। मलयागिरी चंदन को सर्वोत्तम गंधों में से एक सुगंध माना गया है। भस्म भांग पान सुपारी जनेऊ मेवे मिष्ठान फल कई तरह की स्नान योग्य सामग्री। चावल धूप माला पुष्प आदि वस्त्र आभूषण जो भगवान शिव को प्रिय होते हैं, उन्हें अर्पित किया जाता है।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q1. श्रावण मास 2026 कब से शुरू होगा?
An. श्रावण मास 2026 का प्रारंभ 30 जुलाई 2026 से होगा और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पूर्णिमा के साथ होगा।
Q2. श्रावण सोमवार 2026 में कितने सोमवार पड़ेंगे?
An. वर्ष 2026 में श्रावण मास के दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे। ये सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को होंगे।
Q3. श्रावण सोमवार का व्रत क्यों रखा जाता है?
An. श्रावण सोमवार का व्रत भगवान शिव की आराधना, मनोकामना पूर्ति, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से रखा जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित व्रत माना जाता है।
Q4. श्रावण सोमवार की पूजा कैसे करें?
An. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करें। गणेश जी, माता पार्वती और शिव परिवार का पूजन करने के बाद शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें और बेलपत्र, पुष्प, धूप-दीप व नैवेद्य अर्पित करें।
Q5. श्रावण सोमवार को रुद्राभिषेक कैसे किया जाता है?
An. रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत या अन्य शास्त्रीय रूप से मान्य द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। श्रद्धानुसार रुद्र मंत्र या रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते हुए अभिषेक किया जा सकता है।
Q6. भगवान शिव को कौन-कौन से फूल प्रिय हैं?
An. भगवान शिव को बेलपत्र के साथ धतूरा, मंदार, कनेर और सुगंधित सफेद पुष्प जैसे मोगरा अर्पित किए जाते हैं। पूजा सामग्री परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकती है।
Q7. क्या श्रावण सोमवार का व्रत महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं?
An. हां, परंपरा में महिलाएं और कुंवारी कन्याएं भी श्रावण सोमवार का व्रत श्रद्धा और संकल्प के साथ रखती हैं। इसे सुख, सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति की कामना से किया जाता है।



