भाई दूज 2025! इस प्रकार तिलक करने से होगा मंगल ही मंगल, क्या आप जानते हैं, इस बार दूज पर अशुभ भद्रा साया व ग्रहों की चाल कैसी है!

भाई दूज 2025

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हिन्दू धर्म में, भाई दूज का पर्व को बहुत ही बहुत शुभ माना जाता है। यह पर्व न सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। बल्कि हमारी अटूट संस्कृति और परंपराओं की पहचान भी है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी आयु के लिए उन्हें तिलक करती हैं। ज्योतिष शास्त्र में भाई दूज पर भद्रा काल के अशुभ साये के बारे में बताया गया है। तो चलिए, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको भाई दूज 2025 के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। जिसमें हम आपको इस दिन चन्द्रमा व बुध की चाल के साथ अन्य ग्रहों के लिए उपाय भी बताएंगे। इस साल भद्रा का साया रहेगा या नहीं चलिए जान लेते हैं।  हमारे साथ पूरी जानकारी के लिए लेख के अंत तक बने रहें। 

जिस प्रकार धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य के लिए की जाती है। उसी प्रकार भाई दूज का शुभ पर्व भाई-बहनों का त्योहार होता है। जिसमें बहन अपने भाई की दीर्घ आयु और सफलता की मंगल कामना कर माथे पर शुभता के लिए तलक करती हैं। साल 2025 में, यह पर्व पूरे भारत में गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व दिवाली के ठीक बाद आता है और पांच दिवसीय दीपावली  महापर्व  का यह आखिरी पर्व होता है। यह पर्व मुख्य रूप से भारत भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के लिए बहुत ही शुभ व पवित्र दिन होता है।

दूज का पर्व हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। जिसे सभी परिवार बड़ी ही ख़ुशी से मनाते हैं। हालांकि, हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। और अशुभ भद्रा काल से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में किया गया शुभ कार्य फलहीन हो जाता है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों के अनुसार, इस साल 23 अक्टूबर 2025 यानी भाई दूज के दिन भद्रा काल का अशुभ साया नहीं है। यानी, भाई को तिलक करने का जो शुभ मुहूर्त है, वह पूरी तरह से भद्रा काल के के अशुभ साये से मुक्त है। ऐसे में बहने बिना किसी समस्या के अपने भाई का तिलक कर सकती हैं। 

वैदिक ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक मास की द्वितीया तिथि यानी दूज पर तिलक करने के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- 

  • कार्तिक मास की द्वितीय तिथि 

शुरुआत- 22 अक्टूबर 2025, को रात 08 बजकर 16 मिनट। 

समापन- 23 अक्टूबर 2025, को रात 10 बजकर 46 मिनट। 

  • तिलक करने का शुभ मुहूर्त

दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। 

भाई दूज का शुभ पर्व 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। 

ज्योतिष शास्त्र में और हिन्दू पंचांग में भद्रा काल को एक अशुभ साया या समय माना जाता है। क्योंकि, भद्रा शनिदेव की बहन है। उन्हें उग्र स्वभाव का माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य या कोई अनुष्ठान जैसे तिलक, गृह प्रवेश, या विवाह आदि भद्रा काल में वर्जित होते हैं। भाई दूज पर भाई को जो तिलक किया जाता है वह उनके लिए एक सुरक्षा कवच और लंबी आयु का आशीर्वाद का प्रतीक होता है। इसलिए, इस शुभ तिलक को करने से पहले यह जरूर ध्यान दें कि, यह रस्म किसी भी अशुभ समय में न की जाए।

इस साल ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, भाई दूज 2025 पर चंद्रमा और बुध की स्थिति का प्रभाव देखने को मिलेगा। जिस प्रभाव में ज्योतिषीय संदर्भ की गणना ही नहीं बल्कि, यह भाई-बहन के स्नेह, रिश्तों में मजबूती और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से भी जुड़ा है। इस दिन चंद्रदेव (चंद्रमा) और बुध ग्रह का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से आपके रिश्तों में, मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक जुड़ाव और भाई-बहन के आपसी प्रेम और सामंजस्य को सीधा प्रभावित करेगा। लेकिन, यह प्रभाव विशेष रूप से ग्रहों के प्रभाव और धार्मिक मान्यताओं से सम्बन्धित होगा। तो, चलिए जान लेते हैं, इस बार भाई-दूज पर ग्रहों के प्रभाव कैसे होंगे-

  1. मानसिक और भावनात्मक सम्बन्ध: चंद्रमा मन का कारक है, और चंद्र देव का प्रभाव भाई-बहन के रिश्ते में भावनात्मक गहराई और आपसी प्रेम व समझ के सम्बन्ध को मजबूत करता है। 
  2. संचार और संवाद: बुध ग्रह संवाद, बुद्धि, कौशल और सामंजस्य का ग्रह है। इसके प्रभाव में, भाई-बहन के बीच बेहतर संचार और विचारों का आदान-प्रदान शुभ स्थिति से जुड़ा हो सकता है। 
  3. पारिवारिक एकता: यह त्योहार पारिवारिक एकता के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा भी देता है। जिससे आपसी रिश्ते मजबूत होते है। 
  4. सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक: इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र,  सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। वहीं बदले में, भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। 

इस बार भाई दूज पर चन्द्र व बुध के प्रभाव के बारे में तो हमने जान लिया। लेकिन, भाई-बहन के रिश्ते को अधिक मजबूत करने और नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए हमारे ज्योतिषाचार्य के द्वारा भाई दूज के लिए कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं- ये उपाय इस प्रकार हैं

  1. भाई-बहन के पवित्र प्रेम में अधिक मिठास लाने के लिए बरगद के पेड़ पर दूध और पानी मिलाकर चढ़ाएं। 
  2. यदि आपके रिश्तों में मनमुटाव है तो, दूज के दिन पक्षियों को दाना खिलाएं। जिससे रिश्तों में सुधार और स्पष्टता आएगी। 
  3. इसके अलावा भाई की रक्षा हेतु भाई को उसकी राशि के अनुसार, तिलक करना शुभ होता है।

हमारी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में, हर एक त्यौहार का कुछ न कुछ पौराणिक महत्व जरुर होता है। भाई दूज के पर्व का भी शास्त्रों में, पौराणिक महत्व बताया गया है। की, यह पर्व क्यों मनाया जाता है, और इसके पीछे का सांस्कृतिक महत्व क्या है? तो चलिए जान लेते हैं, इस त्यौहार का पौराणिक महत्व-

एक समय, देवी यमुना ने अपने भाई यमराज (मृत्यु के देवता) को अपने घर आमंत्रित किया, उन्हें तिलक लगाया और उनकी दीर्घायु की मंगल कामना की। बदले में, यमराज ने उन सभी भाइयों को आशीर्वाद दिया, जिन्हें, इस दिन उनकी बहनों से तिलक करने का आशीर्वाद मिला था। तभी से कार्तिक मास की द्वितीया तिथि पर दूज का पर्व मनाया जाता है।

भाई-बहन अटूट बंधन का प्रतीक- भाई दूज का पर्व विशेष रूप से भाई-बहन के बीच पवित्र रिश्ते व अटूट बंधन का प्रतीक होता है। जो प्यार और सुरक्षा के रूप में होता है। यह धार्मिक अनुष्ठान भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घ आयु और कल्याण के लिए प्रार्थना का शुभ प्रतीक है।

ज्योतिष शास्त्र में, भाई दूज के शुभ अवसर पर, भाई को तिलक करने की रस्म बहुत महत्वपूर्ण होती है।

इसलिए राशि के अनुसार भाई को तिलक करना बहुत शुभ फलदायी होगा। यहां हमने, सभी राशियों के लिए अलग-अलग तिलक व उनकी शुभता के बारे में बताया है। जिससे भाई की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। सभी 12 राशियों के अनुसार तिलक इस प्रकार करें- 

इस राशि के भाई को बहने केसर मिश्रित तिलक लगाएं। ऐसा करने से ऊर्जा और आयु में वृद्धि होती है। 

वृषभ राशि के भाई के लिए केसर में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर तिलक करें। यह उनके लिए सुख और शांति देने वाला है। 

इस राशि के भाई को लाल सिंदूर से तिलक करना शुभ माना जाता है। जिससे उनके जीवन में सफलता आती है। 

कर्क राशि के भाई के लिए भी केसर में हल्दी मिलाकर तिलक करना बेहद लाभकारी होता है। इससे भाई-बहन के रिश्ते में मधुरता आएगी और रिश्ते मजबूत होंगे। 

सिंह राशि के भाई को केसर का तिलक लगाना चाहिए। यह उनके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा और जीवन में मान-सम्मान मिलेगा।

कन्या राशि के भाई को लाल सिंदूर से तिलक करें। इससे भाई के जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होंगी। 

तुला राशि के भाई के लिए केसर, हल्दी और थोड़ी पीली सरसों मिलाकर तिलक तैयार करें। इससे उनके जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है। 

वृश्चिक राशि के भाई को केसर में सिंदूर मिलाकर तिलक करना शुभ होता है। यह भाई को रोगों से बचाता है। और अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभ है।

इस राशि के भाई को केवल हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। यह करियर और उनके कार्यों में सफलता प्रदान करेगा। 

मकर राशि के भाई के लिए लाल रंग के चंदन का तिलक उत्तम माना जाता है। यह उनके जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है। और कार्यों में सफलता देने वाला होगा।

कुंभ राशि के भाई को रोली का तिलक लगाएं। यह उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है। 

मीन राशि के भाई के लिए केसर का तिलक सबसे शुभ माना जाता है। यह उन्हें उनके सभी प्रयासों में सफलता दिलाता है। 

शास्त्रों में, भाई-दूज पर भाई को तिलक करने की विशेष विधि के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार तिलक करना बुत उत्तम व शुभ माना जाता है।

  1. तिलक करते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर व बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
  2. तिलक लगाते समय बहन अपनी अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से भाई को तिलक करे और फिर अंगूठे से तिलक को थोड़ा ऊपर की तरफ बढ़ाए।
  3. इसके बाद चावल (अक्षत) और फूल भाई पर चढ़ाएं।
  4. तिलक लगाने के बाद, बहन भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराए और आरती उतारे।
  5. इसके बाद भाई को उपहार दें और उनके उज्जवल भविष्य की मंगल कामना के उन्हें आशीर्वाद दें।
भाई दूज 2025

नौ ग्रहों की शांति के ज्योतिष में कुछ विशेष दान और ग्रहों से सम्बन्धित मंत्रों का जाप करना बताया गया है। जो इस प्रकार है- 

हर दिन नवग्रहों को शांत और मजबूत करने के लिए नवग्रह चालीसा का पाठ करना बहुत लाभकारी होता है। इसके साथ आप उस ग्रह से सम्बन्धित मंत्र और दान भी कर सकते हैं- 

तांबा और गुड़ का दान करना शुभ फलदायी है।

लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करना शुभ है।

सफेद वस्त्र, दही, चावल, स्फटिक या चीनी का दान करना श्रेष्ठ है।

काले तिल, उड़द दाल, काला कपड़ा या लोहे का दान करना शुभ है।

  1. सूर्य: 

“ॐ ह्रीं हीं सः सूर्याय नमः”

  1. चंद्र: 

“ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः”

  1. मंगल: 

“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”

  1. बुध: 

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”

  1. गुरु: 

“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवे नमः”

  1. शुक्र: 

“ॐ द्राँ द्रीं द्रों सः शुक्राय नमः”

  1. शनि: 

“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’

  1. राहु: 

“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों सः राहवे नमः”

  1. केतु: 

“ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः”

Q. साल 2025 में भाई-दूज का पर्व कब मनाया जाएगा?

An. साल 2025 में, यह पर्व पूरे भारत में गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व दिवाली के ठीक बाद आता है और पांच दिवसीय दीपावली  महापर्व  का यह आखिरी पर्व होता है।

Q. इस साल भाई दूज पर ग्रहों का क्या विशेष प्रभाव है?

An. इस साल भाई दूज 2025 पर चंद्रमा और बुध की स्थिति का प्रभाव देखने को मिलेगा। जिस प्रभाव में ज्योतिषीय संदर्भ की गणना ही नहीं बल्कि, यह भाई-बहन के स्नेह, रिश्तों में मजबूती और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से भी जुड़ा है।

Q. कुम्भ राशि के भाई को किस प्रकार तिलक करना चाहिए?

An. कुंभ राशि के भाई को रोली का तिलक लगाएं। यह उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।

Q. भाई-दूज पर तिलक करते समय भाई का मुख कौन सी दिशा में होना चाहिए?

An. तिलक करते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर व बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।

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