कुंडली में दूसरे विवाह के लिए भाव व ग्रहों की गणना
ज्योतिष शास्त्र में, ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका हल नहीं मिला हो! वैसे ही, आज की दुनिया में सबसे कठिन है कुंडली में विवाह के लिए बनने वाले संकेतों के बारे में जानना! फिर चाहे वह दूसरी शादी के लिए ग्रहों की स्थिति के बारे में ही क्यों न हो! तो, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में, हम कुंडली में बनने वाले ऐसे संकेत के बारे में जानेंगे जो तलाक या दूसरी शादी के लिए जिम्मेदार हो सकते है-…
आज के आधुनिक दौर में, तलाक या दूसरी शादी असामान्य नहीं है! लेकिन ज्योतिष शास्त्र में, इसके लिए सही अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन का भी अध्ययन किया जाता है! कारण कुछ भी हो सकता है, भले ही, पहली शादी का तलाक, मृत्यु या अलगाव के कारण हुआ हो, आपकी जन्म कुंडली में बनने वाले संकेत बताते हैं ;आपकी दूसरी शादी कब और कैसे होने की संभावना है! आगे लेख में हम जानेंगे कुंडली में भावों पर ग्रहों की ऐसी स्थितियां जो, दूसरी शादी से संबंधित जानकारी देते हैं! साथी उनके लिए उचित उपायों के बारे में भी जानेंगे- तो विस्तार से पढ़ते हैं!
ज्योतिष में- दूसरे विवाह का क्या महत्व है?
सामान्य तौर पर दूसरे विवाह का मतलब है, पिछले विवाह का टूटना या समाप्ति के बाद एक नया वैवाहिक संबंध! लेकिन, यह भी तब ही संभव है जब कुंडली में, दूसरे विवाह के संकेत हो! इसलिए, ज्योतिष शास्त्र दूसरे विवाह की संभावना, सफलता और समय का सही निर्धारण करने के लिए विभिन्न ग्रहों की स्थिति, योग और दशा (ग्रहों की स्थिति) को की गणना करता है! आज के युग में, केवल दूसरे विवाह के बारे में जान लेना ही काफी नहीं है! बल्कि, उनकी उचित गुणवत्ता, अनुकूलता और प्रभाव के लिए भी किया जाता है। ऐसा कहा जाता है, कि जो रिश्ते लंबे समय तक नहीं टिकते हैं, उनके पीछे कर्म की भूमिका होती है! जिसकी जानकारी हमें जन्म कुंडली से प्राप्त होती है!
कुंडली में- दूसरी शादी के लिए भाव की जानकारी?
वैदिक ज्योतिष के आधार पर, कुंडली में, भावों की आधार पर ज्ञात किया जाता है कि, दूसरी शादी के योग हैं या नहीं! ऐसे जाने भावों महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में-
कुंडली में, सातवां भाव-
पहले विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी के बारे में जानकारी देता है!
कुंडली का दूसरा भाव-
परिवार को नियंत्रित करता है और विवाह के सफल होने की संभावनाएं बताता है!
कुंडली का आठवां भाव
हानि, परिवर्तन और संबंधों के समाप्त होने से संबंधित जानकारी देता है!
कुंडली का नौवा भाव
जीवन में, दूसरे विवाह, भाग्य और नई यात्राओं से सम्बन्धित जानकारी देता है!
कुंडली में ग्यारहवां भाव
इच्छाएं, दीर्घकालिक लाभ, और विवाह में अलगाव के बाद नए संबंध की जानकारी देता है!
ज्योतिष की दृष्टि में, दूसरे विवाह के लिए विशेष रूप से नौवां भाव, शुक्र या सातवें भाव के स्वामी के साथ किसी भी संबंध की जानकारी देते हैं!
दूसरे विवाह के लिए संकेत- ग्रहों की भूमिका
ज्योतिष में, दूसरे विवाह की जानकारी ग्रहों के आधार पर भी ज्ञात की जाती है! आइए जाने कुछ ऐसे ग्रहों के बारे में-
- शुक्र ग्रह
ज्योतिष में, शुक्र को, प्रेम और रिश्तों का ग्रह माना गया है! यदि कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर या पीड़ित होती है तो, यह अक्सर, वैवाहिक जीवन में कलह का कारण बनता है। साथ ही, ग्रहों का राशि परिवर्तन, कुंडली में अनुकूल भाव में हो तो, फिर से दूसरे मिलन का संकेत दे सकता है।
- राहु ग्रह
राहु जीवन में, अचानक और अपरंपरागत बदलाव की स्थिति के बारे में जानकारी देता है! कुंडली में, सातवें या नौवें भाव में राहु की स्थिति अक्सर अलगाव का कारण बनती है! जिसके बाद गैर-पारंपरिक या विदेशी रूप से दूसरा विवाह होता है!
- शनि ग्रह
शनि ग्रह कुंडली में कर्म के फल, ऋण और कार्यों में देरी के लिए जाने जाते हैं! कुंडली में शनि का मजबूत स्थिति में होना पहली शादी में देरी का कारण हो सकता है! साथ ही, यह पहली शादी में सीखे गए सबक के कारण दूसरी शादी की संभावना को भी बढ़ावा दे सकता है।
- बृहस्पति ग्रह
गुरु बृहस्पति की भूमिका महिलाओं की कुंडली में जीवन साथी का प्रतिनिधित्व करता है और पुरुषों की कुंडली में गुरु का। यदि वें, पीड़ित या वक्री अवस्था में हो तो, जातक की पहली शादी अधिक समय तक नहीं चलती है!
- चंद्र ग्रह
कुंडली में चन्द्र ग्रह मन, भावनात्मक प्रेरणा और मानसिक शांति के कारक होते हैं! चंद्रमा पर मंगल या राहु के प्रभाव से मन और भावनाएं प्रभावित होती है! मूड में उतार-चढ़ाव और अस्थिर वैवाहिक जीवन होता है!
ज्योतिष में- दूसरी शादी के लिए महत्वपूर्ण योग
भावों के आधार पर तो हमने जान लिया की कुंडली में कौन से भाव दूसरी शादी या विवाह के लिए महत्वपूर्ण रूप से देखे जाते हैं! अब हम कुछ महत्वपूर्ण योग और भाव के स्वामी की स्थिति से ज्ञात करेंगे की कुंडली में दुरे विवाह का संकेत हैं या नहीं!
- कुंडली में सातवें भाव के स्वामी का पीड़ित होना या अस्त होना अलगाव की स्थिति को दर्शाता है!
- शुक्र ग्रह का छठवें, आठवें, बारहवें भाव में स्थित होना भी दूसरी शादी के योग बनता है!
- कुंडली में सातवें भाव में शनि और राहु का होना, वैवाहिक जीवन में चुनौतियों को दर्शाता है। यह स्थिति वैवाहिक जीवन में तनाव, गलतफहमी, और तलाक की संभावना को भी दर्शा सकती है!
- शुक्र-राहु या मंगल के साथ चन्द्र की युति वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत नहीं है!
- कुंडली में, बुध या चन्द्रमा का सातवें भाव में पाप दृष्टि के साथ होना भी वैवाहिक जीवन में अलगाव को दर्शाता है!
- यदि कुंडली में सातवें भाव का स्वामी द्विस्वभाव राशियों (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में स्थित हो तथा पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो यह भी दूसरी शादी की संभावना बनती है।
- शनि और चंद्रमा की युति (विष योग) का निर्माण करती है! यह संयोजन भावनात्मक संकट, अवसाद और रिश्ते में भावनात्मकता की कमी लाता है!
ज्योतिष में, दूसरी शादी के लिए कुंडली मिलान-कैसे किया जाता है?
सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कुंडली मिलान बहुत ही महत्वपूर्ण चरण होता है! दूसरे विवाह में भी उचित कुंडली मिलान होने पर ही भावी योजनाओं को साकार किया जा सकता है! आइए जाने दूसरे विवाह में, कुंडली मिलान कैसे किया जाता है- और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
- दोनों पक्षों के गुण मिलान की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है!
- मांगलिक दोष के होने पर शनि पूजा करना या निष्प्रभावी किया जाना चाहिए।
- नाड़ी दोष को उचित उपाय कर टाला जाना चाहिए।
- वक्री ग्रहों और उनके गोचर के प्रभावों को देखा जाना जरूरी है!

तलाक से कैसे बचा जा सकता है?
यदि चुनौतीपूर्ण ग्रह प्रभाव मौजूद हैं, तो इसका मतलब हमेशा तलाक अपरिहार्य नहीं होता है। वैवाहिक समस्याओं को हल करने की दिशा में जागरूकता पहला कदम है। संचार, आपसी सम्मान और समझ रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। यदि आप कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, तो एक विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श करें जो आपकी जन्म कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
दूसरी शादी के लिए किए जाने वाले आसान ज्योतिषीय उपाय
यदि किसी जातक की कुंडली में दूसरे विवाह के योग हैं तो, आपको ज्योतिष द्वारा बताए गए इन उपायों को करना चाहिए!
- नियमित रूप से ” ऊँ शुक्राय नमः ” या ” ॐ बृहस्पतये नमः ” का जाप सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सहायक है!
- यदि कुंडली में, मंगल दोष है तो, उसकी विधिवत पूजा व निवारण कर नवग्रह शांति पूजा करना शुभ होता है!
- शुक्रवार को सफेद वस्तुएं जैसे (दूध, चीनी, चावल, सफेद वस्त्र) का दान करें, जिससे शुक्र के प्रभाव में सुधार होगा!
- गुरु बृहस्पति वैवाहिक जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है, इसलिए अनुभवी ज्योतिषी सलाह से, बृहस्पति के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा रत्न धारण करने से लाभ होता है!
- सोमवार और शुक्रवार को उपवास करने से वैवाहिक सम्बन्ध में सुधार की सम्भावना होती है!
निष्कर्ष
ज्योतिष शास्त्र में, विवाह या वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के सहीं उपाय बताएं गए है! यदि आपकी जन्म कुंडली में भी दूसरी शादी या अलगाव के संकेत दिखाई देते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है यह यथावत रहेगा! इसलिए उम्मीद न खोएं। आपसी सम्मान, सही प्रयास, धैर्य और उचित मार्गदर्शन से रिश्तों को बेहतर बनाया जा सकता हैं! ज्योतिष आपकी मदद करेगा, चुनौतियों को जल्दी हल पहचान कर हल करने में ! जिससे एक संतोषजनक और सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन की सफल बनाया जा सकता है!
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. क्या, कुंडली में दूसरी शादी की जानकारी देखी जा सकती है?
An. हां, ज्योतिष शास्त्र में, कुंडली देखकर दूसरे विवाह और उसके लिए सही अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन का भी अध्ययन किया जाता है!
Q. कौन से ग्रहों के योग कुंडली में दूसरे विवाह के लिए संकेत देते है?
An. यदि कुंडली में सातवें भाव का स्वामी द्विस्वभाव राशियों (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में स्थित है या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो यह भी दूसरी शादी की संभावना बनती है।
Q. क्या मंगल दोष वैवाहिक जीवन के लिए समस्या का कारण है?
An. हां, मंगल दोष वैवाहिक जीवन के लिए समस्या का कारण है, इसलिए यदि कुंडली में, मंगल दोष है तो, उसकी विधिवत पूजा व निवारण कर नवग्रह शांति पूजा करना जरूरी है!
Q. कुंडली में दूसरे विवाह के लिए कौन से भाव जानकारी देते हैं?
An. कुंडली का नौवा भाव और ग्यारहवां भाव जीवन में, दूसरे विवाह, भाग्य और नई यात्राओं से सम्बन्धित जानकारी देता है!




