दशमांश कुंडली (डी 10 चार्ट),  ज्योतिष की एक विशेष कुंडली, जिसकी जानकारी आपको भी होना जरूरी है!

दशमांश कुंडली (डी 10 चार्ट)

डी 10 चार्ट, यानी जिसे दशमांश कुंडली या कर्ममांश कुंडली के नाम भी दिया जाता है। यह वैदिक ज्योतिष की एक विशेष और महत्वपूर्ण वर्ग की कुंडली (Divisional Chart) होती है। यह जन्म कुंडली का ही (D1 या लग्न कुंडली) का एक हिस्सा है। जो कि, विशेष रूप से कर्म और कैरियर (पेशा, व्यवसाय, सामाजिक स्थिति, और उपलब्धियां) का विश्लेषण करने के लिए उपयोग किया जाता है। तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको इस महत्वपूर्ण चार्ट की विशेषता के साथ साथ विस्तार रूप भी बताएँगे। आशा करते हैं, हमारे लेख में दी गई जानकारी आप सभी के उपयोगी होगी। हमारे लेख पसंद आने पर हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। सम्पूर्ण जानकारी के लिए लेख पूरा पढ़ें- 

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ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली को विशेष रूप से 12 भावों में विभाजित किया गया है। जिससे हम जातक के जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी और घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं। इन बारह भावों में से दशम भाव (दसवें भाव) जो कर्म, पेशा, और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है। दशमांश कुंडली के इसी कुंडली दशम भाव का विशेषण और विस्तार करता है।

डी 10 चार्ट में सभी बारह राशियों को 10 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। जिसमें प्रत्येक भाग 3 डिग्री का होता है। इस तरह, 12 राशियों के कुल 120 दशमांश चार्ट बनाए जाते हैं। जिसे फिर से एक बार 12 राशियों में बनता जाता है। इस चार्ट के माध्यम से बहुत ही आसानी से किसी भी जातक के पेशेवर जीवन, कर्म के क्षेत्र में सफलता, सामाजिक मान-सम्मान व प्रभाव और जीवन में प्राप्त होने वाली उपलब्धियों को समझा जा सकता है।

ज्योतिष के अनुसार, दशमांश कुंडली का (डी 10 चार्ट) का कोई उप-विभाजन या भेद नहीं होता है। क्योंकि यह स्वयं एक विस्तार वर्ग की कुंडली है। हालांकि, वैदिक ज्योतिष में कुल 16 वर्ग कुंडलियां (षोडश वर्ग) होती हैं, जैसे डी1 (लग्न), डी 2 (होर), D3 (द्रेष्काण), डी 9 (नवमांश), आदि। प्रत्येक वर्ग की कुंडली का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है। ठीक वैसे ही, डी 10 चार्ट विशेष रूप से कर्म और पेशे की जानकारी के लिए होता है। लेकिन, यह बात विशेष है कि, कुछ अनुभवी ज्योतिष आचार्यों द्वारा दशमांश कुंडली को अलग-अलग दृष्टिकोणों से विश्लेषित किया गया है। आइये जान लेते हैं, कैसे-:

दशमांश कुंडली में, लग्न और उसका स्वामी से हम जातक के कैरियर की दिशा और प्रकृति और स्वभाव के बारे जान सकते हैं। यानी यहां (डी 10) में लग्न का अर्थ जातक के व्यक्तित्व की जानकारी से है। 

किसी भी कुंडली में महत्वपूर्ण यह है कि, उसमें ग्रहों की राशि, भाव, और नक्षत्र किस प्रकार हैं। यानी ग्रहों की स्थिति पर हम कुंडली में जातक के पेशे की जानकारी विस्तार से ज्ञात कर सकते हैं।

कुंडली में ग्रहों की दशा, महादशा, अंतर्दशा, और गोचर के साथ हम दशमांश कुंडली का विस्तार से अध्ययन कर सकते हैं। यानी ग्रहों की स्थितियों का संयोजन दशमांश कुंडली में बहुत महत्वपूर्ण होता है।

दशमांश कुंडली में, अष्टकवर्ग का उपयोग कर हम ग्रहों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव के बारे में आसानी से ज्ञात कर सकते हैं।

जरुरी नोट- ऊपर बताए गए ये भेद दशमांश कुंडली के उप-प्रकार नहीं हैं, बल्कि इसके विश्लेषण की अलग-अलग विधियां हैं। जिससे आसानी से जानकारी ज्ञात की जाती है।

संस्कृत भाषा में “दशम” का अर्थ है दसवां, और “अंश” का अर्थ है भाग की संज्ञा दी जाती है। डी 10 चार्ट को दशमांश कुंडली इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें, जन्म कुंडली की प्रत्येक राशि को 10 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। इसके अलावा, चूंकि यह चार्ट कुंडली के दसवें भाव (दशम भाव) से संबंधित है और राशि को 10 भागों में बांटता है, इसलिए इसे दशमांश कुंडली यानी डी 10 कहा जाता है। इसलिए, यह नाम वैदिक ज्योतिष के नियमों और की परंपरा के अनुसार दिया गया है। जहां प्रत्येक वर्ग कुंडली को उसके विभाजन की संख्या के आधार पर नाम दिया जाता है। जैसे D9 (नवमांश), D7 (सप्तमांश), आदि।

ज्योतिष में, किसी जातक के करियर और जीवन में पेशे की यदि सही जानकारी या मार्गदर्शन चाहिए हो तो, दशांश कुंडली डी 10 का अध्ययन और इसके सकारात्मक पहलू को जानना जरूरी है। जिससे आपको अपने जीवन पथ और अपनी यात्रा पर एक नया दृष्टिकोण प्राप्त होगा। दशांश या दशमांश कुण्डली को देखकर कर्मों और उनके पीछे की आंतरिक प्रेरणाओं की जानकारी मिलती है। 

दशमांश कुंडली के विभाजन का उपयोग किसी जातक के करियर और पेशे से सम्बन्धित जानकारी और विश्लेषण करने के लिए करते हैं। तो, आये हम जान लेते हैं कि, डी 10 में हम कुंडली के 12 भावों का महत्व क्या है- 

  1. कुंडली में पहला भाव- जातक के स्वभाव, व्यक्तित्व, करियर और चरित्र की जानकारी। 
  2. कुंडली में दूसरा भाव: जातक के व्यवसाय, पेशे में संसाधन, उत्पादन, वाणी और कार्यक्षेत्र। 
  3. तीसरा भाव: जातक का दूसरों से संचार, करियर में सफलता के लिए किए गए प्रयास और कार्यों की जानकारी।
  4. कुंडली में चौथे भाव: जातक के पेशे से सुख व लाभ, कार्य का वातावरण, कार्यालय से सम्बन्धित जानकारी।
  5. कुंडली का पांचवां भाव: व्यवसाय में सफलता, पेशे का प्रबंधन और विशेषता, योजना, नियंत्रण और बुद्धिमत्ता की जानकारी।
  6. छठा भाव: सेवा, बाधाएं, समस्याएं, करियर में चुनौतियां व प्रतिस्पर्धी 
  7. सातवां भाव: व्यापार, साझेदारी, पेशेवर संबंध की जानकारी।
  8. कुंडली का आठवां भाव: करियर में अचानक परिवर्तन, उतार-चढ़ाव, रूपांतरण, असफलता, निराशा, अनुसंधान
  9. नौवां भाव: भाग्य, अधिकारी, संरक्षण, कर्तव्य की जानकारी 
  10. कुंडली का दसवां भाव: सफलता, उपलब्धियां, मान-प्रतिष्ठा 
  11. कुंडली का ग्यारहवां भाव: लाभ, पेशेवर मित्र/नेटवर्क, आय 
  12. बारहवां भाव: पेशे में हानि, समझौते और व्यय

ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण और विशेष कुंडली के भाग को दशमांश कुंडली यानी डी – 10 कुंडली कहा जाता है। विशेष रूप से दशमांश कुंडली का उपयोग व्यवसाय में सफलता, समाज में मान-प्रतिष्ठा और आजीविका में वृद्धि इत्यादि की जानकारी ज्ञात की जा सकती है। यानी यह कहना बिलकुल गलत नहीं है कि, कुंडली में जैसे लग्न या अन्य अंशों की विवेचना जरूरी है, दशमांश कुंडली की विवेचना भी उतनी ही आवश्यक है। क्योंकि, इस कुंडली में दसवें घर (दशम भाव) दशमेश का सर्वाधिक महत्व है। इसके साथ ही साथ दशमांश से माता पिता से प्राप्त होने वाले के सुख-दुख और आयु का विचार भी हमें ज्ञात होता है। तो चलिए अब हम आपको दशमांश कुंडली के दस अंशों की जानकारी विस्तार से देंगे-

ज्योतिष में, पहला दशमांश 0 से 3 डिग्री का होता है। इसे ‘इंद्र दशमांश’  भी कहते हैं। इस अंश के माध्यम से धन-वैभव, संपन्नता और समाज में मान- सम्मान की जानकारी मिलती है। यानी इस अंश के नाम के अनुसार, कहने का अर्थ यह है कि, जैसे इंद्र देव सभी देवों में अग्रीण पर हैं, और सभी प्रकार के सुख-वैभव व सम्मान से युक्त हैं। उसी प्रकार जब दशम भाव या दशमेश का संबंध पहले यानी इंद्र दशमांश से बनता है, तो जातक को सभी प्रकार के सुख-सम्पन्नता और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। 

कुंडली में, दूसरा दशमांश 3 से 6 डिग्री का होता है। इस दूसरे दशमांश को ‘अग्नि दशमांश’  भी कहते हैं। यह दशमांश विशेष रूप से पराक्रम और साहस में वृद्धि करने वाला अंश माना जाता है। यदि कुंडली के दसवें (दशम भाव) या दशमेश, इस दुसरे ‘अग्नि दशमाश’ में हो तो जातक में अग्नि तत्व गुणों की अधिकता रहती है। ऐसा जातक अपनी शक्ति और बल द्वारा धन अर्जित करने का प्रयास कर सकता है। साथ ही ऐसे जातक को ऊर्जावान क्षेत्रों में व्यवसाय करने के अधिक क्षेत्र मिलते हैं।

कुंडली के तीसरा दशमांश 6 से 9 डिग्री का होता है। तीसरे दशमांश को ‘यम दशमांश’  भी कहा जाता है। इस यम दशमांश के कारण जातक में न्याय संगत के कार्य और श्रेष्ठ गुण व कुशलता आती है। अगर दशम भाव या दशमेश इस यम दशमांश में हो तो ऐसे जातक अपने कार्य को बहुत ही उचित रूप से करने वाले होते हैं। साथ ही, इनमें, नेतृत्व की भावना और श्रेष्ठ गुण होते हैं। ऐसे जातक में, दूसरों के लिए एक सही मार्गदर्शन  होने के पर्याप्त गुण होते हैं। 

कुंडली का चौथा दशमांश 9 से 12 डिग्री का होता है।  इस दशमांश को ‘राक्षस दशमांश’  के नाम दिया गया है। इस अंश से प्रभावित जातक अवैधानिक कार्यों को करने की चाह या नीति के विरुद्ध कार्य करने वाला होता है । यदि दशम भाव या दशमेश इस राक्षस दशमांश के साथ हो तो, ऐसे जातक सही और गलत के बीच अंतर को नहीं समझते हैं। ऐसा जातक चोरी, तस्करी, रिश्वतखोर जैसे अनैतिक व गलत कार्यों को करने वाला हो सकता है। 

कुंडली में पांचवा दशमांश 12 से 15 डिग्री का होता है। इस दशमांश को ‘वरुण दशमांश’  भी कहते हैं। इस अंश के प्रभाव में जातक जल से संबंधित कार्य को करने वाला होता है। दशमांश का संबंध यदि दशम भाव या इस भाव के स्वामी से हो तो, ऐसे जातक जल से सम्बन्धित व्यापार या कार्य जैसे नौका यान या पानी के जहाज में कार्य करने वाले होते हैं। इस अंश में ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। जिससे जातक को लाभकारी परिणाम देखने को मिलते हैं। यानी, जल से जुड़े सभी व्यवसाय है, लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। 

कुंडली का छठा दशमांश 15 से 18 डिग्री का होता है। इस दशमांश को ‘वायु दशमांश’  भी कहते है।इस अंश का संबंध यदि दशमेश या दशम भाव से हो,तो ऐसे जातक अपनी आय और धनार्जन वायु संबंधी कार्यों से कर करते हैं। इस दशमांश के प्रभाव में जातक दूरसंचार संबंधी कार्य या परिवहन सेवा, पायलट जैसे कार्यों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं। 

दशमांश कुंडली का सातवां दशमांश 18 से 21 डिग्री का होता है। इस दशमांश को ‘कुबेर दशमांश’  भी कहते हैं। अपने नाम के अनुसार यह अंश जातक को धन सम्बन्धी कार्यों में लाभ देने वाला होता है। इस दशमांश का संबंध यदि दशम भाव या दशमेश स्वामी से हो तो ऐसे जातक धन संपदा से युक्त होते हैं। इसके साथ ही, जातक का पेशा भी धन के लेन-देन से संबंधित कार्यों वाला होगा। जैसे कैशियर, बैंक कर्मचारी, फाइनेंस सलाहकार इत्यादि से सम्बन्धित कार्य। 

दशमांश कुंडली (डी 10 चार्ट)

दशमांश कुंडली का आठवां दशमांश 21 से 24 डिग्री तक का होता है। इस अंश को अष्टम दशमांश’  या ‘ईशान दशमांश’ कहते हैं। इस अंश से प्रभावित जातक समाज में प्रतिष्ठा व सम्मान को प्राप्त करते हैं। साथ ही, ऐसा जातक अपने कार्य को अच्छी प्रकार से करके दूसरों से प्रशंसा और सराहना पाते हैं। दशम भाव या दशमेश स्वामी का योग या युति अष्टम दशमांश से हो तो ऐसे जातक उदार, धीर और गंभीर स्वभाव के होते हैं। इसका अन्य ग्रहों से संबंध होने पर जातक राजा के समान पद की प्राप्ति भी कर सकता है। या वह समाज सुधारक या प्रबंधक सम्बन्धी कार्यों को करने वाला होता है। 

दशमांश का नवां दशमांश 24 से 27 डिग्री का होता है। नवम दशमांश को ‘पद्म दशमांश’  भी कहते हैं। यदि दशमांश का संबंध इस अंश से हो तो ऐसे जातक अनेक प्रकार के भौतिक सुख व सुविधाओं को प्राप्त करने वाला होता है। इससे प्रभावित होने पर जातक रचनात्मक कार्यों को करने में अधिक रुचि रखने वाला होता है। ऐसे जातक विद्वानों के समान गुण वाले होते हैं। व्यक्ति समाज के हित और जन कल्याण संबंधी कार्यों को करने में रुचि रखने वाले होते हैं।

दशमांश का यह अंश 27 से 30 डिग्री का होता है। दशम दशमांश को ‘अनन्त दशमांश’  भी  कहते है। यदि दशम भाव या दशमेश स्वामी इस दशमांश से कोई युति या संबंध में हो तो, ऐसे जातक बहुत परिश्रमी और  अनवरत प्रयास करने की इच्छा वाले होते हैं। इससे प्रभावित जातक में लगातार कार्य करने की श्रेष्ठ क्षमता वाले होते हैं। साथ ही, अपने कार्यों से उसे समाज में मान-प्रतिष्ठा भी मिलती है।

वैदिक ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण इकाई है, ‘दशमांश कुंडली’ यानी डी 10 चार्ट। जिसमें सभी राशियों के बारह भावों और उनके महत्वपूर्ण अंशों की विस्तार से जानकारी होती है। दशमांश में ग्रहों की महत्वपूर्ण स्थिति के साथ, दशमेश के स्वामी की भी अहम भूमिका होती है। यानी कि, कुल-मिलाकर  यह कह सकते हैं कि, डी 10 कुंडली के माध्यम से हम जातक के जीवन में कार्य क्षेत्र, व्यवसाय\पेशा, सफलता-विफलता और धन लाभ की स्थिति के साथ सम्पूर्ण व्यक्तित्व का आकलन कर सकते हैं।

Q. दशमांश कुंडली (डी 10) का ज्योतिष में क्या महत्व है?

An. यह वैदिक ज्योतिष की एक विशेष और महत्वपूर्ण वर्ग की कुंडली (Divisional Chart) होती है। यह जन्म कुंडली का ही (D1 या लग्न कुंडली) का एक हिस्सा है। जो कि, विशेष रूप से कर्म और कैरियर (पेशा, व्यवसाय, सामाजिक स्थिति, और उपलब्धियां) का विश्लेषण करने के लिए उपयोग किया जाता है।

Q. दशमांश कुंडली में क्या जरूरी होता है?

An. ज्योतिष में, किसी जातक के करियर और जीवन में पेशे की यदि सही जानकारी या मार्गदर्शन चाहिए हो तो, दशांश कुंडली डी 10 का अध्ययन और इसके सकारात्मक पहलू को जानना जरूरी है। जिससे आपको अपने जीवन पथ और अपनी यात्रा पर एक नया दृष्टिकोण प्राप्त होगा।

Q. दशमांश कुंडली के दसवें अंश का क्या महत्व है?

An. दशमांश का यह अंश 27 से 30 डिग्री का होता है। दशम दशमांश को ‘अनन्त दशमांश’  भी  कहते है। यदि दशम भाव या दशमेश स्वामी इस दशमांश से कोई युति या संबंध में हो तो, ऐसे जातक बहुत परिश्रमी और  अनवरत प्रयास करने की इच्छा वाले होते हैं।

Q. दशमांश कुंडली को डी 10 नाम क्यों दिया गया है?

An. यह चार्ट कुंडली के दसवें भाव (दशम भाव) से संबंधित है और सभी राशि को 10 भागों में बांटता है, इसलिए इसे दशमांश कुंडली यानी डी 10 कहा जाता है। इसलिए, यह नाम वैदिक ज्योतिष के नियमों और की परंपरा के अनुसार दिया गया है।

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