अमावस्या 2026- साल की सभी तिथि, और पांच विशेष अमावस्या, अनुष्ठान और महत्व की जानकारी के साथ विशेष उपाय !

अमावस्या 2026

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वैसे तो, सभी तीज-त्यौहार और व्रत का विशेष महत्व होता है। हर पर्व के पीछे कोई न कोई कथा और मान्यता जुडी होती है। जिनको करने से हमारे जीवन में शुभता का संचार होता है। सकारात्मकता आती है और हमें समृद्धि मिलती है। 

हमने आपको हमारे पिछले लेख में, पूर्णिमा के व्रत  के महत्व की जानकारी दी थी। आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको अमावस्या 2026  के महत्व और इस दिन किए जाने वाले अनुष्ठान की जानकारी विस्तार से देंगे। पूरी, जानकारी के लिए इस लेख में अंत तक बने रहिए, और हमें अपने जरूरी सुझाव जरूर दें। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या का दिन पितरों के तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। इसके साथ ही, यह केवल चंद्रमा के लुप्त होने का दिन ही नहीं है। बल्कि यह आत्मचिंतन, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का भी विशेष अवसर होता है। इसलिए, साल भर में आने वाली सभी अमावस्या की तिथियां बेहद खास और महत्वपूर्ण होती है। 

इसी जानकारी के साथ आगे के लेख में हम आपको,  साल 2026 में आने वाली सभी विशेष अमावस्या तिथियां और उनके दिन की जानकारी देंगे। जो कि, कई विशेष अनुष्ठान की द्रश्री से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। और आपको जब, सही अमावस्या 2026 की तारीख, समय, मुहूर्त और पूजा विधि की सटीक जानकारी होगी तो आपके द्वारा किए गए तर्पण और पूजा-विधि का फल भी आपको कई गुना बढ़कर मिलेगा।

                                                               लेख को पूरा पढ़े-

नीचे साल  2026 की सभी अमावस्या की सूची दी गई है:

दिनांक दिन अमावस्या तिथि 
18 जनवरी 2026रविवार मौनी अमावस्या 
17 फरवरी 2026सोमवार अमावस्या तिथि 
18/19 मार्च 2026बुधवार अमावस्या तिथि 
17 अप्रैल 2026शुक्रवार अमावस्या तिथि 
16 मई 2026शनिवार  श्राद्ध अमावस्या  
14/15 जून 2026सोमवार सोमवती अमावस्या 
14 जुलाई 2026मंगलवार हल हरणी अमावस्या 
12 अगस्त 2026बुधवार हरियाली अमावस्या 
10  सितंबर 2026गुरुवार कुशोत्पाटनी अमावस्या  
10 अक्टूबर 2026शनिवार सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या 
9 नवंबर 2026सोमवार कार्तिक अमावस्या 
8 दिसंबर 2026मंगलवार अमावस्या 

यहां हमने आपको सटीक जानकारी के लिए,  साल 2026 में आने वाली सभी अमावस्या की तिथियों की जानकारी दी है- जिससे आपको अनुष्ठान करने में आसानी होगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या का समय चंद्रमा की गति के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए, कुछ अमावस्या दो दिन तक रहती हैं, जैसे मार्च और जून, इसलिए सही तिथि की जानकारी होना जरूरी है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों  के अनुसार, अमावस्या की तिथि हर महीने आती है। लेकिन, साल में कुछ विशेष अमावस्या भी आती हैं- जैसे शनि अमावस्या, सोमवती अमावस्या और दीपावली अमावस्या ये बहुत फलदायी मानी जाती हैं। 

इसके अलावा, इस तिथि का पंचांग के अनुसार, भी तारीख का आरंभ और समापन अलग-अलग शहरों में अलग हो सकता है। इसलिए पूजा या तर्पण करने से पहले एक बार पंचांग और मुहूर्त जरुर देखे। आगे हम आपको साल की पांच बहुत ही महत्वपूर्ण अमावस्याओं और उनके महत्व की जानकारी देंगे। 

यह तिथि माघ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। यह दिन धार्मिक कार्य, मौन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान (विशेषकर प्रयागराज में संगम), और दान-पुण्य के लिए विशेष रूप से शुभ फलदायी है। मान्यता है कि इस दिन दान करने और मौन रहकर उपासना व ध्यान करने से पितरों को शांति मिलती है। इसके साथ ही, मौन रहने से, मानसिक शांति तो मिलती ही है साथ ही,  जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं।

यह अमावस्या बहुत ही खास तिथि मानी जाती है। क्योंकि, इस दिन सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह मंगल दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए बहुत ही  शुभ मानी जा रही है। इसके साथ ही, जो जातक इस दिन पितृ तर्पण का अनुष्ठान करते हैं, उन्हें पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

साल 2026 में, सोमवती अमावस्या भी आने वाली है। जो सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को कहा जाता है । हिंदू धर्म में इस तिथि को बहुत ही विशेष फलदायी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, पवित्र स्नान और दान-धर्म के कार्य के लिए बहुत ही श्रेष्ठ होता है। इस तिथि पर विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन के लिए व्रत भी रखती हैं। 

इसके साथ ही इस दिन पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी यह तिथि पितरों के आशीर्वाद, पितृ-दोष से मुक्ति, सुख-समृद्धि, पवित्र स्नान से पापों से मुक्ति, और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक दुर्लभ संयोग है। 

इस तिथि को ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक शास्त्र दोनों में ही बेहद विशेष माना जाता है। क्योंकि, इस दिन सभी पितृ विसर्जन का अनुष्ठान किया जाता है। 16 दिन के सोलह श्राद्ध के समय यह तिथि पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। 

यह उन सभी पूर्वजों के प्रति सम्मान व तर्पण क्रिया करने का दिन होता है, जिनकी मृत्यु की तिथि याद न हो। इसके साथ ही, इस विशेष तिथि पर श्राद्ध व दान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और परिवार पर उनकी असीम कृपा बनी रहती है। 

ज्योतिष शास्त्र में, इस कार्तिक अमावस्या, को ‘दीपावली’ के रूप में मनाया जाता है। हिंदू-धर्म में यह बहुत ही, पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा, पितरों का तर्पण, और संध्या समय दीपदान (घर और पवित्र नदियों में) करने का विशेष महत्व होता है। 

जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही, पितृ देवताओं को शांति और पापों का नाश होता है। यह अमावस्या धन प्राप्ति, नए कार्यों के शुभारम्भ और नकारात्मकता दूर करने के लिए भी विशेष फलदायी मानी जाती है।

मान्यता है कि, इस दिन भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए थे उनके आने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। और अमावस्या की इस घनघोर रात को दीयों से रौशन करके नकारात्मकता को दूर कर जीवन में प्रकाश का संचार किया जाता है। 

इस दिन अन्न, वस्त्र और ऊनी कपड़ों का दान जरुरत मंदों को करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, पितरों की पूजा और तर्पण के लिए भी यह तिथि बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है, जिससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन महाकाली और धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना, गीता पाठ और तुलसी पूजन करने से ग्रहों से सम्बन्धित सभी दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  1. अमावस्या तिथि पर, पितरों के लिए तर्पण करने से उन्हें शांति और मुक्ति का मार्ग मिलता है और परिवार को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  2. इस दिन, गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी पाप व दोष दूर होते हैं।
  3. इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल या जरूरतमंदों को अपने सामर्थ्य अनुसार, दान करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-शांति का वास होता है।
  4. अमावस्या के दिन तर्पण कार्य,  व्रत और पूजा करने से मन शुद्ध होता है, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।
अमावस्या 2026- साल की पांच विशेष अमावस्या व महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या तिथि के दिन कोई भी अनुष्ठान, पूजा विधि या श्राद्ध नियमपूर्वक करना और पूरे विधि-विधान से करने पर पूर्ण शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्र या शनि कमजोर है, तो शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए हम आपको संछिप्त में इस दिन की कार्य विधि के बारे में बताते हैं –

  1. प्रातः जल्दी उठकर स्नान सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. इसके बाद किसी विशेष अनुष्ठान या पितृ तर्पण के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल और जल अर्पित करें और विधि विधान से पूजा करें।
  3. इस दिन शाम के समय दीपदान का विशेष महत्व होता है, इसलिए, पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं।
  4. इस दिन मंत्र जाप, गायत्री मंत्र या शनि मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ होता है।

ज्योतिष में, अमावस्या तिथि पितरों की तृप्ति और दोष निवारण के लिए बहुत ही विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन, पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, सुबह पवित्र नदी/घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करना, और पितरों के नाम का तर्पण करना सबसे प्रभावी उपाय में से एक है। इसके साथ ही, इस दिन कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं, आइये जान लेते हैं इन उपायों के बारे में-

  • सुबह स्नान और पवित्र होने के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त जल और तिल अर्पित करना चाहिए, जिसे तर्पण क्रिया कहते हैं। 
  • इस तिथि पर, भोजन, गुड़, तिल, वस्त्र और जूते-चप्पल का दान करना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है।
  • अमावस्या तिथि के दिन पीपल के वृक्ष में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन, शाम के समय पीपल के नीचे चौमुखा दीपक जलाया जाता है और परिक्रमा की जाती है।
  • अमावस्या की तिथि पर गाय को रोटी, गुड़ और चारा खिलाने से पितृ दोष में शांति और राहु-केतु के दोष शांत होते हैं।
  • शाम को एक नींबू के चार टुकड़े कर किसी चौराहे पर चारों दिशाओं में फेंकें। 
  • इस दिन, सरसों के तेल में भीगी रोटी काले कुत्ते को खिलाने से शत्रुओं से बाधा दूर होती हैं। और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
  • इस दिन घर की साफ-सफाई करना शुभ होता है, घर में मौजूद बेकार सामान, पुराने कपड़े या अनुपयोगी वस्तुएं बाहर निकालें और घर में, गंगाजल का छिड़काव करें, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • अमावस्या की रात मंत्रो का जाप करना बहुत ही शुभ फलदायी होता है। ‘ॐ नमः शिवाय’  या महामृत्युंजय मंत्र  का जाप करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

Q. सोमवती अमावस्या का क्या महत्व है?

An. सोमवती अमावस्या जो सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को कहा जाता है।  हिंदू धर्म में इस तिथि को बहुत ही विशेष फलदायी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, पवित्र स्नान और दान-धर्म के कार्य के लिए बहुत ही श्रेष्ठ होता है। इस तिथि पर विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन के लिए व्रत भी रखती हैं।

Q. पूरे साल 2026 में कितनी अमावस्या आती है?

An. पुरे साल कुल 12 अमावस्या आती है जिनमें से पांच अमावस्या तिथि बहुत ही विशेष मानी जाती है।

Q. सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या क्यों विशेष मानी जाती है?

An. इस तिथि को ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक शास्त्र दोनों में ही बेहद विशेष माना जाता है। क्योंकि, इस दिन सभी पितृ विसर्जन का अनुष्ठान किया जाता है। 16 दिन के सोलह श्राद्ध के समय यह तिथि पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है।

Q. क्या, अमावस्या तिथि दो दिन की होती है?

An. हां, यह तिथि पंचांग के अनुसार, तारीख का आरंभ और समापन अलग-अलग शहरों में अलग हो सकता है। इसलिए पूजा या तर्पण करने से पहले एक बार पंचांग और मुहूर्त जरुर देखे।

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