वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह पंचम भाव का स्वामी होकर, जातक के बुद्धि, आत्मा, स्मरण शक्ति, विद्या ग्रहण करने की शक्ति, नीति, आत्मविश्वास और प्रबंधन क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे जातक के जीवन में, विशेष रूप से केतु, व्यवस्था, देव भक्ति, देश भक्ति, नौकरी का त्याग, धन मिलने के नए स्त्रोत, अचानक धन प्राप्ति, जुआ, लाटरी, सट्टा, जठराग्नि, पुत्र संतान, मंत्र द्वारा पूजा, व्रत उपवास, हाथ का यश, कुक्षी, स्वाभिमान, अहंकार इत्यादि विषयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन, यदि वृश्चिक लग्न के जातक की जन्म कुंडली में केतु अपने दशाकाल में बलवान या शुभ स्थिति में होने पर ऊपर दी गए विषयों में, शुभ प्रभाव देते हैं। जबकि कमजोर या अशुभ स्थिति में होने पर अशुभ परिणाम देते हैं।
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वृश्चिक लग्न- शारीरिक विशेषताएं व स्वाभाविक गुण
हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों की गणना के अनुसार, वृश्चिक लग्न में जन्म लेने वाला जातक वीर, अत्यंत विचारशील, निर्दोष, विद्या के आधिक्य से युक्त, क्रोधी, राजाओं से पूजित, गुणवान, शास्त्रज्ञ, शत्रुनाशक स्वभाव वाला होता है। साथ ही, ऐसे जातक कपटी, पाखंडी, मिथ्या वादी, तमोगुणी, दूसरों के मन की बात जानने वाला, पर निंदक, कटु स्वभाव वाला तथा सेवा कर्म करने के गुण वाले भी होते हैं।
शारीरिक बनावट और रूपरेखा की बात करें तो, उसका शरीर कुछ ठिगना और स्थूल होता है। आँखें गोल होती हैं और छाती चौड़ी होती है। ऐसे जातक अक्सर, भाइयों के लिए विद्रोह की भावना रखने वाले दयाहीन, ज्योतिष तथा भिक्षावृत्ति करने वाले हो सकते हैं। इन लग्न के जातक को अपने जीवन काल की प्रथम अवस्था में दुख मिलता हो और मध्यावस्था में सुख का भोग करते हैं।
इनका भाग्योदय विशेष रूप से 20 से 25 वर्ष की आयु में होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृश्चिक लग्न (Scorpio Ascendant) के स्वामी ग्रह मंगल और यह एक जल तत्व राशि है। जो इस लग्न के जातकों को उग्र, दबंग, दृढ़-इच्छाशक्ति वाला और ऊर्जावान होने की श्रेष्ठ क्षमता देते हैं। लेकिन, मंगल एक लाल ग्रह है जो कि, क्रोध का कारक है, इसलिए इनके प्रभाव से वृश्चिक लग्न के जातकों में क्रोध की अधिकता भी हो सकती है। जो उन्हें अपनी बात पर अटल रहने और सम्मान के लिए लड़ने की प्रेरणा देती है।
वृश्चिक लग्न के लिए- शुभ ग्रह व धन योग
ज्योतिष शास्त्र और वृश्चिक लग्न में अनुकूल ग्रहों की स्थिति और प्रभाव की बात करें तो, इस लग्न के लिए धन प्रदाता ग्रह गुरु बृहस्पति है। यानी, धनेश बृहस्पति की शुभ स्थिति से वृश्चिक लग्न के जातकों के धन स्थान और यहां पर अन्य ग्रहों की दृष्टि होने पर जातक की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत और चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी ज्ञात की जा सकती है। इसके अतिरिक्त लग्नेश मंगल, भाग्येश चंद्र और लाभेश बुध की अनुकूल स्थितियां भी वृश्चिक लग्न वाले जातकों की धन व ऐश्वर्य में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। वैसे, वृश्चिक लग्न के लिए अशुभ ग्रहों में, बुध, मंगल और शनि ग्रह हैं। लेकिन, गुरु बृहस्पति शुभ फलदायी है और सूर्य, चंद्र राजयोग कारक ग्रह हैं। इस लग्न में गुरु बृहस्पति मारकेश होते हुए भी मारक नहीं होते हैं और शुभ प्रभाव देते हैं।
वृश्चिक लग्न में केतु के विशेष भाव और शुभ प्रभाव
केतु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। वे एक छाया ग्रह है, इसलिए वह अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में ही शुभ फल देते हैं। लग्न कुंडली में केतु ग्रह पहले (उच्च राशि ), दूसरे (उच्च राशि ), चौथे और ग्यारहवें भाव में अपनी दशा-अन्तर्दशा में अपनी क्षमता और कारक के अनुसार शुभ फल देते हैं। इसके अलावा, तीसरे , पांचवें , छठे , सातवें (नीच राशि ), आठवें (नीच राशि ), नौवें , दसवें और बारहवें भाव में केतु दशा-अन्तर्दशा में कष्ट और समस्याओं के कारक होते हैं। आगे लेख में हम केतु के प्रभाव में कुछ विशेष भावों और उन पर प्रभाव की जानकारी पढेंगे-
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- लग्न कुंडली के पहले भाव में केतु ग्रह
यदि वृश्चिक लग्न के पहले यानी लग्न भाव ,में केतु ग्रह की स्थिति है तो, ऐसे जातक गहरे अंतर्ज्ञान (intuition) और आध्यात्मिकता के प्रति गहरी रुचि वाले होते है। हालांकि, केतु के स्वभाव के अनुसार ऐसे जातक का स्वभाव रहस्यमय हो सकता है। लेकिन, वे शोध कार्यों में श्रेष्ठ और तीव्र क्षमता वाले होते हैं।
- लग्न कुंडली के दूसरे भाव में केतु ग्रह
यदि वृश्चिक लग्न के दूसरे भाव (धनु राशि) में केतु की उपस्तिति है तो, ऐसे जातक को साहसिक, आध्यात्मिक और रहस्यमयी गुणों से युक्त होते हैं। जिससे धन, परिवार और वाणी पर मिलाजुला असर होता है। हालांकि, एक ओर केतु ग्रह की ऐसी स्थिति अचानक धन लाभ या हानि, परिवार से दूरी, वाणी में कटुता देने वाली होती है, वहीं दूसरी ओर जातक की रुचि गूढ़ विद्याओं, गहन बातचीत और वित्तीय पारदर्शिता की ओर अधिक रहती है। ग्रहों के अनुसार जातक को, व्यग्रता और मानसिक अशांति भी हो सकती है।
- वृश्चिक लग्न के चौथे भाव में केतु ग्रह
लग्न के चौथे भाव में केतु के होने से जातक आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाला होता है। साथ ही ऐसे जातक शोध (Research), विश्लेषण (Analysis) जैसे कार्यों में सफलता पाते हैं। इन जातकों की सामाजिक छवि बहुत अच्छी बनती है और लोग इनकी संगति चाहते हैं। ऐसे जातक अपने अच्छे स्वभाव के कारण चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देख पाता है। उन्हें, कभी-कभी अचानक धन लाभ हो सकता है। ऐसे जातकों, में मातृभूमि से जुड़ने की तीव्र इच्छा होती है।
- वृश्चिक लग्न के ग्यारहवें भाव में केतु ग्रह
लग्न वृश्चिक की जन्म कुंडली के ग्यारहवें भाव (लाभ, इच्छापूर्ति, दोस्तों का भाव) में केतु ग्रह होने से जातक को अप्रत्याशित धन लाभ, आध्यात्मिक रुचि और करियर में सफलता मिल सकती है। लेकिन, इसके लिए जातक को कड़ी मेहनत और संघर्ष करना होगा। साथ ही, लग्न में केतु की यह स्थिति धन संचय, शेयर बाजार और निवेश से लाभ देती है। हालांकि, पीड़ित या अशुभ होने पर जातक को पारिवारिक तनाव और आर्थिक समस्यों का सामना करना पड़ सकता है।
वृश्चिक लग्न के लिए रत्न और महत्वपूर्ण सुझाव
हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिषाचार्य का कहना है कि, रत्न कभी भी राशि के अनुसार नहीं पहनना जाता है। जबकि, रत्न हमेशा लग्न, ग्रहों की दशा-महादशा के अनुसार ही पहनना शुभ होता है। लग्न के अनुसार वृश्चिक लग्न में जातक को मूंगा, पुखराज, मोती, और माणिक रत्न लाभकारी प्रभाव देते हैं। लेकिन, लग्न के अनुसार वृश्चिक लग्न के जातक के लिए नीलम, हीरा, और पन्ना रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि, यह इस लग्न में अशुभ प्रभाव देंगे।

वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह के लिए कुछ आसान उपाय
हमने यहाँ वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए कुछ विशेष और बहुत ही आसान उपाय बताए हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं-
- केतु के अधिपति देवता भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। इसलिए केतु के अशुभ प्रभाव होने पर प्रतिदिन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और उन्हें दूर्वा (घास) अर्पित करें।
- प्रतिदिन केतु के बीज मंत्र “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का 108 बार या अपने सामर्थ्य अनुसार जाप करें।
- वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है, इसलिए हनुमान जी की पूजा करने से केतु के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- कुत्तों को रोटी खिलाना केतु के लिए सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। काले या दो रंग के (चितकबरे) कुत्ते को भोजन देना अत्यंत शुभ होता है।
- शनिवार या मंगलवार को जरूरतमंदों को काला-सफेद कंबल, तिल या नारियल दान करें।
- विकलांग व्यक्तियों को उनकी आवश्यकता अनुसार सहायता करें, जैसे कि व्हीलचेयर का दान या कोई उनके लिए उपयोगी वस्तु।
- नीले और काले रंग के कपड़ों का प्रयोग न करें। इसके स्थान पर केसरिया या हल्के पीले रंग का प्रयोग करें।
- घर के उत्तरी हिस्से को साफ रखें और घर में किसी भी तरह का पानी का रिसाव (seepage) या टपकते नल को तुरंत ठीक करवाएं।
- प्रतिदिन केसर या चंदन का तिलक लगाएं।
- केतु के अशुभ प्रभाव के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण कर ग्रहों की स्थिति के अनुसार, ‘लहसुनिया’ (Cat Eye) रत्न या अन्य रत्न धारण किया जा सकता है।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q. वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह के क्या प्रभाव होते हैं?
An. वृश्चिक लग्न में केतु ग्रह पंचम भाव का स्वामी होकर, जातक के बुद्धि, आत्मा, स्मरण शक्ति, विद्या ग्रहण करने की शक्ति, नीति, आत्मविश्वास और प्रबंधन क्षमता को प्रभावित करता है।
Q. वृश्चिक लग्न के लिए कौन-कौन से ग्रह शुभ है?
An. वृश्चिक लग्न में अनुकूल ग्रहों की स्थिति और प्रभाव की बात करें तो, इस लग्न के लिए धन प्रदाता ग्रह गुरु बृहस्पति है। इसके अलावा, लग्नेश मंगल, भाग्येश चंद्र और लाभेश बुध की अनुकूल स्थितियां भी वृश्चिक लग्न वाले जातकों की धन व ऐश्वर्य में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। वैसे, वृश्चिक लग्न के लिए अशुभ ग्रहों में, बुध, मंगल और शनि ग्रह हैं।
Q. वृश्चिक लग्न कुंडली में केतु ग्रह कौन से भाव में शुभ फलदायी हैं?
An. केतु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। वे एक छाया ग्रह है, इसलिए वह अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में ही शुभ फल देते हैं। लग्न कुंडली में केतु ग्रह पहले (उच्च राशि ), दूसरे (उच्च राशि ), चौथे और ग्यारहवें भाव में अपनी दशा-अन्तर्दशा में अपनी क्षमता और कारक के अनुसार शुभ फल देते हैं।
Q. वृश्चिक लग्न के लिए कौन से रत्न धारण किए जा सकते हैं?
An. रत्न कभी भी राशि के अनुसार नहीं पहनना जाता है। जबकि, रत्न हमेशा लग्न, ग्रहों की दशा-महादशा के अनुसार ही पहनना शुभ होता है। लग्न के अनुसार वृश्चिक लग्न में जातक को मूंगा, पुखराज, मोती, और माणिक रत्न लाभकारी प्रभाव देते हैं।




