वृषभ लग्न में केतु ग्रह ! लग्न कुंडली में ग्रहों की स्थिति मोक्ष और आध्यात्मिक लाभ के अलावा हानि का भी कारक हैं|

वृषभ लग्न में केतु ग्रह

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जन्म कुंडली में केतु ग्रह ग्यारहवें भाव का स्वामी होकर जातक को  लोभ, लाभ, गुलामी, संतान हीनता, कन्या संतति, ताऊ, चाचा, बुआ, बड़े भाई बहन, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, बेईमानी इत्यादि क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा, जन्म कुंडली में यदि केतु अपनी दशा व महादशा काल में बलवान व शुभ प्रभाव में हो तो, जातक को शुभ परिणाम मिलते हैं। लेकिन, वहीं कमजोर और अशुभ प्रभाव में केतु ऊपर बताए गए सभी क्षेत्रों में अशुभ परिणाम देते हैं। 

कुंडली में कुछ भाव (घर) ऐसे होते हैं जहां मित्र राशि में होने से केतु जातक के लिए विशेष रूप से शुभ होते हैं। तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको वृषभ लग्न में केतु ग्रह  के विशेष फलादेश और शुभ\अशुभ प्रभाव  की जानकारी देंगे। हम आशा करते हैं लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी रहें।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ राशि शुक्र ग्रह द्वारा शासित राशि है। यह एक स्त्रीलिंग ग्रह है।  जिसका केतु के साथ एक सौम्य संबंध है। वृषभ राशि के जातकों के स्वभाव के बारे में बात करें तो, ये जातक आजादी से अपना जीवन जीने में यकीन रखते हैं। ऐसे जातक किसी की बंदिश में न रहते हुए एक आजाद पंछी की तरह खुलकर जिंदगी जीने के शौकीन होते हैं। और इस वजह से कई बार वे अनचाही मुसीबतों को भी अपने सर ले लेते हैं। लेकिन, पृथ्वी तत्व की यह राशि हर एक स्थिति को अच्छी तरह से हैंडल करने में सक्षम होती है। इस वजह से इस राशि के जातकों को कई कठिनाइयों के बाद भी जीवन में मधुरता का साथ मिल ही जाता है। 

और वे मुश्किल से मुश्किल स्थिति का भी अच्छी तरह से सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहते हैं।

अब बात करते हैं केतु ग्रह की, तो स्वभाव से इस ग्रह को संदेही स्वभाव और अस्थिर मिज़ाज इस वृषभ लग्न के जातकों के लिओए विशेष शुभ नहीं है।  वृषभ लग्न के शांत और ईमानदार स्वभाव में केतु के प्रभाव होने से यह जातक को बेचैनी और कठिनाई में डालने का कारक होता है। इस प्रभाव में जातक को अच्छे और बुरे में फर्क की परख नहीं होती है। यह प्रभाव इस लग्न के जातकों को बड़बोले और बातचीत में जिद्दी होने की प्रवृति दे सकता है। 

लेकिन, अधिकांश वृषभ राशि के जातक बेहद शांत स्वभाव के इंट्रोवर्ट व्यक्तित्व वाले होते हैं। इस राशि वालों को अपने जीवन में विलासिता (लक्ज़री) और भौतिक सुख सुविधाओं की बहुत तीव्र इच्छा रहती है। और केतु के प्रभाव से इस इच्छा को पाने के लिए जातक को काफी कठिन मेहनत करनी पड़ सकती है।  वहीं, यदि केतु की स्थिति से इस राशि के जातकों के जीवन में, सकारात्मक प्रभाव की बात करें तो, ऐसे जातक एक विचारशील और गहन सोच वाले होते हैं। जिससे उस व्यक्ति को अपने अच्छे व बुरे में फर्क समझने की अच्छी क्षमता रहती है। 

वृषभ लग्न में केतु ग्रह के प्रभाव जन्म कुंडली में स्थिति (भाव), अन्य ग्रहों की युति या दृष्टि और उसकी क्षमता के अनुसार शुभ और अशुभ हो सकते हैं। सामान्य तौर पर, वृषभ राशि भौतिक सुख, स्थिरता और विलासिता को अधिक महत्व देती है।  जबकि केतु वैराग्य, मोक्ष और भौतिक इच्छाओं से अलगाव का ग्रह है। यह विरोधाभास जातक के जीवन में शुभ और अशुभ दोनों तरह के मिश्रित परिणाम देने वाला होता है। तो आइए, जान लेते हैं, वृषभ लग्न में केतु के शुभ व अशुभ प्रभाव- 

  • केतु ग्रह के शुभ प्रभाव से जातक आध्यात्मिकता की ओर रुचि बढ़ती है। व्यक्ति ईश्वर से डरने वाला, धार्मिक और गूढ़ विषयों में गहरी रुचि रखने वाला होता है।
  • जन्म कुंडली में केतु ग्रह की शुभ स्थिति या केतु के साथ शुभ ग्रहों का प्रभाव व दृष्टि हो जातक परिश्रमी और अपनी मेहनत व पुरुषार्थ से धन और सफलता प्राप्त करता है।
  • कुंडली के छठे भाव (रोग, ऋण, शत्रु का घर) में केतु के शुभ प्रभाव होते हैं जिससे जातक को शत्रुओं, बीमारियों और कठिनाइयों से लड़ने की श्रेष्ठता मिलती है।
  • केतु का प्रभाव कुंडली में शुभ हो तो जातक में एक अनोखी आकर्षक या सम्मोहन शक्ति होती है।
  • केतु मोक्ष का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए केतु के शुभ प्रभाव से जातक को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान, अंतर्ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के ज्ञान का आभास होता है। 
  • कुंडली में केतु के अशुभ प्रभाव से जातक चाहे कितनी भी धन-संपत्ति या स्थिरता प्राप्त कर ले, वह अक्सर असंतोष की भावना में रहता है और वह भौतिक सुखों का पूरी तरह आनंद नहीं ले पाता।
  • केतु भ्रम पैदा करने  का कारक होता है, जिससे जातक के मन में अशांति रह सकती है और उसे सही-गलत का निर्णय लेने में भी समस्या होती है।
  • अशुभ केतु जातक को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं भी देता है, उसमें आत्मविश्वास की कमी रहती है और स्नायु तंत्र (nervous) की कमजोरी या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • यदि कुंडली के लग्न के सातवें भाव में केतु है, तो जातक को वैवाहिक जीवन या साझेदारी में चुनौतियां, गलतफहमी या अलगाव की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
  • केतु के अशुभ प्रभाव से जातक को करियर या जीवन के अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता, बार-बार बदलाव की इच्छा या किसी एक काम पर टिके रहने में कठिनाई हो सकती है। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केतु ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं होती है। वे अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में ही वह शुभ परिणाम देते हैं। वृषभ लग्न कुंडली में केतु पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें भावों में शुभ फल देते हैं क्योंकि यह उनकी मित्र राशि है। इसके अलावा, पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, छठे, आठवें, ग्यारहवें और बारहवें भावों में केतु मारक ग्रह बन जाते हैं और अशुभ परिणाम देते हैं। क्योंकि, पहले और दूसरे भावों में केतु नीच राशि में आ जाते हैं। इसलिए यह जातक के लिए अशुभ फलदायी है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के अनुभवी आचार्यों  की विशेष गणना के अनुसार, वृषभ लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए सबसे अधिक शुभ और धन प्रदाता ग्रह बुध है। क्योंकि, धनेश बुध की शुभ स्थिति से और धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रह की स्थिति से जातक की आर्थिक स्थिति, आय व लाभ के स्रोत और चल-अचल संपत्ति का पता चलता है। लग्नेश शुक्र, भाग्येश शनि और लाभेश गुरु बृहस्पति की अनुकूल स्थितियां वृषभ लग्न वाले जातकों के लिए धन, ऐश्वर्य, वैभव-संपदा में वृद्धि करने वाली होती है। इस लग्न की कुंडली के लिए शनि राजयोग कारक ग्रह माना गया है। गुरु बृहस्पति अष्टमेश होने के कारण मारक और सूर्य शुभ फलदायक है। इसलिए, वृषभ लग्न के जातकों के लिए सबसे अधिक योगकारक ग्रह सूर्य, बुध और शनि हैं। जिससे जातक के जीवन में समृद्धि और धन आगमन के योग बनते हैं।

वृषभ लग्न में केतु ग्रह

वृषभ लग्न के जातकों को केतु ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव के लिए इन आसान उपायों को करना चाहिए-ये उपाय इस प्रकार हैं-

  1. विघ्नहर्ता भगवान गणेश केतु के स्वामी हैं, इसलिए उनकी नियमित पूजा करने से केतु के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  2. केतु के अशुभ प्रभाव “ॐ कें केतवे नमः”  मंत्र का जाप करें। आप चाहें तो 108 बार “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।
  3. सफेद चावल, नारियल और सफेद कपड़े दान करें।
  4. गौ माता को हरा चारा और कुत्तों को रोटी खिलाएं।
  5. जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और अन्य वस्तुएं दान करें। 
  6. मानसिक शांति और स्थिरता के लिए ये योग, ध्यान, उपाय सहायक हो सकते हैं।
  7. दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में चांदी का छल्ला धारण करना एक उपाय है।
  8. सफेद रंग के वस्त्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें, चादर या अन्य वस्तुएं इस्तेमाल करें। 

Q. वृषभ लग्न में, केतु ग्रह के कैसे प्रभाव होते हैं?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ राशि शुक्र ग्रह द्वारा शासित राशि है। यह एक स्त्रीलिंग ग्रह है।  जिसका केतु के साथ एक सौम्य संबंध है। वृषभ राशि के जातकों के स्वभाव के बारे में बात करें तो, ये जातक आजादी से अपना जीवन जीने में यकीन रखते हैं।

Q. वृषभ लग्न कुंडली के कौन-कौन से भाव केतु के लिए शुभ फलदायी होते हैं?

An.  वृषभ लग्न कुंडली में केतु पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें भावों में शुभ फल देते हैं क्योंकि यह उनकी मित्र राशि है। इसके अलावा, पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, छठे, आठवें, ग्यारहवें और बारहवें भावों में केतु मारक ग्रह बन जाते हैं और अशुभ परिणाम देते हैं।

Q. वृषभ लग्न जातकों को केतु ग्रह के लिए कौन सा रत्न धारण करना चाहिए?

An. वृषभ लग्न वाले जातकों को केतु ग्रह के लिए लहसुनिया (Cat Eye) रत्न पहनना चाहिए, लेकिन यह रत्न केवल तभी पहनना चाहिए जब केतु कुंडली के पहले, दूसरे, पांचवें, या ग्यारहवें भाव में स्थित हो। लेकिन, किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अपनी कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण जरूरी है।

Q. केतु ग्रह की शांति के लिए वृषभ लग्न के जातकों को कौन से भगवान की आराधना करना शुभ है?

An. विघ्नहर्ता भगवान गणेश केतु के स्वामी हैं, इसलिए उनकी नियमित पूजा करने से केतु के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। साथ ही आप “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें।

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