तुला लग्न में राहु ग्रह-
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि, राहु देव को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। यानि बाकी, ग्रहों के समान उनकी अपनी कोई राशि नहीं है। वे मित्र ग्रह की राशि में शुभ और शत्रु राशि में, अशुभ प्रभाव देते हैं। हमारे हमारे ‘मंगल भवन’ के पिछले लेख में बताया कि, कन्या लग्न में राहु ग्रह के क्या फलादेश होते हैं। आज की लेख में हम आपके लिए, तुला लग्न में राहु ग्रह के प्रभाव और उपाय की जानकारी लेकर आए हैं। आशा करते हैं, हमारे लेख आप सभी के लिए उपयोगी साबित हों। लेख पसंद आने पर हमें अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें।
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तुला लग्न में राहु ग्रह के फलादेश- ज्योतिष में
हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों की गणना के अनुसार, इस लग्न कुण्डली में राहु ग्रह विशेष रूप से पहले , चौथे, पांचवें और नौवें भाव में अपनी दशा- या अंतर्दशा में सामान्य रूप से शुभ फल देते हैं। लेकिन, राहु ग्रह की मारक स्थिति कुंडली के दूसरे (नीच राशि), तीसरे (नीच राशि), छठे , सातवें , आठवें , दसवें , ग्यारहवें और बारहवें भाव में देखने को मिलती है। इन भावों में राहु ग्रह के अशुभ फल मिलते है। आगे लेख में हम तुला लग्न और राहु के शुभ व अशुभ प्रभाव के बारे जानेंगे-
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तुला लग्न में जन्म लेने वाले जातक स्वभाव से गुनी, व्यवसाय में निपुण, धनी, यशस्वी, कुल के भूषण, सत्यवादी, पर स्त्रियों से प्रेम रखने वाला, राज्य द्वारा सम्मानित, देवपूजन में रूचि रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग अक्सर परोपकारी, सतोगुणी, तीर्थ प्रेमी, प्रियवादी, ज्योतिषी, भ्रमणशील और लालची नहीं होते हैं। शारीरिक रूप रंग में ये जातक गौर वर्ण , शिथिल गात्र तथा मोटी नाक वाला होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन जातकों को अपने जीवन काल में प्रारंभिक आयु में दुःख उठाना पड़ता है, मध्यमावस्था में सुखी रहते हैं और अंतिम अवस्था सामान्य रूप से व्यतीत होती है। इन जातकों का भाग्योदय 31 या 32 वर्ष की आयु में होता है।
राहु ग्रह की भूमिका इस लग्न में मिश्रित फलदायी होती है। वैसे तो, तुला लग्न में राहु ग्रह की स्थिति के आधार पर कई विशिष्ट योग भी बनते हैं। लेकिन, यह विशिष्ट योग राहु के साथ अन्य ग्रहों की युति और प्रभाव की स्थिति पर निर्भर करती है। इसके अलावा, राहु स्वयं कोई ग्रह नहीं है,बल्कि एक छाया ग्रह है। इसलिए इसके प्रभाव भी इनके नाम के अनुसार, उस भाव और साथ में विराजित ग्रहों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
ज्योतिष में, तुला लग्न एक वायु तत्व प्रधान लग्न होता है। इस लग्न के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। इस लग्न के विशेष प्रवृत्ति के बारे में बात करें तो, ये जातक, कूटनीतिक, सामाजिक, न्यायप्रिय और सौंदर्य प्रेमी होते हैं। अक्सर ऐसे लोग शांतिपूर्ण सामंजस्यपूर्ण वातावरण पसंद करते हैं। इनकी रुचि कला, संगीत में अधिक होती है और वे अपनी बातचीत से बहुत जल्दी ही सामने वाले को आकर्षित करने में सक्षम होते हैं। ग्रहों की बात करें तो, तुला लग्न में शनि ग्रह विशेष रूप से योगकारक ग्रह माने गए हैं।
तुला लग्न में राहु ग्रह- शुभ\अशुभ प्रभाव
राहु एक छाया ग्रह है। जिसका प्रभाव कुंडली में भाव के अनुसार बदलता रहता है। तुला लग्न में राहु बारहवें भाव का स्वामी होकर जातक के लिए निद्रा, यात्रा, हानि, दान, व्यय, दंड, मोक्ष, विदेश यात्रा, भोग ऐश्वर्य, चोरी-चकारी, परस्त्री गमन, व्यर्थ भ्रमण आदि विषयों के कारक बनते हैं। इसके अलावा, कुंडली के अनुसार, राहु ग्रह की दशा व महादशा के अनुसार, भी जातक को राहु से शुभ या अशुभ परिणाम मिलते हैं। कुंडली में राहु की मजबूत स्थिति जातक को ऊपर बताए गए सभी क्षेत्रों में शुभ प्रभाव देने का कार्य करती है। लेकिन, कमजोर या अशुभ प्रभाव में रहने से या जातक के जीवन को तहस-नहस करके रख देती है। साथ ही, अशुभ प्रभाव में जातक को स्वास्थ्य समस्या और आर्थिक नुक्सान भी उठाना पड़ता है। तो चलिए अब हम संक्षिप्त में जान लेते हैं, तुला लग्न में राहु ग्रह के शुभ व अशुभ प्रभाव के बारे में-
लग्न कुंडली में राहु ग्रह के शुभ प्रभाव
- लग्न कुंडली में राहु के शुभ प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है।
- इस के शुभ प्रभाव से जातक साहसी और बड़े जोखिम लेने से पीछे नहीं हटता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ती है।
- राहु के शुभ प्रभाव में जातक को आय के कई स्रोत मिलते हैं और अप्रत्याशित धन लाभ (जैसे सट्टा या विरासत) के अवसर भी मिलते हैं।
- इस के शुभ प्रभाव से जातक को शत्रुओं, विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को हराने की क्षमता मिलती है।
- राहु ग्रह का शुभ प्रभाव जातक को उनके कार्यक्षेत्र में ऊर्जा, प्रतिष्ठा और ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।
- राहु के शुभ प्रभाव से जातक के विदेश यात्रा के योग बनते हैं। कई बार विदेश में रहने के भी अवसर मिलते है।
- जातक को सभी प्रकार की भौतिक सुख-सुविधा और ऐशों-आराम मिलते हैं।
लग्न कुंडली में राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव
- लग्न कुंडली में राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को धन का संचय करने में में कठिनाई, पारिवारिक कलह और वाणी में कठोरता आती है।
- जीवनसाथी के साथ संबंधों में तनाव, गलतफहमी या अलगाव की स्थिति पैदा हो सकती है। यह साझेदारी के व्यवसाय में भी जातक को हानि देने की कारक हो सकती है।
- राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को पेट, लिवर से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। ऐसे जातकों को दुर्घटनाओं या अप्रत्याशित संकटों का कारण बन सकता है।
- इस के अशुभ प्रभाव से जातक को मन में बेचैनी, भ्रम और अशांति बनी रहती है। जिससे वह सही निर्णय नहीं ले पाते हैं।
- राहु की अशुभता के कारण फिजूल खर्च और अनावश्यक व्यय से आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
- घर-परिवार के सुख में कमी और संपत्ति से जुड़े विवाद हो सकते हैं।
तुला लग्न में राहु ग्रह- विशेष भाव व राहु ग्रह के शुभ प्रभाव
तुला लग्न में राहु ग्रह प्रथम (लग्न), पंचम, षष्ठम, नवम, दशम और एकादश भाव में होने पर शुभ परिणाम देते हैं। हालांकि, परिणामों की शुभता कई अन्य कारकों, जैसे कि अन्य ग्रहों की स्थिति और दृष्टि पर भी निर्भर करती है।
शुभ भावों में राहु के फलादेश
- लग्न कुंडली के पहले भाव में राहु ग्रह
पहले भाव (लग्न भाव) में राहु के प्रभावों का सटीक विश्लेषण करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि पहले भाव में कौन सी राशि स्थित है और कुंडली का लग्न कौन सा है। सामान्य तौर पर, पहला भाव व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, स्वभाव और जीवन दिशा से संबंधित है। यहाँ राहु की स्थिति जातक के व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। ऐसे जातक का व्यक्तित्व रहस्यमय, आकर्षक और दूसरों पर हावी होने वाला होता है। वे अपनी पहचान बनाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। ऐसे जातक स्वार्थी या आत्म-केंद्रित होते है, अपनी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता देता है।
- लग्न कुंडली के पांचवें भाव में राहु ग्रह
तुला लग्न की कुंडली में, पांचवें भाव में राहु ग्रह की उपस्थिति जातक के शिक्षा, बुद्धि, संतान, प्रेम संबंध और रचनात्मकता के लिए प्रभावशाली होती है। तुला लग्न में पांचवें भाव में कुंभ राशि आती है, जो राहु के लिए एक अनुकूल राशि है। क्योंकि कुंभ राशि शनि द्वारा शासित है, और शनि व राहु के बीच मित्रता का संबंध है। ऐसे जातक की बुद्धि बहुत तीव्र, और खोजी होती है। शिक्षा के मामले में, वे सामान्य विषयों के बजाय तकनीकी, रहस्यमय ज्योतिष, या विदेशी भाषाओं जैसे अपरंपरागत क्षेत्रों में रुचि लेते हैं। शिक्षा में कुछ रुकावट आ सकती हैं, लेकिन व्यक्ति अपनी शर्तों पर जीवन जीता है। संतान के संबंध में कुछ समस्या या विलंब हो सकता है। संतान बहुत बुद्धिमान और स्वतंत्र विचारों वाली हो सकती है। जातक में अद्वितीय रचनात्मक क्षमता होती है। वे कला, अभिनय, या किसी भी रचनात्मक क्षेत्र में अपरंपरागत तरीके अपनाकर सफलता प्राप्त करते हैं।
- लग्न कुंडली के छठे भाव में राहु ग्रह
लहं कुंडली का छठा भाव शत्रुओं, ऋण (कर्ज), रोग, नौकरी, दैनिक कार्य, और सेवा से संबंधित है। यहाँ राहु की स्थिति कुछ मिश्रित और प्रभावशाली मानी गई है। इस भाव में राहु जातक को शत्रुओं पर विजय होने में सक्षम बनाता है। ऐसे जातक अपने विरोधियों से हारते नहीं हैं। स्वास्थ्य को लेकर कुछ अनिश्चितता या ऐसे रोग हो सकते हैं जिनका इलाज न मिले । पेट से संबंधित समस्याएं या रहस्यमय बीमारियां होना संभव है।
- लग्न कुंडली के नौवें भाव में राहु ग्रह
कुंडली का नौवां भाव सामान्य तौर पर भाग्य, धर्म, पिता, उच्च शिक्षा, लंबी यात्राओं और आध्यात्मिकता से संबंधित होता है। यहाँ राहु की उपस्थिति कुछ मिश्रित प्रभाव देने वाली होती है। ऐसे जातक पारंपरिक व धार्मिक मान्यताओं से हटकर अलग खोज करते हैं। वे किसी नए या अपरंपरागत धर्म या दर्शन की ओर आकर्षित रहते हैं। भाग्य के मामले में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। कभी अचानक भाग्य साथ देगा, तो कभी भाग्य साथ नहीं देगा। पिता के स्वास्थ्य या पिता के साथ संबंधों को लेकर कुछ समस्याएँ आ सकती हैं। लंबी दूरी की यात्राओं (विशेषकर विदेश यात्रा) के प्रबल योग बनते हैं। जातक को यात्राओं से लाभ भी मिल सकता है।
- लग्न कुंडली के दसवें भाव में राहु ग्रह
तुला लग्न में दसवें भाव यानी (कर्म भाव) में राहु की उपस्थिति जातक के करियर, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। यह स्थिति जातक में असीमित महत्वाकांक्षा और सत्ता व पहचान प्राप्त करने की तीव्र इच्छा पैदा करती है। जातक असामान्य या अपरंपरागत करियर पथ अपना सकता है। वह उन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करता है जो भ्रम पैदा करने वाले (जैसे फिल्म उद्योग, जादू, या पीआर) या नवोन्मेषी (जैसे प्रौद्योगिकी) हैं। यह स्थिति जातक को जनता लोकप्रियता या सार्वजनिक ख्याति और प्रतिष्ठा देने वाली होती है।

- लग्न कुंडली के ग्यारहवें भाव में राहु ग्रह
लग्न कुंडली का ग्यारहवें भाव को (लाभ भाव) कहा जाता है। इस भाव में राहु गृह की स्थिति जातक को भौतिकवादी और महत्वाकांक्षी बनाती है। यह स्थिति जातक को जीवन में प्रचुर धन, सामाजिक प्रभाव और इच्छाओं की पूर्ति की ओर अग्रसर करती है। राहु की इस स्थिति से आय के स्रोतों में वृद्धि और लाभ के योग बनते हैं। जातक अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अधिक मेहनत और प्रयासरत रहता है। ऐसे जातक के सामाजिक संबंध विस्तृत होते हैं, और वह प्रभावशाली लोगों से होते है। इस भाव में राहु आय के कई स्रोत और अप्रत्याशित लाभ देता है। यह स्थिति जातक को आर्थिक रूप से बहुत मजबूत बनाती है और सभी प्रकार की भौतिक सुख-सुविधा प्रदान कर सकती है।
लग्न कुंडली में राहु ग्रह की शांति के लिए करें ये उपाय
- राहु ग्रह की शांति के लिए नियमित रूप से “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके अलावा आप राहु यंत्र की स्थापना कर पूजा भी कर सकते हैं।
- शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल और नीले कपड़े दान करें। साथ ही, बुधवार के दिन गरीबों को भोजन कराएं और कंबल, तेल आदि खाने की सामग्री का दान करें।
- काले कुत्तों को रोटी खिलाएं।
- दुर्गा माँ की नियमित पूजा करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- भगवान शिव और काल भैरव की आराधना कर पूरे विधि-विधान से पूजा करें।
- अपनी जेब में चांदी का चौकोर टुकड़ा रखें और बुधवार को सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
- बिना स्वार्थ और लालच के दूसरों की मदद और दान-पुण्य करें।
- शुद्ध चांदी का आभूषण या गोमेद रत्न धारण करें। (राहु के शुभ प्रभाव होने पर ही गोमेद रत्न पहना जाता है)
FAQS/ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q. तुला लग्न में राहु ग्रह के फलादेश बताओ?
An. तुला लग्न कुण्डली में राहु ग्रह विशेष रूप से पहले , चौथे, पांचवें और नौवें भाव में अपनी दशा- या अंतर्दशा में सामान्य रूप से शुभ फल देते हैं। लेकिन, राहु ग्रह की मारक स्थिति कुंडली के दूसरे (नीच राशि), तीसरे (नीच राशि), छठे , सातवें , आठवें , दसवें , ग्यारहवें और बारहवें भाव में देखने को मिलती है।
Q. तुला लग्न में राहु के अशुभ प्रभाव क्या होते हैं?
An. लग्न कुंडली में राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को धन का संचय करने में में कठिनाई, पारिवारिक कलह और वाणी में कठोरता आती है। राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को पेट, लिवर से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। ऐसे जातकों को दुर्घटनाओं या अप्रत्याशित संकटों का कारण बन सकता है।
Q. तुला लग्न में राहु ग्रह के शुभ प्रभाव हो तो क्या होता है?
An. लग्न कुंडली में राहु के शुभ प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है। राहु के शुभ प्रभाव से जातक साहसी और बड़े जोखिम लेने से पीछे नहीं हटता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ती है।
Q. तुला लग्न के ग्यारहवें भाव में राहु ग्रह के क्या प्रभाव होते हैं?
An. लग्न कुंडली का ग्यारहवें भाव को (लाभ भाव) कहा जाता है। इस भाव में राहु गृह की स्थिति जातक को भौतिकवादी और महत्वाकांक्षी बनाती है। यह स्थिति जातक को जीवन में प्रचुर धन, सामाजिक प्रभाव और इच्छाओं की पूर्ति की ओर अग्रसर करती है।




