सूर्य की महादशा 2025
सूर्य महादशा: ज्योतिष शास्त्र में, सूर्य की महादशा बहुत ही महत्वपूर्ण होती है! Surya की महादशा के प्रभाव में जातक के जीवन की दिशा और दशा दोनों ही बदलने की क्षमता होती है! तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम सूर्य की महादशा और सूर्य के साथ अन्य ग्रहों की अन्तर्दशा और उनके प्रभाव के बारे विस्तार से जानेंगे!
ज्योतिष में सूर्य और सूर्य की महादशा- महत्व
- सूर्य ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में, सूर्य को ग्रहों के राजा और भगवान सूर्य की उपाधि दी जाती है! वैदिक ज्ञान में, सूर्य आत्मा के कारक, माने जाते हैं! सूर्य को एक बहुत ही, शक्तिशाली, प्रगतिशील और गतिशील ग्रह माना गया है! जिसे सौर मंडल में सभी ग्रहों के बीच सबसे उच्च दर्जा दिया जाता है! इसकी चमक आशावाद, अंधकार को दूर करने, अधिकार, और नई ऊर्जा को प्रदर्शित करती है! तो वहीं सूर्य की तेज और ताप से गर्मी, आक्रामकता और अहंकार का भी ज्ञान मिलता है! यह सभी ग्रहों में से एकमात्र जीवन दाता है! हमारे ज्योतिष आचार्यों की प्रमुख गणना के अनुसार, सूर्य की महादशा के दौरान जातक के जीवन में, समर्थन और सरकारी नौकरी या उच्च पद प्राप्त होता है! साथ ही, प्रतिष्ठित लोगों के समर्थन के साथ उन्हें बहुत मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिलती है! ऐसे जातक कोई बड़े अधिकारी पद पर कार्यरत भी रहते हैं! कभी यह पारिवारिक दृष्टि से समस्याओं का कारण भी बन सकता है!
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सूर्य की महादशा
ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक जिन जातकों की कुंडली में सूर्य की महादशा, अच्छी स्थिति में, रहती है! ऐसे जातक, आर्थिक रूप से बहुत संपन्न होते हैं! साथ ही, वें, पर्याप्त धन कमाते हैं और उन्हें आय के कई स्रोतों का लाभ मिलता है! इन जातकों के लिए हथियार, आग, संपत्ति और चिकित्सा से संबंधित व्यापार व कार्यक्षेत्र विशेष रूप से लाभकारी रहते हैं! सूर्य की महादशा से जातक, को आध्यात्मिक कार्यों में रुचि मिलती है! और साथ ही, ऐसे जातकों की अक्सर तीर्थयात्रा और धार्मिक स्थलों की यात्राओं के योग बनते हैं! लेकिन, ये जातक, चोरी, शत्रुता , अधिकार, स्वास्थ्य समस्याओं और आग की बार-बार आशंकाओं के कारण चिंतित और बेचैन भी रहते है! लेकिन, कुल-मिलाकर, ऐसे जातक का जीवन अच्छा होने के साथ वह आर्थिक रूप से संपन्न होता है!
सूर्य की महादशा 2025- अन्य ग्रहों की अंतर्दशा व प्रभाव
आगे लेख में, हम सूर्य की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा में जातक पर कैसे प्रभाव होंगे! इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं! आशा करते हैं यह जानकारी आपके लिए उपयोगी हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें-
सूर्य की महादशा के साथ सूर्य की अंतर्दशा का प्रभाव
जब कुंडली में, सूर्य ही, सूर्य का कारक हो और उच्च राशि का हो व किसी पाप या अशुभ ग्रह से प्रभावित न हो तो, यह अपनी दशा-अंतर्दशा में जातक को बहुत शुभ फल देता है! ऐसे जातक के धन-धान्य की वृद्धि होती है, उसे सफलता और पदोन्नति के अवसर मिलते हैं! लेकिन जातक मानसिक रूप से अशांत रहता है!
सूर्य की महादशा के साथ चंद्रमा की अंतर्दशा प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ चंद्रमा की अंतर्दशा होने पर जातक को धन लाभ होता है। चूँकि ज्योतिष में, सूर्य, पिता के कारक ग्रह हैं इसलिए, ऐसे जातक के पिता के साथ अच्छे संबंध रहते हैं! मान-सम्मान बढ़ता है! इसके साथ ही इसे आत्मा से भी जोड़ा जाता है, तो वहीं चंद्रमा को मन का कारक बताया गया है! ऐसे में सूर्य की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा के प्रभाव से जातक को माता- पिता का पूरा सहयोग मिलता है। जातक अपने करियर में बहुत आगे बढ़ता है और सफल होता है!
सूर्य की महादशा के साथ मंगल की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ मंगल की अंतर्दशा होने पर, जातक को खूब पराक्रमी होने का वरदान मिलता है! साथ ही यह जातक को मन की शांति प्रदान करता है। काम व कार्यक्षेत्र में सफलता के अच्छे योग बनेंगे! जिससे आप में में एक अद्भुत और विशेष ऊर्जा का संचार होगा! आप अपने काम में आगे बढ़कर अपने हर कार्य को करने में सक्षम होंगे!
सूर्य की महादशा के साथ बुध की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ बुध की अंतर्दशा हो तो, यह जातक के लिए बहुत ही अच्छा समय देने वाला संकेत है! विशेष करके इस समय पर जातकों को, बहुत सी खुशखबरी जैसे- प्रमोशन या पदोन्नति के योग बनते दिखाई देते हैं। जो जातक व्यवसाय कर रहें हैं तो उन्हें भी लाभ मिलने के शुभ संकेत हैं! विदेश यात्रा के योग बनेंगे और किसी उच्च या प्रतिष्ठित व्यक्ति के द्वारा मान-सम्मान की प्राप्ति भी होगी! कुल-मिलाकर, यह समय आपके लिए बहुत शुभ है, जिसमें आप अपने महत्वपूर्ण निर्णय भी ले सकते हैं! क्योंकि सूर्य और बुध दोनों मिलकर आपके लिए अच्छे संकेत और शुभ योग का निर्माण कर रहे हैं!
सूर्य की महादशा के साथ गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा के चलने पर यह एक बहुत ही शुभ और अच्छा योग माना जाता है क्योंकि इस समय जातक को, संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह विवाह के योग भी बनाते हैं! जो अच्छा जीवनसाथी मिलने का संकेत है! गुरु बृहस्पति को ज्ञान के कारक ग्रह माना गया है! ऐसे में आप जातक को नए कार्य सीखने व उच्च शिक्षा प्राप्त करने का मन करता है! कुल-मिलाकर शिक्षक जातकों के लिए यह शुभ प्रभाव देने का कारक है और संतान के लिए भी यह समय बहुत शुभ है!
सूर्य की महादशा के साथ शुक्र की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ शुक्र की अंतर्दशा होने पर यह जातक के प्रेम सम्बन्ध और रिश्तों को प्रभावित करता है! यानी विशेष रूप से इस समय आपके जीवन साथी के साथ आपके प्रेम प्रसंगों में उतार-चढ़ाव की स्थितियां बन सकती हैं! जो आप दोनों के बीच में विवाद की स्थिति का कारण बन सकता है! हमारी सलाह में, यह समय आपको अपने पार्टनर का ध्यान बहुत अच्छे से रखने की जरूरत है! धन के मामले में यदि आप कहीं भी इन्वेस्टमेंट करने का सोच रहें हैं तो आपको उसमें काफी सोच समझकर ही कोई निर्णय लेना है! जिससे आपको, धन हानि का सामना न करना पड़े!
सूर्य की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा का होना जातक के लिए शुभ संकेत नहीं होता है! क्योंकि सूर्य पिता का कारक ग्रह भी है तो पिता के स्वास्थ्य में समस्याएं या पिता के साथ आपके विचारों में मतभेद की स्थिति बन सकती हैं! जिसके कारण आपके व पिता के संबंधों में मनमुटाव आएँगे! ऐसे में आपको अपने पिता के साथ बेहतर रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। कार्य क्षेत्र में जो भी आप से उच्च वर्ग पर कार्यरत हैं, उनके साथ में भी आपके मतभेद होने के संकेत हैं! शत्रु आपको बहुत ज्यादा परेशान कर सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें!

सूर्य की महादशा के साथ राहु की अंतर्दशा का प्रभाव
सूर्य की महादशा के साथ यदि राहु की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक के लिए बहुत मुश्किल समय का संकेत हो सकता है। आपके स्वास्थ्य के लिए तो यह विशेष रूप से कुछ परेशानियां देने का कारक होगा! इसके साथ ही, हमारे ‘मंगल भवन’ के आचार्यों की गणना में, भी यह जातक के लिए मानहानि, अपमान और कलंक का भी संकेत हो सकता है! आपको आपके कोई गुप्त या अज्ञात शत्रुओं से परेशानी हो सकती है! कुल-मिलाकर यह समय आप में बहुत डिप्रेशन पैदा कर सकता है। जिसमें आप से कोई गलत कार्य या गलत निर्णय भी हो सकता है! जिससे आपको भविष्य में भी समस्या देखने को मिल सकती है! हमारी सलाह में बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ें और सतर्क रहें!
सूर्य की महादशा के साथ केतु की अंतर्दशा का प्रभाव
जब सूर्य की महादशा और केतु की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक को उनके कार्यक्षेत्र में समस्या देने का कार्य करती है! साथ इससे शत्रुओं की संख्या भी बढ़ जाएगी! जो आपको आपके कार्यक्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है! और यदि आप व्यवसाय कर रहे हैं तो आपको इससे हानी का सामना करना पड़ सकता है! इसलि कोई भी बड़ा पैसला जल्दबाजी में बिलकुल न करें! यह आपको हानि और कर्ज का शिकार बना सकता है! हमारी सलाह में, आपको सतर्क व धैर्य के साथ रहना होगा! यह आपके लिए सही है और आप भारी नुकसान से बच सकते हैं!
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. सूर्य की महादशा कैसी होती है?
An. ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक जिन जातकों की कुंडली में सूर्य की महादशा, अच्छी स्थिति में, रहती है! ऐसे जातक, आर्थिक रूप से बहुत संपन्न होते हैं! साथ ही, वें पर्याप्त धन कमाते हैं! प्राप्त करते हैं और उन्हें आय के कई स्रोतों का लाभ मिलता है! इन जातकों के लिए हथियार, आग, संपत्ति और चिकित्सा से संबंधित व्यापार व कार्यक्षेत्र विशेष रूप से लाभकारी रहते हैं!
Q. सूर्य की महादशा के साथ, मंगल की अंतर्दशा का क्या प्रभाव होता है?
An. सूर्य की महादशा के साथ मंगल की अंतर्दशा होने पर, जातक को खूब पराक्रमी होने का वरदान मिलता है! साथ ही यह जातक को मन की शांति प्रदान करता है। काम व कार्यक्षेत्र में सफलता के अच्छे योग बनेंगे!
Q, क्या, सूर्य की महादशा में, शनि की अंतर्दशा अच्छी नहीं होती है?
An. सूर्य की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा का होना जातक के लिए शुभ संकेत नहीं होता है! क्योंकि सूर्य पिता का कारक ग्रह भी है तो पिता के स्वास्थ्य में समस्याएं या पिता के साथ आपके विचारों में मतभेद की स्थिति बन सकती हैं! जिसके कारण आपके व पिता के संबंधों में मनमुटाव आएँगे!
Q. सूर्य की महादशा का प्रभाव कितने वर्ष का होता है?
An. सूर्य की महादशा का प्रभाव 6 वर्ष तक रहता है!




