शुक्र की महादशा ! मिलेगी, मान-प्रतिष्ठा और अपार धन संपत्ति, जान लें अन्य ग्रहों की अंतर्दशा के बारे में!

शुक्र की महादशा

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ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के माध्यम से हमें यह ज्ञात हुआ कि, सभी 9 ग्रहों का संबंध किसी न किसी रूप से मानव जीवन को प्रभावित करता है! उसी प्रकार, नौ ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा भी एक निश्चित समय के लिए जातक के जीवन को एक निश्चित समय के लिए प्रभावित करती है! इन प्रभावों में या तो जातक का जीवन सुख से भर जाता है या फिर जातक समस्याओं से घिर जाता है! हमने हमारे पिछले लेख में, गुरु बृहस्पति की महादशा के बारें में आपको जानकारी दी थी!  तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम शुक्र की महादशा के बारे में चर्चा करेंगे! आशा करते हैं लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी सिद्ध है! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें! 

आज हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं, भौतिक सुख सुविधाओं के कारक, वैभव, सौंदर्य और ऐश्वर्य के दाता शुक्र ग्रह और शुक्र की महादशा के बारे में! ज्योतिष में, शुक्र की महादशा का प्रभाव 20 साल तक जातक के जीवन में रहता है! शुक्र ग्रह को विशेष रूप से भौतिक संसाधनों के सुख , वैवाहिक सुख , भोग-विलास, धन-वैभव, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना के कारक माने जाते हैं! इसके साथ यह एक बहुत ही शुभ प्रभाव देने वाले ग्रह भी है! 

चूँकि, शुक्र ग्रह धन-संपदा, भोग-विलासिता, वैभव, प्रेम-सौंदर्य और रोमांस का कारक ग्रह हैं! इसलिए उनकी जब महादशा चलती है तो, जातक के जीवन में इन क्षेत्रों में अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं! ऐसे में अगर किसी जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह उच्च के हों या फिर शुभ ग्रहों के साथ शुभ भाव (घर) में विराजमान हों तो ऐसे जातक को हमेशा ही भाग्य का साथ मिलता है! साथ ही ऐसा जातक धन-दौलत, भोग विलासिता और सभी प्रकार के भौतिक सुख और ऐशोआराम के साथ अपना जीवन व्यतीत करता है! इन जातकों को उनके जीवनकाल में अपार धन संपदा मिलती है! ऐसे जातक बहुत सारा धन कमाते हैं और अपना जीवन सभी सुख-सुविधा के साथ बिताते हैं! 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जीवन में, सभी को शुक्र ग्रह की महादशा का सामना करना पड़ता है. वहीं शुक्र की महादशा के प्रभाव भी शुभ ही होते हैं! लेकिन शुक्र ग्रह के शुभ या अशुभ प्रभाव जातक की जन्म कुंडली में उनकी स्थिति पर निर्भर करता है! अगर शुक्र ग्रह कुंडली में अशुभ या नीच स्थिति में होंगे तो, जातक को शुक्र ग्रह की दशा में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ेगा! इसके साथ ही जातक को भौतिक सुख भी प्राप्त नहीं होंगे! अक्सर शुक्र के उच्च अवस्था में होने पर जातक को, आर्थिक और मानसिक सुख के साथ शारीरिक सुख भी प्राप्त होगा! 

जब शुक्र की महादशा व शुक्र की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक के लिए बहुत ही शुभ स्थिति मानी जाती है! शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक को अनेक प्रकार के लाभ होंगे! सुख-सुविधाओं के साथ जातक को धन लाभ और आर्थिक समृद्धि भी मिलेगी! साथ ही जातक को, समाज में मान-सम्मान और प्रसिद्धि भी मिलेगी! यह नए रिश्तों की शुरुआत का समय भी होता है! रिश्तों में, प्यार और रोमांस बढ़ता है! जातक की रुचि विभिन्न प्रकार की  कलाओं में होंगी! 

जब, शुक्र की महादशा के साथ गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक के लिए शुभ या मिलाजुला प्रभाव देने वाली होती है! क्योंकि, एक-दुसरे से विरोधी सम्बन्ध होने पर इस समय के जातक को शुभ फलों को मिलने में समय लगता है! लेकिन, अंत में सब कुछ सही दिशा में होकर कार्य सार्थक होने लगते हैं! यानी कुल-मिलाकर, जहां नकारात्मक है, वहीं ये दोनों ग्रह शुभ होने के कारण अच्छे परिणाम भी देते हैं! जिसमें जातक को, व्यावसायिक स्थिति, भौतिक सुख और पारिवारिक मामलों में अच्छे और शुभ परिणाम मिलते हैं! साथ ही, ऐसे जातक अध्यात्म की ओर कुछ अधिक रूचि होगी! गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव में, जातक के ज्ञान और बुद्धि का विस्तार होगा! 

जब शुक्र की महादशा के साथ, बुध ग्रह की अंतर्दशा चलती है तो, यह जातक के लिए बहुत ही, शुभ समय होता है! इस समय जातक को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं! क्योंकि, ज्योतिष में, यह दोनों ग्रह बहुत ही शुभ और लाभदायक होने के साथ साथ एक-दूसरे के साथ मित्रता का संबंध रखते हैं! यानी इस समय जातक को सफलता और जीवन में बहुत ही आनंद और मौज-मस्ती के मौके मिलते हैं!  लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है! ऐसे जातक का जीवन बहुत ही सुखमय और सुखद व्यतीत होता है!करियर में सफलता मिलती है! शत्रु वर्ग पराजित रहेगा! पारिवारिक संबंध अच्छे रहते हैं! और भौतिक सुख मिलता है! परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं! 

जब शुक्र की महादशा के साथ सूर्य ग्रह की अंतर्दशा का प्रभाव हो तो जातक को उसके जीवन में मिले जुले परिणाम देखने को मिलेंगे! शुक्र और सूर्य के शुभ प्रभाव से जातक के कार्यक्षेत्र मान-प्रतिष्ठा पर बहुत ही शुभ प्रभाव होता है! ऐसे जातक अपनी स्वयं की मेहनत से बहुत आगे जाते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं! लेकिन, कभी-कभी जीवन में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं! जीवनसाथी के साथ छोटे-छोटे विवाद और मनमुटाव होने की संभावना हो सकती है! शत्रु पक्ष से परेशानियां हो सकती है! इसलिए, आपको सफलता तो मिलेगी लेकिन, बहुत मेहनत और संघर्ष के साथ मिलेगी! 

जब किसी जातक के जीवन में, शुक्र की महादशा व चंद्र ग्रह की अंतर्दशा चल रही हो और शुभ ग्रहों की दशाओं के साथ शुभ भाव में हो तो, इसके सुभ प्रभाव में जातक का अपने भाई बंधुओं के साथ अच्छे संबंध होते हैं! स्वभाव से ऐसे जातक बहुत दयालु और सौम्य होते हैं! हालांकि, केतु के प्रभाव में, करियर में कुछ परेशानियां हो सकती हैं! लेकिन, शुक्र के शुभ प्रभाव से वे समस्या अधिक समय तक नहीं होंगी! ऐसे जातक चंचल होते हैं और सौंदर्य के प्रति उनका आकर्षण भी अधिक रहता है! 

जब, शुक्र की महादशा व मंगल की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक को एक वर्ष दो माह तक प्रभावित करती है! इस समय अवधि में जातक, को औसत यानी कुछ लाभ और कुछ हानि देने वाले होंगे! मंगल के प्रभाव से, कुछ मामलों में जातक को नई ऊर्जा और उत्साह मिलेगा! मंगल की ऊर्जा शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक की कामुकता में वृद्धि होगी! लेकिन जातक को सफलता परिश्रम करने से ही मिलेगी! इस समय के दौरान जातक को अपने प्रेम और जीवन साथी के प्रति बहुत सावधानी रखने की जरूरत है! 

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जब, शुक्र ग्रह की महादशा के साथ शनि ग्रह की अन्तर्दशा का प्रभाव हो तो, यह जातक के जीवन में बहुत से परिवर्तन करने वाला होगा! क्योंकि, शुक्र और शनि के, मित्र रूप में सम्बन्ध होते है! तो यह समय जातक की इच्छाओं को पूरा करने के लिए बहुत प्रभावशाली होगा! दोनों ग्रह एक-दूसरे के मित्र होने से हैं, शनि के जो नकारात्मक प्रभाव होंगे वे शुक्र की शुभता से शुभ हो जाते हैं! इसलिए जातक को इसके औसत परिणाम मिलते हैं! वैवाहिक जीवन में संघर्ष महसूस हो सकता है! लेकिन, इस अवधि के दौरान ऐशों-आराम और विलासिता का आनंद मिलता है! करियर और सामाजिक जीवन में रुकावट आ सकती है! लेकिन धैर्य से कार्य करने पर समस्याओं से होने वाले नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा! स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और आर्थिक रूप से अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है! 

जब, शुक्र की महादशा में राहु ग्रह की अंतर्दशा का प्रभाव हो तो, यह समय जातक को विशेष प्रभाव देने वाला समय होगा! इस समय पर जीवन की घटनाएं गहराई तक प्रभावशाली होती हैं! यानी, इस समय यदि जातक को, धन लाभ मिलता है वहीं मानसिक हानि का भी सामना करना पड़ता है! पारिवारिक और संतान के लिए शुभ समाचार मिलने की संभावना है! दवाओं के कारण कुछ संक्रमण भी संभव होता है! इस दौरान आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते है! जीवन में किसी प्रकार की दुर्घटना होने की संभावना भी हो सकती है! इसलिए सावधानी रखें! 

जब शुक्र महादशा के साथ केतु की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह समय जातक के लिए कुछ मुश्किलों से भरा हो सकता है! इसलिए, बहुत सावधानी से संभल कर कार्य करने की जरूरत होगी! शुक्र शुभ है लेकिन केतु का प्रभाव इस समय आपके लिए बाधक का कार्य करेगा! यानी केतु का अशुभ होना, शुक्र के सकारात्मक प्रभाव को कमजोर कर सकता है! जिससे जातक के पारिवारिक संबंधों में कड़वाहट और विरोध होगा! मानसिक शांति की कमी और सफलता में, बाधाएं आएंगी! इस दौरान विषाक्तता  का प्रभाव भी अधिक हो सकता है! अपने दैनिक खान-पान में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें! नहीं तो, संक्रमण का प्रभाव आपको परेशान कर सकता है!  

Q. शुक्र की महादशा कितने समय चलती है?

An. ज्योतिष में, शुक्र की महादशा का प्रभाव 20 साल तक जातक के जीवन में रहता है! शुक्र ग्रह को विशेष रूप से भौतिक संसाधनों के सुख, वैवाहिक सुख , भोग-विलास, धन-वैभव, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना के कारक माने जाते हैं!

Q. शुक्र की महादशा के क्या प्रभाव होते हैं?

An. चूँकि, शुक्र ग्रह धन-संपदा, भोग-विलासिता, वैभव, प्रेम-सौंदर्य और रोमांस का कारक ग्रह हैं! इसलिए उनकी जब महादशा चलती है तो, जातक के जीवन में इन क्षेत्रों में अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं! ऐसे में अगर किसी जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह उच्च के हों या फिर शुभ ग्रहों के साथ शुभ भाव में विराजमान हों तो ऐसे जातक को हमेशा ही भाग्य का साथ मिलता है!

Q. शुक्र की महादशा के साथ शुक्र की अन्तर्दशा का क्या प्रभाव होता है?

An. जब शुक्र की महादशा व शुक्र की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक के लिए बहुत ही शुभ स्थिति मानी जाती है! शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक को अनेक प्रकार के लाभ होंगे! सुख-सुविधाओं के साथ जातक को धन लाभ और आर्थिक समृद्धि भी मिलेगी! साथ ही जातक को, समाज में मान-सम्मान और प्रसिद्धि भी मिलेगी!

Q. शुक्र की महादशा और शनि की अंतर्दशा कैसी होती है?

An. जब, शुक्र ग्रह की महादशा के साथ शनि ग्रह की अन्तर्दशा का प्रभाव हो तो, यह जातक के जीवन में बहुत से परिवर्तन करने वाला होगा! क्योंकि, शुक्र और शनि के, मित्र रूप में सम्बन्ध होते है! तो यह समय जातक की इच्छाओं को पूरा करने के लिए बहुत प्रभावशाली होगा! दोनों ग्रह एक-दूसरे के मित्र होते हैं, शनि के जो नकारात्मक प्रभाव होंगे वे शुक्र की शुभता से शुभ हो जाते हैं!

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