शनि ग्रह की महादशा व अन्य ग्रहों की अन्तर्दशा का फल! जाने, कर्म और भाग्य का संतुलन

शनि ग्रह की महादशा

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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की महादशा का प्रभाव जातक के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है! हमारे ‘मंगल भवन’ के पिछले लेख  में हमने आपको शुक्र की महादशा व अन्य ग्रहों की अंतर्दशा  के बारे में जानकारी दी थी! आज के इस लेख में आपको शनि की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा  और उनके प्रभाव बताएँगे! साथ ही, शनि की महादशा के दौरान उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए कुछ आसान से उपाय की जानकारी भी है! आशा करते हैं, लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयुक्त हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें! 

वैदिक ज्योतिष में शनि को एक बहुत ही क्रूर ग्रह की संज्ञा प्राप्त है! लेकिन वास्तव में, शनि कर्मों के अनुसार फल देते हैं! यानी शनि को, न्यायाधीश और दंडाधिकारी भी माना जाता है। किसी भी जातक के जीवन में शनि की महादशा बहुत ही प्रभावी मानी जाती है और इसका जीवन पर सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है! इतना ही नहीं, करियर, रुपये-पैसे और यहां तक कि वैवाहिक जीवन भी शनि की दशा पर ही निर्भर करता है! लेकिन, माना जाता है कि अगर कोई और ग्रह शनि की महादशा के साथ अंतर्दशा में प्रभावशील हो तो, यह शनि के प्रभाव को कम करने में सक्षम होता है!  शनि की महादशा कुंडली में 19 साल तक चलती है! इस समय के दौरान शनि की महादशा के बीच सभी नौ ग्रहों की अंतर्दशा भी आती-जाती रहती है!  

कुल-मिलाकर, शनि की महादशा का प्रभाव जातक के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है! जिसके प्रभाव में जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है! यह प्रभाव अच्छे या बुरे हो सकते हैं! ज्योतिष शास्त्र में, शनि की महादशा किसी भी जातक की कुंडली में, 19 साल तक चलती है! इस दौरान हर ग्रह की अंतर्दशा भी आती है, जो कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक चल सकती है। शनि की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशाओं का प्रभाव जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है! तो आइए इस लेख में शनि के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और उसके प्रभाव के बारे में जानेंगे- 

हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों  की गणना के अनुसार, शनि की महादशा में शनि की ही अंतर्दशा हो तो यह जातक के जीवन में, तीन वर्ष तक चलती है! जिसके प्रभाव में जातक को अपने जीवन में, मिले-जुले परिणाम नज़र आएँगे! इस समय आपको जमीन से जुड़े मामलों में अच्छा लाभ होगा! साथ ही यह समय आपके जीवनसाथी और संतान संबंधी मामलों के लिए भी शुभ प्रभाव देने वाली स्थिति होगी! यदि, शनि उच्च, मित्र और स्वराशि में विराजमान हो, तो यह अनुकूल परिणाम देने वाली होगी! ज्योतिष में, शनि का असर सुख की प्राप्ति को देने वाला होता है! यह जातक को,  व्यापार में लाभ और आर्थिक स्थिति के लिए भी अच्छी स्थिति मानी जाती है! 

अब बात करते हैं, शनि की महादशा के साथ बुध ग्रह की अंतर्दशा के बारे में, जिसकी अवधि जातक के जीवन में, दो वर्ष आठ महीने, नौ दिन की होती है! इस अवधि में जातक को करियर और आर्थिक रूप से बहुत ही शुभ प्रभाव मिलेंगे!  बुध एक शुभ ग्रह है अतः शनि के साथ बुध ग्रह की अंतर्दशा होने से यह शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में बहुत प्रभावशाली होती है! यानी, शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा का होना सकारात्मक प्रभाव देने वाला होता है! यह समय जातक अपने कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है! साथ ही, पारिवारिक सम्बन्धों के लिए यह समय बहुत ही अच्छा माना जाता है! चूंकि, शनि और बुध के बीच मित्रता का सम्बन्ध होता है, इसलिए इस समय जातक में, एक नयी ऊर्जा रहती है! 

Shani grah के साथ, केतु ग्रह की अंतर्दशा का समय एक वर्ष एक महीने,  9 दिन का होता है! शनि के साथ केतु के संयोग से जातकों को लाभ मिलता है! इस समय जातक को विदेश यात्रा करने का अवसर मिलता है! साथ ही, आय में भी वृद्धि होने के भी योग बनते हैं! शनि की महादशा के साथ में केतु की अंतर्दशा का समय जातक के लिए आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है! यानि जातक को ऐसे अनुभव मिलते हैं जिनके बारें में वह सोच रहा होता है!  यदि जन्म कुंडली में, शनि और केतु अपनी स्थिति के अनुसार अच्छा संबंध साझा करते हैं, तो इस समय जातक करियर के संबंध में बहुत अच्छे फल प्राप्त करता है! कुछ वरिष्ठ और अनुभवी लोगो से संपर्क बनते हैं! 

ग्रह शनि की महादशा के साथ, शुक्र की अंतर्दशा का समय तीन वर्ष दो महीने का होता है! शनि के साथ शुक्र ग्रह की अन्तर्दशा का समय जातक के जीवन में नए सुधर और सकारात्मक परिणाम देने वाला होता है! कुल मिलाकर यह संयोग जातक के लिए शुभ फल देने वाला होता है! यदि कुंडली में शनि और शुक्र की स्थिति अनुकूल प्रभाव में है तो, यह जातक की भौतिक इच्छाओं के पूर्ण होने और अपार सफलता प्राप्त करने का समय भी होता है! जातक का अपने परिवार और संबंधों पर अधिक ध्यान होता है! लेकिन, यदि इन दशा में ग्रहों के के बीच प्रतिकूलता हो तो, यह समय जातक को हानि और असफलता देखने को मिल सकती है! 

शनि की महादशा के साथ, सूर्य की अंतर्दशा का समय 11 महीने, 12 दिन का होता है! चूंकि शनि और सूर्य को एक-दूसरे का परम शत्रु के सम्बन्ध में होते हैं! इसलिए शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा का परिणाम भी अशुभ ही होता है!  यानी, पिता और पुत्र होने के बाद भी शनि और सूर्य ग्रह एक-दूसरे के शत्रु कहलाते हैं! इसके साथ ही, यदि कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है तो प्रारंभ में, आपके जीवन में नए अवसर और मित्रों से अच्छा सहयोग आपको मिल सकता है! इस समय आपको अपने वरिष्ठ जनों या उच्च अधिकारियों के साथ कुछ वैचारिक मतभेद का सामना करना पड़ सकता है! लेकिन यदि मेहनत करेंगे तो सफलता निश्चित रूप से मिलेगी! इसके विपरीत यदि कुंडली में, दोनों ग्रह प्रतिकूल स्थिति में है तो,इसका प्रभाव भी आपके जीवन में प्रतिकूल ही होगा! जैसे नौकरी छूटना, करियर संबंधी समस्याएं, तनाव, चिंता, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, वित्तीय परेशानी, देरी आदि!

शनि की महादशा के साथ, चंद्र ग्रह की अंतर्दशा का समय एक वर्ष सात महीने का होता है! यह संयोग विशेष रूप से अधिकांश अशुभ परिणाम देने वाला होता है! यह समय जातक, स्वास्थ्य संबंधी समस्या से अधिक परेशान रहते हैं! साथ ही, वैवाहिक जीवन में भी तनाव और मनमुटाव देखा जाता है! शनि की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा के कारण जातक मुख्य रूप से मानसिक और भावनात्मक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है! साथ इस समय जातक के मन में, एक अनजाने डर और व्यर्थ की चिंता बनी रहती है! इस समय जातक को सफलता के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है! इस दशा से प्रभावित जातक अपने आस-पास के लोगों पर विश्वास नहीं करते हैं! 

शनि की महादशा के साथ मंगल की अंतर्दशा का समय एक वर्ष एक महीने, नौ दिन का होता है! ज्योतिष में शनि के साथ मंगल को भी एक आक्रामक और क्रूर ग्रह की संज्ञा दी जाती है! यानी जब मंगल, शनि की महादशा के साथ होते हैं तो, यह जातक के जीवन में मुश्किलें लाने का कार्य करता है! मंगल के प्रभाव से जातक का स्वभाव आक्रामक और क्रोधी हो जाता है! यह समय जातक को उसके कार्यक्षेत्र में अधिक परिश्रम देने वाला होता है! पारिवारिक रिश्तों के लिए यह समय आपसी मतभेद विरोधाभास की स्थिति देने वाला होता है! 

शनि की महादशा के साथ, राहु ग्रह की अंतर्दशा का समय दो वर्ष दस महीने, छः दिन का होता है! यह समय जातक के जीवन का सबसे अधिक मुश्किल समय होता है! इस दौरान जातक के जीवन में कड़े संघर्ष होते हैं और कड़ी मेहनत के बाद भी जातकों को मनचाही सफलता नहीं मिलती है!  यह भी कहा जा सकता है कि, जातक को मानसिक तनाव के साथ साथ शारीरिक कष्ट भी मिलते हैं! आर्थिक रूप से इन जातकों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है! जीवन में एक के बाद एक मुश्किल आती जाती है! साथ ही, यह समय जातक को गलत चीजों के द्वारा काम करने के लिए प्रेरित करता है! ऐसे जातक स्वभाव में बेचैनी और विद्रोह की स्थिति का सामना करते हैं! 

शनि ग्रह की महादशा

शनि की महादशा के साथ, गुरु की अंतर्दशा का समय दो वर्ष छह महीने, व बारह दिन का होता है! जिसके दौरान जातक को शुभ परिणाम मिलते हैं!  बृहस्पति ग्रह एक शुभ ग्रह है जिससे जातक को, शुभ फलों की प्राप्ति होती है! शनि की महादशा में बृहस्पति ग्रह की अंतर्दशा के प्रभाव से जातक को अपने भविष्य की चिंता महसूस होती है! ऐसे जातक सामाजिक कार्यों में अधिक व्यस्त रहते हैं!अपने कार्यक्षेत्र में उन्हें, नए लोगों का सहयोग मिलता है! साथ ही, जातक को नए-नए कार्यों को सीखने में रुचि होती है! खर्चों की अधिकता से आर्थिक दृष्टि से परेशानियां आती है! 

शनि की महादशा के दौरान कुछ उपाय करके इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं-

  1. ग्रह शनि की महादशा के दौरान शनि पूजा और व्रत करना लाभदायक होता है! इससे, शनि देवता की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है।
  2. शनि मंदिर में दर्शन करना भी शनि की महादशा के दौरान लाभदायक हो सकता है, इससे शनि के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
  3. नीलम रत्न धारण करना शनि की महादशा के दौरान बहुत ही लाभदायक होता है, लेकिन इसके लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करना उचित होगा!
  4. काले रंग के वस्त्र पहनना भी शनि की महादशा के दौरान लाभदायक होता है, क्योंकि काला रंग शनि का प्रतिनिधित्व करता है!
  5. काली वस्तुओं जैसे कि काले कपड़े, काले तिल आदि आदि का दान करना ,शनि की महादशा के लिए लाभदायक होता है!

Q. शनि की महादशा का समय कितने वर्ष तक चलता है?

An. शनि की महादशा कुंडली में 19 साल तक चलती है! इस समय के दौरान शनि की महादशा के बीच सभी नौ ग्रहों की अंतर्दशा भी आती-जाती रहती है!

Q. क्या, शनि की महादशा जातक के लिए अशुभ होती है?

An. नहीं, शनि की महादशा से जातक को अशुभ प्रभाव ही नहीं बल्कि शुभ और अनुकूल ग्रहों की अंतर्दशा में, शुभ प्रभाव भी मिलते हैं!

Q. शनि की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा कैसी होती है?

An. शनि की महादशा में शनि की ही अंतर्दशा हो तो यह जातक के जीवन में, तीन वर्ष तक चलती है! जिसके प्रभाव में जातक को अपने जीवन में, मिले-जुले परिणाम नज़र आएँगे! इस समय आपको जमीन से जुड़े मामलों में अच्छा लाभ होगा!साथ ही यह समय आपके जीवनसाथी और संतान संबंधी मामलों के लिए भी शुभ प्रभाव देने वाली स्थिति होगी!

Q. शनि की महादशा के साथ केतु की अन्तर्दशा का क्या प्रभाव होता है?

An. शनि के साथ, केतु ग्रह की अंतर्दशा का समय एक वर्ष एक महीने,  9 दिन का होता है! शनि के साथ केतु के संयोग से जातकों को लाभ मिलता है! इस समय जातक को विदेश यात्रा करने का अवसर मिलता है! साथ ही, आय में भी वृद्धि होने के भी योग बनते हैं! शनि की महादशा के साथ में केतु की अंतर्दशा का समय जातक के लिए आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है!

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