कन्या लग्न में शनि की स्थिति
ज्योतिष में कन्या राशि, राशि चक्र की छठी राशि है। जिसका राशि चिन्ह हाथ में फूल की डाली लिए एक कन्या का है। इसका विस्तार राशि चक्र के 150 अंशों से 180 तक के अंश में किया गया है। ग्रहों में, कन्या राशि का स्वामी बुद्धि के कारक ग्रह बुध है। इस राशि के लोग व्यवहार में संकोच करने वाले और शर्मीले होते हैं।
कन्या राशि को पृथ्वी तत्व की राशि माना गया है। यह राशि द्विस्वभाव राशि कहलाती है। राशि का चिन्ह के अनुसार इसमें एक लड़की है, मानवता को सन्देश देती है कि, दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
दूसरी ओर शनि ग्रह के बारे में समझे तो, ग्रहों में शनि को न्याय के देवता की संज्ञा प्राप्त है। जो जातक को उनके कर्मों के अनुसार, फल देते हैं। कुंडली में शनि की युति अन्य ग्रहों के साथ युति और गुणों पर निर्भर करती है। तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको कन्या लग्न में शनि की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही, कन्या लग्न के लिए शनि के उपाय की जानकारी भी है। हमारे साथ लेख में बने रहें और लेख में दी गई जानकारी के लिए हमें अपनी प्रतिक्रिया देना बिल्कुल न भूलें…
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ज्योतिष में- कन्या लग्न में शनि ग्रह की भूमिका
ज्योतिष शास्त्र में, यदि कन्या लग्न में शनि की स्थिति है तो, यह योगकारक मानी गई है। क्योंकि, इस लग्न में शनि ग्रह पांचवें और छठे भाव के स्वामी है और बुध के मित्र होने के कारण यह शुभ फलदायक है। शनि की स्थिति के अनुसार, कन्या लग्न के जातक करियर, आर्थिक स्थिति, सेहत और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राप्त करते हैं। लेकिन यह भाव के अनुसार अलग-अलग परिणाम देता है।
कन्या लग्न में शनि ग्रह- रूपरेखा व स्वभाव
कन्या लग्न में जन्म लेने वाले जातक गोर या संव्लें वर्ण के होते है। ऐसे जातकों को कफ और पित्त की समस्या रहती है। स्वभाव से वे सौन्दर्यवान, विचारशील, संतान से युक्त, स्त्री द्वारा पराजित, डरपोक, मायावी, काम- वासना से दुखी शरीर वाला, कामक्रीड़ा में निपुण, अनेक प्रकार के गुणों तथा कौशलों से युक्त, सदैव प्रसन्न रहने वाला, सुन्दर स्त्री प्राप्त करने वाला, श्रृंगार प्रिय, स्थूल तथा सामान्य शरीर वाला, बड़ी आँखों वाला, प्रियवादी, अल्पभाषी, गणित तथा धर्म में रूचि रखने वाला, गंभीर, अधिक कन्या और संतति वाला, यत्रप्रेमी, चतुर, नाजुक मिजाज, बाल्यावस्था में सुखी, माध्य्मावस्था में सामान्य तथा अंतिम अवस्था में दुःख प्राप्त करने वाला होता है। इन जातकों को 24 से 36 वर्ष की आयु के बीच भाग्य का साथ मिलता है। यह समय वह अपने धन ऐश्वर्य में बहुत तेजी से वृद्धि करते हैं।
शनि ग्रह की शुभ और अशुभ दृष्टि- कन्या लग्न में
- ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक, कन्या राशि में शनि पहले केंद्र में होने पर जातक को शरीर में रोग तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही ऐसे जातक श्रेष्ठ बुद्धि के साथ बहुत विद्या अर्जित करते हैं।
- इस लग्न में शनि तीसरी शत्रु दृष्टि से तीसरे भाव को भी देखता है, जिससे जातक को भाई बहन के सुख में कमी आती है। और कार्यों को पूरा करने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
- इसके साथ ही, सातवें भाव में, शनि की सप्तम शत्रु दृष्टि होने से जातक को वैमनस्य रहता है। व्यवसाय में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
- शनि की दसवीं मित्र दृष्टि से दसवें भाव पर हो तो पिता की ओर से कुछ छोटी-मोटी परेशानी रह सकती हैं। लेकिन, राज्य और व्यापार के क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलेगी।
कन्या लग्न में शनि ग्रह- शुभ \अशुभ प्रभाव
शनि ग्रह कन्या लग्न में पांचवें और छठे भाव के स्वामी कहलाते हैं। साथ ही, शनि देव लग्नेश बुध के भी प्रिय मित्र हैं। इसलिए, यह कन्या लग्न की कुंडली के योगकारक ग्रह माने जाते हैं। शनि का पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में उदय अवस्था में अपनी दशा-अंतर्दशा में जातक के लिए अपनी क्षमतानुसार शुभ फल देते हैं। आइये जानते हैं, कन्या लग्न में शनि के शुभ और अशुभ प्रभाव क्या हो सकते हैं-
शुभ प्रभाव
- यदि कन्या लग्न में शनि की शुभ दृष्टि शुभ ग्रहों के साथ हो तो, ऐसे जातक मेधावी और कुशल होते हैं।साथ ही वें बहुत बुद्धिमान और नेतृत्व करने के गुणों से युक्त होते हैं।
- ऐसे जातक के पास शनि देव की शुभता से धन-संपत्ति और आर्थिक सम्पन्नता बहुत अच्छी होती है।
- शनि के शुभ प्रभाव से लग्न के जातकों को, करियर में मेहनत और अनुशासन से उच्च पद प्राप्त होता है, विशेष रूप से सरकारी सेवाओं में।
- कन्या लग्न में शनि छठे भाव के स्वामी होने के कारण जातक को अपने शत्रुओं और विरोधियों पर विजय देने के कारक होते है।
- शनि के शुभ प्रभाव में होने पर जातक को, समाज में सामाजिक प्रतिष्ठा और बहुत सम्मान मिलता है।
- कन्या लग्न में शनि की शुभ और सीधी चाल जातक को पारिवारिक जीवन में सम्पन्नता और रचनात्मक गतिविधियों में सफलता देने की कारक होती है।
- अशुभ प्रभाव
- लग्न में यदि शनि षष्ठेश हो तो यह जातक के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देने का कारक होता है।
- अशुभ प्रभाव के कारण शनि जातक को कई मानसिक तनाव और उलझनों का सामना करना पड़ सकता है।
- अशुभ प्रभाव के कारण जातक को, घरेलू मामलों में कलह और झगड़ों की स्थिति सामना करना पड़ता है।
- शनि के अशुभ प्रभाव से जातक को अपने जीवन में, कठोर परिश्रम और बहुत संघर्ष करना पड़ता है।
- शनि के अशुभ प्रभाव में जातक में साहस और आत्मविश्वास की कमी रहती है।
कन्या लग्न में शनि ग्रह के लिए आसान उपाय
प्रयेक ग्रह किसी राशि में शुभ तो किसी राशि लग्न के लिए अशुभ प्रभाव देते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है ,कि, ग्रहों की अशुभता को दूर नहीं किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों के प्रभाव उनकी दशा और अन्तर्दशा के चलते शुभ और अशुभ प्रभाव देते है। इस दशा या अशुभ स्थिति में, जातक को उचित उपाय जरूर करना चाहिए। कन्या लग्न में शनि ग्रह के लिए जातक को ये उपाय करने की सलाह दी गई है-

- कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य के साथ अस्त अवस्था में होने पर शनि के लिए नीलम रत्न धारण किया जाता है। जिससे वे अच्छे प्रभाव देने में सक्षम होते हैं।
- साथ ही यदि शनि, तीसरे, छठे, आठवें और बारहवें भाव में उदय अवस्था में हैं तो वह अशुभ हो सकते हैं। ऐसे में उनका पाठ, मंत्र जाप, पूजन और शनि सम्बन्धी दान करके उनकी अशुभता को दूर किया जाता है।
- शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 9 या 11 बार परिक्रमा करें।
- भगवान शिव की पूजा करने से शनिदेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यदि रोज संभव ना हो तो सोमवार के दिन भगवान शिव को जल अर्पित करें।
- शनि से सम्बन्धित वस्तुएं शनिवार के दिन, काले तिल, चमड़े के जूते-चप्पल, काले वस्त्र या लोहे से बनी वस्तु का दान करें।
- शनिवार को सरसों के तेल में अपनी परछाई देखकर दान करें।
- अपनी क्षमता के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों या मजदूरों की मदद करें। आप उन्हें अपनी सामर्थ्य अनुसार, कपड़े, अनाज या जरुरत की वास्तें दे सकते हैं।
- काले कुत्तों को तेल से बने मीठे गुलगुले खिलाएं या कौवों को सरसों का तेल लगी रोटी खिलाने से शनि देव को शांत किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बात- कन्या लग्न के जातकों पर शनि की साढ़े साती और शनि की ढैया के दौरान मिश्रित प्रभाव देखने को मिलते हैं। इसलिए, कन्या लग्न के जातकों को इस दौरान जातक को धैर्य के साथ कार्य करने और अपनी मेहनत पर विश्वास करने की सलाह है।
सारांश\निष्कर्ष
हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों, की प्रमुख गणना के अनुसार, कन्या लग्न के जातकों के लिए शनि एक मिश्रित प्रभाव देने वाले ग्रह है। जहाँ वे उन्हें, एक ओर मेहनत और अनुशासन में रहकर सफलता देने, धन और शत्रुओं पर जीत दिलाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानियाँ भी देते हैं। इसलिए कन्या लग्न के जातकों को शनि से सकारात्मक प्रभाव के लिए बताए गए उचित उपाय करना चाहिए।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. कन्या लग्न में शनि के प्रभाव कैसे होते हैं?
An. कन्या लग्न में शनि की स्थिति है तो, यह योगकारक मानी गई है। क्योंकि, इस लग्न में शनि ग्रह पांचवें और छठे भाव के स्वामी है और बुध के मित्र होने के कारण यह शुभ फलदायक है। शनि की स्थिति के अनुसार, कन्या लग्न के जातक करियर, आर्थिक स्थिति, सेहत और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राप्त करते हैं। लेकिन यह भाव के अनुसार अलग-अलग परिणाम देता है।
Q.क्या कन्या लग्न के लिए शनि की स्थिति शुभ है?
An. हां, शनि ग्रह कन्या लग्न में पांचवें और छठे भाव के स्वामी कहलाते हैं। साथ ही, शनि देव लग्नेश बुध के भी प्रिय मित्र हैं। इसलिए, यह कन्या लग्न की कुंडली के योगकारक ग्रह माने जाते हैं।
Q. क्या, कन्या लग्न के जातक शनि ग्रह के प्रभाव के लिए नीलम रत्न पहन सकते हैं?
An. हां, कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य के साथ अस्त अवस्था में होने पर शनि के लिए नीलम रत्न धारण किया जाता है। जिससे वे अच्छे प्रभाव देने में सक्षम होते हैं।
Q. शनि के लिए कन्या लग्न के जातक को क्या-क्या उपाय करना चाहिए?
An. आप, भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं, जिससे शनिदेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यदि रोज संभव न हो तो सोमवार के दिन भगवान शिव को जल अर्पित करें। साथ ही, शनि से सम्बन्धित वस्तुएं शनिवार के दिन, काले तिल, चमड़े के जूते-चप्पल, काले वस्त्र या लोहे से बनी वस्तु का दान करें।




