मीन लग्न में शनि ग्रह, आपके लिए बहुत जरुरी जानकारी, शनि ग्रह शुभ\अशुभ स्थिति, प्रभाव और उपाय

मीन लग्न में शनि ग्रह

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मीन लग्न में शनि ग्रह लाभेश व द्वादशेश होने के कारण मिश्रित परिणाम देने वाले प्रभाव देते हैं। लेकिन, मीन लग्न के जातकों की कुंडली में यदि शनि ग्रह केन्द्र, त्रिकोण में या उच्च राशि में विराजमान हो तो, वे जातक के लिए शुभ फलदायी होते हैं। इसके विपरीत यदि शनि की स्थिति अशुभ भावों में है, तो वे अशुभ फल में कमी करके शुभ फल देते हैं। तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में आज हम मीन लग्न में शनि के शुभ\अशुभ प्रभाव के साथ उपाय और शुभ भाव में प्रभाव के विषय में चर्चा करेंगे।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मीन लग्न में जन्म लेने वाले जातक विलास प्रिय, सुख शांतिमय और भोग विलासमयी जीवन जीने वाले होते हैं। इसलिए वे फिजूल खर्च बहुत अधिक करते हैं। पानी की तरह धन बिना सोच-विचार के करते हैं। इसके अलावा, ऐसे जातक कुशल कवि और लेखक होते हैं और इसमें उन्हें आनंद की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग समय की कीमत को जानने वाले सदा किसी न किसी काम में व्यस्त रहते हैं। इसके साथ ही, मीन लग्न के जातक बहुत सी बातों को जानने वाले और सभी बातों की खबर रखने वाले आतुर स्वभाव के होते हैं। आप कीर्ति संपन्न, दक्ष, अल्पहारी,चपल और धन समृद्धि युक्त व्यक्ति होंगे।

प्रायः इस लग के जातक को धन का नुकसान शत्रु द्वारा तथा पारस्परिक द्वेष और शत्रुता की भावना से होती है। लेकिन वे समय पर अपना साहस दिखने से कभी पीछे नहीं हटते हैं। इन्हें नाटक, संगीत, चित्र, नाच, तथा अन्य ललित कलाओं में अभिरुचि तथा प्रेम होता है। बातचीत की कला में ऐसे जातक बहुत कुशल होते हैं अपनी बातों और विचारों से किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। मीन लग्न के जातक विश्वासपात्र और वफादार होते हैं, उन्हें आसानी से भ्रमित किया जा सकता है। उनका गैर व्यवहारिक स्वभाव दूसरों के लिए परेशानी की एक अच्छी सीख बनता है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों  के  मतानुसार,शनि देव मीन लग्न कुंडली में ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं। और साथ ही, इस लग्न में वे लग्नेश बृहस्पति के विरोधी ग्रह भी हैं। इसलिए शनि  देव इस लग्न की कुंडली में अति मारक ग्रह माने जाते हैं। इसके अलावा, कुंडली के किसी भी भाव में स्थित शनि देव की दशा व अंतर्दशा जातक के लिए कष्टकारी होती है। जिनमें वे अपनी क्षमतानुसार शुभ फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, छठे , आठवें और बारहवें भाव में शनि देव विपरीत राजयोग में आकर शुभ फलदायक होते हैं। लेकिन, इसके लिए लग्नेश बृहस्पति का बलि व शुभ दोनों होना जरूरी है। 

जरुरी नोट- मीन लग्न के लिए शनि देव का रत्न नीलम को पहनना बिल्कुल भी शुभ नहीं माना जाता है इसलिए अनुभवी ज्योतिषी की सलाह के बिना मीन लग्न के जातक नीलम रत्न धारण न करें।

मीन लग्न में शनि ग्रह से प्रभावित शुभ भाव इस प्रकार हैं-

तीसरा भाव (पराक्रम/छोटे भाई-बहन) का भाव होता है। इस भाव में, शनि का होना शुभ परिणाम देने वाला होता है। क्योंकि ये उपचय भाव (Growth houses) माना जाता हैं। इस भाव में, शनि जातक को  को पराक्रमी और मेहनत से सफलता देने वाला होता है।

कुंडली का छठा भाव (शत्रु/ऋण/रोग) का भाव कहलाता है। छठे भाव में शनि की स्थिति शुभ मानी जाती है। यह शत्रुओं पर विजय जीत दिलाने वाली और कर्ज, ऋणों का प्रबंधन करने में सहायक स्थिति मानी जाती है। 

इस भाव में शनि, जातक को अनुशासित जीवन शैली के माध्यम से अच्छे स्वास्थ्य और सफलता के मार्ग की ओर ले जाता है।

कुंडली का ग्यारहवां भाव आय, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति और बड़े सामाजिक दायरे का भाव होता है। यदि, शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में इस भाव में स्थित होता है, जो यह बहुत ही लाभकारी स्थिति मानी गई है। 

यह जातक को बहुत मजबूत बनाता है। यहां शनि अत्यधिक धन लाभ, आय में वृद्धि, करियर में सफलता और हर तरह की इच्छाओं की पूर्ति करने वाला होता है। इस भाव में शनि की स्थिति को मीन लग्न के लिए बहुत शुभ माना जाता है। जातक अपने प्रयासों से खूब धन और लाभ कमाता है।

कुंडली का बारहवां भाव व्यय, विदेश यात्रा, मोक्ष और अस्पताल के खर्चों का भाव होता है। यदि, यहां शनि ग्रह अपनी स्वराशि मकर में इस भाव में स्थित होता है। तो, यह स्थिति विपरीत राजयोग का निर्माण कर सकती है यदि कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति अच्छी हो। तो, जातक को विदेश यात्रा से लाभ, आयात-निर्यात के व्यवसाय में सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान कर सकता है। हालांकि, यह खर्चे में वृद्धि करता है,  लेकिन, जातक को विदेशी भूमि से या अलगाव के क्षेत्रों (जैसे अस्पताल, जेल) से लाभ मिल सकता है।

मीन लग्न के लिए शनि के प्रभाव मिश्रित फलदायी होते हैं। क्योंकि ,शनि देव ग्यारहवें (लाभ) और बारहवें (व्यय) दोनों भावों का स्वामी है। सामान्य तौर पर, शनि को मीन लग्न के लिए एक अशुभ ग्रह माना जाता है, लेकिन उसकी स्थिति, अन्य ग्रहों के साथ युति और दृष्टि के आधार पर वह शुभ फल भी देते है। आइए जान लेते हैं मीन लग्न में शनि के शुभ\अशुभ प्रभाव के बारे में- 

  1. यदि शनि लग्न (प्रथम भाव) में हो, तो इससे जातक को शारीरिक कमजोरी, थकान और स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं होती हैं। साथ ही, विशेषकर जोड़ों या हड्डियों में दर्द की समस्याएं से जातक परेशान रहता है।
  2. ज्योतिष में, शनि देव को विलंब के कारक ग्रह माना जाता है। यानी, शनि जिस भाव में विराजमान होते हैं, या दृष्टि रखते हैं उससे संबंधित फलों में देरी करते हैं। जिससे जातक को, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में निराशा और हताशा महसूस होती है।
  3. इस लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव से जातक को पारिवारिक जीवन में सामंजस्य की कमी हो सकती है। जिससे व्यक्तिगत जरूरतों व पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है।
  4. शनि की प्रतिकूल स्थिति मानसिक तनाव, उदासी और अवसाद का कारण बन सकती है।
  5. बारहवें भाव के स्वामी होने के कारण शनि अनावश्यक खर्चों में वृद्धि करता है। और यदि कुंडली में बृहस्पति (लग्न का स्वामी) कमजोर हो, तो आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। 
  1. किसी लग्न में शनि ग्रह का शुभ प्रभाव जातक को अनुशासित और मेहनती बनाता है। जिससे जातक अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प और ईमानदार होता है।
  2. यदि शनि अच्छी स्थिति में (जैसे केंद्र या त्रिकोण में या उच्च राशि में) हो, तो यह आय में स्थिरता और निवेश के अच्छे अवसर प्रदान कर सकता है, विशेषकर दीर्घकालिक निवेश से लाभ होता है।
  3. शनि की शुभ स्थिति करियर में सफलता देने का कार्य करती है। ऐसे जातक को नौकरी या व्यवसाय में कड़ी मेहनत के बाद स्थायी सफलता मिलती है। साथ ही विदेश से जुड़े व्यापार या नौकरी में भी जातक के सफल होने के शुभ योग बनते हैं।
  4. मीन राशि जल तत्व की और आध्यात्मिक राशि है। इस लग्न में शनि का प्रभाव जातक को गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार वाला बनाता है, जिससे आत्म-शांति और ज्ञान में वृद्धि होती है।
  5. लग्नस्थ या मजबूत शनि जातक को शत्रुओं पर विजय पाने का कारक होता है। और समाज में मान- सम्मान और प्रतिष्ठा देता है। 
मीन लग्न में शनि ग्रह

ज्योतिष में, प्रत्येक लग्न के लिए शनि के अशुभ प्रभाव हेतु कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। तो चलिए जान लेते हैं, मीन लग्न के जातकों को शनि ग्रह के लिए क्या उपाय करना चाहिए-  

  • मीन लग्न के लिए प्रतिदिन 108 बार “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ है।
  • हनुमान चालीसा का पाठ करना शनि के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में बहुत प्रभावी माना जाता है।
  • हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पेड़ की 7 या 11 परिक्रमा भी करें।
  • शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें। साथ ही, निर्धन और जरूरतमंद को सरसों के तेल या काले तिल का दान करें। शनि देव सेवा और श्रम के कारक ग्रह हैं, इसलिए दूसरों की मदद करें और दयावान बनें।
  • शनिदेव के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए उनके गुरु भगवान शिव को जल अर्पित करें और पूजा करें। 
  • जीवन शैली को व्यवस्थित और व्यवहार नम्र रखें, अनैतिक कार्यों से बचें, क्योंकि शनि कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। मांसाहारी भोजन और शराब से बचें।
  • मीन राशि पैरों की राशि है। नियमित रूप से अपने पैरों पर तेल मालिश करने से भी शनि देव शांत होते हैं।
  • ध्यान, योग और साधना से आध्यात्मिक शांति और सफलता के मार्ग खुलते हैं। जो शनि के प्रभावों को संतुलित करने में मदद करती है।
  • किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह पर 14 मुखी रुद्राक्ष या 7 मुखी रुद्राक्ष धारण भी आप धारण कर सकते हैं।
  • ज्योतिष में, मीन लग्न के स्वामी गुरु बृहस्पति हैं, इसलिए गुरु के बीज मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” का जाप करना भी शनि के प्रभावों को कम करने में, मदद करता है। 

ऊपर लेख में दी गई जानकारी और हमारे ‘मंगल भवन के ज्योतिष आचार्यों’ के मतानुसार, मीन लग्न में शनि के प्रभाव मिश्रित रूप से फलदायी होते हैं। जिसमें वे उस भाव में स्थिति, क्षमता और कुंडली में बृहस्पति की स्थिति पर निर्भर करता है। उचित उपाय, संतुलित जीवन शैली और कड़ी मेहनत से जातक शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को कम कर जीवन में स्थिरता और सफलता का लाभ उठा सकते हैं।

Q.क्या, मीन लग्न के लिए शनि ग्रह शुभ प्रभावी हैं?

An. हां, मीन लग्न में शनि ग्रह लाभेश व द्वादशेश होने के कारण मिश्रित परिणाम देने वाले प्रभाव देते हैं। लेकिन, मीन लग्न के जातकों की कुंडली में यदि शनि ग्रह केन्द्र, त्रिकोण में या उच्च राशि में विराजमान हो तो, वे जातक के लिए शुभ फलदायी होते हैं।

Q. मीन लग्न के लिए शनि किस भाव में सबसे अधिक प्रभावी और शुभ परिणाम देते हैं?

An. कुंडली का ग्यारहवां भाव आय, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति और बड़े सामाजिक दायरे का भाव होता है। यदि, शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में इस भाव में स्थित होता है, जो यह बहुत ही लाभकारी स्थिति मानी गई।

Q. मीन लग्न में शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव क्या हैं?

An. ज्योतिष में, शनि देव को विलंब के कारक ग्रह माना जाता है। यानी, शनि जिस भाव में विराजमान होते हैं, या दृष्टि रखते हैं उससे संबंधित फलों में देरी करते हैं। जिससे जातक को, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में निराशा और हताशा महसूस होती है। इस लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव से जातक को पारिवारिक जीवन में सामंजस्य की कमी हो सकती है।

Q. क्या, मीन लग्न में शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए रुद्राक्ष पहनना चाहिए?

An. हां, मीन लग्न वाले योग्य ज्योतिषी की सलाह पर 14 मुखी रुद्राक्ष या 7 मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *