क्या आप जानते हैं, तुला लग्न में शनि ग्रह, लाभकारी और योग कारक होने के प्रभाव के बारे में!

तुला लग्न में शनि

ज्योतिष शास्त्र में, तुला लग्न के स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है। इस लग्न के जातकों में संतुलन की शक्ति असाधारण होती है। दूसरी ओर शनि को कर्मों के फल दाता की संज्ञा दी जाती है। शनि का प्रभाव जब तुला लग्न में होता है तो, यह किस प्रकार कारक होते हैं? तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको तुला लग्न में शनि ग्रह की योगकारक और लाभकारी युति के प्रभाव बताएंगे। आशा करते हैं हमारे लेख में दी गई जानकारी आप सभी पाठकों के लिए उपयोगी रहे। लेख पसंद आने पर हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

ज्योतिष शास्त्र में, तुला लग्न के लिए शनि की स्थिति को एक बहुत ही शुभ कारक स्थिति मानी जाती है। क्योंकि यह तुला लग्न की कुंडली में चौथे भाव (सुख और माता का घर) और पांचवें भाव (विद्या, संतान और प्रेम का घर) के स्वामी होते है। शनि ग्रह का इन भावों में योगकारक होना तुला लग्न के जातकों के लिए बहुत ही शुभ और लाभकारी होता है। इसके साथ ही, यह लग्न के स्वामी शुक्र के मित्र ग्रह भी हैं, जिससे इसके सकारात्मक प्रभाव और भी बढ़ जाते हैं। चलिए आगे लेख में हम और भी अधिक विस्तार से जानेंगे-

                                                                                  आगे पढ़ें-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तुला लग्न का स्वामी ग्रह शुक्र है। अतः इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक विलासी और ऐश्वर्यशाली जीवन जीने का शौकीन होते हैं। शारीरिक रूप रंग की बात करें तो, वे मध्यम कद, गौर वर्ण व सुन्दर आकर्षक चेहरा के लक्षणों से युक्त होते हैं। विशेष रूप से इस लग्न के जातकों में संतुलन शक्ति असाधारण होती है। जिससे कि वें, सामने वाले के बोलने से पहले ही उसके मन की बात को समझ लेते हैं। ऐसे जातकों में, तुरंत निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता होती है जिससे लोग इनके आगे आसानी से आकर्षित हो जाते है। इस लग्न के जातकों में एक कुशल व्यापारी के सभी गुण होते हैं।

तुला लग्न में जन्मे जातक के स्वभाव के बारे में बात करें तो, इस लग्न के जातक मुख्य रूप से विचारशील व ज्ञान प्रिय होते हैं। ऐसे जातकों का रूचि न्याय व अनुशासन के प्रति अधिक होती हैं। राजनीतिक क्षेत्र में ऐसे जातक अधिक सफलता से कार्य करते हैं। इन जातकों में परोपकार की भावना होती हैं, लेकिन साथ ही अपने हानि-लाभ का भी पूरा ध्यान रखते है। जरुरत मंदों की सेवा करने और गरीबों को भोजन देने वाले, अतिथि सेवी स्वभाव के धनी होते हैं। दूसरों के प्रति हमेशा आदर और प्रेम रखते हैं। उनका हृदय शीघ्र ही द्रवित हो जाता है तथा उन्हें सच्चे अर्थों में पुण्यात्मा और सत्यवादी की संज्ञा दी जा सकती है। चूंकि, शुक्र स्वामी ग्रह हैं इसलिए ये जातक बड़ी आयु में भी अधिक आकर्षक और जवान दिखते हैं।

हमारे ‘मंगल भवन’ के विद्वान आचार्यों  के अनुसार शनि देवता इस लग्न कुंडली में चौथे और पांचवे भाव के स्वामी हैं। यानी, एक केंद्र और एक त्रिकोण भाव स्वामी होने के कारण शनिदेव इस कुंडली के सबसे योगकारक ग्रह माने जाएंगे। लेकिन, कुंडली के अन्य भाव पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में शनि देव की स्थिति और प्रभाव उनकी दशा-अंतर्दशा में अपनी क्षमतानुसार और अन्य ग्रहों की युति के प्रभाव से शुभ व अशुभ फलदायी होंगे। इसके अलावा, यदि शनि तीसरे, छठे, सातवें (नीच-राशि), आठवें और बारहवें भाव में उदय अवस्था में हैं तो, वह अपनी शुभता को खो देते हैं और अशुभ फल देते है। आगे लेख में हम तुला लग्न में शनि के शुभ और अशुभ प्रभाव के बारे में जानेंगे-

  1. यदि शनि लग्न में ही स्थित हो और उच्च का हो तो वह जातक को धैर्य और अनुशासन के साथ कड़ी मेहनत करने की श्रेष्ठ क्षमता देने वाला कारक होता है। ऐसे जातक, करियर और व्यवसाय में बहुत सफलता व लाभ पाते हैं।
  2. लग्न में शनि के शुभ प्रभाव से जातक को पैतृक संपत्ति, भूमि, और वाहन सुख जैसे संपत्ति व समृद्धि का लाभ मिलता है।
  3. सभी ग्रहों में शनि न्याय के कारक ग्रह है और तुला राशि न्याय और संतुलन का प्रतिनिधित्व करती है। यानी इस लग्न में जातक को, एक न्यायप्रिय और निष्पक्ष व्यक्तित्व का शुभ प्रभाव मिलता है।
  4. तुला राशि पर शुक्र का स्वामित्व होता है। जिससे शनि और शुक्र के प्रभाव से जातक सौंदर्य की गहरी समझ और तर्क सांगत होता है। वे वास्तुकला, कला, फैशन, या संगीत जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं।
  5. तुला लग्न में शनि व शुक्र की यह स्थिति जातक को अनुशासित और जिम्मेदार बनाती है। जिससे वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध रहता है।
  1. वैसे तो शनि शुभ फल कारक होते हैं। लेकिन, वह अपनी प्रकृति और स्वभाव के अनुसार जातक को कुछ समस्याएं भी देते हैं। शनि के अशुभ प्रभाव हो तो ऐसे जातक के जीवन में देरी, संघर्ष और कड़ी मेहनत जैसी समस्याएं आती हैं।
  2. कुंडली में लग्न के अशुभ शनि के प्रभाव से कभी-कभी जातक में अत्यधिक आत्मविश्वास या अभिमान के भाव आ जाते हैं, जो उनके विकास और सफलता में बाधक होते है।
  3. अशुभ शनि के प्रभाव में जातक कुछ मामलों में एकांत को पसंद करने वाला या सबसे अलग-थलग रहने वाले स्वभाव का बन जाता है।
  4. अगर शनि कुंडली में अशुभ भावों (जैसे कि छठे या आठवें भाव) में स्थित हो, तो उसके शुभ फलों को कम करते हैं। यदि लग्न में शनि छठे भाव में हो तो, जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अधिक मेहनत का सामना करना पड़ सकता है।

ज्योतिष शास्त्र की गणना में, यदि शनि अपनी उच्च राशि तुला में, या अपनी स्वराशि मकर या कुंभ में, कुंडली के केंद्र यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें) भाव में स्थित हो तो यह शुभ योग ‘शश योग’ बनता है। जिसके प्रभाव में जातक को हर क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलती है।

यह शुभ योग कुंडली में तब बनता है, जब केंद्र और त्रिकोण के स्वामी एक साथ होते हैं। यानी तुला लग्न में, शनि चौथे और पांचवें भाव का स्वामी होने के कारण स्वयं योगकारक स्थिति बनाते है। यह अकेला ही राजयोग बनाने में सक्षम है। जिसके शुभ प्रभाव में जातक को सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं का सुख मिलता है।

Saturn in Libra ascendant

उपरोक्त, सभी स्थितियों के अनुरूप हमने जाना, की तुला लग्न के लिए शनि ग्रह की स्थिति योगकारक होती है। लेकिन उनकी स्थिति के अनुसार यदि कोई अशुभ प्रभाव जीवन में आपको शनि से प्राप्त हो रहें हैं तो, उनके लिए उचित उपाय जरुर करने चाहिए। तुला लग्न के लिए ये उपाय इस प्रकार हैं- 

  1. आप हर शनिवार या संभव हो तो हर दिन, शनि मंत्र का जाप, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। जिससे शनि के अशुभ प्रभाव शत होते हैं। 
  2. शनिवार के दिन काली वस्तुओं का दान करना, शनि देव की पूजा करने से भी शनी के दोष से मुक्ति मिलती है। 
  3. तुला लग्न के जातकों को, महाकाल शिव की आराधना करना चाहिए। साथ ही शनि देव को प्रसन्न करने के लिए दान और जरुरत मंदों की सेवा सम्बन्धी कार्य भी किए जा सकते हैं।
  4. हमेशा जीवन में ध्यान और संयम बनाए रखने का अभ्यास करने से भी लाभ मिलता है। इसलिए हमेशा मन को स्थिर और शांत रखने का अभ्यास करें।
  5. शनि के अशुभ प्रभाव के लिए हमारे ज्योतिष आचार्यों द्वारा ‘नीलम रत्न’ को बहुत ही लाभकारी रत्न बताया गया है। लेकिन तुला लग्न के लिए आप यह रत्न अनुभवी ज्योतिष द्वारा व कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार उनके उचित मार्गदर्शन से ही पहनें।

Q. क्या, तुला लग्न में शनि ग्रह का होना अच्छा नहीं है?

An. नहीं, तुला लग्न के लिए शनि की स्थिति को एक बहुत ही शुभ कारक स्थिति मानी जाती है। क्योंकि यह तुला लग्न की कुंडली में चौथे भाव (सुख और माता का घर) और पांचवें भाव (विद्या, संतान और प्रेम का घर) के स्वामी होते है।

Q. तुला लग्न में, शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव क्या है?

An. वैसे तो शनि शुभ फल कारक होते हैं। लेकिन, वह अपनी प्रकृति और स्वभाव के अनुसार जातक को कुछ समस्याएं भी देते हैं। शनि के अशुभ प्रभाव हो तो ऐसे जातक के जीवन में देरी, संघर्ष और कड़ी मेहनत जैसी समस्याएं आती हैं।

Q. तुला लग्न में शनि ग्रह के होने पर कौन से शुभ योग बनते हैं?

An. तुला लग्न में शनि के होने पर ‘शश योग’ व राजयोग जैसे शुभ योग बनते हैं। यह शुभ योग कुंडली में तब बनता है, जब केंद्र और त्रिकोण के स्वामी एक साथ होते हैं।

Q. तुला लग्न के जातकों को शनि के लिए क्या विशेष उपाय करना चाहिए?

An. तुला लग्न के जातकों को, महाकाल शिव की आराधना करना चाहिए। साथ ही शनि देव को प्रसन्न करने के लिए दान और जरुरत मंदों की सेवा सम्बन्धी कार्य भी किए जा सकते हैं।

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