मकर लग्न में शनि ग्रह, जान लो शुभ व अशुभ प्रभाव के साथ, विशेष प्रभाव और उपाय

मकर लग्न में शनि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न में शनि मुख्य रूप से शुभ प्रभाव ही देने वाले होते हैं।  क्योंकि यह लग्न (पहला) और दूसरे भाव (धन) का स्वामी है। कुंडली में, विशेष रूप से पहला भाव (लग्न), दूसरा भाव (धन), और पांचवां भाव (लाभ) में शनि के शुभ परिणाम मिलते हैं। इस प्रभाव में जातक अनुशासित, परिश्रमी, और भाग्यशाली होते हैं। इसके अलावा, कुंडली के छठे भाव, केंद्र भाव (पहला, चौथा, सातवां, दसवां) और त्रिकोण (नौवां) भाव में भी शनि ग्रह के शुभ प्रभाव मिलते हैं। तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम शनि ग्रह की शुभ व अशुभ स्थिति के बारे में, विस्तार से चर्चा करेंगे।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न के लिए शनि का प्रभाव कुंडली के पहले, दूसरे और छठे भाव में शुभ होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि, शनि मकर राशि के स्वामी ग्रह है। इसलिए, वह इस लग्न के लिए भी शुभ ग्रह की भूमिका निभाते हैं। इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक शारीरिक रूप से पतले, मध्यम कद, पैनी आंखें, नाक चपटी के और प्रायः श्याम वर्ण और फुर्तीले होते हैं। इनके शरीर के गठन व्यवस्थित नहीं होते हैं। यानी, इनके शरीर का कोई अंग कम या अधिक होता है। ऐसे जातक बहुत अधिक आकर्षक नहीं होते हैं।

अब हम इनके स्वभाव की बात करते हैं, स्वभाव से ये जातक प्रायः उग्र स्वभाव के होते हैं। ये जातक उत्साही प्रव्रत्ति के होते हैं, लेकिन, थोड़े गुस्से और झगडालू भी होती है। इनका क्रोध जितनी धीमी गति से आता है, उतने देर तक रहता है। लेकिन, उनकी यह विशेषता होती है कि, स्थितियों के अनुरूप अपने स्वभाव को ढाल लेते हैं। इसके साथ ही, इस लग्न के जातक बहुत ही उद्यमी और मेहनती भी होते हैं। कोई भी कार्य बड़ी ही निडरता के साथ करते हैं। हार मानकर निराश होना उन्हें नहीं आता। अपने  विचारशीलता, शांत और गंभीर स्वभाव से इस लग्न के जातक कर्मशील और समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले होते हैं। 

शनि ग्रह का प्रभाव मकर लग्न के लिए कुछ विशेष भावों में बहुत ही शुभ फलदायी होता है। आइए जान लेते हैं, ऐसे भाव जिनमें शनि ग्रह के शुभ प्रभाव हैं- 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न की कुंडली के पहले भाव में शनि का प्रभाव जातक के जीवन में अनुशासन, परिश्रम और गंभीरता लाने वाला होता है। इसके अलावा शनि के प्रभाव में से ये जातक दीर्घायु, धनवान और सफल होते हैं। इस भाव में, शनि के साथ यदि अन्य ग्रहों की युति के कारण विवाह में देरी और वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ सकती हैं। शनि की स्थिति के कारण करियर में सफलता  मिलने में भी देरी का सामना करना पड़ सकता है।  इस लग्न के जातक को मान-सम्मान की प्राप्ति उच्च पद या कोई सरकारी पद प्राप्त करते हैं।। 

शनि यदि मकर लग्न के दूसरे भाव में विराजमान हो तो, ऐसे जातक मेहनती, बुद्धिमान और अपार धन संपदा प्राप्त करने वाला होता है। व जीवन भर धनी रहता है। हालांकि, सफलता धन और पारिवारिक सुख प्राप्त होने में विलंब हो सकता है लेकिन, स्थाई रूप से प्राप्त होगा। मकर लग्न के पहले भाव में शनि की स्थिति जातक को आर्थिक मामलों के लिए गंभीर और जिम्मेदार बनाने का कार्य करती है। ऐसे जातक, अपनी कार्यशैली में, लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा और स्थाई सुख को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन, ये जो भी कार्य करते हैं, कड़ी मेहनत और लगन से ही लाभ को प्राप्त करते हैं। हालांकि, शनि की धीमी चाल के कारण, वित्तीय स्थिरता धीरे-धीरे आती है और जातक को, अपने संचित धन को सुरक्षित रखने के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास करना पड़ता है। 

शनि ग्रह यदि मकर लग्न की कुंडली के छठे भाव में विराजमान हो और शुभ ग्रहों की युति और प्रभाव में है तो, जातक साहसी, सतर्क और प्रभावशाली गुण वाले होते हैं। ऐसे जातक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं। इन जातकों को नौकरी, सरकारी मुकदमेबाजी और प्रतियोगिता सम्बन्धी कार्यों में सफलता मिलती है।  लेकिन, स्वास्थ्य और संबंधों में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। शनि की तीसरी दृष्टि दसवें भाव (करियर) पर पड़ने के कारण व्यक्ति कठोर परिश्रम से करियर में सफलता प्राप्त करता है। हालांकि, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है रिश्तों और संबंधों में, देरी का सामना करते हैं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न में शनि ग्रह के होने से जातक को शुभ प्रभाव में कठोर परिश्रम से सफलता, उच्च पद की प्राप्ति और शुभ योग, जैसे शश योग भी बनता है। यानी इस लग्न में शनि, जातक के करियर में देरी पर स्थाई धन और सफलता देने वाला होता है। लेकिन, जातक को अशुभ प्रभाव या अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव में, वैवाहिक जीवन में कठिनाइयाँ, स्वास्थ्य संबंधी समस्या और आर्थिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पद सकता है। हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों  के अनुसार, शनि लग्नेश होने के कारण अधिकतर शुभ फल ही देते हैं। खासकर जब वह शुभ भावों (जैसे केंद्र, त्रिकोण, लाभ भाव) में हो। हालाँकि, इसकी स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। मकर लग्न में शनि ग्रह उनके राशि स्वामी हैं। लेकिन अन्य ग्रहों की स्थिति और प्रभाव से इस लग्न में शनि के शुभ\अशुभ प्रभाव देखने को मिलते हैं- आइए जान लेते हैं मकर लग्न में शनि ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभाव के बारे में-

  1. शनि ग्रह मकर लग्न वालों को अधिक मेहनती और ईमानदार बनाता है। ऐसे जातक कड़ी मेहनत के बाद सफलता प्राप्त करते हैं।
  2. मकर लग्न में शनि ग्रह के होने से जातक को शुभ ‘शश योग’ के प्रभाव मिलते हैं। जिसके प्रभाव में जातक को करियर में उच्च पद प्राप्त होता है साथ ही, समाज में मान-सम्मान भी मिलता है।
  3. छठे भाव में शनि ग्रह के होने पर जातक रोग, ऋण और शत्रुओं के मामले में स्थिरता और विजय प्राप्त करता है।
  4. मकर लग्न में शनि के शुभ प्रभाव से जातक अपनी आयु के 30 वर्ष की आयु के बाद या विशेषकर 36 वर्ष के बाद तेजी से भाग्य का साथ और सफलता पाता है।
  5. यदि मकर लग्न में शनि, शुक्र के साथ प्रभाव में हो तो, जातक को व्यापार, कला और इंजीनियरिंग संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिलती है। 
  1. मकर लग्न में यदि शनि सातवीं दृष्टि से विराजमान हो तो, ऐसे जातक को जीवनसाथी के साथ गलतफहमियाँ, मनमुटाव या बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
  2. इस लग्न में, शनि के अशुभ प्रभाव से जातक को पेट, त्वचा और रक्त संबंधी रोग होने की संभावना हो सकती है।  इसलिए स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
  3. यदि लग्न में शनि अन्य ग्रहों के साथ अशुभ प्रभाव में हो तो, जातक को आर्थिक समस्याएं और फिजूल खर्चे से उधार या  कर्ज की समस्या आ सकती है।
  4. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की दसवीं दृष्टि विलंब की कारक होती है, जिससे जातक को करियर में देर से समझौता का सामना करना पड़ता है। हालांकि अंततः अच्छे परिणाम और सफलता भी मिलती है पर संघर्ष के बाद सफल होते हैं।
  5. इस लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव से जातक दिखावे और झूठी शान-शौकत पर व्यर्थ खर्च करते हैं जिससे धन संबंधी परेशानियां रहती हैं। 
मकर लग्न में शनि

ज्योतिष शास्त्र में, मकर राशि के लिए शनि ग्रह लग्न और दूसरे भाव के स्वामी हैं। जिसके कारण वे इस लग्न के लिए एक महत्वपूर्ण और शुभ ग्रह माने जाते हैं। फिर भी, किसी भी ग्रह को और भी अधिक अनुकूल बनाने के लिए या अशुभता को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। जिसके कारण जातक को हानि या नकारात्मक प्रभाव का सामना न करना पड़ें। मकर लग्न के लिए शनि के उपाय इस प्रकार हैं: 

  1. शनि ग्रह अनुशासन प्रिय ग्रह है, इसलिए जातक को शुभ प्रभाव के लिए आलस्य से बचना चाहिए। अपने काम और जीवन में अनुशासन का पालन करना चाहिए।
  2. शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें और शनि के बीज मंत्र का जाप करें। तिल और सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।
  3. शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। इसलिए सोमवार और शनिवार को भगवान शिव का अभिषेक करने से शनिदेव की कृपा मिलती है।
  4. शनिवार को गंगाजल और काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ पर अर्पित करें और परिक्रमा करें। या आपको नकारात्मक प्रभाव से दूर करेंगे। 
  5. हनुमान जी की पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनिदेव के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
  6. शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल, काले कपड़े, कंबल या लोहा जैसी वस्तुओं का दान करें।
  7. गरीबों, दिव्यांगों और कमजोर लोगों और जरूरतमंद की सहायता करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। उनकी सेवा करना शनि के लिए एक उत्तम उपाय है।
  8. शनि की शुभ प्रभाव के लिए पक्षियों, विशेषकर कौओं को खाना खिलाएं।

Q. मकर लग्न में शनि ग्रह का प्रभाव कैसा होता है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न में शनि मुख्य रूप से शुभ प्रभाव ही देने वाले होते हैं।  क्योंकि यह लग्न (पहला) और दूसरे भाव (धन) का स्वामी है। कुंडली में, विशेष रूप से पहला भाव (लग्न), दूसरा भाव (धन), और पांचवां भाव (लाभ) में शनि के शुभ परिणाम मिलते हैं।

Q. मकर लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव क्या होते हैं?

An. मकर लग्न में यदि शनि सातवीं दृष्टि से विराजमान हो तो, ऐसे जातक को जीवनसाथी के साथ गलतफहमियाँ, मनमुटाव या बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इस लग्न में, शनि के अशुभ प्रभाव से जातक को पेट, त्वचा और रक्त संबंधी रोग होने की संभावना हो सकती है।  इसलिए स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।

Q. मकर लग्न के लिए शनि के अशुभ प्रभाव को दूर किस प्रकार करें?

An. शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें और शनि के बीज मंत्र का जाप करें। तिल और सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं। शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। इसलिए सोमवार और शनिवार को भगवान शिव का अभिषेक करने से शनिदेव की कृपा मिलती है।

Q. मकर लग्न के लिए शनि देव के शुभ प्रकार क्या होते हैं?

An. मकर लग्न में शनि ग्रह के होने से जातक को शुभ ‘शश योग’ के प्रभाव मिलते हैं। जिसके प्रभाव में जातक को करियर में उच्च पद प्राप्त होता है साथ ही, समाज में मान-सम्मान भी मिलता है। छठे भाव में शनि ग्रह के होने पर जातक रोग, ऋण और शत्रुओं के मामले में स्थिरता और विजय प्राप्त करता है।

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