कर्क लग्न के लिए शनि ग्रह की ऐसी स्थिति, हो जाएँ सावधान और बिलकुल भी न करें ये कार्य !

कर्क लग्न में शनि ग्रह

ज्योतिष शास्त्र एक ऐसी इकाई है, जहां आपको अपने सभी सवालों का जवाब मिलता है। किस राशि में कौन से ग्रह का क्या प्रभाव होगा, ये जान सकते हैं। इतना ही नहीं, सही जानकारी के साथ अपने भावी जीवन की सफलता के लिए उपाय भी कर सकते हैं। हमारे ’मंगल भवन’ के पिछले लेख में हमने आपको वृषभ लग्न में शनि की स्थिति के बारे में बताया था। आज हम आपके लिए कर्क लग्न में शनि के प्रभाव और उपाय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आएं हैं। आशा करते हैं, लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी है। लेख पसंद आने पर हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। 

ज्योतिष गणना के अनुसार, कर्क लग्न के लिए शनि ग्रह की स्थिति शुभ नहीं मानी गई है। क्योंकि, यह एक मारक ग्रह (हानिकारक ग्रह) माना जाता है और साथ ही यह कुंडली के सातवें (विवाह और साझेदारी) और आठवें (आयु, रुकावटें और मृत्यु) भाव का स्वामी भी है। इसके अलावा, कर्क लग्न के स्वामी चंद्र ग्रह हैं और शनि और चन्द्र में शत्रु सम्बन्ध होते हैं। इसलिए शनि की दशा-अंतर्दशा में आमतौर पर यह अनुकूल स्थिति नहीं है। हालाँकि, कुंडली में शनि के साथ अन्य ग्रहों की स्थिति के प्रभाव अलग-अलग होते हैं। 

इसके अलावा , हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों  का यह भी कहना है कि, शनि, लग्नेश चन्द्रमा के शत्रु और अष्टमेश होने के कारण वह कुंडली के अतिमारक ग्रह माने जाते हैं। साथ ही, कुंडली के प्रत्येक भाव में न्याय के देवता शनि ग्रह अपनी स्थिति, दशा व अंतर्दशा में अपनी क्षमतानुसार शुभ या अशुभ फल देते हैं। परन्तु यदि शनि देवता छठे, आठवें और बारहवें भाव में विराजमान है तो, विपरीत राजयोग में आकर शुभ फल देने की क्षमता भी रखते हैं। लेकिन, इसके लिए लग्नेश चन्द्रमा का मजबूत या बलि होना और शुभ प्रभाव में होना जरूरी है। 

यदि किसी जातक का जन्म कर्क लग्न में हुआ है, तो ऐसे जातक गोरे वर्ण के होते हैं। साथ ही इनकी प्रव्रत्ति पित्त प्रकृति, जल क्रीड़ा के प्रेमी, अधिक मीठा खाने वाले और दूसरों से प्रेम भाव रखने वाले होते हैं। स्वभाव से ये जातक, उदार, विनम्र, बुद्धिमान, पवित्र, धर्मात्मा, कन्या- संततिवान, व्यवसायी, मित्रद्रोही, धनी, व्यसनी, शत्रुओं से पीड़ित, कुटिल, विपरीत  और अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का परिचय देने वाले होते हैं। ये जातक अक्सर अपने जन्म-स्थान को छोड़कर अन्य स्थान में निवास करने वाले होते हैं।  शारीरिक रूप से पतले होते हैं लेकिन, शक्तिशाली होते है।

ज्योतिष के नियमों के अनुसार ग्रहों के फल मुख्य रूप से भाव, राशि, ग्रह पर अन्य ग्रहों की दृष्टि, युति व स्थिति के आधार पर ज्ञात होता है। कुंडली में,  शनि विशेष रूप से तीसरे, छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव में शुभ फल देते है। इसके अलावा, शनि आयु भाव यानी आठवें भाव के कारक ग्रह है।  इस भाव में शनि सामान्यतः: अनुकूल माने गए हैं। लेकिन, अन्य शेष भावों में शनि के परिणाम शुभ नहीं होते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में शनि सप्तमेश होने से मारकेश भी होते हैं। तो, आइये जाने कुंडली के बारह भावों में शनि के कैसे प्रभाव है-

कुंडली के पहले भाव में शनि, जातक के  स्वास्थ्य पर प्रभाव होता है। साथ ही ऐसे जातकों को भाई -बहनों के सुख में कमी होती है। ऐसे जातक साहसी और आत्मविश्वासी होते हैं। ऐसे जातक को अपने जीवनसाथी से बहुत सुख प्राप्त होता है। जातक को आजीविका चलाने और आय प्राप्ति में समस्याएं आती हैं। हालाँकि, लाभ भी मिलता है। 

शनि का प्रभाव कर्क लग्न के दूसरे भाव में होने पर यह जातक को माता का पूर्ण सुख प्राप्त करने का सुख देता है। साथ ही, जमीन व भूमि से भी सुख प्राप्त और लाभ मिलता है। लेकिन, ऐसे जातक को अपने परिवार के सदस्यों से परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करने के कई अवसर व् योग बनते हैं। जिससे अधिक खर्च के कारण व्यय की अधिकता व धन संचय में कमी हो सकती है। वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कुंडली के, कर्क लग्न के शनि का तीसरे भाव में होना यह संकेत है कि, जातक का स्वभाव में क्रोधी है। शनि के प्रभाव से ऐसे जातक के पराक्रम में भी वृद्धि होती है। भाई-बहनों से संबंध मधुर नहीं होते हैं। ऐसे जातक को समय पर मित्रों का सहयोग भी नहीं मिलता है। शनि का तीसरे भाव में होना जातक की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। इसके फलस्वरूप उसके धन में कमी हो सकती है। व्यापारिक क्षेत्र में समस्याओं का सामना करना पद सकता है। ऐसे जातक नास्तिक विचार वाले होते हैं। 

शनि की स्थिति से जातक कर्क लग्न के चौथे भाव में अपनी माता के सुख से वंचित रहता है। या अपनी माता से विवाद पूर्ण संबंध हो सकते है। भूमि- भवन के मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। परन्तु, प्रयास करने से परिस्थितियां सामान्य हो जाएंगी। व्यापार में बाधाएं आने की संभावना रहती है। जातक को अपने शत्रुओं से कष्ट मिलता है। लेकिन, जातक यदि हिम्मत से काम लें तो शत्रुओं पर जीत हासिल कर सकता है। वैवाहिक जीवन में कलह पूर्ण स्थिति रहती है।

कुंडली के पांचवें भाव में कर्क लग्न में शनि जातक को प्रेम में असफलता देने के कारक होते हैं। कुंडली का पांचवां भाव शिक्षा का भाव भी है. इसलिये शिक्षा में भी शनि के प्रभाव से रुकावटें आने के योग बनते है। लेकिन, जातक यदि उच्च मनोबल को महत्व दे तो, वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है। जातक के धन संचय में भी कमी के योग बनते हैं। क्योंकि, आजिविका का क्षेत्र प्रभावित होता है, पर आय सामान्य रहती है।

कुंडली के छठे भाव में कर्क लग्न, में शनि जातक को आजीविका के लिए शुभ प्रभाव देने वाला होता है। इस योग के फलस्वरूप जातक को नौकरी करने की अच्छी संभावनाएं और अवसर मिलते हैं। जातक के वैवाहिक जीवन में मतभेद हो सकते है। विदेश में व्यापार से लाभ प्राप्त हो सकता है। खर्च अधिक होंगे। छठे भाव में शनि से प्रभावित जातक अपने सही पुरुषार्थ व बुद्धि से लाभ और सफलता प्राप्त करता है। 

कुंडली में, कर्क लग्न के सातवें भाव में शनि की स्थिति से जातक को व्यापार में अच्छा लाभ और सफलता मिलती है। लेकिन, घर-परिवार के सुख में कुछ कमी हो सकती है। धन की कमी को जातक अपनी मेहनत के बल से पूर्ण कर सकता है। 

कुंडली के आठवें भाव में शनि की स्थिति से कर्क लग्न के जातक को दीर्घायु का वरदान मिलता है। साथ ही, ऐसे जातक के जीवन साथी के स्वास्थ्य में समस्या हो सकती है। जमीन, भूमि संबंधी कार्यों में परेशानियां हो सकती है। पिता और सरकारी क्षेत्र से भी कष्ट प्राप्त हो सकते है। विधा व संतान सम्बन्धी पक्ष में समस्या आ सकती है।

कुंडली के नौवें भाव में शनि की स्थिति से कर्क लग्न के जातक को, आमदनी या आय के अच्छे स्रोत प्राप्त होते हैं। शत्रु पर जीत हासिल करते हैं। जीवन साथी का सुख प्राप्त होता है। ऐसे जातक को व्यापार से लाभ प्राप्त होता है। स्वास्थ्य मध्यम रहने की संभावना है। परिवार में भाई- बहनों का सहयोग कम ही मिलता है।

दसवें भाव में शनि का प्रभाव कर्क लग्न में  जातक के लिए पिता के सुख और सहयोग में कमी को दर्शाता है। जातक को सरकारी कार्यों में परेशानियां आ सकती है। पारिवारिक कलेश रहते हैं और गृहस्थ जीवन सुखी नहीं होता है। स्वास्थ्य सामान्यतः ठीक नहीं रहता है। व्यावसायिक क्षेत्र से आमदनी और लाभ अच्छा मिलता है। 

शनि का प्रभाव कर्क लग्न में ग्यारहवें भाव में जातक के स्वास्थ्य में कमी को दर्शाता है। शिक्षा के क्षेत्र में रुकावट या समस्याएं आती हैं। वैसे तो जातक की बुद्धिमत्ता में वृद्धि होने का भी संकेत है। जिससे जातक अपने परिश्रम व चतुराई से आय में वृद्धि और सफलता प्राप्त करता है। 

कर्क लग्न में शनि ग्रह

बारहवें भाव में शनि कर्क लग्न के जातकों के लिए आमदनी से अधिक खर्च देने वाला होता है। ऐसे जातक हमेशा किसी न किसी समस्या में उलझे रहते हैं। जीवन साथी के सुख से भी वंचित रहते हैं। परिवार के सदस्यों से सहयोग व सुख में कमी रहती है। 

  1. कर्क लग्न के जातकों को शनि देव के मूल मंत्र “ओम शं शनैश्चराय नमः” और “ओम नमः शिवाय” का नियमित जाप करना चाहिए। साथ ही शनिवार का व्रत भी करें। 
  2. शनिवार के दिन, जरूरतमंदों को काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और भोजन का दान जरूर करें।  इससे शनि देव की कृपा होती है।
  3. हनुमान जी की पूजा करने से शनि के नकारात्मक प्रभावों को दूर किया जा सकता है।आप हनुमान चालीसा का पाठ नियमित रूप से कर सकते हैं। 
  4. शनि की स्थिति और शुभ-अशुभ प्रभाव के लिए ज्योतिष मर्दर्शन से अपनी कुंडली का विश्लेषण कराएं और उपाय करें।
  5. वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में समस्या हो तो, समझदारी और सतर्क रहने की कोशिश करें।
  1. कर्क लग्न के जातकों को शनि के लिए नीलम रत्न बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए। इसकी बजाय आप शनि सम्बन्धी दान और मंत्र का पाठ कर के शनि की अशुभता को दूर कर सकते हैं।

Q. कर्क लग्न में शनि के शुभ प्रभाव कैसे होते हैं?

An. कर्क लग्न में, यदि शनि देवता छठे, आठवें और बारहवें भाव में विराजमान है तो, विपरीत राजयोग में आकर शुभ फल देने की क्षमता भी रखते हैं। लेकिन, इसके लिए लग्नेश चन्द्रमा का मजबूत या बलि होना और शुभ प्रभाव में होना जरूरी है।

Q. क्या, कर्क लग्न में शनि ग्रह का होना अशुभ होता है?

An.हां, कर्क लग्न के लिए शनि ग्रह की स्थिति शुभ नहीं मानी गई है। क्योंकि, यह एक मारक ग्रह (हानिकारक ग्रह) माना जाता है और साथ ही यह कुंडली के सातवें (विवाह और साझेदारी) और आठवें (आयु, रुकावट और मृत्यु) भाव का स्वामी भी है।

Q. कर्क लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव में जातक को क्या नहीं करना चाहिए?

An. कर्क लग्न के जातकों को शनि के लिए नीलम रत्न बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए। इसकी बजाय आप शनि सम्बन्धी दान और मंत्र का पाठ कर के शनि की अशुभता को दूर कर सकते हैं।

Q. कर्क लग्न में शनि के कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?

An. कर्क लग्न के जातकों को शनि देव के मूल मंत्र “ओम शं शनैश्चराय नमः” और “ओम नमः शिवाय” का नियमित जाप करना चाहिए। साथ ही शनिवार का व्रत भी करें।

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