वृषभ लग्न में राहु ग्रह, इन भावों में अनुकूल प्रभाव व अशुभ प्रभाव होने पर हो सकता है, भारी नुकसान!

वृषभ लग्न में राहु ग्रह

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राहु ग्रह एक छाया ग्रह है, जो कि,अशुभ प्रभाव के लिए जाना जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं है ज्योतिष शास्त्र में, राहु ग्रह के बारें में कहा गया है कि, यह जब देता है तो, छप्पर फाड़ कर देता है। कुंडली के शुभ भाव में राहु ग्रह अपने मित्र ग्रह की राशि में हो ओ यह जातक को विशेष रूप से शुभ फल ही देते हैं। क्योंकि, राहु ग्रह की कोई अपनी राशि नहीं होती है। तो आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख   में हम आपके लिए वृषभ लग्न में राहु ग्रह के शुभ भाव और प्रभाव की जानकारी लेकर आए हैं- सम्पूर्ण जानकारी के लिए लेख को पूरा पढ़ें और हमें अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें-

ज्योतिष में राहु ग्रह के सामर्थ्य का बहुत ही विशेष वर्णन किया गया है। यह एक अशुभ ग्रह, तो कहा जा सकता है लेकिन इसके प्रभाव बहुत ही चमत्कारी है। वृषभ लग्न की कुण्डली में राहु ग्रह विशेष रूप से  पहले, दूसरे, पांचवें, नौवें, दसवें भाव में शुभ फल देते हैं। क्योंकि यह उनकी मित्र की राशि में होते हैं। लेकिन, तीसरे, चौथे, छठे, सातवें, आठवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में राहु अशुभ फल देते हैं। क्योंकि यह उनकी शत्रु की राशि में होते हैं। इसके अलावा, सातवें और आठवें भाव में राहु ग्रह नीच राशि में होते हैं। इसलिए परिणाम मिश्रित होते हैं।

इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक के वर्ण गेहुंआ होता है। वह स्त्रियों जैसे स्वभाव वाला शौकीन तबीयत का, मधुर वाणी, रजोगुणी, लम्बे दांत तथा कुंचित केशों वाला, श्रेष्ठ संगति में बैठने वाला, ऐश्वर्यशाली, उदार स्वभाव के होते हैं। साथ ही ऐसे जातक भगवान के भक्त, गुणवान, बुद्धिमान, धैर्यवान, शुर- वीर , साहसी, अत्यंत यशस्वी, अत्यंत शांत प्रकृति का, परन्तु अवसर पड़ने पर युद्ध करने में अपने प्रबल पराक्रम को प्रकट करने वाले होते हैं। लेकिन, कभी-कभी इन जातकों में, अपने परिवार वालों से अनाहत, कलहयुक्त, शास्त्र से अभिज्ञात, मानसिक रोग अथवा चिंताओं से पीड़ित या दुखी रहने वाला, मित्र- वियोगी भी देखा जा सकता है। 

वृषभ लग्न की कुंडली के ऐसे कुछ विशेष भाव होते हैं जहां, राहु ग्रह के शुभ फल मिलते हैं। तो आइए जान लेते हैं, इन विशेष भावों के बारे में- 

राहु यदि वृषभ लग्न के पहले भाव में हैं तो, ऐसे जातक का व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है। वह अपनी एक अलग पहचान बनाने में सक्षम होता है। ऐसे जातक दिखावे से दूर रहते हैं और अपरंपरागत रूप से खुद को दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। जातक में भौतिक सुख-सुविधाओं, धन, और विलासितापूर्ण जीवन की तीव्र लालसा होती है। वह महत्वाकांक्षी होता है और जीवन में शून्य से शिखर तक का सफर तय करने की क्षमता रखता है। इस स्थिति के कारण जातक में कभी-कभी स्वार्थ, लालच, और आत्मकेंद्रित होने की प्रवृत्ति देखी जा सकती है। ऐसे जातक को राजनीति या व्यवसाय के क्षेत्र में, अच्छी सफलता मिल सकती है। इन जातकों के मित्र प्रभावशाली, राजनेता या व्यवसायियों में से होते हैं। 

वृषभ लग्न की कुंडली के दूसरे भाव (जहाँ राहु उच्च का माना जाता है) में राहु ग्रह का प्रभाव जातक के लिए अत्यधिक धन लाभ, भौतिक सुख-सुविधाओं की लालसा और वाणी में मधुरता देने वाले होते हैं। ऐसे जातक को धन कमाने की तीव्र इच्छा होती है और वह इस दिशा में कड़ी मेहनत करता है। साथ ही, आय के गुप्त या अपरंपरागत स्रोत हो सकते हैं। विशेष रूप से विदेशी स्रोतों या गैर-पारंपरिक तरीकों से अचानक धन लाभ की संभावना रहती है। ऐसे जातक संपत्ति के लालची होते हैं। जातक की वाणी प्रभावशाली और गणनात्मक हो सकती है। वह अपनी बातों से दूसरों को आकर्षित करने में सक्षम होता है। हालांकि, कभी-कभी वाणी कठोर या भ्रमित करने वाली भी हो सकती है।

वृषभ लग्न की कुंडली के पांचवे भाव (जो कि कन्या राशि है) में राहु ग्रह का प्रभाव जातक की बुद्धि, शिक्षा, संतान और प्रेम संबंधों पर पड़ता है। इस भाव में राहु ग्रह की यह स्थिति जातक को मिश्रित परिणाम देती है।

 लेकिन जातक की रचनात्मकता और सोच-विचार की क्षमता बहुत तीव्र और कुशल होती है। जिससे वह लीक से हटकर सोचने में सक्षम होता है।

वृषभ लग्न की कुंडली के नौवें भाव (जो कि मकर राशि है, जिसका स्वामी शनि है और शनि राहु का मित्र ग्रह है) में राहु ग्रह का प्रभाव जातक के लिए भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और विदेश यात्रा के मामलों में विशेष परिणाम देता है। यह स्थिति जातक के लिए अत्यंत भाग्यशाली हो सकती है। राहु यहां अपार धन और वित्तीय लाभ प्रदान कर सकता है। विशेष रूप से विदेशी स्रोतों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, या गुप्त/अपरंपरागत तरीकों से अचानक लाभ की संभावना रहती है। ऐसे जातक अपने स्वयं के धर्म में शंका कर सकता है जब तक कि उसे स्वयं उस पर विश्वास न हो जाए। वह गहन अध्ययन या खोज के माध्यम से एक अद्वितीय दार्शनिक या आध्यात्मिक मार्ग अपना सकता है। राहु ग्रह की यह स्थिति जातक के लिए विदेश यात्रा के लिए प्रबल योग बनाती है,ऐसे लोगों का भाग्योदय अक्सर विदेश जाकर होता है। 

इस भाव में राहु करियर में सफलता, समाज में मान-प्रतिष्ठा और राजयोग जैसे शुभ परिणाम देता है। यह जातक को कर्मठ बनाता है और अच्छी स्थिति में होने पर श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है। वृषभ लग्न की कुंडली के दसवें भाव (जो कि कुंभ राशि है, जिसका स्वामी शनि है) में राहु ग्रह के प्रभाव से जातक क्रांतिकारी, आदर्शवादी और कभी-कभी अपरंपरागत होते हैं। ऐसे जातक अत्यधिक महत्वाकांक्षी होता है और अपने पेशेवर जीवन में उच्च पद प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित होता है। वह सफलता पाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। इस स्थिति में जातक को नाम और प्रसिद्धि मिलती है, ऐसे जातक दूसरों के बीच लोकप्रिय होता है। हालांकि, प्रसिद्धि पाने के लिए अतिरिक्त प्रयास और मेहनत भी करनी पड़ती है।

कुंडली का यह भाव आय और लाभ का भाव होता है। यहाँ राहु आर्थिक विकास और सफलता में वृद्धि करने वाला होता है। ऐसे जातक को कई स्रोतों से धन और लाभ कमाने के अवसर मिलते हैं। वृषभ लग्न की कुंडली के ग्यारहवें भाव (जो कि मीन राशि है और इसका स्वामी बृहस्पति है) में राहु ग्रह का होना अत्यंत शुभ और धन दायक माना जाता है। इसके अलावा ग्यारहवां भाव लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति, मित्र मंडली और सामाजिक प्रतिष्ठा का होता है, और राहु इस भाव में इन सभी चीजों को कई गुना बढ़ा देता है। यह स्थिति व्यक्ति को जीवन में भारी मात्रा में धन और लाभ देती है। ऐसे जातक को अचानक व अप्रत्याशित रूप से बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है, जैसे कि सट्टा, शेयर बाजार या विरासत से। कुंडली का ग्यारहवां भाव ‘काम’ (इच्छाओं) का सर्वोच्च भाव होता है। यहां राहु के होने से जातक की अधिकांश भौतिक इच्छाएं, मनोकामना   और सपने साकार होते हैं। 

ज्योतिष में किसी भी लग्न कुंडली में ग्रहों के प्रभाव उस भाव और अन्य ग्रहों के साथ युति पर भी निर्भर करता है। वृषभ लग्न में राहु का प्रभाव उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। इतना ही नहीं, ये प्रभाव शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं। तो चलिए जान लेते हैं, वृषभ लग्न में, राहु ग्रह के शुभ और शुभ प्रभाव के बारे में- 

  1. राहु के शुभ प्रभाव में जातक शारीरिक रूप से बलशाली, आध्यात्मिक झुकाव, गुप्त विद्याओं में रुचि, और गुप्त तरीकों से धन लाभ प्राप्त करता है। 
  2. यह जातक को गुप्त विद्याओं और रहस्यमय विषयों की ओर आकर्षित करता है। 
  3. ऐसे जातक को, विरासत या अप्रत्याशित तरीकों से धन लाभ हो सकता है।
  4. ग्रह राहु प्रभाव के कारण जातक के व्यक्तित्व में बहुत परिवर्तन होता है और अभिव्यक्ति की श्रेष्ठ कुशलता भी आती है।
  5. राहु की महादशा में और कुंडली के तीसरे भाव में होने पर, यह जातक को उद्यमिता और व्यवसाय में सफलता देने वाला होता है। 
वृषभ लग्न में राहु ग्रह
  1. लग्न में राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को मानसिक तनाव, पारिवारिक परेशानियां, स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे पैरों से संबंधित), और आय से अधिक खर्च आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  2. यदि लग्न कुंडली के बारहवें भाव में राहु की स्थिति हो तो ऐसे जातक के फिजूल खर्च बहुत होते हैं। 
  3. ऐसे जातकों को शत्रुओं से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  4. ऐसे राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को रोजगार और व्यापार में अस्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

वृषभ लग्न के लिए राहु के शुभ प्रभाव हेतु ये सरल उपाय बताए गए हैं- जो इस प्रकार हैं… 

  1. राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए, भगवान शिव और काल भैरव की उपासना करें।
  2. राहु ग्रह के बीज मंत्र “ॐ रां राहवे नमः” राहु मंत्र का जाप करें।
  3. शनिवार को गरीबों को भोजन कराएं। और जरूरतमंदों या मंदिरों में गुड़, तांबे की वस्तुएं और भोजन दान करें।
  4. आवारा जानवरों और मवेशियों को खाना खिलाएं।
  5. मछलियों को दाना डालें।
  6. बहते जल में नारियल को प्रवाहित करें।
  7. अपने स्वास्थ्य और रिश्तों पर ध्यान दें, तनाव से दूर रहें और सकारात्मक सोच रखें।
  8. अपने खर्चों को नियंत्रित रखें एक बजट के अनुसार खर्च करें। 

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों   के अनुसार, वृषभ लग्न में राहु ग्रह का प्रभाव मिश्रित फलदायी होता है होता है। यह जातक के लिए शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से फल कारक होता है। इसके अलावा, यह कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और भाव के आधार पर भी जातक के जीवन को प्रभावित करता है। वैसे तो कोई भी रत्न बिना किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए, इसलिए राहु ग्रह के लिए भी कोई रत्न आपको बिना ज्योतिष परामर्श के नहीं पहनना चाहिए।

Q. क्या वृषभ लग्न के लिए राहु ग्रह अशुभ फलदायी हैं?

An.  नहीं, वृषभ लग्न में राहु ग्रह का प्रभाव मिश्रित फलदायी होता है होता है। यह जातक के लिए शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से फल कारक होता है। इसके अलावा, यह कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और भाव के आधार पर भी जातक के जीवन को प्रभावित करता है।

Q. वृषभ लग्न की कुंडली में राहु ग्रह से प्रभावित कौन-कौन से भाव शुभ फलदायी हैं?

An. वृषभ लग्न की कुण्डली में राहु ग्रह विशेष रूप से  पहले, दूसरे, पांचवें, नौवें, दसवें भाव में शुभ फल देते हैं। क्योंकि यह उनकी मित्र की राशि में होते हैं। लेकिन, तीसरे, चौथे, छठे, सातवें, आठवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में राहु अशुभ फल देते हैं। क्योंकि यह उनकी शत्रु की राशि में होते हैं।

Q. वृषभ लग्न में राहु ग्रह के शुभ फलादेश बताओ

An. वृषभ लग्न में, राहु के शुभ प्रभाव में जातक शारीरिक रूप से बलशाली, आध्यात्मिक झुकाव, गुप्त विद्याओं में रुचि, और गुप्त तरीकों से धन लाभ प्राप्त करता है। यह जातक को गुप्त विद्याओं और रहस्यमय विषयों की ओर आकर्षित करता है।

Q. वृषभ लग्न में में राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. लग्न में राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को मानसिक तनाव, पारिवारिक परेशानियां, स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे पैरों से संबंधित), और आय से अधिक खर्च आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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