कर्क लग्न में राहु ग्रह के कुछ अचूक उपाय, लग्न कुंडली में, शुभ या अशुभ प्रभाव के साथ जानें महत्वपूर्ण फलादेश भी !

कर्क लग्न में राहु ग्रह

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वैदिक ज्योतिष में, कर्क लग्न में राहु का फल विशेष शुभ नहीं है। क्योंकि, कर्क लग्न में चन्द्रमा स्वामी ग्रह हैं, और चंद्र देव राहु ग्रह के शत्रु हैं, इसलिए अशुभ प्रभाव देते हैं। यह लग्न कुंडली में जातक के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन, यहां अन्य ग्रहों के साथ राहु की युति और भाव के अनुसार फलादेश भी अलग-अलग होते हैं।

 तो चलिए, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में  हम आपको कर्क लग्न में राहु ग्रह के  शुभ और अशुभ प्रभाव के साथ कुछ आसान और अचूक उपाय की के बारे विस्तार से जानकारी देंगे। हमारे साथ लेख में बने रहें, और लेख में दी गई जानकारी के लिए हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें- 

कर्क लग्न में जन्म लेने वाले जातक का रंग गोरा होता है।  वह पित्त प्रकृति वाला, जल क्रीड़ा का प्रेमी, मिष्ठान्नभोजी, भले लोगों से स्नेह करने वाला, उदार, विनम्र, बुद्धिमान, पवित्र विचार वाले स्वभाव का होता है। लेकिन, क्षमाशील , धर्मात्मा,बड़ा ढीठ, कन्या- संततिवान, व्यवसायी, मित्रद्रोही, धनी, व्यसनी, शत्रुओं से पीड़ित, स्वभाव से कुटिल, कभी कभी विपरीत- बुद्धि का परिचय देने वाला, अपने जन्म-स्थान को छोड़कर अन्य स्थान में निवास करने वाला और पतले, परन्तु बलशाली आभा से युक्त होता है। 

राहु ग्रह को ज्योतिष में छाया ग्रह माना जाता है। जो अपने नाम के अनुसार ही, भ्रम की स्थिति देने का कार्य करता है। इतना ही नहीं, यह धन-दौलत देने वाला ग्रह भी माना गया है। जिसके यदि शुभ प्रभाव हो जाएं तो,  जातक रंक  से रजा बन जाता है। लेकिन, यह भी सत्य है कि, राहुकाल ग्रह जो भी देता है स्थाई नहीं होता है। राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं है, यह अपने मित्र ग्रह या शत्रु ग्रह के अनुसार, अन्य ग्रहों की युति के अनुसार या कुंडली में भाव के अनुसार शुभ या अशुभ प्रभाव देते हैं। 

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अब बात करते हैं, कर्क लग्न की, ज्योतिष में कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है, जो, एक जलीय, चलायमान या अस्थिर राशि भी है। इस राशि के मुख्य गुण हैं कि, स्त्री-प्रवृति, लाभदायक व भावुक राशि मानी गई है। इस लग्न में जन्मे जातक प्रेम-विलासी और कल्पनाशील होते हैं। कर्क लग्न के जातक में अत्यधिक भावुकता का गुण तो होता है, लेकिन न्यायप्रिय भी होते हैं। ये सदैव, दूसरों के प्रति दया व प्रेम की भावना रखने वाले होते हैं। इसके साथ ही, वे अपने जीवन में अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निरंतर आगे बढ़ने की तीव्र लालसा रखने वाले होते हैं। मानसिक रूप से ये जातक बहुत तीव्र और मजबूत होते हैं। हमेशा सच का साथ देने वाले और पवित्र हृदय वाले होते हैं।

हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों   की प्रमुख गणना के मुताबिक, कर्क लग्न में राहु के परिणाम  कुंडली में उसकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे लग्न कुंडली के पहले भाव में राहु ग्रह मानसिक रूप से अस्थिर और शारीरिक समस्याएं देने का कार्य करता है। उसी प्रकार कुंडली छठे भाव में राहु शत्रुओं पर विनाश  का कारण बनता है। लेकिन जातक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, कर्ज और मानसिक तनाव में रहता है। कुंडली के सातवें भाव में होने पर राहु ग्रह  स्त्री तथा व्यवसाय के मामलों में चिंता देने का कार्य करता है। दसवें भाव में, राहु की स्थिति जातक के लिए सफलता, धन और सामाजिक मान-सम्मान देने का कार्य करती है। लेकिन ऐसे जातक झूठ और चालाकी के बल पर कार्य निकलते हैं। 

ज्योतिष की दृष्टि से यह भी ज्ञात हुआ है कि, राहु ग्रह को कर्क लग्न में तृतीयेश का दायित्व मिलता है। जिसके परिणाम स्वरूप यह कर्क लग्न के जातकों के जीवन के नौकर चाकर, सहोदर, प्राकर्म, अभक्ष्य पदार्थों का सेवन, क्रोध, भ्रम लेखन, कंप्यूटर, अकाउंट, मोबाइल, पुरुषार्थ, साहस, शौर्य, खांसी, योग्याभ्यास, दासता इत्यादि क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।  लेकिन, जन्‍मकुंडली या राहु की दशा काल के समय यदि राहु ग्रह बलवान और शुभ प्रभाव में है तो, जातक को बताए गए क्षेत्रों में शुभ परिणाम मिलते हैं। और कमजोर या पीड़ित होने पर जातक को अशुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सभी ग्रहों को किसी न किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त होता है। लेकिन, राहु देवता एक ऐसे ग्रह हैं, जिन्हें किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। राहु ग्रह अक्सर अपने मित्र की राशि में शुभ भाव में विराजित होकर ही जातक के लिए शुभ प्रभावशाली होते हैं। कर्क लग्न की कुंडली में राहु ग्रह विशेष रूप से तीसरे, सातवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फलदायक होते हैं। पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, छठे, आठवें, नौवें, दसवें और बारहवें भाव में अशुभ होते है। ज्योतिष में, राहु ग्रह का रत्न गोमेद है, जिसे कभी किसी जातक को धारण तो नहीं करना चाहिए लेकिन, आप इस रत्न का दान करें राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं। चलिए अब हम राहु ग्रह के शुभ भाव और शुभ प्रभाव के बारे में जान लेते हैं- 

इसके अलावा जातक को अपने कर्मों को भी अच्छे  रखना चाहिए।

यही किसी जातक की लग्न कुंडली के तीसरे भाव में, राहु ग्रह की स्थिति है तो, ऐसे जातक की सोच तार्किक और वैज्ञानिक होती है। ऐसे जातक साहसी, पराक्रमी और महत्वाकांक्षी होते हैं। लेकिन, ज्योतिष के मुताबिक कर्क लग्न में राहु ग्रह की यह स्थिति आमतौर पर अच्छे व बुरे दोनों परिणाम देती है। ऐसे जातक में अद्भुत साहस और दृढ़ संकल्प वाले होते हैं। जिससे वह अपने शत्रुओं पर और किसी भी प्रतिस्पर्धियों पर जीतने के लिए सक्षम होते हैं। अपने असाधारण संचार कौशल के माध्यम से ऐसे जातक प्रभावी ढंग से अपनी बात रख पाते हैं। साथ ही वे मीडिया, मार्केटिंग या ऑनलाइन क्षेत्रों में सफल होते हैं। राहु की यह स्थिति जातक के करियर में तेजी से उन्नति और आर्थिक संपन्नता लाने की कारक होती है। विशेष रूप से नौकरीपेशा या राजनीति से जुड़े लोगों का करियर तेजी से आगे बढ़ता है। हालांकि, राहु ग्रह कुछ हद तक बेचैनी और निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति भी दे सकता है।

कर्क लग्न के सातवें भाव राहु ग्रह की स्थिति जातक के रिश्तों और वैवाहिक जीवन के अच्छी नहीं मानी जाती है। लेकिन, सातवें भाव में राहु का शुभ प्रभाव व अन्य शुभ ग्रहों के साथ प्रभाव से जातक करियर और व्यवसाय में बहुत सफल होता है। ऐसे जातक को विदेश में व्यवसाय से बहुत लाभ मिलता हैं। लेकिन, ऐसे जातक का जीवनसाथी किसी विदेशी संस्कृति का हो सकता है या उसकी पृष्ठभूमि सामान्य से अलग हो सकती है। ऐसे लोग बहुत महत्वाकांक्षी और स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं। राहु ग्रह के प्रभाव से ऐसे जातक अधिक भौतिक इच्छा करने वाली प्रवृत्ति के होते हैं जिसे पूरा करने के लिए वे हर संभव प्रयास करते हैं।

कर्क लग्न में राहु ग्रह

ज्योतिष शास्त्र की गणना में कर्क लग्न की कुंडली के ग्यारहवें भाव (लाभ भाव) में राहु ग्रह की स्थिति शुभ और लाभदायक मानी जाती है। कुंडली का ग्यारहवें भाव से जातक की आय के स्रोत, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति, मित्र और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा को ज्ञात किया जाता है। इस भाव में राहु ग्रह की स्थिति जातक को अनेक स्रोतों से धन और लाभ कमाने के अवसर प्रदान करती है। आय में अप्रत्याशित वृद्धि होती है। विशेषकर विदेशी स्रोतों से या उन क्षेत्रों से जो राहु  से संबंधित है-(जैसे प्रौद्योगिकी, मीडिया, या असामान्य व्यवसाय)। 

राहु यहाँ व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाता है और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे जातक अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम होते हैं। ऐसे जातक का सामाजिक दायरा बहुत विशाल होता है।  और इनकी मित्रता बहुत ही सम्मानित लोगों से होती है। जिनसे उन्हें लाभ होता है। उसकी मित्र मंडली में विभिन्न प्रकार के लोग और विदेशी भी, शामिल हो सकते हैं। व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। परिवार में, बड़े भाई-बहनों के साथ संबंध सामान्यतः अच्छे रहते हैं। 

राहु ग्रह के प्रभाव ग्रहों की स्थिति के आधार पर सकारात्मक और नकारात्मक हो सकते हैं। तो आगे लेख में कर्क लग्न ,में राहु ग्रह के शुभ या अशुभ प्रभाव के बारे में जानेंगे- 

  1. कर्क लग्न के लाभ भाव में राहु के शुभ प्रभाव से जातक को समाज में बहुत मान-प्रतिष्ठा मिलती है। लग्न कुंडली के इस भाव में राहु के प्रभाव से जातक को बड़े भाई-बहनों और विदेश में मित्र सम्बन्ध के माध्यम से लाभ मिलता है। ऐसे जातक की आर्थिक स्थिति विशेष रूप से अच्छी होती है।
  2. कुंडली के तीसरे, चौथे, सातवें और ग्यारहवें भाव में राहु के शुभ प्रभाव से जातक आत्म-खोज के माध्यम से व्यक्तिगत सफलता को प्राप्त करता है।
  3. राहु ग्रह के शुभ प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व साहसी और प्रभावशाली बनता है।  ऐसे जातक को भाग्य का साथ और आर्थिक रूप से स्थिरता मिलती है। 
  4. राहु ग्रह के शुभ प्रभाव से जातक को शत्रुओं पर हमेशा जीत मिलती है। 
  1. कुंडली में कर्क लग्न के पहले भाव में राहु के होने से जातक को मानसिक अशांति, भावनात्मक अस्थिरता, चिंता और भ्रम जेसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक अधिक कल्पनाशील होते है।
  2. राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को शारीरिक बीमारियों या विकलांगता की समस्या हो सकती है, जो अक्सर रहस्यमय और निदान करने में कठिन होती हैं।
  3. यदि कर्क लग्न की कुंडली में राहु या शनि दूसरे भाव में हों तो ऐसे जातक की भाषा बहुत कठोर होती है और साथ ही, दाँत संबंधी समस्याओं का सामना भी कर सकता है।
  4. यदि राहु की महादशा में, जातक की कुंडली में  अन्य पाप ग्रहों का प्रभाव हो तो बड़े भाई-बहनों के स्वास्थ्य या आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। 
  1. राहु ग्रह को शांत करने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  2. राहु के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ होता है।
  3. राहू के प्रभाव से भ्रम की स्थिति या मानसिक असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है तो, गायत्री मंत्र का जाप करें।  जो कि,  मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभदायक होता है। 
  4. शनिवार के दिन गरीबों को भोजन कराएं और काले तिल, कंबल या तेल दान करें।
  5. कोई भी बड़ा निर्णय या आर्थिक निर्णय लेते समय सावधानी बरतें क्योंकि राहु भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए कोई भी कार्य बहुत सोच-समझ कर करें। 
  6. मानसिक और शारीरिक रूप से स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, प्रतिदिन व्यायाम और ध्यान करें जिससे मन शांत रहता है।

Q. क्या, कर्क लग्न की कुंडली में राहु ग्रह शुभ फलदायी हैं?

An. नहीं, कर्क लग्न में राहु का फल विशेष शुभ नहीं है। क्योंकि, कर्क लग्न में चन्द्रमा स्वामी ग्रह हैं, और चंद्र देव राहु ग्रह के शत्रु हैं, इसलिए अशुभ प्रभाव देते हैं। यह लग्न कुंडली में जातक के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन, यहां अन्य ग्रहों के साथ राहु की युति और भाव के अनुसार फलादेश भी अलग-अलग होते हैं।

Q. कर्क लग्न कुंडली के कौन से भाव में राहु ग्रह के सबसे अधिक प्रभावशाली होते हैं?

An. कर्क लग्न की कुंडली के ग्यारहवें भाव में राहु ग्रह के प्रभाव सबसे अधिक शुभ होते हैं। क्योंकि, यह लाभ का भाव कहलाता है। कुंडली के ग्यारहवें भाव (लाभ भाव) में राहु ग्रह की स्थिति शुभ और लाभदायक मानी जाती है। जिससे जातक की आय के स्रोत, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति, मित्र और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा को ज्ञात किया जाता है।

Q. कर्क लग्न में राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. राहु के अशुभ प्रभाव से जातक को शारीरिक बीमारियों या विकलांगता की समस्या हो सकती है, जो अक्सर रहस्यमय और निदान करने में कठिन होती हैं। इसके अलावा, जातक को भरम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

Q. कर्क लग्न के जातकों को राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?

An. राहु ग्रह को शांत करने के लिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इसके अलावा आप हनुमान चालीसा का प्रतिदिन अध्ययन करें।

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