मेष लग्न में राहु ग्रह, कुंडली में जब राहु बलवान होगा तो आपको सब कुछ मिलेगा, जान लो यह स्थिति व उपाय

मेष लग्न में राहु ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को एक अशुभ छाया ग्रह का स्थान दिया गया है। इस ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं होती है। बल्कि, वे अपने मित्र ग्रह की राशि और कुंडली के शुभ भाव जैसे पहला, दूसरा, चौथा, पांचवा, सातवां, नौवां, और ग्यारहवां में होकर जातक को शुभ फल देते हैं। तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको मेष लग्न में राहु ग्रह से प्रभावित शुभ भाव की जानकारी देंगे। इसके साथ ही, राहु ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभाव व कुछ आसान उपाय की जानकारी भी दी गई है। विस्तृत जानकारी के लिए लेख को पूरा पढ़ें और हमें अपनी प्रतिक्रिया जरुर दें।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष लग्न की कुंडली के लिए राहु ग्रह यदि दूसरे, सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में हैं, तो वह शुभ प्रभाव देते हैं। क्योँकि ये उनकी मित्र राशि है पहले, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, आठवें, नौवें और बारहवें भाव में (नीच राशि) राहु देवता अशुभ फल देते हैं। 

मेष लग्न में जन्म लेने वाला जातक शारीरिक रूप से दुबले – पतले शरीर के, अधिक बोलने वाला, उग्र स्वभाव वाला, रजोगुणी, अहंकारी, चंचल, बुद्धिमान, धर्मात्मा, अत्यंत चतुर, अल्प संततिवान, अधिक पित्त वाला, सब प्रकार के भोजन करने वाले होते हैं। 

ऐसे जातक उदार, कुल दीपक तथा स्त्रियों से अल्प स्नेह अथवा द्वेष रखने वाला (जातक यदि स्त्री हो, तो पुरुषों से कम स्नेह अथवा द्वेष रखने वाली ) होता है। इसके शरीर का रंग कुछ लालिमा लिए होता है। मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपने जेवण के छठे, आठवें, पन्द्रहवें, इक्कीसवें, छतीसवें, चालीसवें, पैंतालीसवें,छप्पनवें तथा तिरेसठवें वर्ष में शारीरिक कष्ट और धन- हानि का सामना करना पड़ता है । और वे, अपनी आयु के सोलहवें , बीसवें, अठाईसवें , चौतीसवें, इकतालीसवें , अड़तासलीसवें तथा इक्यानवे वर्ष में धन की प्राप्ति , वाहन सुख , भाग्य वृद्धि और अन्य भौतिक सुख और लाभ का आनंद प्राप्त करते हैं।

  1. मेष लग्न के लिए राहु के प्रभाव से जातक अत्यधिक महत्वाकांक्षी बनता है। ऐसे जातक जोखिम लेने से नहीं डरते हैं। और वह अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं।
  2. राहु के शुभ प्रभाव से जातक साहसी और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले होते है, उसमें कुशल नेतृत्व के गुण होते हैं।
  3. मेष लग्न की कुंडली के कुछ विशिष्ट भावों (जैसे दूसरे, दसवें व ग्यारहवें) में शुभ और अनुकूल ग्रहों के साथ युति जातक को अप्रत्याशित धन लाभ देती है। हालांकि यह धन अस्थि होता है।
  4. राहु की स्थिति विदेश यात्राओं या विदेश से संबंधित कार्यों में सफलता देने में सहायक होती है ऐसे जातक की तार्किक बुद्धि श्रेष्ठ होती है।
  5. ऐसे जातक तकनीकी क्षेत्रों, कानूनी मामलों या उन क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं, जिनमें गहन शोध की आवश्यकता होती है।
  6. मेष लग्न में यदि राहु तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में हो तो यह जातक को सुन्दर और धनवान होने का आशीर्वाद देते हैं। 
  1. राहु को भ्रम, भ्रांति और छाया ग्रह कहा जाता है जिसके अशुभ प्रभाव में जातक पहचान का संकट पैदा कर सकता है। ऐसे जातक को मतिभ्रम या मानसिक अस्थिरता की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  2. मेष लग्न में अशुभ राहु जातक को स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियाँ या पेट की समस्याएं देने का कार्य करता है। ऐसे जातक को अचानक स्वास्थ्य संबंधो कोई बड़ी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
  3. परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ अनावश्यक मतभेद हो सकते हैं, जिससे संबंधों में मधुरता की कमी आ सकती है। अशुभ राहु से प्रभावित जातक की वाणी में कटुता रहती है।
  4. अशुभ राहु के प्रभाव में जातक को धन संग्रह करने की तीव्र इच्छा के कारण अवैध या अनैतिक तरीकों से धन कमाने के लिए प्रेरित करती है।
  5. अशुभ राहु के प्रभाव से जातक को अचानक धन लाभ के बाद भी आर्थिक रूप से अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक अप्रत्याशित खर्चे में बहुत धन बर्बाद करते हैं। 

कुंडली में मेष लग्न में विराजमान राहु के के प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है। वे भीड़ से अलग दिखना चाहते हैं और ध्यान आकर्षित करते हैं। इस भाव में राहु जातक में सफलता और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की तीव्र इच्छा पैदा करता है। ऐसे जातक बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। मेष राशि के स्वाभाविक नेतृत्व गुणों में वृद्धि करता है। ऐसे जातक पहल करने वाले, अभिनव (innovative) विचारक होते हैं लेकिन, वें और जोखिम लेने से नहीं डरते हैं।

कुंडली के दूसरेभाव में राहु की स्थिति से जातक धन और परिवार-कुटुंब धन-सम्बन्धी चिंताओं से ग्रस्त बना रहता है और उसे अनेक प्रकार के कष्ट भी उठाने पड़ते हैं। इस भाव में राहु अप्रत्याशित स्रोतों या सट्टेबाजी (speculation), शेयर बाजार या विदेशी निवेश से अचानक धन लाभ करा सकता है। धन कमाने के नए और अपरंपरागत तरीके अपनाने में सफलता मिल सकती है। साथ ही ऐसे जातक समाज में धनी व्यक्ति के रूप में सम्मानित होता है।

लग्न की कुंडली के तीसरे भाव में राहु ग्रह विराजमान हो तो ऐसे जातक बहुत पराक्रम तथा भाई-बहन का प्रेम प्राप्त करने वाले होते हैं। साथ ही ऐसे जातक साहसी, युक्तबल में प्रवीण होता है और बड़ी दिलेरी , हिम्मत तथा साहस व परिचय देता है। जिससे ये अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर लेते हैं।

पांचवे भाव में राहु के प्रभाव से जातक की बुद्धि बहुत तीव्र और अपरंपरागत होती है। वे लीक से हटकर सोचते हैं और उनमें अद्भुत रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा होती है। शिक्षा के क्षेत्र में ये लोग कुछ नया करना चाहते हैं। वे तकनीकी, कंप्यूटर, शेयर बाजार या किसी विशेष शोध (research) के क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। जातक में अभिनय, संगीत या कला के प्रति गहरा रुझान हो सकता है और वे इन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

कुंडली के छठे भाव में राहु के प्रभाव से जातक शत्रुओं , झगड़ों तथा परेशानियों के बीच भी अत्यधिक हिम्मत से काम लेकर अपना परचम लहराने वाला होता है। ऐसे जातक कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपने धैर्य और साहस को नहीं खोते हैं। राहु की ऐसी स्थिति के कारण जातक को कभी-कभी बहुत मुसीबत में फंस जाता है, परन्तु हर बार वह अपने साहस और हिम्मत के द्वारा जीत हासिल कर लेता है।

नौवें भाव में राहु ग्रह के प्रभाव से जातक का भाग्य बहुत मजबूत होता है। ऐसे जातक अप्रत्याशित तरीकों से भाग्य का साथ प्राप्त करते हैं, जिससे जीवन में समृद्धि आती है। जातक में धर्म, दर्शन, या आध्यात्मिकता के प्रति गहरी, लेकिन अपरंपरागत रुचि हो सकती है। वे पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती दे सकते हैं और सत्य की अपनी खोज कर सकते हैं। उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के योग बनते हैं। कानूनी, धार्मिक या दार्शनिक विषयों के अध्ययन में सफलता मिल सकती है। जातक बहुत सारी लंबी यात्राएं कर सकता है, विशेषकर धार्मिक स्थलों या विदेश की। विदेश में बसने या विदेश से धन लाभ के योग बनते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष लग्न के ग्यारहवें भाव को लाभ भाव कहते हैं। इस भाव यदि राहु अपने मित्र शनि की राशि पर वित्रज्मान हो तो, जातक को आमदनी के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त होती है। लेकिन, उपार्जित लाभ होने के कारण जातक को कठोर परिश्रम करना पड़ता है। कभी-कभी आय में कमी और हानि के योगों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक परिश्रमी , स्वार्थी, मितव्ययी ऐश्वर्यवान तथा संपत्ति वान होता है।

कुंडली का  बढ़वान भाव व्यय का भाव कहलाता है। मेष लग्न के इस भाव में राहु ग्रह के प्रभाव से जातक को अपने शत्रु ग्रह गुरु बृहस्पति की राशि में स्थित होने से जीवन में खर्च की अधिकता के कारण मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से भी कष्ट मिलते हैं। लेकिन, यदि राहु मेष लग्न में शुभ ग्रह के साथ है तो, जातक शान – शौकत और सभी प्रकार के भौतिक सुखों प्राप्त करता है। समय- समय पर उपस्थित होने वाली समस्याओं के बीच भी सफल हो जाता है। लेकिन, अधिक खर्च से आर्थिक समस्या बनी रहती है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों का कहना है कि, मेष लग्न में जब राहु ग्रह की स्थिति बनती है तो, कुछ विशेष योग भी बनते हैं। आइए जान लेते हैं इन शुभ योग और प्रभाव के बारें में-

जब राहु ग्रह मेष लग्न की कुंडली में गुरु (बृहस्पति) के साथ युति करता है, विशेषकर लग्न (पहला भाव), पंचम, नवम या दशम भाव में तो यह योग बनता है। ज्योतिष में इस योग को अशुभ माना जाता है, लेकिन कुछ संदर्भों में इसके शुभ परिणाम भी मिलते हैं। 

इस योग के शुभ प्रभाव से जातक को विलक्षण बुद्धि, ज्ञान और दूर दर्शिता के गुण मिलते हैं। जातक पारंपरिक शिक्षा से हटकर बहुत कुछ सीखता है। यदि राहु और गुरु दोनों मजबूत स्थिति में हैं, तो जातक अपने क्षेत्र में अद्वितीय सफलता प्राप्त कर सकता है, विशेषकर आध्यात्मिकता, कानून, शिक्षा, या विदेश से संबंधित मामलों में ऐसे जातक सफल होते हैं।

ज्योतिष में, राहु और केतु को कुछ विशेष स्थितियों में राजयोग कारक माना जाता है।  खासकर जब वे केंद्र या त्रिकोण के स्वामियों के साथ युति करें या उन भावों में स्थित हों। यदि राहु त्रिकोण भावों जैसे (पहले, पांचवें, नौवें) में स्थित हो और केंद्र भावों के स्वामी से दृष्टि या युति करें, या यदि राहु केंद्र भावों में स्थित हो और त्रिकोण भावों के स्वामी से दृष्टि या युति करें तो यह केंद्र त्रिकोण राजयोग बनता है।

मेष लग्न में राहु ग्रह

इस योग के शुभ प्रभाव से जातक को अचानक धन, शक्ति और अधिकार की प्राप्ति होती है। साथ ही, ऐसे जातक सरकारी नौकरी या राजनीति में उच्च पद प्राप्त हो सकता है।

मेष लग्न के जातकों के लिए हमारे ‘मंगल भवन’ के अनुभवी ज्योतिष आचार्यों द्वारा कुछ विशेष बौर आसान उपाय बताए गए हैं

  • राहु ग्रह को मजबूत करने के लिए, शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाएं, शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र और रुद्राभिषेक का पाठ करें।
  • प्रतिदिन राहु के बीज मंत्र ‘ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ या ‘ऊँ रां राहवे नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। 
  • शनिवार को गरीबों को तिल, उड़द, बैंगन, नारियल, चांदी, लोहा या नीला कपड़ा दान करें। गुड़ और तांबा दान करें या मंदिरों में चढ़ाएं।
  • राहु को मजबूत करने के लिए तामसिक भोजन से बचें, क्योंकि यह राहु की अशुभ शक्ति को बढ़ाता है।
  • काले और नीले वस्त्र न पहने। और सट्टा बाजार या आवेगपूर्ण कार्यों से बचें।

ऊपर दी हुई जानकारी और हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों   के मतानुसार मेष लग्न में राहु शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से फलदायी है। लेकिन, कुंडली के कुछ विशेष भाव जिनमें, राहु शुभ प्रभावशाली होते हैं। जिनमें अन्य ग्रहों की युति और प्रभाव से राहु के फला देश जातक को अच्छे या बुरे मिलते हैं। इन प्रभावों को उचित उपाय और सही मार्गदर्शन से दूर किया जा सकता है।

Q. मेष लग्न में राहु ग्रह का प्रभाव कैसा होता है?

An. ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को एक अशुभ छाया ग्रह का स्थान दिया गया है। इस ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं होती है। बल्कि, वे अपने मित्र ग्रह की राशि और कुंडली के शुभ भाव जैसे पहला, दूसरा, चौथा, पांचवा, सातवां, नौवां, और ग्यारहवां में होकर जातक को शुभ फल देते हैं।

Q. क्या, मेष लग्न में राहु ग्रह के होने से कोई शुभ योग बनता है?

An. हां, जब मेष लग्न में, राहु ग्रह गुरु बृहस्पति के साथ युति में हो तो “गुरु चांडाल योग” बनता है। इसके अलावा, जब राहु ग्रह केंद्र या त्रिकोण के स्वामियों के साथ युति करें या उन भावों में स्थित हों तब “ केंद्र त्रिकोण राजयोग बनता है।

Q. मेष लग्न के जातकों को राहु ग्रह की शुभता के लिए क्या धारण करना चाहिए?

An. वैसे तो, राहु किसी भी ग्रह की शुभता के लिए बिना किसी वरिष्ठ ज्योतिषी की सलाह के कोई रत्न नहीं पहना जाता है। राहु के लिए आप ज्योतिष की सलाह से गोमेद रत्न पहन सकते हैं।

Q. मेष लग्न में राहु ग्रह के शुभ प्रभाव क्या हैं?

An. मेष लग्न के लिए राहु के प्रभाव से जातक अत्यधिक महत्वाकांक्षी बनता है। ऐसे जातक जोखिम लेने से नहीं डरते हैं। और वह अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। राहु के शुभ प्रभाव से जातक साहसी और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले होते है, उसमें कुशल नेतृत्व के गुण होते हैं।

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