राहु ग्रह की महादशा
राहु की महादशा: ज्योतिष में, ग्रहों की दशा और महादशा, जातक के जीवन को बदलने में बहुत ही अहम भूमिका निभाती है! अब यदि ग्रहों के प्रभाव के बारे में बताए तो, कुंडली में ग्रहों के शुभ या अशुभ स्थिति के अनुसार, जातक के जीवन पर ग्रहों की महादशा व अंतर्दशा का प्रभाव होता है! तो, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम राहु ग्रह की महादशा के साथ विभिन्न ग्रहों की अंतर्दशा के प्रभाव के बारे में भी जानेंगे! आशा करते हैं लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया हमें जरूर दें!
ज्योतिष में, राहु ग्रह की महादशा
ज्योतिष में, राहु की महादशा का समय 18 वर्ष तक जातक के जीवन में प्रभावशाली होता है! यह एक लंबी अवधि है, जिससे जातक मानसिक रूप से प्रभावित होता है! यानी, राहु की महादशा के दौरान जातक जीवन के अनेक अनुभवों से होकर गुजरता है! या हम यह भी कह सकते हैं कि, राहु की महादशा का प्रभाव में, जातक का जीवन लगभग बदल ही जाता है! यदि कुंडली में राहु के स्थान की बात करें तो, यह तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो जातक को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है! यानी राहु के अच्छे और शुभ प्रभाव में जातक सुख और सफलता पाता है! कुंडली के तीसरे, चौथे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में राहु की स्थिति से जातक को,धन, समृद्धि और वैभव-सुख मिलता है! आगे लेख में हम राहु के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में जानेगे-
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राहु ग्रह की महादशा-प्रभाव
- सकारात्मक प्रभाव
- राहु की महादशा में जातक को भौतिक सफलता जैसे कि धन, संपत्ति और प्रतिष्ठा मिलती है!
- ग्रह राहु की महादशा के शुभ प्रभाव में जातक को, आय और धन प्राप्ति के नए अवसर मिलते हैं, जैसे कि अच्छे पद की नई नौकरी, नया व्यवसाय या नई परियोजना के तहत धन लाभ!
- राहु की महादशा से प्रभावित जातक, आकर्षण और मोह का अनुभव करता है, जैसे कि प्रेम संबंध या नए दोस्त बनाने में रुचि रखता है!
- नकारात्मक प्रभाव
- राहु की महादशा का अशुभ प्रभाव हो तो ऐसे जातक, भ्रम और अनिश्चितता का अनुभव करते हैं! उन्हें, निर्णय लेने में कठिनाई या भविष्य के बारे में अनिश्चितता और चिंता परेशान करती है!
- ग्रह राहु की महादशा के दौरान जातक को अपने जीवन में, कई नकारात्मक प्रभावों जैसे कि नकारात्मक विचार, नकारात्मक या बुरे लोगों की संगत या विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है!
- राहु की महादशा में जातक को स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि मानसिक समस्याएं या शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है!
राहु की महादशा के साथ विभिन्न ग्रहों की अन्तर्दशा का परिणाम
ग्रह राहु की महादशा के साथ जातक को विभिन्न ग्रहों की अन्तर्दशा का भी सामना करना पड़ता है-आइए जानते हैं अन्य ग्रहों की अन्तर्दशा के परिणाम के बारें में-
राहु की महादशा व राहु की अंतर्दशा
जब राहु की महादशा के साथ राहु की ही अन्तर्दशा हो और अच्छे भाव में अच्छी स्थिति में हो तो, यह जातक को लाभ देने वाली स्थिति है! इसके प्रभाव में जातक को, छोटे संगठन का मेल-मिलाप से आय के साधन मिलते हैं! जीवन में असंतोष की स्थिति रहती है! भौतिक कार्यों के प्रति रूचि बढ़ती है! जातक को विदेश जाने के अवसर मिलते हैं! ऐसे जातक स्वयं की मजबूत इच्छा शक्ति और हिम्मत के माध्यम से सफलता प्राप्त करते हैं! यदि यह राहु की दशा अशुभ भाव में अशुभ स्थिति में हो तो, अनिर्णय, भ्रम, धन हानि और आजीविका में बाधक होती है! अचानक धन हानि व विफलताओं का सामना करना पड़ता है! पारिवारिक क्लेश और समस्याएं जातक को तनाव दे सकती हैं! स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होंगी! ऐसी स्थिति में जातक को कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व किसी ज्योतिष या जानकर से सलाह जरूर लेनी चाहिए!
राहु की महादशा व गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा
जब, राहु की महादशा के साथ, गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा हो तो, यह जातक के स्वास्थ्य में सुधार और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देने वाली होती है! क्योंकि, बृहस्पति के शुभ प्रभाव के कारण जातक को परिणाम भी अच्छे मिलते हैं! मान-सम्मान में वृद्धि होती है! गुरु बृहस्पति की शुभ और सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से जातक में नयी ऊर्जा का संचार होता है! आय के साधनों में वृद्धि होती है! अनुभवी और प्रसिद्ध लोगों से मिलने का अनुभव मिलता है! आध्यात्मिक और धार्मिक यात्राएं करने का अवसर मिलता है! इस अंतर्दशा में जातक का प्रेम विवाह या दूसरी जाति में विवाह होने के योग बनते हैं! इसके विपरीत यदि बृहस्पति अशुभ हो तो राहु की महादशा जातक के स्वास्थ्य को नकारात्मक प्रभाव देती है और साथ ही, धन की हानि, करियर में बाधा और अलगाव की स्थितयों का सामना करना पड़ता है!
राहु की महादशा व बुध की अंतर्दशा
जब, राहु की महादशा के साथ बुध की अंतर्दशा हो तो, यह जातक के लिए अनुकूल मानी जाती है! ऐसे जातक अपने करियर में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं! साथ ही, अपनी समझदारी से, कार्यक्षेत्र में पदोन्नति और व्यापार में वृद्धि के नए अवसर मिलते हैं! वैवाहिक जीवन, सुखमय बना रहता है! जातक को सभी भौतिक संसाधनों और वहां सुख की प्राप्ति होती है! बुध को बौद्धिकता का ग्रह मन जाता है, और राहु भी जातक की बुद्धि को प्रभावित करता है, इसलिए इस दशा के दौरान जातक कई नई चीजों से जुड़ता है! स्वभाव में उत्साह रहता है और धन व स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार होता है!
राहु की महादशा व शुक्र की अंतर्दशा
जब, राहु की महादशा के साथ शुक्र की अंतर्दशा हो तो, यह जातक को अच्छे परिणाम देने वाली होती है! इस दशा के दौरान जातक को चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है, लेकिन, साथ ही इससे मोक्ष का मार्ग भी मिलता है! कुछ कठिनाइयां जीवन में अधिक समय तक रहती हैं! लेकिन, जातक को आर्थिक लाभ भी मिलता है! जातक को सुख-सुविधाओं की महंगी वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं! वाहन और संपत्ति का सुख मिलता है! इस समय पर जीवन में कड़ी मेहनत के बाद जातक को सफलता मिलती है और करियर में आगे बढ़ते हैं!
राहु की महादशा व शनि की अंतर्दशा
राहु और शनि की साथ में अन्तर्दशा होती है तो, यह जातक को, अशुभ प्रभाव देने वाली होती है! क्योंकि, ये दोनों ही ग्रह पाप युक्त प्रभाव देने वाले ग्रह हैं! इन दोनों ग्रहों को अशुभ माना जाता है! इसलिए इस अंतर्दशा में नकारात्मकता प्रभाव से जातक को अपने जीवन में संघर्ष की स्थिति का सामना करना पड़ता है! इस दौरान जातक को, आर्थिक रूप से परेशानी, आजीविका में रुकावट आती है! व्यर्थ की बदनामी तो होती ही है, धन हानि का भी सामना करना पड़ता है! यह दशा दुर्घटना, चिकित्सा समस्याओं की सूचक होती है! इस समय यदि शनि की स्थिति शुभ भाव में है तो, यह कई चीजों में सकारात्मकता फल भी देती है!
राहु की महादशा व केतु की अंतर्दशा
जब, राहु की महादशा के साथ, केतु की अंतर्दशा हो तो यह जातक के लिए विशेष रूप से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक नहीं मानी जाती है! क्योंकि, दोनों पाप ग्रह हैं, जो कि, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के निदान में बाधक होने की भूमिका निभाते हैं! इस अवधि के दौरान जातक को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है! मन में वैराग्य की भावना का अनुभव होता है! और हमेशा मन में रोग, विष, अग्नि और शस्त्र से भय बना रहता है!
राहु की महादशा व सूर्य की अंतर्दशा
राहु के साथ, सूर्य की अंतर्दशा का होना जातक के जीवन में, उतार-चढ़ाव का कारक होता है! इस दशा में जातक अपने जीवन के कुछ मुद्दों को सुलझा नहीं पाता है! क्योंकि, राहु और सूर्य के बीच विरोध (शत्रुता) का संबंध होता है! जिसके परिणाम स्वरूप जीवन में काफी तनाव का सामना करना पड़ता है! इस अवधि में जातक को, नौकरी में परिवर्तन या स्थानांतरण का अवसर मिलता है! स्वास्थ्य कमजोर रहता है! मानसिक रूप से तनाव व क्रोध बना रहता है! मान-सम्मान में कमी होती है, विदेश यात्रा के अवसर मिलते हैं!
राहु की महादशा व चंद्रमा की अंतर्दशा
राहु की महादशा के साथ चंद्रमा की अन्तर्दशा के प्रभाव से जातक को मानसिक और मन को प्रभावित करने वाली भावुक परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है! क्योंकि, चंद्रमा मन का कारक होता है और जब यह राहु द्वारा प्रभावित होता है, तो यह काफी चिंताओं का संकेत देता है! ऐसे में जातक को, बेचैनी और तनाव महसूस होता है! इस समय जातक को, जल से संबंधित चीजों के कारण रोग होने की संभावना रहती है! कार्यक्षेत्र में परेशानियां होती है! जीवन में कई बार पसंद की चीजें दूर हो जाती है!

राहु की महादशा व मंगल की अंतर्दशा
जब, राहु की महादशा व मंगल की अंतर्दशा हो तो यह समय जातक के जीवन का सबसे अधिक कठिनाई और परेशानी देने वाला समय होता है! इसलिए हमारे ज्योतिष आचार्यों की सलाह में, इस दौरान जातक को बहुत सावधानी रखने की जरूरत होती है! क्योंकि, इस अवधि में जातक को चोट लगने की संभावना अधिक होती है, साथ ही, जीवन में परिश्रम और संघर्ष बना रह सकता है! परिवार और रिश्तों के साथ विवाद और तनाव की स्थिति बनी रहती हैं! इसके अलावा, जातक को, मंगल की अंतर्दशा में कोई भी कार्य जल्दबाजी में करने से बचना चाहिए!
राहु की महादशा- किए जाने वाले आसन उपाय
राहु की महादशा के दौरान कुछ उपाय करके इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं:
- मां दुर्गा की आराधना व पूजा करना राहु की महादशा के दौरान बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि दुर्गा माता राहु के प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं!
- विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करना भी राहु की महादशा के दौरान लाभदायक उपाय है!
- नीले रंग के वस्त्र का दान करना राहु की महादशा के लिए शुभ प्रभावशाली होता है!
- राहु की महादशा के दौरान, अन्न और धन का दान करना भी लाभदायक होता है, और इससे पुण्य की प्राप्ति होती है!
- राहु की महादशा के दौरान मानसिक तनाव से दूर रहने के लिए आपको, ध्यान और योग करना चाहिए! क्योंकि इससे मानसिक शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होती है!
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. जीवन में, राहु ग्रह की महादशा कितने समय तक चलती है?
An. राहु की महादशा का समय 18 वर्ष तक जातक के जीवन में प्रभावशाली होता है! यह एक लंबी अवधि है, जिससे जातक मानसिक रूप से प्रभावित होता है! यानी, राहु की महादशा के दौरान जातक जीवन के अनेक अनुभवों से होकर गुजरता है!
Q. क्या, राहु की महादशा नकारात्मक होती है?
An. नहीं, राहु की महादशा में जातक को भौतिक सफलता जैसे कि धन, संपत्ति और प्रतिष्ठा मिलती है! साथ ही, राहु की महादशा के शुभ प्रभाव में जातक को, आय और धन प्राप्ति के भी नए अवसर मिलते हैं, जैसे कि अच्छे पद की नई नौकरी, नया व्यवसाय या नई परियोजना के तहत धन लाभ!
Q. राहु की महादशा के साथ राहु की ही अंतर्दशा हो तो क्या होता है?
An. जब राहु की महादशा के साथ राहु की ही अन्तर्दशा हो और अच्छे भाव में अच्छी स्थिति में हो तो, यह जातक को लाभ देने वाली स्थिति है! इसके प्रभाव में जातक को, छोटे संगठन का मेल-मिलाप से आय के साधन मिलते हैं! जीवन में असंतोष की स्थिति रहती है! भौतिक कार्यों के प्रति रूचि बढ़ती है! जातक को विदेश जाने के अवसर मिलते हैं!
Q. राहु की महादशा के लिए सबसे आसान और कारगर उपाय क्या है?
An. मां दुर्गा की आराधना व पूजा करना राहु की महादशा के दौरान बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि दुर्गा माता राहु के प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं! इसके अलावा, राहु की महादशा के दौरान मानसिक तनाव से दूर रहने के लिए आपको, ध्यान और योग करना चाहिए! क्योंकि इससे मानसिक शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होती है!




