मिथुन लग्न में सूर्य ग्रह! विशेष स्थिति, प्रभाव, फलादेश और महत्वपूर्ण उपाय |

मिथुन लग्न में सूर्य ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में बारह भाव होते हैं। इन सभी भावों के अलग-अलग महत्व और भूमिका होती है जिससे हमें जातक के जीवन की आय, कर्म, पारिवारिक व वैवाहिक जीवन और नौकरी सम्बन्धी जानकारी मिलती है। इतना ही नहीं, जातक के पिछले जन्म के कर्म और मोक्ष, यानी मृत्यु तक की गणना हम इन्हीं भावों के आधार पर ज्ञात कर सकते हैं। 

अब बात करते हैं, ग्रहों की तो, इन सभी भावों में नौ ग्रह भी अपनी स्थिति और गोचर के आधार पर शुभ या अशुभ प्रभाव देते हैं। कोई ग्रह अपनी वक्री चाल  के अनुरूप तो, कोई ग्रह अपनी अस्त स्थिति के अनुरूप विशेष प्रभाव देते हैं। 

तो, आइए आज हम आपको हमारे इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में मिथुन लग्न में सूर्य ग्रह  के मुख्य प्रभाव और विशेष स्थिति के बारे में, महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। हम आशा करते हैं हमारे द्वारा लेख में दी गई जानकारी आप सभी पाठकों के लिए उपयुक्त होगी।

वैदिक ज्योतिष ज्ञान के अनुसार, मिथुन लग्न वाले जातक का स्वभाव साहसी और पराक्रमी होता है। इस राशि पर वाणी और बुद्धि के कारक ग्रह बुध का प्रभाव होने से वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। इसके साथ ही, इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक दयालु, बुद्धिमान और वाक्पटु प्रवृत्ति के होते हैं। इनकी रुचि कलात्मक कार्यों में अधिक होती है। 

हर दिन कुछ नया सीखने की उनकी प्रवृत्ति, इन्हें दिन-प्रतिदिन और भी अधिक निखारने व खिलने में सहायक होती है। ऐसे जातक अपनी मेहनत व अपने कार्य से सभी का मन बहुत आसानी से प्रभावित करते हैं। इस राशि का संबंध वायु तत्व होने से, इनका मस्तिष्क और बुद्धि बहुत ही गतिमान होती है। जिससे उनकी योजनाएं हर दिन नयी-नयी होती हैं। वास्तविकता से अधिक ऐसे जातकों को अपनी कल्पनाओं में खोया हुआ रहने की प्रवृत्ति होती हैं। 

ज्योतिष गणना के आधार पर, मिथुन लग्न के जातकों के लिए,  सूर्य देवता लग्नेश के मित्र हैं, परन्तु तीसरे भाव के स्वामी होने के कारण वह इस लग्न कुंडली के लिए मारक ग्रह बन जाते हैं। इसलिए, यहां सूर्य देवता मारक ग्रह होने के कारण किसी भी भाव में, हो वे जातक के लिए अशुभ फल ही देंगे। इसके अलावा, वे अन्य ग्रहों की स्थिति और प्रभाव के आधार पर भी अशुभ परिणाम ही देंगे। 

इस लग्न में सूर्य ग्रह कुंडली के तीसरे भाव के स्वामी के रूप में एक पापी ग्रह की भूमिका में होंगे।  पर यहां सूर्य न्यूनतम प्रभाव में पापी ग्रह है। इसके अलावा, सूर्य लग्नेश बुध के मित्र ग्रह है और क्षत्रिय होने पर सत्वगुणी भी है। अतः यहां अनिष्टकारी या अशुभ न होकर जातक के लिए शौर्य, तेजस्विता और पराक्रम में वृद्धि करने के परिणाम देंगे। 

मिथुन लग्न के पहले भाव में होने पर सूर्य इस लग्न के स्वामी होंगे। यह इनकी मित्र राशि है। ऐसा जातक सूर्य के प्रभाव में, राजा के समान उच्च पद को प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति स्वाभिमानी, धार्मिक कार्यों में अग्रणी और  अपनी संस्कृति व परंपराओं का पालन करने वाला होता है। स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या इन जातकों को नहीं होती है। बौद्धिक रूप से बहुत ही प्रभावशाली होते हैं।

लग्नस्थ सूर्य की दृष्टि सप्तम भाव (धनु राशि) पर होने से जातक को स्त्री व पुत्र दोनों का अच्छा  सुख प्राप्त होता है।

जब भी कुंडली में सूर्य की दशा चलती है तो, जातक को सफलता मिलती है, पराक्रम में वृद्धि होती है।

ज्योतिष में ही नहीं, धार्मिक शास्त्रों में भी, सूर्य देव को प्रकाश बिखेरने वाला और लग्न कुंडली के तृतीय भाव का अधिपति कहा जाता है। जो, नौकर चाकर, सहोदर, प्राकर्म, अभक्ष्य पदार्थों का सेवन, क्रोध, भ्रम लेखन, कंप्यूटर, अकाउंट, मोबाइल, पुरुषार्थ, साहस, शौर्य, खांसी, योग्याभ्यास, दासता इत्यादि विषयों का प्रतिनिधित्व करता है। 

यदि इन संदर्भों में, जातक को शुभ प्रभाव मिले हो तो, यह सूर्य के लग्न कुंडली में मजबूत स्थिति को दर्शाता है। जन्‍मकुंडली या दशाकाल में सूर्य के बलवान और शुभ प्रभाव में रहने पर जातक को ऊपर बताए गए सभी विषयों में उच्च सुख और शुभ परिणाम मिलते हैं। जबकि, कमजोर व पाप ग्रहों के प्रभाव में सूर्य के कमजोर होने पर उपरोक्त संदर्भों में जातक को हानि या अशुभता देखनी पड़ती है।

  • यदि सूर्य लग्न कुंडली के तीसरे, छठे, नौवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो तो ऐसे जातक साहसी, परिश्रमी और बहुत ही पराक्रमी होते हैं।
  • लग्न कुंडली के दसवें,भाव में सूर्य उच्च पद सरकारी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं, साथ ही, उन्हें समाज में मान-प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है।
  • स्वग्रही सूर्य (तीसरे भाव में), सिंह राशि में होने पर जातक को दृढ़ निश्चयी और भाइयों का सुख देने वाले प्रभाव देते हैं।
  • कुंडली में शुभ प्रभाव में, सूर्य ग्रह जातक को अच्छा प्रशासक और निडर नेता बना सकता है। 
  • लग्न कुंडली में यदि सूर्य पीड़ित हो तो, ऐसे जातक को पिता के साथ वैचारिक मतभेद, पिता को कष्ट , या पिता से अलगाव होने की समस्या होती है।
  • सूर्य के अशुभ प्रभाव में जातक को हृदय रोग आंखों की समस्या या सिरदर्द जैसी समस्याएं रहती हैं।
  • लग्न कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभाव में, जातक को क्रोधी और घमंडी होने का प्रभाव मिलता है जिससे जातक की सामाजिक छवि खराब हो सकती है।
  • कार्यों में बहुत अधिक मेहनत के बाद ही सफलता मिलती है।

इस लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता और शुभ ग्रह ग्रह चंद्रमा है। धनेश चंद्र की शुभ स्थिति से, धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रहों की स्थिति और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों की दृष्टि के ज्ञान से जातक की आर्थिक स्थिति, आय व चल-अचल संपत्ति के बारे में ज्ञात किया जा सकता है। 

इसके अलावा, मिथुन लग्न में लग्नेश बुध, पंचमेश शुक्र और भाग्येश शनि की अनुकूल स्थितियां धन, ऐश्वर्य एवं वैभव में वृद्धि करने वाली और पूर्ण रूप से सहायक सिद्ध होती हैं। वैसे, मिथुन लग्न के जातकों के लिए मंगल, गुरु, शनि और सूर्य ग्रह अशुभ है। केवल एकमात्र, शुक्र ग्रह ही शुभ है। चंद्रमा मारक होते हुए भी मारक का काम नहीं करेगा और सूर्य निष्फल होते हैं।

विशेष सलाह: मिथुन लग्न के जातकों को सूर्य का रत्न ‘माणिक्य’ (Ruby) पहनने से बचना चाहिएजब तक कि वह बहुत कमजोर या अस्त स्थिति में न हो।

  1. पहले भाव में सूर्य ग्रह-  लग्न कुंडली के पहले भाव में, सूर्य के प्रभाव से जातक बुद्धिमान और आकर्षक बनाता है, लेकिन आत्मविश्वास में कमी होती है इसलिए साहसिक कार्यों में पीछे रहते हैं।
  2. दूसरे भाव में सूर्य ग्रह-  दूसरे भाव में, सूर्य के प्रभाव से जातक धन और संपत्ति को प्राप्ति करता है लेकिन, इन जातकों की वाणी बहुत कठोरता हो सकती है।
  3. तीसरे भाव में सूर्य ग्रह – इस भाव में सूर्य ग्रह के प्रभाव से जातक साहसी और पराक्रमी होते हैं, परिवार में, भाई-बहनों का साथ मिलता है। अपने परिश्रम व पराक्रम से सफलता प्राप्त करते हैं।
  4. चौथे भाव में सूर्य ग्रह-  परिवार और माता-पिता के साथ सम्बन्ध मधुर रहते हैं। जीवन में, सुख और शांति की प्राप्ति होती है और घर का वातावरण सुखद बनाता है।
  5. पांचवे भाव में सूर्य ग्रह- सभी कार्यों में कुशल रचनात्मक और साहसी बनाता है, संतान के साथ संबंध अच्छे रहते हैं और प्रेम संबंधों में सफलता प्राप्त करता है।
  6. छठे भाव में सूर्य ग्रह- स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और व्यवसाय में लाभ व सफलता प्राप्त करता है।
  7. सातवें भाव में सूर्य ग्रह- वैवाहिक जीवन में सुखी, संपन्न और सफल रहता है, जीवनसाथी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है और साझेदारी में सफलता प्राप्त करता है।
  8. आठवे भाव में सूर्य ग्रह- जीवन में उतार-चढ़ाव व समस्याएं आ सकती  है, अचानक घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं।
  9. नौवें भाव में सूर्य ग्रह- धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रहती है, पिता के साथ अच्छे संबंध मधुर और अच्छे बनाए रखता है। भाग्य का साथ मिलता है।
  10. दसवें भाव में सूर्य ग्रह- करियर में सफलता और समृद्धि मिलती है, उच्च पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। समाज में मान-सम्मान मिलता है।
  11. ग्यारहवें भाव में सूर्य ग्रह-  निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता मिलती है, मित्रों और संबंधियों के साथ अच्छे संबंध होते हैं और धन-वैभव का सुख मिलता है।
  12. बारहवें भाव में सूर्य ग्रह-  आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में रुचि होती है। उच्च पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन जीवन में उतार-चढ़ाव व समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और फिजूल खर्च हो सकता है।
मिथुन लग्न में सूर्य ग्रह

ग्रहों को शांत करने और मजबूत करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में, विशेष उपाय बताए गए हैं जो इस प्रकार है-

  1. प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल और कुमकुम मिलाकर सूर्य को जल अर्पित करें।
  2. अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ सूर्याय नमः” का 108 बार जाप करें।
  3. रविवार के दिन गेहूं, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान करें।
  4. प्रतिदिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और कुंडली के दोष दूर होते हैं।
  5. रविवार को बंदरों को गुड़-चना खिलाएं या गाय को गेहूं की रोटी में गुड़ खिलाएं।
  6. अपने घर बड़े, पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें।

कुल-मिलाकर हमने आपको ऊपर जो जानकारी दी, इस जानकारी और हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों के मतानुसार, मिथुन लग्न में सूर्य ग्रह की स्थिति शुभ व अशुभ दोनों प्रकार से प्रभावित होती है। लेकिन, इसका यह अर्थ नहीं है कि, सूर्य केवल आपको हानि या समस्या ही देंगे। कुछ समय जीवन के उतार-चढाव के लिए, आपको सूर्य संबंधित उपाय करने से राहत मिलेगी।

Q. मिथुन लग्न में सूर्य गृह की स्थिति क्या होती है?

An. मिथुन लग्न के जातकों के लिए,  सूर्य देवता लग्नेश के मित्र हैं, परन्तु तीसरे भाव के स्वामी होने के कारण वह इस लग्न कुंडली के लिए मारक ग्रह बन जाते हैं। इसलिए, यहां सूर्य देवता मारक ग्रह होने के कारण किसी भी भाव में, हो वे जातक के लिए अशुभ फल ही देंगे।

Q. मिथुन लग्न में सूर्य के अशुभ होने पर क्या होता है?

An. लग्न कुंडली में यदि सूर्य पीड़ित हो तो, ऐसे जातक को पिता के साथ वैचारिक मतभेद, पिता को कष्ट , या पिता से अलगाव होने की समस्या होती है। इसके अलावा, सूर्य के अशुभ होने पर जातक को हृदय रोग आंखों की समस्या या सिरदर्द जैसी समस्याएं रहती हैं।

Q. मिथुन लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन सा है?

An. मिथुन लग्न के जातकों के लिए मंगल, गुरु, शनि और सूर्य ग्रह अशुभ है। केवल एकमात्र, शुक्र ग्रह ही शुभ है। चंद्रमा मारक होते हुए भी मारक का काम नहीं करेगा और सूर्य निष्फल होते हैं।

Q. ज्योतिष में मिथुन लग्न के जातकों के बारे में क्या बताया गया है?

An. मिथुन लग्न वाले जातक का स्वभाव साहसी और पराक्रमी होता है। इस राशि पर वाणी और बुद्धि के कारक ग्रह बुध का प्रभाव होने से वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। इसके साथ ही, इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक दयालु, बुद्धिमान और वाक्पटु प्रवृत्ति के होते हैं।

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