मिथुन लग्न में शुक्र ग्रह! क्या, आपकी कुंडली में भी दिख रहे हैं, शुक्र ग्रह के ऐसे प्रभाव !

मिथुन लग्न में शुक्र ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मिथुन लग्न में शुक्र शुभ फलदायी होता है। जिसके शुभ प्रभाव में जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, कला, संगीत, साहित्य और मीडिया में सफलता मिलती है। साथ ही ऐसे जातक, कल्पनाशील, बुद्धिमान और संचार के मामलों में श्रेष्ठ होते हैं। ऐसे जातक को सभी प्रकार की धन-संपदा और भौतिक सुख मिलते हैं। 

लेकिन, रिश्तेदार, शिक्षा या संतान संबंधी मामलों में कुछ अस्थिरता या देरी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से, जब कुंडली में, शुक्र की स्थिति कमजोर या पीड़ित हो, तो, यह मानसिक रूप से अस्थिरता, कमजोर चरित्र जैसी समस्याएं देने का कारक होता है। जिसे रिश्तों में संतुलन और आध्यात्मिक जुड़ाव से दूर किया जा सकता है। तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको मिथुन लग्न में शुक्र ग्रह की विशेष स्थिति के बारे में जानकारी देंगे। 

ज्योतिष शास्त्र की विशेष गणना के अनुसार, मिथुन लग्न के लिए शुक्र ग्रह की महादशा को अनुकूल प्रभाव देने वाली कहा जा सकता है। क्योंकि, शुक्र ग्रह की महादशा के दौरान जातक को अपने जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। लेकिन, यदि अशुभ ग्रहों के साथ युति में हो तो, यह जातक के आर्थिक पक्ष को भी प्रभावित करता है। 

कुल-मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि, इस समय जातक अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में बहुत सक्षम होता है। इसके साथ ही महादशा का यह समय जातक के जीवन में नई चीजों की प्राप्ति के साथ-साथ नए रोमांस की शुरुआत का भी का समय होता है। ऐसे जातक अपने आस-पास के लोगों से घुल-मिल जाता है और कई नए रिश्ते भी बनाता है।

इसके साथ ही, ऐसे जातक का स्वभाव बहुत सकारात्मक होता है। और इस समय जातक को अपने भाग्य का भी अच्छा साथ मिलता है। ऐसे जातक को अधिकांश लाभ दूसरों के प्रयासों से भी मिल जाते हैं। शुक्र के शुभ प्रभाव में जातक को, लेखन, अभिनय, नृत्य, संगीत से जुड़ने के नए व अच्छे अवसर मिलते हैं। ऐसे स्थानों पर वे अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल होते हैं। यानी इस महादशा के दौरान जातक को जीवन में सफलता की सुनहरी सीढ़ी चढ़ने का अवसर मिलता है। चलिए, आगे के लेख में हम मिथुन लग्न के लिए शुक्र ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभावों के बारे में जानेंगे-

ज्योतिष शास्त्र की विशेष गणना के अनुसार, मिथुन लग्न में जन्म लेने वाले जातक के शरीर का रंग गेहुआं तथा चेहरा गोल होता है। ऐसे जातक, वह स्त्रियों में आसक्त , नृत्य- संगीत- वाघ आदि का प्रेमी, हास्य प्रवीण, दूत- कर्म करने वाला, मधुर भाषी, विनम्र, शिल्पज्ञ, विषयी, चतुर, कवि, होते हैं। 

स्वभाव से ये जातक, परोपकारी, सुखी, तीर्थयात्री, गणितज्ञ, ऐश्वर्यवान, बहु संतति एवं मित्रवान, सुशील, दानी, अनेक प्रकार के भोगों का उपयोग करने वाला, राजा के करीब रहने वाले और सुन्दर केशों वाले होते हैं। चलिए, आगे के लेख में हम मिथुन लग्न के लिए शुक्र ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभावों के बारे में जानेंगे- 

  1. शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक सुंदर, आकर्षक, मिलनसार और कलात्मक (संगीत, नृत्य, अभिनय) होता है।
  2. इस के शुभ प्रभाव से जातक को धन, वाणिज्य, व्यापार, और सभी प्रकार के सुख-सुविधाओं में लाभ मिलता है, ऐसे जातक का भाग्योदय विवाह के बाद होता है।
  3. शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक बुद्धिमान, रचनात्मक, और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करते हैं कुंडली के पांचवे भाव में शुक्र हो तो जातक सफल होता है।
  4. इस के शुभ प्रभाव से जातक को प्रेम संबंधों में सफलता, सुंदर जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन के योग बनते हैं, प्रेम विवाह की संभावना होती है।
  5. शुक्र के अन्य ग्रहों के साथ शुभ प्रभाव से ‘कुलदीपक योग’ बनता है और जीवन में जातक बहुत उन्नति प्राप्त करता है। 
  1. जन्म कुंडली के आठवें या छठे भाव में शुक्र ग्रह के होने पर जातक को स्वास्थ्य समस्याएं, अचानक धन हानि, और जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि,यहां यह मारक ग्रह बन सकता है।
  2. शुक्र ग्रह की सूर्य, शनि, राहु, या केतु के साथ युति होने पर मनोवृत्ति में अस्थिरता, निर्णय लेने में कठिनाई, और रिश्तों में समस्या आती है।
  3. इस के अशुभ प्रभाव से जातक को अत्यधिक भोग-विलास की इच्छा होती है, जो संतुलन बिगड़ने पर कष्ट का कारण बनती हैं।
  4. शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव या पीड़ित होने पर महिलाओं से संबंधित मामलों में या स्त्रियों के साथ संबंधों में दिक्कत आ सकती है और उनके साथ बातचीत में समस्या आती है। 

लग्नस्थ मिथुन राशि में शुक्र पांचवे और बारहवें भाव का स्‍वामी होता है। पंचमेश होने के कारण, वह बुद्धि, आत्मा, स्मरण शक्ति, विद्या ग्रहण करने की शक्ति, नीति, आत्मविश्वास, प्रबंध व्यवस्था, देव भक्ति, देश भक्ति, नौकरी का त्याग, धन मिलने के उपाय, अनायास धन प्राप्ति, जुआ, लाटरी, सट्टा, जठराग्नि, पुत्र संतान, मंत्र द्वारा पूजा, व्रत उपवास, हाथ का यश, कुक्षी, स्वाभिमान, अहंकार जैसे विषयों का कारक होता है। 

साथ ही, द्वादशेश होने के कारण निद्रा, यात्रा, हानि, दान, व्यय, दंड, मूर्छा, कुत्ता, मछली, मोक्ष, विदेश यात्रा, भोग ऐश्वर्य, लम्पट गिरी, परस्त्री गमन, और व्यर्थ भ्रमण जैसे विषयों का कारक बनता है। किसी जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में शुक्र बलवान और शुभ प्रभाव में हो तो, जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। लेकिन, कमजोर और पाप ग्रहों के प्रभाव में होने पर जातक को अनेक समस्याओं और अशुभ फल ही मिलते हैं।

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र देवता इस लग्न कुंडली में पांचवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। तुला शुक्र देव की मूल त्रिकोण राशि है, वह कुंडली के मूल त्रिकोण भावों में आती है। लग्नेश बुध व शुक्र देवता मित्र ग्रह हैं। इस कारण शुक्रदेव इस लग्न कुंडली के अति योगकारक ग्रह माने जाते हैं।
  • जन्म कुंडली के भावों की बात करें तो, पहले, दूसरे, पांचवें, सातवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुक्र देवता अपनी दशा व अन्तरा में शुक्र ग्रह के प्रभाव शुभ होते हैं।
  • कुंडली के तीसरे, चौथे, छठे, आठवें, और बारहवें भाव में शुक्र देवता यदि उदय अवस्था में स्थित हैं तो वें कुंडली के मारक ग्रह बन जाते हैं। लेकिन, ज्योतिष में, शुक्र के लिए दान और पाठ करके उनके मारकेत्व को कम किया जाता है।
  • किसी भी भाव में शुक्र ग्रह यदि सूर्य ग्रह के साथ विराजमान हो तो, अस्त अवस्था में आ जाते हैं।
  • कुंडली में जब लग्नेश बुध देवता बलवान होंगे, तो, छठे, आठवें और बारहवें भाव में शुक्र ग्रह विपरीत राजयोग में आते हैं। विपरीत राजयोग में आने पर शुक्र देवता शुभ फल देते हैं।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों के अनुसार, मिथुन लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता और शुभ ग्रह चंद्रमा है। धनेश चंद्र की शुभ स्थिति से, धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रहों की स्थिति और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों की दृष्टि से जातक की आर्थिक स्थिति से आय के स्रोत और धन संपदा का पता चलता है। 

ग्रहों की बात करें तो, मिथुन लग्न में लग्नेश बुध, पंचमेश शुक्र व भाग्येश शनि ग्रह की अनुकूल स्थितियां मिथुन लग्न के जातकों के लिए धन, ऐश्वर्य एवं वैभव को बढ़ाने में सहायक होती हैं। वैसे मिथुन लग्न के लिए मंगल, गुरु, शनि और सूर्य अशुभ है। अकेला एक शुक्र ग्रह ही शुभ ग्रह है। चंद्रमा मारक होते हुए भी मारक का काम नहीं करेगा, रवि (सूर्य)निष्फल होता है। मिथुन लग्न के जातकों के लिए शुक्र पांचवें (संतान, बुद्धि, प्रेम) और बारहवें (व्यय, विदेश) भाव का स्वामी होकर एक शुभ (योग कारक) ग्रह माना जाता है।

मिथुन लग्न में शुक्र ग्रह!
  1. शुक्र के बीज मंत्र का जाप “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” प्रतिदिन 108 बार करें।
  2. मिथुन लग्न के लिए, शुक्रवार के दिन श्री सूक्त का पाठ करना लक्ष्मी माता की पूजा अत्यंत लाभकारी होती है। 
  3. शुक्रवार के दिन, सुबह सफेद वस्तुओं का दान करें, जैसे- चावल, दूध, दही, मिश्री, या सफेद कपड़े।
  4. जरूरतमंद महिलाओं या कन्याओं को श्रृंगार की सामग्री भेंट करने से शुक्र ग्रह शुभ फल देते हैं।
  5. हमेशा साफ और प्रेस किए हुए कपड़े पहने। फटे हुए या गंदे कपड़े पहनने से शुक्र ग्रह खराब होता है।
  6. नियमित रूप से इत्र या चंदन के परफ्यूम का प्रयोग करें।
  7. अपने चरित्र को शुद्ध रखें और जीवनसाथी का सम्मान करें।
  8. मिथुन लग्न के लिए ओपल या हीरा धारण करना बहुत शुभ होता है। (रत्न धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएं, विशेषकर यदि शुक्र आपकी कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठा हो)। 
  9. शुक्रवार के दिन चीटियों को पिसा हुआ सफेद चावल और चीनी का मिश्रण खिलाएं।
  10. गौ सेवा करें और सफेद गाय को ताजी रोटी और गुड़ खिलाएं।

Q. मिथुन लग्न में शुक्र ग्रह के प्रभाव क्या होते हैं?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मिथुन लग्न में शुक्र शुभ फलदायी होता है। जिसके शुभ प्रभाव में जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, कला, संगीत, साहित्य और मीडिया में सफलता मिलती है। साथ ही ऐसे जातक, कल्पनाशील, बुद्धिमान और संचार के मामलों में श्रेष्ठ होते हैं।

Q. मिथुन लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन सा है?

An. मिथुन लग्न के लिए मंगल, गुरु, शनि और सूर्य अशुभ है, अकेला एक शुक्र ग्रह ही शुभ ग्रह है।

Q. मिथुन लग्न के लिए शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. जन्म कुंडली के आठवें या छठे भाव में शुक्र ग्रह के होने पर जातक को स्वास्थ्य समस्याएं, अचानक धन हानि, और जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि,यहां यह मारक ग्रह बन सकता है।

Q. मिथुन लग्न के लिए शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए क्या करें?

An. मिथुन लग्न के लिए, शुक्रवार के दिन श्री सूक्त का पाठ करना लक्ष्मी माता की पूजा अत्यंत लाभकारी होती है। साथ ही, शुक्रवार के दिन, सुबह सफेद वस्तुओं का दान करें, जैसे- चावल, दूध, दही, मिश्री, या सफेद कपड़े।

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