मेष लग्न में सूर्य ग्रह के विशेष फलादेश ! जान लो, सूर्य ग्रह की बहुत ही शुभ व योगकारक स्थिति, प्रभाव व ये आसान उपाय

मेष लग्न में सूर्य

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ज्योतिष शास्त्र में हर एक ग्रह की अपनी एक विशेष भूमिका होती है। इस भूमिका के सभी 12 राशियों में भी अलग-अलग फलादेश होते हैं। ये फलादेश ग्रह की स्थिति पर निर्भर करते हैं।  यदि किसी ग्रह की स्थिति कोई राशि के लिए शुभ व योग कारक है तो, परिणाम भी शुभ और सकारात्मक ही होंगे।  

लेकिन, यदि यह स्थिति अशुभ दृष्टि, पीड़ित प्रभाव या मारक है तो, परिणाम अशुभ या नकारात्मक हो सकते हैं।  तो आइए, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको मेष लग्न में, सूर्य ग्रह की विशेष स्थिति और फलादेश के बारे में, विस्तार से जानकारी देंगे।  सम्पूर्ण जानकारी के लिए हमारे साथ लेख में अंत तक बने रहिए। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष लग्न में आत्मा और मान-प्रतिष्ठा के कारक ग्रह सूर्य पंचम भाव (सिंह राशि) का स्वामी होकर बहुत ही शुभ और योग कारक भूमिका निभाते हैं। जो जातक को त्रिकोण के स्वामी होने से धन, संतान, शिक्षा और रचनात्मकता प्रदान करता है। 

इसके साथ ही, मेष लग्न में उच्च का होकर यह जातक को अद्भुत आत्मविश्वास, श्रेष्ठ नेतृत्व और साहस प्रदान करते है।  साथ ही, कुंडली के पांचवें या दसवें भाव में हो होने पर यह जातक के लिए राजयोग व उच्च सरकारी पद देने वाले होते हैं। 

ज्योतिष में, मेष लग्न के लिए सूर्य ग्रह के कुछ विशेष फलादेश बताए गए हैं। जिसके अनुसार, इस लग्न में यदि वे उच्च के व पहले भाव में हो तो, यह जातक को साहसी, प्रभावशाली व्यक्तित्व, कुशल नेतृत्व क्षमता और सरकारी क्षेत्र में बहुत ही, सफल बनाते हैं। आइए अन्य विशेष स्थिति के बारे में जान लेते हैं-

  • दसवें भाव में, मकर राशि में होने पर यह जातक को करियर में अपार सफलता, मान-प्रतिष्ठा और उच्च सरकारी पद का आशीर्वाद देते हैं।
  • सिंह राशि के पांचवें भाव में होने पर यह जातक को, संतान सुख, अच्छी बुद्धि, शिक्षा और रचनात्मक कार्य में रुचि देने वाले होते हैं।
  • वृषभ राशि के दूसरे भाव में, सूर्य की स्थिति जातक को आर्थिक मामलों में संघर्ष की स्थिति देती है ऐसे जातक की वाणी प्रभावशाली होती है लेकिन, ये अहंकारी होते हैं। 
  • मीन राशि में बारहवें भाव में इस ग्रह की स्थिति, जातक के लिए विदेश यात्रा, आध्यात्मिकता और अनावश्यक खर्च की सूचक है। 
  • इसके अलावा, यदि किसी जातक की कुंडली में, सूर्य पीड़ित न हो तो यह अच्छी पाचन शक्ति देता है, लेकिन, पाप ग्रहों के प्रभाव में तो यह जातक को पेट संबंधी समस्याएं दे सकता है। 

ज्योतिष गणना में, सूर्य, मेष लग्न में अपनी दशा-अंतर्दशा में बहुत से अद्भुत परिणाम देने के कारक होते हैं।  ऐसे में जातक को सरकारी कार्यों से लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत ही सफलता प्राप्त होती है। 

इस लग्न कुंडली में, सूर्य देव पंचमेश (पांचवें भाव के स्वामी ) होने की भूमिका में होते हैं। इसलिए, इस कुंडली के लिए वे बहुत ही, योग कारक व शुभ प्रभाव देने वाले होते हैं। यदि हम कुंडली के भावों की बात करें तो, इस लग्न के तीसरे, छठे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में सूर्य देव अशुभ परिणाम देते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में, सूर्य ग्रह को, प्रकाश फैलाने वाला ग्रह ही नहीं, बल्कि आत्मा, और मान-प्रतिष्ठा के साथ पिता का कारक ग्रह भी कहा जाता है। मेष लग्न की कुंडली में, यह ग्रह पंचम भाव का स्‍वामी (पंचमेश) होते है। जो कि, जातक के लिए बुद्धि, आत्मा, स्मरण शक्ति, विद्या ग्रहण करने की शक्ति, नीति, आत्मविश्वास, प्रबंध व्यवस्था, भक्ति, देश भक्ति, नौकरी का त्याग, धन प्राप्ति के कारक होते हैं। 

इसके अलावा, अनायास धन प्राप्ति, जुआ, लाटरी, सट्टा, जठराग्नि, पुत्र संतान, मंत्र द्वारा पूजा, व्रत उपवास, हाथ का यश, कुक्षी, स्वाभिमान, अहंकार को भी व्यक्त करता है। जन्म कुंडली में सूर्य की दशा काल के प्रभाव भी जातक के लिए अन्य ग्रहों की स्थिति और प्रभाव के अनुसार, शुभ या अशुभ होते हैं। इसकी सही जानकारी के लिए कुंडली में सूर्य ग्रह की सटीक स्थिति का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, कुंडली में बली सूर्य शुभ प्रभाव व अच्छे फलों में वृद्धि करने के कारक होते हैं। कमजोर सूर्य इन फलों में कमी और अशुभता के कारक होते हैं।

  1. मेष लग्न में सूर्य पंचम भाव का स्वामी होकर सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करते हैं। जिससे जातक तीव्र बुद्धिमान और साहसी बनता है।
  2. यदि सूर्य उच्च (प्रथम भाव/मेष राशि) या शुभ भाव में हो, तो ऐसे जातक को सरकारी नौकरी, उच्च पद और यश-कीर्ति की प्राप्ति होती है।
  3. इस लग्न में, सूर्य होने पर जातक को उत्तम संतान, उच्च शिक्षा और सट्टे/लाटरी से लाभ के योग बनते हैं।
  4. सूर्य जब भाग्य स्थान (नवम) या कर्म स्थान (दशम) में हो, तो जातक को अपने भाग्य का साथ मिलता है और करियर में भी स्थिर सफलता मिलती है। 
  1. इस लग्न में यदि सूर्य ग्रह छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो नेत्र विकार, हृदय रोग, सिरदर्द, पेट में जलन या अनिद्रा जैसी समस्याएं देने के कारक होते हैं।
  2. अत्यधिक बलवान या पापी ग्रहों (राहु/शनि) के साथ सूर्य जातक को अहंकारी, आक्रामक और चिड़चिड़ा स्वभाव देने के कारक होते हैं साथ ही ऐसे जातक के पारिवारिक रिश्तों में भी तनाव रहता है।
  3. नीच राशि (तुला/सातवें भाव) में होने पर जातक को धन हानि, कर्ज और पिता के साथ संबंधों में तनाव होता है।

ज्योतिष गणना के अनुसार, मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता और सबसे अधिक शुभ ग्रह,  शुक्र है। क्योंकि, धनेश शुक्र की शुभ स्थिति से, धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रह की स्थिति से और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों की दृष्टि से जातक की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत व चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी मिलती है। इसके अलावा, मेष लग्न के लिए भाग्येश गुरु-बृहस्पति व लग्नेश मंगल की अनुकूल स्थितियां धन, ऐश्वर्य व वैभव में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। 

वैसे मेष लग्न के लिए शनि, बुध और शुक्र ग्रह अशुभ फलदायी होते हैं। गुरु व सूर्य शुभ फलदायक ग्रह हैं। सूर्य (पंचमेश) यानी शुभ और योगकारक होने से प्रबल राजयोग प्रभाव देने वाले ग्रह हैं। जो जातक को उच्च आत्मविश्वास, बुद्धि, और प्रशासनिक क्षमता प्रदान करते हैं। 

ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि, रत्न कभी भी राशि के अनुसार नहीं पहनना चाहिए। रत्न हमेशा लग्न, दशा, महादशा के अनुसार ही पहनना चाहिए। लग्न के अनुसार मेष लग्न के जातकों के लिए मूंगा, मोती, माणिक, और पुखराज रत्न श्रेष्ठ फलदायी होते हैं वे उन्हें धारण कर सकते है। 

लेकिन, लग्न के अनुसार इस लग्न के जातकों को हीरा, पन्ना या नीलम रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। साथ ही, कोई रत्न धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिषी की सलाह व कुंडली में ग्रहों की स्थिति की जानकारी के बाद ही धारण करना चाहिए। रत्न को पूरे विधि-विधान सही तिथि और सही तरीके से ही धारण करने पर पूर्ण फल मिलते हैं।

जरूरी जानकारी- सूर्य के साथ राहु या शनि ग्रह की युति होने पर ही जातक को अशुभ फल मिलते हैं। अन्यथा मेष लग्न में सूर्य ग्रह की स्थिति शुभ और योग कारक होने से सदैव अच्छे परिणाम ही देते हैं।

मेष लग्न में सूर्य -1

ज्योतिष शास्त्र में, मेष लग्न में सूर्य पांचवे भाव यानी, शिक्षा, संतान, बुद्धि के स्वामी होकर बहुत ही, शुभ और योगकारक ग्रह होते है। लेकिन, अन्य स्थिति व अशुभ प्रभाव से बचने के लिए हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों द्वारा, सूर्य को मजबूत करने व शुभ प्रभाव के लिए कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। जो इस प्रकार हैं-

  1. प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे, लाल चन्दन मिश्रित जल से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  2. सूर्य देव के बीज मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ ह्रीं सूर्याय नमः” का 11 या 108 बार जाप करें।
  3. सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है।
  4. रविवार के दिन, को गेहूं, गुड़, तांबा या लाल रंग के वस्त्र दान करें। बंदरों को गुड़-चना खिलाना से भी सूर्य के शुभ प्रभाव मिलते है।
  5. पिता और पिता के समान सभी पुरुषों का सम्मान करें। जीवन में, अनुशासन का पालन करें और प्रतिदिन माता के चरण स्पर्श करें।
  6. सूर्य ग्रह के लिए, किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से माणिक्य (Ruby) धारण कर सकते हैं। जिससे आत्मविश्वास बढ़ाता है और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  7. रविवार को नमक का सेवन न करें। 

Q. मेष लग्न में सूर्य ग्रह के क्या प्रभाव होते हैं?

An. मेष लग्न में आत्मा और मान-प्रतिष्ठा के कारक ग्रह सूर्य पंचम भाव (सिंह राशि) का स्वामी होकर बहुत ही शुभ और योग कारक भूमिका निभाते हैं। जो जातक को त्रिकोण के स्वामी होने से धन, संतान, शिक्षा और रचनात्मकता प्रदान करता है।

Q. मेष लग्न में सूर्य के शुभ प्रभाव में क्या होता है?

An.मेष लग्न में सूर्य पंचम भाव का स्वामी होकर सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करते हैं। जिससे जातक तीव्र बुद्धिमान और साहसी बनता है। यदि सूर्य उच्च (प्रथम भाव/मेष राशि) या शुभ भाव में हो, तो ऐसे जातक को सरकारी नौकरी, उच्च पद और यश-कीर्ति की प्राप्ति होती है।

Q. मेष लग्न के लिए शुभ व धन प्रदाता ग्रह कौन से हैं?

An. मेष लग्न के लिए भाग्येश गुरु-बृहस्पति व लग्नेश मंगल की अनुकूल स्थितियां धन, ऐश्वर्य व वैभव में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। वैसे मेष लग्न के लिए शनि, बुध और शुक्र ग्रह अशुभ फलदायी होते हैं। गुरु व सूर्य शुभ फलदायक ग्रह हैं। सूर्य (पंचमेश) यानी शुभ और योगकारक होने से प्रबल राजयोग प्रभाव देने वाले ग्रह हैं।

Q. मेष लग्न को कौन सा रत्न पहनना शुभ होता है?

An. ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि, रत्न कभी भी राशि के अनुसार नहीं पहनना चाहिए। रत्न हमेशा लग्न, दशा, महादशा के अनुसार ही पहनना चाहिए। लग्न के अनुसार मेष लग्न के जातकों के लिए मूंगा, मोती, माणिक, और पुखराज रत्न श्रेष्ठ फलदायी होते हैं वे उन्हें धारण कर सकते है।

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