मेष लग्न में मंगल ग्रह की विशेष स्थिति ! लग्नेश की स्थिति, प्रभाव और महत्वपूर्ण फलादेश व लाभकारी उपाय

मेष लग्न में मंगल ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र में, इस लग्न में जन्म लेने वाले जातक शारीरिक रूप से दुबले – पतले शरीर वाला, अधिक बोलने वाला, उग्र स्वभाव वाला, रजोगुणी, अहंकारी, चंचल, बुद्धिमान, धर्मात्मा, अत्यंत चतुर, अल्प संततिवान, अधिक पित्त वाला, सब प्रकार के भोजन करने वाला, उदार, कुल दीपक तथा स्त्रियों से अल्प स्नेह या द्वेष रखने वाली प्रवृत्ति का होता है। 

शारीरिक रूपरेखा की बात करें तो, इनके चेहरे का रंग लालिमा लिए होता है। इन जातकों को अपने जीवनकाल में, विभिन्न आयु में सुख और दुःख का सामना करना पड़ेगा इसके साथ ही माध्यम अवस्था से लेकर, शारीरिक कष्ट और धन- हानि का सामना करना पड़ता है।

लेकिन, साथ ही, उन्हें अपनी आयु के सोलहवें  वर्ष से लेकर इक्यानवे वर्ष में धन की प्राप्ति , सभी प्रकार के भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति, वाहन सुख  और भाग्य का साथ भी मिलता है।  तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको मेष लग्न के लिए मंगल ग्रह  की विशेष स्थिति और प्रभाव की जानकारी देंगे। पूरी जानकारी के लिए हमारे साथ लेख में अंत तक बने रहिए। और हमें अपने महत्पूर्ण सुझाव जरूर दें।

इस लग्न में मंगल प्रथम भाव (स्वराशि) में होने पर ‘रूचक नामक’ पंच महापुरुष राजयोग का निर्माण करते हैं। जिससे जातक साहसी, नेतृत्व क्षमता वाला, दृढ़ निश्चयी, तेजस्वी और बहुत ऊर्जावान होता है। मंगल के मजबूत प्रभाव से जातक आत्म-केंद्रित, स्पष्टवादी और अधिक क्रोध करने वाला होता है। लेकिन, लग्न के स्वामी और अष्टमेश (8th house) में होकर मंगल स्वास्थ्य, लंबी उम्र और आत्मबल में वृद्धि के संकेत देता है। लेकिन, अधिक क्रोध के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में तनाव की स्थितियां बनती है। 

इस लग्न में, यहाँ मंगल के स्वग्रही होने से जातक बहुत ही पराक्रमी और निडर बनता है। इससे जातक के व्यक्तित्व में आकर्षण और तीव्र ऊर्जा मिलती है, लेकिन ऐसा जातक बहुत ही दबंग स्वभाव का होता है।

उच्च मंगल लग्न के दसवें, भाव में हो तो, यह जातक के करियर में बहुत ही सफलता, पुलिस/सेना/तकनीकी क्षेत्र में उच्च पद, और समाज में मान-सम्मान देने के कारक होता है। यहाँ मंगल की लग्न भाव में, दृष्टि होने से जातक को शारीरिक रूप से स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट बनाता है।

आठवें भाव पर मंगल की दृष्टि होने से लग्न कुंडली के जातक को लंबी आयु प्राप्त होती है। ऐसे जातक को किसी आकस्मिक दुर्घटना या शल्य चिकित्सा के मामलों में सावधान रहने की जरूरत होगी।

लग्न कुंडली के चौथे भाव में, मंगल की नीच दृष्टि होने पर वे जातक को माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव या संपत्ति/वाहन सुख से वंचित कर सकते हैं। 

लग्न कुंडली में, मंगल की महादशा में जातक को धन, मान-सम्मान, और सभी प्रकार सुख व उत्साह की प्राप्ति होती है। इस महादशा के चलते जातक को उनके कार्यक्षेत्र में आगे रहने की प्रवृत्ति मिलती है। यदि मंगल शुभ प्रभाव में हो, तो जातक को वे, बहुत ऊँचे स्तर तक सफलता देने का कार्य करते हैं। 

लेकिन, हमारे ज्योतिष आचार्यों का कहना है कि, जब भी कुंडली में मंगल की महादशा का प्रभाव हो तो, इस स्थिति में जातक को कुछ विशेष सावधानियां रखनी चाहिए। जैसे, बहुत अधिक क्रोध और जल्दबाजी से बचें। वैवाहिक जीवन में तालमेल और संयम बनाए रखें। नहीं तो रिश्तों में मनमुटाव या अलगाव हो सकता है।

  • मेष लग्न की कुण्डली में मंगल ग्रह उनके लिए पहले भाव यानि (लग्न) भाव का स्वामी तथा आठवें भाव का स्वामी है। राशियों की बात करें तो, मंगल की दो राशियाँ होती हैं – मेष राशि व वृश्चिक राशि। इसलिए लग्न भाव का स्वामी होने के कारण यह कुंडली का सबसे पहला योग कारक ग्रह माने जाएंगे।
  • इस लग्न के लिए, दूसरा महत्वपूर्ण फलादेश यह है कि, मंगल देव लग्न कुंडली के तीसरे, चौथे, (नीच राशि ), छठे, आठवें व बारहवें भाव में विराजमान हो तो, मंगल देव अपने बलि प्रभाव के अनुसार जातक को अशुभ फल देंगे। क्योंकि यहां वह अशुभ या गलत भाव में होने के कारण अपनी योगकारकता के प्रभाव को भी खो देते हैं।
  • इसके साथ ही, यदि मंगल देव जन्म लग्न कुंडली के पहले, दुसरे, पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें और  ग्यारहवें भाव में हैं तो वे अपनी क्षमतानुसार दशा/अंतर में जातक के लिए शुभ फलदायक होते हैं।
  • इस लग्न के लिए मंगल की स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण फलादेश यह है कि, इस लग्न में मंगल विपरीत राजयोग में नहीं आते हैं, क्योंकि वे यहाँ लग्नेश भी है।  विपरीत राजयोग के लिए लग्नेश का शुभ व बलि स्थिति में होना बहुत अनिवार्य है।

इस लग्न के लिए मंगल आपके पहले और आठवें भाव के स्वामी है। यहाँ, लग्नेश होने के फलस्वरूप वे जातक के रूप, चिन्ह, जाति, शरीर, आयु, सुख दुख, विवेक, मस्तिष्क, स्वभाव, आकृति और संपूर्ण व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

मेष लग्न में अगर मंगल बलशाली स्थिति में हो तो, जातक को में शुभ फल अधिक प्राप्त होते हैं, बलवान और शुभ मंगल की स्थिति जातक के वृद्धि कारक और योगकारक होगी। जबकि कमजोर मंगल, इन परिणामों में कमी को दर्शाते है।

इसके अलावा, लग्नेश के साथ साथ मंगल आठवें भाव का प्रतिनिधि करते हैं यानि यानि अष्टमेश भी है। अष्टमेश होने फलस्वरूप मंगल, व्याधि, जीवन, आयु, मृत्यु का कारण, मानसिक चिंता, समुद्र यात्रा, नास्तिक विचारधारा, ससुराल, दुर्भाग्य, दरिद्रता, आलस्य, गुह्य स्थान, जेल यात्रा, अस्पताल, चीर फाड़ ऑपरेशन, प्रेत, बाधा, जादू टोना, दुख इत्यादि का भी प्रतिनिधित्व करते है। 

यानी ऊपर बताए गए इन, समस्त फलों के बारे में मंगल की स्थिति का अध्ययन करके ही जानकारी प्राप्त की जाती है। मेष लग्न में मंगल लग्नेश होकर अष्टमेश है, इसलिये उसे अष्टमेश होने का दोषी नहीं माना जाएगा। इसलिए , अगर मंगल शुभ और बलि प्रभाव में हो तो शुभ फलों की अतिशय वृद्धि करते है। और अशुभ या नीच, स्थिति में कमजोर होने से अशुभ फल भी देते है।

इस लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता ग्रह शुक्र है। यहां धनेश शुक्र की शुभ स्थिति से, जातक के धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रह की स्थिति से और दृष्टि से जातक की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत व धन संपत्ति के बारे में जानकारी मिलती है। 

इसके अलावा, भाग्येश बृहस्पति व लग्नेश मंगल की अनुकूल स्थितियां मेष लग्न वालों के लिए धन, ऐश्वर्य व वैभव में, वृद्धि करने में सहयोग करती हैं। वैसे मेष लग्न के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ फलदायी ग्रह हैं। गुरु व सूर्य शुभ फलदायी हैं।

इस लग्न में मंगल लग्नेश (पहले भाव) और अष्टमेश होकर परम योगकारक और शुभ ग्रह की भूमिका और प्रभाव देने वाले होते हैं। जिसके फलस्वरूप जातक को साहसी, ऊर्जावान, स्पष्टवादी और श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता मिलती है। 

इसके अलावा, अपनी स्वराशि यानी मेष में होने पर ‘रूचक योग’ भी बनता है, जिसके शुभ प्रभाव में जातक को धन-संपत्ति, सफलता और दीर्घायु मिलती है। हालांकि, पाप प्रभाव में होने पर यह अत्यधिक क्रोध, जिद्दीपन, वैवाहिक कलह और शारीरिक चोट का कारण भी बन सकता है। 

  • साहसी, निडर और सेनापति जैसा व्यक्तित्व।
  • प्रशासनिक सेवाओं, रक्षा, इंजीनियरिंग, या स्वतंत्र व्यवसाय में बड़ी सफलता।
  • मेहनत से प्रॉपर्टी और संपत्ति मिलना।
  • दीर्घायु और शारीरिक गतिविधियों में कुशल।
  • लग्न में मंगल ‘रूचक पंच महापुरुष योग’’ बनता है, जो अत्यंत शुभ प्रभाव देता है। 
  • अधिक क्रोध व छोटी बातों पर नाराज होने वाला।
  • अत्यधिक गर्मी, पित्त विकार, सिर या माथे पर चोट का निशान।
  • सातवें,भाव पर दृष्टि के कारण मांगलिक दोष व वैवाहिक जीवन में तनाव या विलंब।
  • अत्यधिक दबंगता और तानाशाही रवैया 
  • संबंधों में कड़वाहट या अलगाव। 
मेष लग्न में मंगल ग्रह

मेष लग्न में, मंगल ग्रह को मजबूत और शांत करने के लिए सबसे प्रभावी उपाय इस प्रकार हैं-

  • प्रतिदिन या हर मंगलवार हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को बूंदी का प्रसाद अर्पित करें।
  • किसी मंदिर या जरूरतमंद को मंगलवार के दिन गुड़, मसूर की दाल, लाल कपड़े, शहद, तांबा या लाल मिठाई का दान करें।
  • मंगलवार का व्रत रखें और इस दिन नमक का सेवन न करें।
  • अपने पास लाल रुमाल रखें या लाल रंग के कपड़े पहनें।
  • मंगल के बीज मंत्र  ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ या ‘ॐ अं अंगारकाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • भाइयों के साथ संबंध अच्छे रखें और जमीन पर बैठकर भोजन करें।
  • जरूरतमंदों और विकलांग लोगों को मीठा भोजन कराएं।
  • कुंडली विश्लेषण और ज्योतिष की सलाह से तांबे की अंगूठी या अनामिका उंगली में मूंगा रत्न धारण करें।

कुल-मिलाकर हमें ऊपर दी गई जानकारी के अनुसार, यह ज्ञात हुआ कि, मेष लग्न में मंगल लग्नेश (प्रथम भाव) और अष्टमेश होकर अत्यंत योगकारक और बलवान ग्रह हैं जो शुभ प्रभाव देंगे। साथ ही, इनका प्रथम भाव (स्वराशि) में होने से ‘रूचक’ नामक पंच महापुरुष राजयोग भी बनाता है।

जिससे जातक साहसी, कुशल नेतृत्व क्षमता युक्त, तेजस्वी और धनवान होता है। यह जातक को अधिक ऊर्जावान बनाता है, लेकिन साथ ही अत्यधिक क्रोधी और जल्दबाज भी बना सकता है। जिससे मांगलिक दोष विवाह में विलंब/असंतोष की संभावना रहती है। 

सावधानी- लग्न कुंडली में, मंगल बली होने पर जातक को शुभ व अद्भुत परिणाम देता है, लेकिन निर्बल या पाप प्रभाव में होने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं , बवासीर, आर्थिक कष्ट और शत्रु पीड़ा भी दे सकता है। इसलिए, इस समय जातक अहंकार और अत्यधिक क्रोध से बचना चाहिए।

Q.  मेष लग्न में मंगल ग्रह का क्या महत्व है?

An. मेष लग्न में मंगल लग्नेश और अष्टमेश होता है, इसलिए यह अत्यंत प्रभावशाली और योगकारक ग्रह माना जाता है। यह जातक के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, आयु और साहस को प्रभावित करता है।

Q. क्या मेष लग्न में मंगल राजयोग बनाता है?

An. हाँ, जब मंगल प्रथम भाव (मेष राशि) में होता है, तब ‘रूचक पंच महापुरुष राजयोग’ बनता है, जो जातक को साहसी, नेतृत्व क्षमता वाला और सफल बनाता है।

Q. मेष लग्न में मंगल के शुभ प्रभाव क्या होते हैं?

An. मंगल के शुभ प्रभाव से जातक को साहस, ऊर्जा, करियर में सफलता, धन-संपत्ति, नेतृत्व क्षमता और दीर्घायु प्राप्त होती है।

Q. मेष लग्न में मंगल के अशुभ प्रभाव क्या हैं?

An. अशुभ स्थिति में मंगल अधिक क्रोध, वैवाहिक तनाव, चोट, पित्त रोग और संबंधों में कड़वाहट का कारण बन सकता है।

Q. मंगल की महादशा मेष लग्न वालों के लिए कैसी होती है?

An. मंगल की महादशा में जातक को धन, सफलता और मान-सम्मान मिलता है, लेकिन क्रोध और जल्दबाजी से बचना जरूरी होता है।

Q. मेष लग्न में मंगल के लिए कौन से उपाय करने चाहिए?

An. मंगल को मजबूत करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार व्रत, लाल वस्तुओं का दान, और मंगल मंत्र जाप करना लाभकारी होता है।

Q.  क्या मेष लग्न में मांगलिक दोष बनता है?

An. हाँ, मंगल की दृष्टि या स्थिति के अनुसार मांगलिक दोष बन सकता है, जिससे विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में तनाव आ सकता है।

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