मेष लग्न में शुक्र ग्रह ! भोग विलासिता, प्रेम व सौन्दर्य के कारक ग्रह की विशेष स्थिति, प्रभाव, योग और उपाय |

मेष लग्न में शुक्र ग्रह

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी नौ ग्रहों में, शुक्र ग्रह ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जो भावनाओं, विलासिता, सौंदर्य और प्रेम का कारक है। जिनके प्रभाव के बिना, कोई भी अपने जीवन में रोमांस, लगाव, आकर्षण को समझ ही नहीं सकता। क्योंकि, यह हमारे जीवन के आरंभ का विशेष आधार भी होते है। 

जन्म कुंडली में, शुक्र का किसी भी राशि में जाना उस राशि के साथ मिलकर शुभ और अशुभ फल कारक होता है। जैसे, शुक्र अगर मेष राशि में स्थित है तो, यह एक अत्यंत ही उत्साह का आधार माना जाएगा। इसी के साथ शुक्र ग्रह के प्रभाव मेष लग्न के लिए कुछ स्थितियों में विशेष तो कुछ मामलों में अशुभ फलदायी भी होते हैं। 

तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख   में हम आपको मेष लग्न में शुक्र ग्रह  के शुभ\अशुभ प्रभाव के साथ कुछ आसान उपाय की जानकारी भी देंगे। हमारे साथ लेख के अंत तक बने रहें और लेख में दी गई जानकारी के लिए, हमें अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर दें।

ज्योतिष की दृष्टि से समझें तो, मेष राशि एक तीव्र, क्रियाशील, उत्साहित, कामुक, जोश से युक्त और परिपूर्ण राशि है। इसलिए, जब इस राशि में, शुक्र के प्रभाव होंगे तो, वे इन गुणों में अधिक वृद्धि करेंगे। लेकिन, इसके साथ ही कुछ परिणाम अविश्वसनीय और अशुभ भी हो सकते हैं। 

क्योंकि, मेष राशि मंगल ग्रह द्वारा शासित राशि है। जो, कि अग्नि तत्व युक्त और गतिशील के गुण वाली होती है। वहीं शुक्र में भी अपनी एक अलग ही ऊर्जा और गुण होते हैं। जो कि, आनंद, आकर्षण और शुभता का प्रतीक है। शुक्र जब इस राशि में होता है तो यह योग बहुत ही कमाल का योग बनता है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों   के दृष्टिकोण से, मेष लग्न में शुक्र ग्रह का संयोग बहुत ही, रोमांचक और शुभ प्रभावशाली होगा। जिससे जातक के अन्दर एक नयी ऊर्जा और आकर्षण का संचार होता है।  

इसके साथ ही, मेष राशि, मंगल ग्रह द्वारा प्रभावित होने के कारण शुक्र के साथ मिलकर एक ऊर्जावान स्थिति कहलाती है। वैसे, तो, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल और शुक्र का संबंध बहुत अधिक अनुकूल नहीं माना जाता है, किंतु शुक्र का मेष में आना उदासीनता से अलग प्रभाव डालने वाला होता है। यह जातक के भीतर उन्मुख होने की प्रवृत्ति डालने वाली होती है। साथ ही ऐसे जातक, अभिव्यक्ति में मुखर होते है। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष लग्न में शुक्र ग्रह धन और कुंडली के सातवें भाव के स्वामी है, लेकिन यह मारक ग्रह भी होते हैं। इसलिए इसकी स्थिति कुंडली के हर भाव के अनुसार अलग-अलग परिणाम देने वाली होती है। शुक्र के प्रभाव से जातक सुंदर, आकर्षक, कलात्मक होने के गुण से युक्त होते हैं। 

लेकिन, मेष लग्न में मारक होने के कारण, शुभ भावों जैसे, दूसरे, सातवें भाव में होने पर ही अधिक शुभ और धन-सुख में वृद्धि देने वाले होते हैं। जबकि, अन्य भावों में अशुभ परिणाम जैसे धन, सुख, स्वास्थ्य और संबंधों में समस्याएं देने के कारक होते हैं। और ज्योतिष में शुक्र के अशुभ प्रभावों को व उनकी दशा-अंतर्दशा की अशुभता को दान, सद्व्यवहार व पूजा से शांत किया जा सकता है। 

ज्योतिष में, मेष लग्न में जन्म लेने वाला जातक शारीरिक रूप से दुबले – पतले शरीर वाला, अधिक बोलने वाला, उग्र स्वभाव, रजोगुणी, अहंकारी, होते हैं।  स्वभाव से ये जातक, चंचल, बुद्धिमान, धर्मात्मा, अत्यंत चतुर, अल्प संततिवान, अधिक पित्त वाला, सब प्रकार के भोजन करने वाला, उदार, कुल दीपक और स्त्रियों से अल्प स्नेह या द्वेष रखने वाला होता है। 

शरीर के रंग की बात करें तो, वे, कुछ लालिमा रंग लिए होते हैं। मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आयु के छठे, आठवें, पन्द्रहवें, इक्कीसवें, छतीसवें, चालीसवें, पैंतालीसवें, छप्पनवें तथा तिरेसठवें वर्ष में शारीरिक कष्ट या धन- हानि का सामना करना पड़ता है। मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आयु के सोलहवें , बीसवें, अठाईसवें , चौतीसवें, इकतालीसवें , अड़तासलीसवें तथा इक्यानवे वर्ष में धन की प्राप्ति , वाहन सुख , भाग्य वृद्धि आदि विविद प्रकार के लाभ एवं आनंद प्राप्त होते हैं। 

शुक्र मेष लग्न में दूसरे और सातवें भावों का स्वामी होता है। जिनकी,  दशा-अंतर्दशा में वे जातक के धन, रिश्ते, कला, विलासिता और सुख-सुविधाओं को प्रभावित करते हैं। मेष लग्न में शुक्र ग्रह धन (दूसरा) और सातवें भाव (जीवनसाथी, साझेदारी) का स्वामी होता है, जो शुभ फल देता है, लेकिन यह मारक ग्रह की भूमिका में भी परिणाम देते हैं। 

इसलिए, दशा में जातक को ज्योतिष परामर्श  के साथ सावधान रहना चाहिए। लेकिन, शुभ प्रभाव में होने पर यह जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, धन, सुख, सुंदर जीवनसाथी देने के कारक भी होते हैं। और अशुभ होने पर जातक को स्वास्थ्य, रिश्तों, धन, अहंकार, स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे यौन/मधुमेह), और अनावश्यक तनाव दे सकता है।  विशेष रूप से तब जब, शुक्र ग्रह पीड़ित हो या शत्रु भाव (जैसे छठा) में विराजमान हो। 

  1. शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव में, जातक सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाला और कला प्रेमी होता है। जिससे लोग उसकी ओर आकर्षित होते हैं। 
  2. जन्म कुंडली के दूसरे भाव में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर जातक के धन, संपत्ति, वाहन, और भौतिक सुखों में वृद्धि होती है।
  3. जन्म कुंडली के सातवें भाव में शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक को सुंदर और सुखी जीवनसाथी मिलता है। और प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है। 
  4. शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक को वस्त्र, सौंदर्य उत्पाद, होटल, फैशन, इंटीरियर डिजाइन, कला, या सर्जन जैसे क्षेत्रों में सफलता मिलती है। 
  5. शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक का स्वभाव खुशमिजाज, ऊर्जावान, रोमांटिक, और सामाजिक होता है।  
  1. शुक्र के अशुभ प्रभाव से जातक को यौन समस्याएं, मधुमेह, या शारीरिक कमजोरी हो सकती है। 
  2. अशुभ शुक्र के प्रभाव में, जातक को अहंकार, झगड़े, असामंजस्य, और तलाक या पार्टनर से दूरी हो का सामना करना पड़ता है। 
  3. शुक्र के प्रभाव से जातक को, धन हानि, फिजूलखर्ची, या व्यवसाय में समस्याएँ आ सकती हैं, विशेष रूप से जब शुक्र छठे भाव में विराजमान हो। 
  4. शुक्र के अशुभ प्रभाव से जातक को अहंकार बढ़ना, मन में चंचलता, व्यसनी स्वभाव, और नकारात्मक निर्णय का सामना करना पड़ता है।  

ज्योतिष शास्त्र की विशेष गणना के अनुसार, मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता ग्रह शुक्र ग्रह है। धनेश शुक्र की शुभ स्थिति से, धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रह की स्थिति और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों की दृष्टि से जातक की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत व चल-अचल संपत्ति का पता चलता है। 

मेष लग्न में शुक्र ग्रह

इसके अलावा भाग्येश गुरु बृहस्पति और लग्नेश मंगल ग्रह की अनुकूल स्थितियां भी मेष लग्न के जातकों के लिए धन, ऐश्वर्य व वैभव में वृद्धि करने वाली होती है। वैसे स्थिति के अनुसार, ग्रहों में, मेष लग्न के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ फलदायी होते हैं। गुरु व सूर्य ग्रह शुभ फलदायी होते हैं।

कुल-मिलाकर मेष लग्न में, शुक्र की स्थिति, दशा-महादशा भाव और ग्रहों की युति के आधार पर शुभ या अशुभ प्रभाव देने वाली हो सकती है। क्योंकि, शुक्र इस लग्न के धन भाव का स्वामी होता है और इसी के आधार पर ग्रहों के प्रभाव भी महत्वपूर्ण होते हैं। 

यानी, जब भी शुक्र की दशा आयेगी धन योग का फल मिलेगा, लेकिन दशा के अनुसार ही शुभ-अशुभ परिणाम भी तय किए जाते हैं। लग्न में शुक्र ग्रह की महादशा हो तो, धन और सुख का नाश होता है। ऐसे जातक, भ्रमणकारी होते हैं, व्यसनी और चंचल स्वभाव के होते हैं। 

Q. मेष लग्न में शुक्र ग्रह के क्या प्रभाव हो सकते हैं?

An. मेष लग्न में शुक्र ग्रह धन और कुंडली के सातवें भाव के स्वामी है, लेकिन यह मारक ग्रह भी होते हैं। इसलिए इसकी स्थिति कुंडली के हर भाव के अनुसार अलग-अलग परिणाम देने वाली होती है। शुक्र के प्रभाव से जातक सुंदर, आकर्षक, कलात्मक होने के गुण से युक्त होते हैं।

Q. मेष लग्न में शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव हो तो क्या होता है?

An. अशुभ शुक्र के प्रभाव में, जातक को अहंकार, झगड़े, असामंजस्य, और तलाक या पार्टनर से दूरियों का सामना करना पड़ता है। अशुभ शुक्र के प्रभाव से जातक को, धन हानि, फिजूलखर्ची, या व्यवसाय में समस्याएँ आ सकती हैं, विशेष रूप से जब शुक्र छठे भाव में विराजमान हो।

Q. मेष लग्न में शुभ प्रभाव देने वाले ग्रह कौन से हैं?

An. ग्रहों में, मेष लग्न के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ फलदायी होते हैं। गुरु व सूर्य ग्रह शुभ फलदायी होते हैं।

Q. मेष लग्न में शुक्र ग्रह क्यों अशुभ है?

An. शुक्र मेष लग्न में दूसरे और सातवें भावों का स्वामी होता है। जिनकी,  दशा-अंतर्दशा में वे जातक के धन, रिश्ते, कला, विलासिता और सुख-सुविधाओं को प्रभावित करते हैं।

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