Mars in 2nd House | कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह का प्रभाव बनाएगा परिश्रमी व ऊर्जावान

मंगल ग्रह

वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, कुंडली के द्वितीय यानी दूसरे भाव में मंगल ग्रह जातकों को परिश्रमी बनता है। साथ ही ऐसे जातक लापरवाही भी कर सकते और इसी कारण वे शीघ्र ही आवेग में आ जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में, कुंडली के दूसरे भाव में विराजमान मंगल ग्रह जातक को ऊर्जावान बनाने का कार्य करता हैं। जिसका सदुपयोग से जातक अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर संपत्ति बनाने और पद प्रतिष्ठा को प्राप्त करने में कर सकते हैं।

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ज्योतिष शास्त्र में: दूसरे भाव में मंगल ग्रह की भूमिका 

शास्त्रों में, जन्म कुंडली के बारह भाव में ही सभी नक्षत्र, राशियां और नौ ग्रह भ्रमण करते हैं। कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर ही जातक के जीवन पर शुभ व अशुभ प्रभाव देखने को मिलते हैं। हमारे वैदिक ज्योतिष में कुंडली के मूल 18 प्रकारों का वर्णन किया गया है,  इनके आधार पर ग्रहों के अलग-अलग प्रभावों का मूल्यांकन भी किया जाता है। यदि कुंडली को ब्रह्मांड के तुल्य मान लिया जाए तो 360 डिग्री माना जा सकता है। 

ज्योतिष में : मंगल ग्रह का महत्व 

‘मंगल भवन’ के इस लेख में आज हम बात करेंगे कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह की। परन्तु इससे पहले हम मंगल ग्रह के स्वभाव, स्वरूप और गुणों के बारे में भी चर्चा करेंगे। ज्योतिष में मंगल ग्रह को भूमि नंदन, भौम, लोहितांग, अंगारक और क्षितिज जैसे नामों से है। इसी के साथ मंगल ग्रह को ग्रह को सौरमंडल में सेनापति का दर्जा भी दिया गया है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को काल पुरुष व पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा मंगल ग्रह क्षत्रिय वर्ण के तमोगुणी ग्रह भी कहलाते हैं। जिनका प्रभुत्व लाल रंग और शरीर के खून पर विशेष रूप से होता है। 

ज्योतिष शास्त्र में, मंगल ग्रह उत्साह, साहस, शौर्य और शक्ति का  प्रतिनिधित्व करते हैं। वैदिक ज्योतिष में कुछ अन्य ग्रहों के साथ मंगल को भी विशेष दृष्टि व रहस्यमयी अद्भुत क्षमता प्राप्त है। मंगल ग्रह अपने स्थान से चौथे और आठवें भाव पर पूर्ण दृष्टि डालते हैं। गणना के अनुसार, मंगल ग्रह को एक राशि के भ्रमण में लगभग 45 दिनों का समय लगता है। इसके अलावा मंगल ग्रह तामसी प्रकृति के ग्रह माने जाते है, और यदि कुंडली में मंगल ग्रह शुभ स्थिति में हो तो जातक को इसके बहुत सकारात्मक व शुभ फल देने का कार्य करते हैं।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह:  सकारात्मक परिणाम 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कुंडली का दूसरा भाव धन-संपदा या कुटुंब का स्थान माना जाता है। इसका संबंध धन, चल-अचल संपत्ति, कुटुंब, वाणी, वंश, धन संग्रह, रत्न, लाभ-हानि, महत्वाकांक्षा और विरासत में मिली संपत्ति के क्षेत्रों से होता है। यदि किसी जातक की जन्म कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह की उपस्थिति हो, तो यह कुंडली के दूसरे भाव के प्रभावों को भी नियंत्रित करने का कार्य करती है।

तथा जातकों को उनके गुण, स्वभाव के अनुरूप फल देने का कार्य करती हैं। 

इसके साथ ही कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह की स्थिति जातक की आर्थिक या वित्तीय स्थिति, करियर-पेशा, पारिवारिक संबंध और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को भी प्रभावित करने का कार्य कर सकते हैं। कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह जातकों को मेहनती बनाने का कार्य तो करता ही है, साथ ही ऐसे जातक कुछ हद तक लापरवाह भी हो सकते और इसी कारण वे जल्द ही क्रोध व आवेग पूर्ण व्यवहार करने लगते हैं। लेकिन कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह की स्थिति से जातक को ऊर्जा भी प्राप्त होती है। 

दूसरे घर में स्थित मंगल जातकों को पैसा कमाने और एक सफल करियर के लिए अद्भुत समय देता है, आपके पास पैसा कमाने के लिए सबसे अद्भुत समय होगा। और आपके जीवन में अच्छे परिवार और प्रेम संबंध बने रहेंगे। जातक के जीवन में चिंता करने वाली बातें कम होती हैं, बस उन्हें जीवन में करीबी लोगों के प्रति अपने स्वभाव के प्रति सावधान रहने की जरूरत होती है।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह : नकारात्मक परिणाम 

कुंडली के दूसरे भाव में यदि मंगल ग्रह  प्रतिकूल स्थिति में या कमजोर अवस्था में विराजमान हैं, तो ऐसे जातक बहुत संवेदनशील हो सकते हैं। वें छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाते हैं, या बहुत संवेदनशील हो जाते हैं। इसके अलावा दूसरे भाव में मंगल ग्रह की स्थिति कमजोर होने से जातक को शब्दों के उच्चारण में भी कुछ समस्या हो सकती है। कहने का आशय यह है कि यदि मंगल ग्रह पीड़ित है तो जातक को अन्य लोगों के साथ संवाद करने में भी समस्या होती है। 

इनका अन्य लोगों से साथ या तो बोलचाल ठीक नहीं होता है या तो कठोर होने से उनके संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। इसके साथ ही प्रतिफल के रूप में उन्हें वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। लेकिन ऐसे जातक अपना लाभ या हिस्सा किसी अन्य के साथ बांटने में विश्वास नहीं करते, चाहे उस कार्य में उनके साथी ने उनकी सहायता ही क्यों न कि हो। परिणाम स्वरूप उनके और साझेदारों या सहकर्मियों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

दूसरे भाव में मंगल जीवन में बड़ी समस्याएं देता है, आप व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अति-अधिकारवादी और जुनूनी स्वभाव के होंगे। इसलिए आपको इससे सावधान रहने की जरूरत है। जीवन में किसी भी समस्या के लिए उचित मार्गदर्शन या समाधान के लिए ज्योतिषियों से ऑनलाइन फोन पर परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

यदि आप भी कर रहे हैं अपने करियर या व्यावसायिक जीवन में समस्याओं का सामना तो आज ही पाएं समाधान ‘मंगल भवन’ के अनुभवी विशेषज्ञ ज्योतिषियों से।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह : स्वास्थ्य पर प्रभाव  

आपको आंखो में चोट लग सकती है अथवा नेत्र दोष हो सकता है  पेट से सम्बंधित बीमारी भी हो सकती है। कोई आपरेशन भी हो सकता है। संतान को लेकर आप मानसिक पीड़ा से ग्रसित अथवा परेशान हो सकते हैं। किसी आपात दुर्घटना के कारण पैर में चोट लग सकता है खासकर यदि सिंह लग्न के जातक हो तो। कंधे और गले के अंगो को लेकर कुछ परेशानी हो सकती है। आप कभी कभी बेहोशी के शिकार भी हो  सकते हैं।

दूसरे भाव में मंगल ग्रह: आर्थिक स्थिति पर प्रभाव 

ज्योतिष के अनुसार, कुंडली के दूसरे भाव का मंगल ग्रह वाले जातक को प्रायः विद्वान निर्धन कहा है यथा – धने कुजे धनैर्हीनः क्रियाहीन च जायते। अन्यत्र भी — अधन्यताम् का जनाश्रय तो।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल की स्थिति बताती है कि मंगल धन तो प्रदान करता है परन्तु जातक को उतना धन सुख प्राप्त कर नहीं पाता है जितना मिलना चाहिए। ऐसा तब होता है जब जातक धन का संचय करता है यदि जातक धन का संग्रह के साथ-साथ उसका सदुपयोग करता है तथा दान पुण्य का काम करता है तो वह धन अतुल्य सुख भी प्राप्त करता है।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह: व्यक्तित्व पर प्रभाव 

प्रमुख गणनाओं के मुताबिक, मंगल की द्वितीय भाव में स्थिति आपको पैसे के प्रति उत्साही व्यक्ति बना सकती है। उनके लिए किसी भी वित्तीय मामले को संभालना आसान नहीं होगा, इसलिए ये जातक पैसे के लिए तत्पर रहेंगे। रचनात्मकता और सकारात्मक मानसिकता स्थापित करने के लिए आपको बड़े प्रयासों की आवश्यकता हो सकती है। इससे जातकों को अपनी आत्म-छवि को और अधिक निखारने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि आपने एक आकर्षक व्यक्तित्व विकसित कर लिया है, तो भी आपको शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई हो सकती है।

संभवतः, ऐसे जातकों के पास उचित संचार कौशल नहीं है, और इस प्रकार आपको भाषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, मंगल की यह स्थिति अक्सर आपको दुष्ट मानसिकता वाली बनाती है। इसलिए, संभावित रूप से आप अपने करीबी लोगों के साथ संबंध तोड़ सकते हैं। आप एक संवेदनशील व्यक्ति होने की संभावना रखते हैं, और इसलिए, छोटी-छोटी बातों पर आपके बीच बड़ी बहस हो सकती है। आप अपनी वित्तीय स्थिति पर अपनी पकड़ मजबूत करने के इच्छुक होंगे।

मंगल ग्रह

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह : वैवाहिक जीवन पर प्रभाव 

ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक, दूसरे भाव में स्थित मंगल ग्रह की स्थिति से जातकों को उनके वैवाहिक जीवन में सकारात्मक फल प्रदान करती है। दूसरे भाव में स्थित मंगल ग्रह का जातक के जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। दूसरे घर का मंगल विवाह के घर से आठवें स्थान पर होगा, इसलिए आपके जीवनसाथी को ऐसी समस्याएं होने की संभावना हो सकती है। महिला जातकों को गर्भावस्था संबंधी समस्याएं, स्त्री रोग संबंधी समस्याएं या त्वचा रोग हो सकते हैं, जबकि पुरुष जातकों को सुनने में समस्या या आंखों में दर्द हो सकता है। यह स्थिति आपको शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन नहीं दे सकती है। यदि दूसरे घर में मंगल पर शुभ ग्रहों का प्रभाव नहीं है, तो आपके विवाह संबंध में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। हो सकता है कि आप अपने ख़राब संचार कौशल के कारण अपने जीवनसाथी के साथ आपसी संबंध बनाने में सक्षम न हों।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह : करियर पर प्रभाव 

जिन जातकों के दूसरे घर में मंगल होता है, वे अपने करियर में वांछित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते हैं। आपको हर अवसर पर खुद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। अन्यथा आपको सफलता नहीं मिल सकेगी. सकारात्मक परिणाम पाने का एकमात्र तरीका स्वतंत्र रूप से कड़ी मेहनत करना है। ऐसा करने से आप अपने करियर लक्ष्यों के करीब पहुंच सकते हैं। आपको सफलता की राह में बाधाएं आ सकती हैं और आपको काफी संघर्ष करना पड़ सकता है। हालांकि, यदि आप उस कठिन समय से बच गए, तो मंगल आपको एक सफल करियर का आशीर्वाद दे सकता है। दूसरे भाव में मंगल के जातक इंजीनियरिंग, अनुसंधान या आईटी क्षेत्र के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। यहां, आपको पैसा बचाने का कौशल भी आपको शेयर बाजार में सफलता अर्जित करने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

इस प्रकार द्वितीय भाव का मंगल जातकों पर प्रभाव डालता है। अपने विशिष्ट क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको किसी पहाड़ी पर चढ़ना पड़ सकता है। इसके अलावा, आपका वैवाहिक संबंध पहले जैसा नहीं रहेगा क्योंकि आपको अपने साथी के साथ अधिक समस्याएं हो सकती हैं। वित्त के मामले में आप अपने पिछले निवेशों से सफलता अर्जित कर सकते हैं। लेकिन यह केवल आपकी समस्याओं को सुधारने के लिए होगा। पैसे के लिए आपकी तलाश समय के साथ बढ़ सकती है, और आप केवल पैसे बचाने का कौशल विकसित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, दूसरे भाव में मंगल ग्रह आपको जीवन की सीख दे सकता है और उसके कारण, आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

कुंडली के दूसरे भाव में मंगल ग्रह से सम्बंधित- सामान्यप्रश्न- FAQ


Q- कुंडली के दूसरे भाव का स्वामी ग्रह कौन सा ग्रह है?

An- दूसरे भाव का स्वामी ग्रह शुक्र होता है और कारक ग्रह गुरु है।

Q- यदि मंगल दूसरे भाव में हो तो क्या होगा?

An- आपके दूसरे घर में स्थित मंगल का अर्थ है कि आप एक अत्यधिक सक्षम व्यक्ति हैं जो निरंतर कड़ी मेहनत और परिश्रम से पैसा कमाएंगे। जब आप हमेशा जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं, तो आपके प्रयास अधिकांश समय अधिक लाभ के रूप में फलित होगा।

Q- द्वितीय भाव किसका होता है?

An- दूसरा भाव धन, वाणी और प्रारंभिक शिक्षा का होता है। इसे धन भाव भी कहते हैं। तीसरा छोटे भाई-बहन, साहस, प्रयास और पराक्रम का होता है। इसे पराक्रम भाव भी कहते हैं।

Q- मंगल के खराब होने से क्या होता है?

An- इसके प्रभाव से व्यक्ति को दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है. पीड़ित मंगल जातक के जीवन में कई तरह की समस्याएं लेकर आता है. कमजोर मंगल की वजह से कई तरह की पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जमीन संबंधी विवाद बढ़ता है और कर्ज जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Q- कुंडली में मंगल अच्छा हो तो क्या होता है?

An- कुंडली में मंगल की स्थिति अच्छी हो तो व्यक्ति स्वभाव से निडर और साहसी होता है लेकिन अगल कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कुछ मामलों में मंगल को क्रूर ग्रह भी कहा जाता है. कुंडली में मंगल पीड़ित हो तो जातक को कई तरह की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

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