मकर लग्न में सूर्य ग्रह की विशेष स्थिति! मारक और अशुभ प्रभाव के लिए सार्थक हैं ये उपाय |

मकर लग्न में सूर्य ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न के जातक शरीर से दुबले-पतले और मध्यम ऊंचाई के होते हैं। वे अधिकांश श्याम वर्ण के होते हैं। प्रायः इनके शरीर का कोई हिस्सा औसत अनुपात में कम या अधिक होता है। इन जातकों के नेत्र सुन्दर होते हैं और स्वभाव से वे गंभीर और मननशील होते हैं। अध्यात्म में उनकी विशेष रूचि होती हैं। 

लेकिन, अपने श्रेष्ठ व्यवहार और स्वभाव से वे दूसरों के बीच प्रेम और सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं। हमेशा सतर्क रहकर कुशल नीतिज्ञ होना इनका विशेष गुण होता है। इसके अलावा, धैर्य और संयम इनमें कूट-कूट कर समाहित होता है, जो उन्हें दूसरों से अलग पहचान बनाने में सहायक है। तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको मकर लग्न में सूर्य ग्रह के विशेष और मारक प्रभाव के साथ कुछ जरुरी सुझाव की विस्तार से जानकारी देंगे। 

इस लग्न के लिए, सूर्य ग्रह की भूमिका अष्टम भाव (आयु, रहस्य, अचानक घटना) की स्वामी की होती है। जो कि, एक अशुभ व मारक प्रभाव देने वाली स्थिति है। साथ ही,  यह लग्नेश शनि का शत्रु भी है। जो, कि, सामान्यतः स्वास्थ्य, पिता, और पारिवारिक समस्याओं का कारण बनता है। लेकिन, इस लग्न में, उनका छठे, आठवें, और बारहवें भावों में होने से, यह ‘विपरीत राजयोग’ का निर्माण करता है, जो कि धन और विदेश से सफलता देने में सहायक स्थिति मानी गई है। 

अब, चूंकि, अष्टमेश सूर्य का प्रभाव इस लग्न के लिए मारक प्रभाव देने वाला होगा इसलिए, इस लग्न के लिए सूर्य एक मारक और अशुभ ग्रह माने जाएंगे। विशेषकर उनकी, दशा-अंतर्दशा में यह जातक के लिए अशुभ फलदायक होगा। इसके साथ ही, लग्न कुंडली के, छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो ‘विपरीत राजयोग’ बनता है। जो अचानक धन लाभ, शोध कार्यों में सफलता और विदेश यात्रा या विदेश में कार्य की सफलता के लिए एक शुभ स्थिति है।

जहां, तक बात है, करियर व व्यवसाय के लिए परिणाम की तो, इस लग्न के दसवें, भाव में (तुला राशि में नीच) के होने पर वे जातक को करियर में संघर्ष देने के कारक होंगे। लेकिन, इस भाव के स्वामी मंगल के साथ होने पर वे इंजीनियरिंग या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े जातकों को सफलता देने के शुभ प्रभाव देंगे। 

स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो, इस लग्न के लिए, सूर्य ग्रह की यह मारक भूमिका जातक को नेत्र रोग, पेट की समस्या और हड्डी से जुड़ी समस्याएं देने की कारक होंगी। जिससे जातक को परेशानी उठानी पड़ सकती है। 

ज्योतिष में सूर्य को, पिता और आत्मा के कारक देव की उपाधि दी गई है। जिसके मजबूत और शुभ प्रभाव से जातक को आत्मविश्वास, साहस और पिता का अच्छा साथ मिलता है। इस लग्न में सूर्य मारक प्रभाव में होने से, जातक के पिता के साथ वैचारिक मतभेद में वृद्धि करने का कार्य करेंगे। साथ ही, पिता की संपत्ति का फिजूल खर्च भी होगा।

इस लग्न में सूर्य अष्टमेश होने से अशुभ ग्रह है। साथ ही, सूर्य ग्रह का शनि ग्रह से शत्रु संबंध होने से अशुभ ग्रहों के सानिध्य से भी आपको कभी-कभी मारक प्रभाव देखने को मिलेंगे। संहिता ग्रंथ के अनुसार सूर्य को लग्न में अष्टमेश होने का दोष नहीं लगता है। लेकिन, प्रथम स्थान में मकर राशि का सूर्य शत्रु क्षेत्री प्रभाव में होता है। जिसके परिणाम स्वरूप जातक को, स्वास्थ्य व सौंदर्य में कमी देखने को मिलेगी। 

लेकिन, फिर भी कुछ स्थिति में, जातक को तेजस्वी, ओजस्वी, सत्य का पालन करने वाला व  न्यायप्रिय होने का आशीर्वाद भी मिलेगा। जातक की अपने पिता से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। और साथ ही, जातक के जीवन में गुप्त शत्रुओं का अज्ञात भय भी हो सकता है।

इसके साथ ही, लग्नस्थ सूर्य की दृष्टि सप्तम भाव (कर्क राशि) पर होने से, स्त्री पक्ष से जातक का कुछ विरोधाभास होगा यानी,  गृहस्थ जीवन सुखी रहेगा। जातक की स्त्री रूपवान,  सुंदर व आकर्षक होगी।

कुल-मिलाकर इस लग्न के लिए सूर्य ग्रह की दशा-अंतर्दशा में जातक को मान-सम्मान की प्राप्ति होगी वृद्धि होगी और साथ ही, यश मिलेगा। लेकिन,  दुर्घटना होने का भय बना रहेगा।

इस लग्न के लिए, सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होकर, जातक के लिए व्याधि, जीवन, आयु, मृत्यु का कारण, मानसिक चिंता, समुद्र यात्रा, नकारात्मक विचार, ससुराल, दुर्भाग्य, दरिद्रता, आलस्य, गुह्य स्थान, जेल यात्रा, अस्पताल, चीर फाड़ ऑपरेशन, भूत प्रेत, जादू टोना और भीषण दुख इत्यादि विषयों के प्रतिनिधि होंगे। 

लेकिन, जातक की जन्म कुंडली या दशाकाल में सूर्य की शुभ स्थिति और बलवान होने पर, वे जातक को शुभ प्रभाव देंगे और उपरोक्त विषयों में शुभ परिणाम कारी होंगे। शोध कार्यों व पैतृक संपत्ति से लाभ देंगे। वहीं, कमजोर व अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ परिणाम देंगे। जातक को संघर्ष, स्वास्थ्य समस्याएं (पेट, नेत्र), और सरकारी कार्यों में समस्या आ सकती है।

  1. इस लग्न में, सूर्य दसवें, भाव (तुला राशि में नीच के हों लेकिन,यदि अन्य ग्रह मजबूत हों) तो जातक को श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक शक्ति और सरकारी नौकरी में सफलता देने के कारक होते हैं।
  2. अष्टमेश होने के कारण, सूर्य जातक को अनुसंधान (Research), आध्यात्म, ज्योतिष, या गूढ़ विद्याओं में गहरी रुचि और सफलता देते है।
  3. इस लग्न के,  तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में सूर्य की स्थिति होने पर जातक शत्रुओं पर विजय और अचानक धन लाभ के योग बनते हैं। 
  1. अशुभ सूर्य के प्रभाव में जातक को, पेट से संबंधित विकार, नेत्र रोग, और हड्डियों की कमजोरी (विशेषकर हृदय रोग) हो सकता है।
  2. जीवन में संघर्ष, अचानक उतार-चढ़ाव, कार्यों में रुकावट, और व्यर्थ की चिंता बनी रहती है।
  3. पिता के साथ मतभेद, वैवाहिक जीवन में तनाव, और पैतृक संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है।
  4. इस लग्न में, अष्टम भाव के स्वामी की दृष्टि से सूर्य जातक को अक्सर मानसिक क्लेश या अज्ञात भय की समस्या देते हैं। 

इस लग्न के जातकों के लिए, धन प्रदाता ग्रह शनि है। यानी, यहां धनेश शनि की शुभ स्थिति, धन स्थान से संबंध स्थापित करने वाले ग्रहों की स्थिति और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों के दृष्टि से जातक की धन-संपदा और आर्थिक स्थिति, के बारे में जानकारी मिलती है। 

मकर लग्न में सूर्य ग्रह

इसके अतिरिक्त, इस लग्न के लिए, पंचमेश शुक्र, भाग्येश बुध, लाभेश मंगल ग्रह की अनुकूल स्थितियां धन व  ऐश्वर्य में, वृद्धि करने में सहायक होंगी। वैसे मकर लग्न वालों के लिए मंगल, गुरु और चंद्रमा अशुभ फलदायक ग्रह हैं। शुक्र और बुध ग्रह शुभ फलदायक हैं, शुक्र अकेला ‘राजयोग’  कारक ग्रह है। शनि लग्नेश होने के कारण मारकेश के अशुभ फल नहीं देते हैं।

मकर लग्न के लिए सूर्य के अशुभ प्रभाव से बचने हेतु हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों   द्वारा ये आसान उपाय बताए गए हैं। जो इस प्रकार हैं- 

  1. प्रतिदिन सूर्य देव को लाल पुष्प, लाल चन्दन और गुड़ मिश्रित जल का अर्घ्य दें।
  2. मंगलवार के दिन, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  3. लाल या नारंगी रंग के कपड़े कम पहनें।
  4. रविवार को गुड़ और गेहूं का दान करें। 
  5. सूर्य के शुभ प्रभाव के लिए, हमेशा सत्य का साथ दें।
  6. प्रतिदिन, गायत्री मंत्र का जाप करें।

कुल-मिलाकर, मकर लग्न के जातकों के लिए, सूर्य देवता अष्टमेश की भूमिका में होते हैं। लेकिन साथ ही वे, लग्नेश के भी शत्रु होने के कारण अति मारक ग्रह बन जाते हैं। तो, इससे यह ज्ञात होगा कि, कुंडली के किसी भी भाव,में सूर्य देव अपनी दशा – अंतरदशा में अपनी क्षमतानुसार अशुभ फल दायक ही होंगे।

लेकिन, लग्न के  छठे, आठवें और बारहवें भाव में सूर्य देवता ‘विपरीत राजयोग’ में आकर जातक को शुभ फल देने में भी सक्षम होंगे। इसके लिए लग्नेश शनि का शुभ स्थिति में होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कभी भी बिना ज्योतिष परामर्श  के सूर्य का रत्न माणिक नहीं पहना जाता है। लेकिन, आप सूर्य को मजबूत करने के लिए हमारे द्वारा बताए गए ये आसानी से  कर सकते हैं। जिससे सूर्य के मारकेत्व को कम किया जा सकता है।

Q. मकर लग्न के लिए, सूर्य की क्या विशेष स्थिति होती है?

An. इस लग्न के लिए, सूर्य ग्रह की भूमिका अष्टम भाव (आयु, रहस्य, अचानक घटना) की स्वामी की होती है। जो कि, एक अशुभ व मारक प्रभाव देने वाली स्थिति है। साथ ही,  यह लग्नेश शनि का शत्रु भी है। जो, कि, सामान्यतः स्वास्थ्य, पिता, और पारिवारिक समस्याओं का कारण बनता है।

Q. मकर लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन से हैं?

An. इस लग्न के लिए, पंचमेश शुक्र, भाग्येश बुध, लाभेश मंगल ग्रह की अनुकूल स्थितियां धन व  ऐश्वर्य में, वृद्धि करने में सहायक होंगी। वैसे मकर लग्न वालों के लिए मंगल, गुरु और चंद्रमा अशुभ फलदायक ग्रह हैं। शुक्र और बुध ग्रह शुभ फलदायक हैं, शुक्र अकेला राजयोग  कारक ग्रह है। शनि लग्नेश होने के कारण मारकेश के अशुभ फल नहीं देते हैं।

Q. मकर लग्न के जातकों के लिए सूर्य के विशेष फलादेश क्या है?

An. अष्टमेश सूर्य का प्रभाव इस लग्न के लिए मारक प्रभाव देने वाला होगा इसलिए, इस लग्न के लिए सूर्य एक मारक और अशुभ ग्रह माने जाएंगे। विशेषकर उनकी, दशा-अंतर्दशा में यह जातक के लिए अशुभ फलदायक होगा। इसके साथ ही, लग्न कुंडली के, छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो विपरीत राजयोग बनता है।

Q. मकर लग्न के लिए सूर्य के शुभ प्रभाव क्या हैं?

An. इस लग्न में अष्टमेश होने के कारण, सूर्य जातक को अनुसंधान (Research), आध्यात्म, ज्योतिष, या गूढ़ विद्याओं में गहरी रुचि और सफलता देते है।

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