सूर्य ग्रह कुंडली के इन भावों में होंगे तो, आपका जीवन होगा राजा के तुल्य, कहीं आपकी कुंडली भी उनमें से एक तो नहीं |

सूर्य ग्रह

ग्रहों में सबसे अधिक बड़े, शुभ और प्रभाव शाली ग्रह, सूर्य ग्रह  को माना गया है। जिसे ग्रहों का राजा भी कहा जाता है। जिस प्रकार जीवन के लिए प्रकाश जरूरी है उसी प्रकार, जीवन में सफलता और मान-प्रतिष्ठा के लिए  सूर्य ग्रह की कृपा होना बहुत जरूरी है। हम सभी की कुंडली में, बारह भाव (घर) होते हैं, जिनका ग्रहों के अनुसार हमें शुभ या अशुभ फल मिलता है। 

ठीक इसी प्रकार, कुंडली में सूर्य की स्थिति का भी गहरा प्रभाव होता है। यदि सूर्य ग्रह की स्थिति कुंडली में अच्छी है तो ऐसा जातक अपने जीवन में बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त करता है। इतना ही नहीं, ऐसे जातक को सफलता के साथ-साथ, ऐश्वर्य, मान-सम्मान और सूर्य के समान तेज मिलता है। इसके विपरीत कमजोर सूर्य के प्रभाव से जातक कई चुनौतियों का सामना करते हैं। तो, चलिए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको सूर्य कुंडली के किस भाव में शुभ और किस भाव में अशुभ होगा यह जानकारी देंगे। हमारे साथ लेख में बने रहें और लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें-

ज्योतिष में, सूर्य ग्रह को विशेष रूप से महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। देवता की उपाधि प्राप्त सूर्य ग्रह का प्रभाव जातक के जीवन में विशेष लाभकारी होता है। लेकिन, इसका प्रभाव अन्य ग्रहों के साथ युति पर निर्भर करता है। कुंडली में, सूर्य आत्मा, पिता, उच्च पदाधिकार, मान-प्रतिष्ठा और सरकारी नौकरी का कारक माना जाता है। यानी, यदि कुंडली में सूर्य की युति कोई शुभ ग्रह के साथ होगी तो, यह जातक को उच्च पद, प्रतिष्ठा, और धन की प्राप्ति देता है। लेकिन, अशुभ ग्रह के साथ सूर्य की युति जातक में क्रोध, जिद्दीपन, और स्वास्थ्य समस्याएं देने की कारक होती है।

आइए जाने, सूर्य की कौन से ग्रह के साथ युति किस प्रकार शुभ या अशुभ प्रभाव देती है- कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:-

ज्योतिष की दृष्टि से, सूर्य और चंद्रमा की युति जब साथ में होती है तो, यह “ग्रहण योग” का निर्माण करते हैं। यह जिसके प्रभाव में जातक को, मानसिक रूप से अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। साथ ही, उसके जीवन में, भावनात्मक उतार-चढ़ाव होते रहते हैं।

मंगल और सूर्य ग्रह जब साथ युति में आते हैं तो, “अंगारक योग” बनता है। इससे जातक को ऊर्जा और साहसी होने का प्रभाव मिलता है। लेकिन मंगल ग्रह क्रोध का प्रतिनिधित्व करते हैं, और यह योग जातक में, उग्रता और क्रोध का भाव देता है।

बुध के साथ सूर्य की युति से “बुधादित्य योग” बनता है। इस शुभ योग के शुभ प्रभाव से जातक को, बुद्धिमान, वाक्पटु, और तार्किक होने का गुण प्राप्त होता है। इन दोनों शुभ ग्रहों की युति के प्रभाव से जातक व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं।

गुरु बृहस्पति के साथ सूर्य की युति होने से “गुरु आदित्य योग” बनता है। यह जातक में, धार्मिक, आध्यात्मिक, और दार्शनिक ज्ञान का संचार करता है। इन दोनों शुभ ग्रहों की युति से जातक उच्च ज्ञान और उचित समझ प्राप्त करता है।

शुक्र के साथ सूर्य ग्रह की युति हो तो “शुक्र आदित्य योग” बनता है। जिससे जातक को, धन, यश , कलात्मक, रचनात्मक, और आकर्षण प्राप्त होता है। यह युति सुख, समृद्धि, और प्रेम में सफलता के साथ सौंदर्य में भी वृद्धि करने वाली होती है।

सूर्य के साथ शनि की युति होने से “समसप्तक योग” बनता है। जिससे जातक संघर्षशील, अनुशासन प्रिय और मेहनती बनते हैं। इस युति के प्रभाव से जातक को जीवन में चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। 

सूर्य के साथ और राहु/केतु ग्रहों की युति से “ग्रहण योग” बनता है। यह युति के प्रभाव से जातक को भ्रम, अनिश्चितता, और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। साथ ही, इस युति के अशुभ प्रभाव से जातक के जीवन में, कई बाधाएं और समस्याएं आती हैं।

आगे लेख में हम सूर्य कुंडली के किस भाव में शुभ प्रभाव देते हैं, यह जानेंगे-

हमारे ‘मंगल भवन के वरिष्ठ ज्योतिष आचार्यों’ की गणना में, कुंडली के बारह भावों में से कुछ भाव ऐसे होते हैं। जहां, सूर्य ग्रह यदि किसी शुभ ग्रह के साथ विराजमान हो तो, उस जातक के जीवन में बहुत से शुभ प्रभाव होते हैं- आइए जाने वे भाव कौन से हैं।  

यदि किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में सूर्य ग्रह किसी शुभ ग्रह के साथ विराजमान हो तो, ऐसे जातक के अपनी माता के साथ संबंध अच्छे होंगे। साथ ही, उस जातक को भाग्य का अच्छा साथ मिलता है। हालाँकि, बचपन में कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, सूर्य के प्रभाव से ऐसे जातक कुछ क्रोधी स्वभाव के होते हैं, इसलिए सूर्य ग्रह पहले भाव में हो तो, आपके लिए क्रोध पर नियंत्रण रखने की सलाह है। 

कुंडली के पांचवे भाव में सूर्य ग्रह के होने से जातक में बौद्धिक कौशल का संचार होता है। ऐसे जातक अच्छे विद्यार्थी तो होते हैं साथ ही, वे शिक्षा के क्षेत्र बहुत उपलब्धियां हासिल करते हैं। एक अच्छे सलाहकार भी होते हैं, जिनकी सलाह किसी को भी फायदा पहुंचा सकती है।

कुंडली के नौवें भाव में यदि सूर्य ग्रह विराजमान हो तो, ऐसे जातक की नेतृत्व करने की जबरदस्त क्षमता होती है। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी वें अपना करियर सफलता से आगे बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ऐसे जातकों को विदेशों में घूमने का भी अवसर मिलता है। लेकिन, सूर्य की यह स्थिति संतान पक्ष के लिए विशेष अनुकूल नहीं मानी गई है। 

कुंडली के दसवें भाव में यदि सूर्य विराजमान हो तो ऐसे जातक बहुत बुद्धिमान होते हैं। साथ ही, उनकी निर्णय करने की क्षमता भी बहुत अच्छी होती है। सरकारी क्षेत्रों से ऐसे जातकों को बहुत धन लाभ मिलता है। लेकिन, कुंडली में दसवें भाव में सूर्य की यह स्थिति जातक की माता के लिए तब अच्छी नहीं मानी जाती है। या वह व्यक्ति गलत कार्य करता है और नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है। जिससे माता को मानसिक या आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

कुंडली के ग्यारहवें भाव को लाभ का भाव कहा जाता है, और इस भाव में सूर्य की स्थिति होने से धन लाभ प्राप्त होता है। ऐसे जातक बोलते कम हैं और सुनते अधिक है। इन जातकों की रुचि धार्मिक क्षेत्र में विशेष अधिक होती है। लेकिन, संतान के लिए यह स्थिति ठीक परिणाम देने वाली नहीं होती है।

कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य की स्थिति के परिणाम जातक के कार्यों पर निर्भर है। अगर आप परोपकारी कार्य करते हैं तो सूर्य की यह स्थिति आपको धन लाभ के साथ सब कुछ दे सकती है। हालांकि, जीवन के कुछ शुरुआती समय में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता ,है लेकिन उसके बात सब कुछ स्थाई प्राप्त होगा। विदेशी में व्यवसाय करने वाले जातकों या घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए सूर्य ग्रह का बारहवें भाव में होना बहुत शुभ परिणाम देने वाला है।

ऊपर लेख में हमने कुंडली के ऐसे शुभ भावों के बारें में जाना जहां सूर्य का प्रभाव लाभकारी होता है। अब हम जानेंगे कि, ऐसी कौन सी राशियां हैं जो सूर्य ग्रह के प्रभाव से सबसे अधिक लाभान्वित होती हैं।

सूर्य ग्रह

वृषभ राशि के सूर्य का गोचर होना या उनकी राशि में विराजमान होना, उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रतिष्ठा में वृद्धि देने वाला है। ऐसे जातकों को  कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती हैं। स्वास्थ्य के लिए अच्छा और आकर्षण में वृद्धि करने वाला होता है।

यदि मकर राशि के पांचवे भाव में सूर्य का गोचर हुआ है तो, ऐसे जातक शिक्षा और प्रेम संबंधों में बहुत ही शुभ परिणाम प्राप्त करते हैं। साथ ही, संतान पक्ष से भी आपको सुख मिलेगा। रचनात्मक कार्यों में आपको प्रशंसनीय सफलता मिलेगी। धन निवेश से लाभ होने के योग बनते हैं।

यदि कन्या राशि में, कुंडली के भाग्य भाव में सूर्य का गोचर होगा तो, यह आपकी किस्मत को प्रबल करने वाला होगा। यानी, आपके सभी कार्य विदेश यात्रा, उच्च शिक्षा और धार्मिक कार्यों में सफलता के योग बनेंगे। साथ ही, आपके रुके हुए कार्य पूरे हो जाएंगे।

  1. नित्य प्रतिदिन सुबह जल्दी सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। जल में लाल फूल और अक्षत (चावल) डालें। साथ ही, “ॐ सूर्याय नमः”  या “ॐ घृणि सूर्याय नमः”  मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपको सूर्य देव की कृपा प्राप्त होगी। 
  2. शास्त्रों में, आदित्य हृदय स्तोत्र को बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र माना गया है। जो सूर्य देव की स्तुति करने के लिए किया जाता है। इसका नियमित पाठ करने से सूर्य ग्रह मजबूत होते हैं और शुभ फल देते हैं।
  3. सूर्य देव को प्रसन्न करने और शुभ फलों के लिए रविवार का व्रत रखें। इस दिन उपवास करें और सूर्यास्त के बाद भोजन करें।  
  4. आप रविवार के दिन गरीबों को गुड़, गेहूं, तांबा, और लाल वस्त्र दान कर सकते है। सूर्य से शुभ परिणाम मिलेंगे। गाय को हरा चारा या पत्तेदार सब्जियां खिलाना भी बहुत शुभ माना जाता है।
  5. सूर्य देव को लाल रंग प्रिय है, इसलिए लाल रंग के कपड़े पहने और लाल रंग के फल खाएं।
  6. ज्योतिष में, सूर्य ग्रह की शुभता के लिए माणिक्य रत्न धारण करना शुभ माना जाता है। यह रत्न आप किसी ज्योतिषी की सलाह से पूरे विधि-विधान के साथ पहनें।
  7. सूर्य नमस्कार योग एक ऐसा अभ्यास है जो सूर्य देव को समर्पित है। इसलिए नियमित सूर्य नमस्कार करें। यदि नियमित संभव न हो तो प्रति रविवार करें। 

Q. सूर्य ग्रह का ज्योतिष महत्व क्या है?

An. जीवन में सफलता और मान-प्रतिष्ठा के लिए  सूर्य ग्रह की कृपा होना बहुत जरूरी है। कुंडली में, सूर्य आत्मा, पिता, उच्च पदाधिकार, मान-प्रतिष्ठा और सरकारी नौकरी का कारक माना जाता है। यानी, यदि कुंडली में सूर्य की युति कोई शुभ ग्रह के साथ होगी तो, यह जातक को उच्च पद, प्रतिष्ठा, और धन की प्राप्ति देता है।

Q. सूर्य ग्रह कौन से भाव में सबसे शुभ परिणाम देते हैं?

An. वैसे तो, कुंडली के पहले, पांचवें, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में सूर्य ग्रह के शुभ परिणाम मिलते हैं।

कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य की स्थिति के परिणाम जातक के कार्यों पर निर्भर है। अगर आप परोपकारी कार्य करते हैं तो सूर्य की यह स्थिति आपको धन लाभ के साथ सब कुछ दे सकती है। हालांकि, जीवन के कुछ शुरुआती समय में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता ,है लेकिन उसके बात सब कुछ स्थाई प्राप्त होगा।

Q. क्या, कन्या राशि के लिए सूर्य ग्रह का गोचर शुभ है?

An. हां, यदि कन्या राशि में, कुंडली के भाग्य भाव में सूर्य का गोचर होगा तो, यह आपकी किस्मत को प्रबल करने वाला होगा। यानी, आपके सभी कार्य विदेश यात्रा, उच्च शिक्षा और धार्मिक कार्यों में सफलता के योग बनेंगे। साथ ही, आपके रुके हुए कार्य पूरे हो जाएंगे।

Q. सूर्य ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए?

An. सूर्य ग्रह की कृपा प्राप्त करने के आप बहुत से उपाय कर सकते हैं, इनमें से विशेष रूप से आप, ये कार्य करें। नित्य प्रतिदिन सुबह जल्दी सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। जल में लाल फूल और अक्षत (चावल) डालें। साथ ही, “ॐ सूर्याय नमः”  या “ॐ घृणि सूर्याय नमः”  मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपको सूर्य देव की कृपा प्राप्त होगी।

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