क्या अर्थ होता है, कुंडली में खाली घर का?  ज्योतिष में जानें, खाली घरों का महत्व और प्रभाव

कुंडली में खाली घर का अर्थ

कुंडली में खाली घर का अर्थ और महत्व-  वैदिक ज्योतिष का ज्ञान हमें बताता है की, कुंडली में यदि कोई घर खाली है तो; इसका यह अर्थ बिलकुल भी नहीं है कि, आपके जीवन के उस क्षेत्र में कुछ भी नहीं हो रहा है। बल्कि हमारे, अनुभवी ज्योतिष आचार्यों ने कहा है की, कुंडली का खाली घर भी किसी न किसी शासक ग्रह द्वारा शासित होता है। जो की उस घर और उससे संबंधित जीवन के क्षेत्रों को प्रभावित करता है।

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वैदिक ज्योतिष में,  सभी ग्रह प्रत्येक दिन अपनी धुरी पर 24 घंटे में, पृथ्वी के घूमने की स्थिति को दर्शाते हैं। जिससे मनुष्य को यह ज्ञान ,मिलता है कि, उसका जन्म हुआ था उस समय प्रत्येक ग्रह और तारा (सूर्य और चंद्रमा) आकाश में कहाँ स्थित थे। इसके साथ ही, हमारी जन्म कुंडली में बारह घर हैं, और उन घरों में नौ ग्रह स्थित होते हैं। 

हालांकि, इनमें कुछ अशुभ ग्रह भी सम्मिलित हैं। साथ ही कभी ऐसा भी होता है की, किसी की जन्म कुंडली में एक या दो घर भी खाली हो सकते हैं। जो यह दर्शाता है की, उन घरों से संबंधित लाभ हमारे जीवन में नहीं हो। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में कोई घर खाली हो तो भी यह फल दे सकता है। आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में, हम विस्तार से जानेंगे कि ज्योतिष में,  कुंडली के खाली घरों का क्या महत्व है और यह कैसे काम करते हैं।  जो की हमारे जीवन में, कुछ अन्य दिलचस्प तथ्य और भी बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं, आशा है पाठकों को लेख में दी गई जानकारी पसंद आए-

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में,  खाली घर का अर्थ है “संघर्ष”, जैसे कि यदि किसी जातक की जन्म कुंडली  में आठवां घर खाली है, जो की धन और दीर्घायु का प्रतिनिधित्व करता है। तो उस जातक को धन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके अलावा, उसके जीवन में कई आकस्मिक घटनाएँ व बहुत संघर्ष भी होंगे। 

इसी के साथ, एक और उदाहरण बताते हैं; यदि किसी जातक का सातवां घर खाली है, जो की जीवन साथी और वंश का प्रतिनिधित्व करता है। यह जातक को जीवन के अन्य सभी रिश्तों और संबंधों के बारे में भी जानकारी देता है। लेकिन अगर यह भाव ही खाली हो तो, इसका मतलब आपके रिश्तों या विवाह सम्बन्धी मामलों में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि, जातक द्वारा अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। 

वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, किसी कुंडली में, खाली घर के महत्व को लेकर बताया गया है की, कुंडली में, एक खाली घर की कार्यप्रणाली को देखने के लिए, सबसे पहले हमें, यह देखना होगा कि,  उस घर के स्वामी ग्रह कहाँ स्थित है? और यह कैसी शुभ या अशुभ स्थिति में है? इसके अलावा, हमें उस खाली घर पर अन्य ग्रहों व  गोचर के प्रभाव की भी जानकारी हासिल करनी पड़ेगी। जिस प्रकार, ज्योतिष में कुंडली के हर घर (भाव) का एक-दूसरे से अलग महत्व होता है। ठीक वैसे ही, कुंडली के हर खाली घर का भी एक अलग महत्व होता है। आइए, अब कुंडली के कुछ महत्वपूर्ण घरों के खाली होने का क्या महत्व है, इस विषय पर विस्तार से नज़र डालते हैं-

ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में किसी घर का खाली होना पूरी तरह से सामान्य होता है। कुंडली में, बारह भाव होते हैं और नौ ग्रह होते हैं। किसी भी एक जातक की, जन्म कुंडली में, कम से कम दो या तीन घर खाली होते हैं। कुंडली में किसी घर का खाली होना उस घर से संबंधित मामलों में संघर्ष की स्थिति को दर्शाता है। इसके साथ ही, ज्योतिष शास्त्र में खाली घर किसी जातक की जन्म कुंडली का वह घर होता है, जिसमें कोई ग्रह नहीं होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस घर द्वारा दर्शाया गया पहलू  महत्वहीन है या उपेक्षित किया जाएगा। इसके बजाय, यह उस भाव में उन चीजों के सुख के प्रति संघर्ष का संकेत दे सकता है। यहाँ हमने कुछ ऐसे बिंदुओं के बारे में बताया है, जो खाली घर के कुछ महत्वपूर्ण पक्षों की जानकारी देते है-  

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक खाली घर का यह अर्थ होता है, कि यह जीवन के जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है; उन  भावों या घरों में ग्रहों की जटिलता को दर्शाता है। यह उस प्रभावित जातक के जीवन में केंद्र के बिंदु के समान होता है।

कुंडली में, खाली घर के शिखर पर चिन्ह के आधार और उसमें उपस्थित स्वामी ग्रह की स्थिति के आधार पर निर्भर करती है। इसी के साथ ये कारक इस बात की भी अंतर्दृष्टि दे सकते हैं कि; खाली घर द्वारा दर्शाए गए जीवन के उस महत्वपूर्ण क्षेत्रों से कैसे अवगत किया जाता है। 

कुछ विद्वान ज्योतिषियों का मानना ​​है कि जन्म के समय कुंडली का एक घर खाली हो सकता है, लेकिन ग्रहों के पारगमन की चाल के माध्यम से यह जीवन में अलग-अलग समय पर सक्रिय होते है।  जिससे जीवन के उस क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाएं या विकास होते हैं। यहां हमने कुंडली के कुछ महत्वपूर्ण घरों की व्याख्या की है;  जिनमें हमने उस घर के खाली होने से होने वाले प्रभाव के बारे में, जानकारी दी है। जो कुछ एस प्रकार है-

ज्योतिष के अनुसार, कुंडली का पहला घर लग्न यानी स्वयं का प्रतिनिधित्व करता है। यह भाव जातक के रूप-रंग, दिमाग  और निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है। इसके अलावा, यह जातक के मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से भी संबंधित होता है।  जिसके कारण जातक की शक्ति और ताकत और कमजोरियों का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष शास्त्र में यदि, पहला भाव (घर) खाली हो तो, यह सीधे जातक के आगे बढ़ने और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। और ऐसे जातक में फोकस, लक्ष्य और सफलता प्राप्त करने कमी होती है। इन जातकों को अपने रूप-रंग और सामाजिक सम्मान की भी कोई चिंता नहीं रहती।  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के दूसरे घर को “धन भाव” कहा जाता है। क्योंकि यह हमारे जीवन की संपत्ति और धन लाभ के कार्यों से संबंधित होता है। इसके अलावा यह घर जातक के व्यवसाय और करियर की भी जानकारी देता है। जब किसी जातक का यह घर खाली होता है, तो यह गरीबी, भूख जैसे अन्य प्रभावों का कारण बनता है। ऐसे जातक के पास कितनी भी संपत्ति हो, वह लंबे समय तक नहीं रहेगी।

कुंडली का चौथा घर ‘बंधु भाव’ कहलाता है। यह घर जातक की घरेलू ख़ुशी से संबंधित होता है।  इसके साथ ही, यह मां के साथ संबंधों को प्रभावित करता हैं। यदि किसी जातक का यह भाव खाली हो तो, परिणामस्वरूप, उस जातक के पारिवारिक संबंधों प्रभावित होते हैं। ज्योतिष के अनुसार, इस घर में कर्क राशि की शक्तिशाली ऊर्जाएं भी होती हैं।

कुंडली के छठे भाव को “अरि भाव” के नाम से जाना जाता है। यह हमारे जीवन में बाधाओं और कठिनाइयों का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही इस भाव से संबंधित जुड़े शरीर के अंग, जैसे- कमर, पेट का निचला हिस्सा, किडनी, नाभि आदि। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब यह घर खाली हो तो, प्रभावित जातक कब्ज, हर्निया आदि स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं आती हैं।

कुंडली में खाली घर का अर्थ

कुंडली का सातवां घर हमारे रिश्तों और उनके प्रदर्शन से संबंधित होता है। जातक के सभी पारिवारिक, व्यक्तिगत (personal) रिश्ते इसी घर से सम्बंधित होते हैं। जब किसी जातक का यह घर खाली होता है, तो यह उसके रिश्तों में समस्या का कारण बनता है। जैसे कि या तो उस जातक के वैवाहिक जीवन में परेशानियां होंगी या वः उसके व्यापारिक \व्यावसायिक संबंध अच्छे नहीं बना पाएंगे।

कुंडली का दसवां भाव ‘कर्म भाव’ कहा जाता है, यह भाव शनि की ऊर्जाओं से संबंधित होने के कारण एस भाव को कर्म भाव कहते हैं। इस भाव का सम्बन्ध घुटनों, हड्डियों और जोड़ों को भी नियंत्रित करना है। यदि यह भाव खाली हो तो, जातक को  घुटनों, हड्डियों और जोड़ों के दर्द से परेशान होना पड़ता है।

इस प्रकार, कुंडली में उपस्थित सभी बारह घर(भाव) जन्म कुंडली का एक टुकड़ा होता है। जो की, जीवन के एक विशिष्ट क्षेत्र और दायरे का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे की, घर और परिवार (चौथा घर), कार्यों के लिए (दसवें घर)। अनुभवी ज्योतिष आचार्यों का ऐसा मानना है कि, जन्म कुंडली में, प्रत्येक घर में किसी राशि और ग्रहों से प्रभावित होता है।

जो की उस भाव से संबंधित क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। किसी भी जातक की कुंडली में सभी घर खाली नहीं होते हैं, बल्कि केवल कुछ घरों में ग्रह नहीं होने के कारण वह घर खाली होता है। जिसका मतलब है कि कोई भी ग्रह जातक के जीवन के उस क्षेत्र को तीव्र रूप से प्रभावित नहीं कर रहा है।  ऐसा नहीं है कि उस भाव में कुछ भी नहीं हो रहा है।


Q. कुंडली में घर का क्या अर्थ होता है?

An. वैदिक ज्योतिष में,  सभी ग्रह प्रत्येक दिन अपनी धुरी पर 24 घंटे में, पृथ्वी के घूमने की स्थिति को दर्शाते हैं। जिससे मनुष्य को यह ज्ञान ,मिलता है कि, उसका जन्म हुआ था उस समय प्रत्येक ग्रह और तारा (सूर्य और चंद्रमा) आकाश में कहाँ स्थित थे। इसके साथ ही, हमारी जन्म कुंडली में बारह घर हैं, और उन घरों में नौ ग्रह स्थित होते हैं।

Q. क्या, कुंडली में खाली घर रहना ठीक है?

An. कुंडली में किसी घर का खाली होना पूरी तरह से सामान्य होता है। कुंडली में, बारह भाव होते हैं और नौ ग्रह होते हैं। किसी भी एक जातक की, जन्म कुंडली में, कम से कम दो या तीन घर खाली होते हैं। कुंडली में किसी घर का खाली होना उस घर से संबंधित मामलों में संघर्ष की स्थिति को दर्शाता है।

Q. कुंडली के पहले घर के खाली होने पर क्या होता है?

An.ज्योतिष शास्त्र में यदि, पहला भाव (घर) खाली हो तो, यह सीधे जातक के आगे बढ़ने और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। और ऐसे जातक में फोकस, लक्ष्य और सफलता प्राप्त करने कमी होती है। इन जातकों को अपने रूप-रंग और सामाजिक सम्मान की भी कोई चिंता नहीं रहती।

Q. कुंडली में खाली घर का क्या महत्व है?

An. कुंडली में, एक खाली घर की कार्यप्रणाली को देखने के लिए, सबसे पहले हमें, यह देखना होगा कि,  उस घर के स्वामी ग्रह कहाँ स्थित है? और यह कैसी शुभ या अशुभ स्थिति में है? इसके अलावा, हमें उस खाली घर पर अन्य ग्रहों व  गोचर के प्रभाव की भी जानकारी हासिल करनी पड़ेगी। जिस प्रकार, ज्योतिष में कुंडली के हर घर (भाव) का एक-दूसरे से अलग महत्व होता है। ठीक वैसे ही, कुंडली के हर खाली घर का भी एक अलग महत्व होता है।

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