सूर्य बल को बढ़ाने वाले ज्योतिषीय रहस्य !
हमारे, शास्त्रों व धार्मिक मान्यताओं में, सूर्य ग्रह को देव की उपाधि दी गई है! सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश से ही पृथ्वी और पृथ्वी पर रहने वाले समस्त जीव-जंतु और वनस्पतियों को जीवन मिलता है! उसी प्रकार, ज्योतिष शास्त्र में, भी सूर्य की बहुत विशेष भूमिका के बारे में, बताया गया है! कुंडली में सूर्य की स्थिति और प्रभाव का बहुत ही महत्व है! तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में, हम सूर्य बल को बढ़ाने वाले ज्योतिषीय रहस्य के बारे में, जानेंगे!
इसके साथ ही, सूर्य बल कुंडली में, किस भाव में सबसे अधिक प्रभावशाली होता है और कैसे होता है इस बारे में विस्तार से जानेंगे! आशा करते हैं, लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें!
पौराणिक मान्यताओं में- सूर्य ग्रह
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य महर्षि कश्यप और माता अदिति के पुत्र हैं! धार्मिक शास्त्र में सूर्य देव को, आत्मा का कारक ग्रह माना गया है! सप्ताह में, रविवार का दिन सूर्य देव की लिए समर्पित है! शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य देव की आराधना व उपासना करने से बहुत ही शुभ प्रभाव जीवन में होते हैं! सूर्य का गोचर सभी राशियों में प्रभावशाली माना जाता है! सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने के लिए एक माह का समय लेते हैं! यानी सूर्य का किसी एक राशि में रहने का समय एक महीने का होता है! इस सौर मास और सूर्य संक्रांति भी कहा जाता है! सूर्य जब सम्पूर्ण राशि चक्र यानी सभी 12 राशि में गोचर के समय को पूरा कर लेते हैं तो, उसे एक सौर वर्ष कहा जाता है!
कुंडली में, सूर्य ग्रह पिता के संबंध और सरकारी नौकरी के लिए प्रभावशाली माने गए हैं! कुंडली में सूर्य के बल को बढ़ाने या घटाने में कुछ विशेष भाव और चिह्न होते हैं जो बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं! कुल-मिलाकर कुंडली में, सूर्य का मजबूत होना जातक को शुभ और सकारात्मक परिणाम के साथ, आत्मविश्वास और सफलता देने वाला होता है! जबकि कमजोर या पीड़ित सूर्य नकारात्मक प्रभाव में, मान-प्रतिष्ठा में कमी के साथ धन हानि देता है! तो, आइए जान लेते हैं, कुंडली के ऐसे विशेष भाव जो सूर्य बल को बढ़ाते हैं!
कुंडली में- सूर्य बल को बढ़ाने वाले विशेष भाव
कुंडली में, कुल बारह भाव होते हैं! जिनमें से कुछ ऐसे विशेष भाव होते हैं जिनमें, सूर्य ग्रह सबसे अधिक बलशाली प्रभाव में होते हैं! ये भाव इस प्रकार हैं-
- पहला भाव (लग्न)
हमारे, ‘मंगल भवन के अनुभवी आचार्यों’ के अनुसार, कुंडली का पहला भाव, यानी लग्न भाव जातक के व्यक्तित्व और स्वयं की पहचान के बारे में, दर्शाता है! इस भाव में, सूर्य ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो ऐसे जातक, उत्साही, आत्मविश्वासी और श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं हैं! - पांचवां भाव
कुंडली में पंचम भाव को संतान भाव, विद्या भाव और बुद्धि भाव भी कहा जाता है! यह भाव जातक की संतान, शिक्षा, बुद्धि, रचनात्मकता और प्रेम संबंधों के बारे जानकारी देता है! इस भाव में, सूर्य की स्थिति मजबूत हो तो जातक को शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है और रचनात्मक कार्यों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं!
- नौवां भाव
कुंडली में नौवां भाव भाग्य भाव, धर्म भाव और पिता का भाव कहलाता है! इस भाव से जातक के भाग्य, धर्म, पिता, उच्च शिक्षा, लंबी दूरी की यात्रा और आध्यात्मिकता के बारे जानकारी मिलती है! इस भाव में, सूर्य मजबूत या बली हो जातक भाग्यशाली होता है और वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर सफल होता है! यह स्थिति जातक के आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाती है!
- दसवां भाव
कुंडली में दसवां भाव कर्म, पेशा और राजयोग का भाव कहलाता है! यह भाव जातक के करियर, पेशे, सामाजिक प्रतिष्ठा, और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है! इस भाव में सूर्य का बलि होना यानी ऐसे जातक करियर में उच्च पद और सम्मान प्राप्त करते हैं!
- ग्यारहवां भाव
कुंडली में ग्यारहवां भाव लाभ, आय और इच्छा का भाव कहलाता है! यह भाव जातक की आय, लाभ, इच्छाओं, और आकांक्षाओं को दर्शाता है! इस भाव में, सूर्य मजबूत हो तो जातक को आर्थिक लाभ मिलता है! ग्यारहवें भाव में सूर्य का बलि होना जातक के मित्रों और सामाजिक संबंधों के लिए लाभकारी प्रभाव देता है!
कुंडली में- सूर्य बल को घटाने वाले विशेष भाव
अलग-अलग कुंडली के अनुसार, सूर्य के बल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले भाव भी होते है! आइये, जानें इन भावों के बारे में-
- छठा भाव
कुंडली में छठा भाव रोग, ऋण और शत्रु का भाव कहलाता है! यह भाव जातक के स्वास्थ्य, ऋण, शत्रुओं, और दैनिक कार्यों को दर्शाता है! सूर्य यहां कमजोर हो तो जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और उसे शत्रुओं से समस्या होती है! छठे भाव में सूर्य का बल कम हो तो, जातक को ऋण और वित्त समस्याएं होती है! जैसे कि जातक को कर्ज में डूबना पड़ सकता है!
- सातवां भाव
कुंडली में सातवां भाव विवाह, साझेदारी और मैत्री का भाव कहलाता है! यह भाव जातक के वैवाहिक जीवन, साझेदारी, और सामाजिक संबंधों को दर्शाता है! यदि सूर्य इस भाव में कमजोर हो तो वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।
- आठवां भाव
कुंडली में आठवां भाव आयु, मृत्यु और रहस्य भाव कहलाता है! यह भाव जातक की आयु, मृत्यु, और रहस्यमय चीजों को दर्शाता है! यदि सूर्य इस भाव में कमजोर हो तो, जातक को अनिद्रा, बेचैनी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं! साथ ही, यह स्थिति जातक की विरासत और संपत्ति पर प्रभाव डालती है, जैसे जातक को विरासत में मिली संपत्ति या धन के मामलों में हानि हो सकती है!
कुंडली में- सूर्य ग्रह के कमजोर या पीड़ित होने के प्रभाव
- जब किसी जातक की कुंडली में, सूर्य ग्रह पीड़ित होता है तो, ऐसे जातक को ह्रदय और आँखों संबंधित समस्याएं परेशान करती है!
- सूर्य कमजोर होने से जातक के पिता के साथ संबंध खराब हो सकते हैं, या पिता का स्वास्थ्य खराब हो सकता है!
- यदि, सूर्य शनि देव के प्रभाव के कारण पीड़ित हैं तो जातक को ब्लड प्रेशर कम होने की समस्याएं आती हैं। वेसे ही, यदि गुरु बृहस्पति से पीड़ित है तो उच्च ब्लड प्रेशर की बीमारी रहती है!
- सूर्य कमजोर होने से जातक के करियर में समस्याएं आती हैं, जैसे नौकरी में समस्याएं, या व्यवसाय में धन हानि!
कुंडली में- सूर्य ग्रह के मजबूत या बली होने के प्रभाव
- कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं तो जातक को जीवन में हमेशा शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है! ऐसे जातक उच्च पद पर कार्य करते हैं! साथ ही, ऐसे जातकों का स्वयं पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है!
- कुंडली में सूर्य जब उच्च के हो, अच्छे भाव में हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि में और अपने मित्र ग्रह की राशि में होते हैं तो जातक को बहुत ही शुभ फल मिलते हैं! ऐसे जातक, सकारात्मक सोच वाला और समाज में सम्मानित होता है।
- ज्योतिष में, सूर्य देव राजा, उच्च पद और स्थायित्व के कारक होते है, सूर्य मजबूत होने से जातक को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है, जिससे वह अपने क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति बन सकता है!
- सूर्य मजबूत होने से जातक के पिता के साथ अच्छे संबंध होते हैं, और पिता का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है!

कुंडली में- सूर्य बल को बढ़ाने वाले विशेष चिह्न
सूर्य की उच्च राशि (मेष)
सूर्य की उच्च राशि मेष राशि है, जिसमें सूर्य की स्थिति होने से सूर्य का बल बढ़ता है और जातक को शुभ परिणाम देता है! मेष राशि में सूर्य की स्थिति जातक को साहसी, आत्मविश्वासी बनाती है!
सूर्य की स्वराशि (सिंह):
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य की स्वराशि सिंह राशि है, जिसमें सूर्य की स्थिति होने से सूर्य का बल बढ़ता है! सिंह राशि में सूर्य की स्थिति जातक को आत्मविश्वासी, साहसी और श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता का आशीर्वाद देती है!
कुंडली में- सूर्य बल को घटाने वाले विशेष चिह्न
नीच का सूर्य
तुला राशि में सूर्य नीच का माना जाता है, जो की, प्रभावित जातक को कमजोर मानसिकता और निराश बनाता है!
शत्रु राशियों के साथ सूर्य
सूर्य ग्रह के शत्रु ग्रहों जैसे कि शनि, शुक्र, राहु और केतु की राशियों में होने से यह जातक को अशुभ फल देता है!
सूर्य का कमजोर षड्बल
ज्योतिष में, सूर्य का षड्बल अन्य ग्रहों के औसत षड्बल से कम होना भी अशुभ माना जाता है!
कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए करें ये कार्य\उपाय
- कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन जल में लाल रंग या रोली मिलाकर सूर्य देव को जल अर्पित करें! जल का अर्घ्य देते समय, “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें!
- निम्न मंत्र का भी जाप करने से भी सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है!
‘एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।
अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर’ ।।
इससे जातक को करियर और व्यवसाय में, मनचाही सफलता मिलती है!
- सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के दिन लाल रंग के वस्त्र का दान करें!
- रविवार के दिन लाल रंग का वस्त्र धारण भी कर सकते हैं! इस उपाय को करने से सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है!
- पिता का सम्मान करने से सूर्य ग्रह को मजबूत किया जा सकता है!
जरूरी नोट- सूर्य बल का प्रभाव जातक की कुंडली में, अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है! इसलिए, किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करना बिलकुल ना भूले और सही प्रभाव के बारे जानकारी लें!
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q, कुंडली में सूर्य कौन से भाव में सकारात्मक या शुभ होते हैं?
An. कुंडली में सूर्य पहले भाव, पांचवें भाव, नौवें भाव और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देने वाले होते हैं!
Q. क्या, शनि के साथ सूर्य अच्छे परिणाम देते हैं?
An. सूर्य ग्रह के शत्रु ग्रहों जैसे कि शनि, शुक्र, राहु और केतु की राशियों में होने से यह जातक को अशुभ फल देता है!
Q. सूर्य कौन सी राशि में सबसे अधिक प्रभावशाली होते हैं?
An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य की स्वराशि सिंह राशि है, जिसमें सूर्य की स्थिति होने से सूर्य का बल बढ़ता है! सिंह राशि में सूर्य की स्थिति जातक को आत्मविश्वासी, साहसी और श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता का आशीर्वाद देती है!
Q. सूर्य को मजबूत करने के लिए क्या करना चाहिए?
An. कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन जल में लाल रंग या रोली मिलाकर सूर्य देव को जल अर्पित करें! जल का अर्घ्य देते समय, “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें! साथ ही, पिता का सम्मान करने से सूर्य ग्रह को मजबूत किया जा सकता है!




