केतु की महादशा, अन्य ग्रहों की अंतर्दशा ! रहस्यमय और अनिश्चितता के साथ जीवन में आएगा एक नया मोड़!

केतु की महादशा

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वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो, केतु कोई ग्रह नहीं है, बल्कि यह एक छाया है! ज्योतिषशास्त्र में भी इन्हें छाया ग्रह की संज्ञा दी गई है! जिन्हें, जीवन में अशुभ और अनिष्टकारी परिणाम देने के लिये जाना जाता है! केतु ग्रह की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि, इनके द्वारा जो भी परिणाम मिलते हैं, चाहे वे शुभ या अशुभ अचानक या आक्स्मिन ही मिलते हैं! यानी केतु का प्रभाव जातक को एक झटके में,  ही अर्श से फर्श और फर्श से अर्श पर लाने की क्षमता रखता है! तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’  के लेख में हम केतु की महादशा के साथ अन्य  ग्रहों की अन्तर्दशा और कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करेंगे…  

ज्योतिष में, केतु की महादशा के साथ उसके शुभ और अशुभ फलों का निर्धारण अन्य ग्रहों की अंतर्दशा पर भी निर्भर करता है! यानी केतु के साथ, विभिन्न ग्रहों की अंतर्दशा का फल जातक के जीवन को अलग-अलग प्रकार से प्रभावित करता है!  ज्योतिष में केतु की महादशा का समय 7 साल तक बताया गया है! इसी के बीच, प्रत्येक ग्रह की अंतर्दशा का भी एक विशिष्ट समय होता है! अतः ग्रहों के अनुरूप प्रभाव भी विभिन्न प्रकार के होते हैं! किसी भी जातक की जन्म कुंडली में, केतु की महादशा का समय बेहद महत्वपूर्ण और नए परिवर्तन लाने का समय होता है! इस दशा के समय जातक के मन में अस्थिर विचार आते हैं जो उन्हें बहुत तकलीफ देते हैं! ऐसे में, जातक अपने लिए सही, गलत का चयन करने में असमर्थ रहता है!

इसके साथ ही, केतु की महादशा में जातक को समस्याएं ही, नहीं, बल्कि लाभ भी मिलता है!  लेकिन यह लाभ भी बहुत कम समय के लिए सीमित रूप में मिलता है! जिस प्रकार केतु एक  छाया ग्रह है, उसी प्रकार उसके प्रभाव भी जातक को आंतरिक रूप से समस्या देते हैं! ऐसे लोग बाहरी लोगों के साथ अधिक संपर्क रखते हैं! धन, परिवार, संबंधों के मामले में यह दशा जातक को अस्थिरता देने वाली होती है! केतु महादशा के समय अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का आगमन भी कई तरह से असर दिखाने वाला होता है! तो आइये जान लेते हैं केतु की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का प्रभाव क्या होगा! 

जब केतु की महादशा के साथ, केतु की ही अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जीवन में बहुत से परिवर्तन लाने वाला समय होगा! केतु जीवन में भ्रम की स्थिति में डालने के कारक माने गए है! अतः इनकी महादशा और अंतर्दशा के समय जातक को, अपनी चीजों को लेकर भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है! लेकिन, यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में केतु का स्थान शुभ हो तो, यह कुछ बेहतर परिणाम देने वाला होगा!  

जब, केतु की महादशा के साथ, बुध की अंतर्दशा हो तो, यह जातक के लिए बहुत ही धैर्य, समझदारी और सावधानी पूर्वक कार्य करने का समय होता है! क्योंकि, इस समय जातक, अधिक बेचैन और उत्साही प्रव्रत्ति का सामना करना पड़ सकता है! लेकिन, अधिक सोच-विचार और व्यर्थ की चिंता में न पड़कर आप अपने कार्य पर फोकस करेंगे तो, आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे! 

केतु की महादशा के साथ, गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा, जातक के आध्यात्मिक विकास को बढ़ाता है! क्योंकि केतु और गुरु बृहस्पति दोनों ही ग्रहों का संबंध मुक्ति और अध्यात्म से है! ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस अवधि के दौरान जातक बहुत सारी धार्मिक यात्राएं करता है और अपना धन दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों में अधिक खर्च करता है! साथ ही, गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव से, जातक को विदेश यात्रा करने के अवसर मिलते हैं! लेकिन, केतु के प्रभाव से जातक अपने करियर में भ्रम की स्थिति का सामना करते हैं! वैवाहिक जीवन में, संघर्ष देखने को मिल सकता है! 

केतु की महादशा के साथ, शुक्र की अंतर्दशा का समय जातक को लाभ और सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है! इस समय पर जातक को भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ कुछ नई चीजों को पाने का अवसर मिलता है! कुंडली में केतु के साथ शुक्र का संबंध यदि अनुकूल प्रभाव में हो तो, यह जातक को, लाभ देने वाला हो सकता है! इस समय जातक को, अच्छे फल प्राप्त होंगे, और रिश्ते में नई शुरुआत के लिए भी यह समय आपके लिए अनुकूल होगा! 

जब केतु की महादशा के साथ में सूर्य की अन्तर्दशा होती है, तब, इस समय जातक को, मानसिक और शारीरिक समस्याओं और कष्टों का सामना करना पड़ सकता है! इस समय जातक की धार्मिक यात्राओं में रूचि बढ़ेगी और तीर्थ स्थानों के दर्शन होंगे! सरकार की ओर से लाभ नहीं होगा, और आपको बाहरी विवादों से बचने की आवश्यकता होगी! ऐसे जातक अपने निर्धारित किए लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश में लगे रहते हैं! 

जब, केतु की महादशा के साथ, चन्द्रमा की अन्तर्दशा का समय हो तो, यह जातक के जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष परिणाम देने वाला होगा! चन्द्रमा के कारण केतु को मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है! साथ ही, कार्यक्षेत्र में भी रूचि तो होगी, लेकिन अपने कार्य को सही रूपरेखा न मिलने से असंतुष्ट होगा! पारिवारिक मामलों में भी विवाद और कुछ अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है! इसलिए धैर्य बनाए रखने में ही समझदारी होगी! आर्थिक और भौतिक सुख के लिए भी यह समय कुछ उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है! चूँकि, चन्द्रमा जल तत्व से संबंधित ग्रह है, इसलिए जल जनित रोग से भी जातक प्रभावित हो सकते हैं! 

केतु की महादशा के साथ, शनि की अंतर्दशा यदि हो, तो, यह समय जातक के लिए बहुत ही मुश्किल समय होता है! ऐसे जातक को नौकरी और व्यवसाय सम्बन्धी मामलों में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है! साथ ही, ऐसे जातक, सांसारिक अलगाव की भावना से ग्रस्त रहते हैं! पारिवारिक सम्बन्धों और रिश्तों के लिए भी यह स्थिति एक संघर्षमय अवधि की भूमिका निभाती है! जातक के खर्च अधिक होते हैं! मानसिक कष्ट और बेचैनी की समस्या के साथ शारीरिक समस्याएं भी होती हैं! ऐसे जातक अपने जीवन से असंतुष्ट महसूस करते हैं! यात्रा करने पर कोई अनहोनी हो सकती है! हमारे ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, इस महादशा के दौरान जातक को बहुत सावधानी और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है! 

ज्योतिष में, केतु की महादशा के साथ यदि मंगल की अंतर्दशा चल रही हो तो, यह जातक के कुछ विशेष शुभ संकेत नहीं माना जाता है! क्योंकि, मंगल आक्रामकता और महत्वाकांक्षा के कारक ग्रह हैं, और केतु भी मंगल के समान ही अशुभ और क्रूर ग्रह माने गए हैं! इनके साथ में, प्रभाव होने पर जातक, अनुचित विवादों में पड़ने लगता है! साथ ही, ऐसे जातक का व्यक्तित्व मजबूत और दूसरों के साथ आक्रामक प्रवृत्ति वाला होता है! ऐसे जातक को, बहुत से शारीरिक और मानसिक कष्टों से गुजरना पड़ता है! केतु के साथ, मंगल का होना जातक के लिए नकारात्मक प्रभावों और समस्याओं का कारण बनता है! ऐसे जातक के सभी कार्यों में बाधा आती है! स्वास्थ्य की बात करें तो, जातक को दुर्घटनाओं, एलर्जी और चिकित्सा संक्रमणों का भी सामना करना पड़ता है! लेकिन, इसकी सबसे विशेष बात यह होती है की, इन सभी समस्याओं से जातक को, विपक्ष के विरुद्ध दृढ़ संकल्प और साहस भी मिलता है! जीवन के कठिन पहलुओं को पार करने में सक्षम होता है! 

केतु की महादशा व अन्य ग्रहों की अंतर्दशा

जब, केतु की महादशा के साथ अन्तर्दशा राहु की हो तो, यह समय जातक के जीवन में, बहुत ही, महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला होता है! जिसके प्रभाव में, जातकों को कई नयी चीजों के अनुभव में रूचि होती है! वे, अपने आस पास की स्थिति को लेकर बहुत अधिक जिज्ञासु और उत्सुक रहते हैं! साथ ही, अपने कार्य के लिए भी बहुत सकारात्मक सोच वाले होते हैं और सफलता के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं! केतु के साथ राहु की अन्तर्दशा जातक के स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ कमजोर मानी जाती है!  इस समय विदेश यात्रा के योग बनते हैं! सामाजिक क्षेत्र की दृष्टि से यह स्थिति प्रभावशाली होती है!

यदि कुंडली में, केतु की महादशा के दौरान अशुभ फल मिल रहे हो तो, यह उपाय आपके लिए लाभकारी है- 

  1. गणेश जी की पूजा करना, केतु की महादशा के दौरान अशुभ फलों के नकरात्मक प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ता है! क्योंकि गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं! 
  2. धान, चावल और अन्य खाद्यान्न चीजों का दान, केतु की महादशा के दौरान लाभदायक हो सकता है।
  3. गाय को हरा चारा या हरी पत्तेदार सब्जियों को खिलाने से, केतु की महादशा के दौरान लाभ होता है!
  4. केतु मंत्र का जाप करना केतु की महादशा के दौरान लाभदायक हो सकता है, क्योंकि इससे केतु के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
  5. आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि लें और मन को धार्मिक कार्यों में लगाने से केतु की महादशा के दौरान आपको लाभ मिलेगा! क्योंकि इससे आंतरिक शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होती है!

Q. केतु की महादशा कितने वर्ष तक चलती है?

An. ज्योतिष में केतु की महादशा का समय 7 साल तक बताया गया है! इसी के बीच, प्रत्येक ग्रह की अंतर्दशा का भी एक विशिष्ट समय होता है!

Q. क्या, केतु की महादशा से अशुभ परिणाम मिलते हैं?

An. नहीं, केतु की महादशा में जातक को समस्याएं ही, नहीं, बल्कि लाभ भी मिलता है!  लेकिन यह लाभ भी बहुत कम समय के लिए सीमित रूप में मिलता है! जिस प्रकार केतु एक  छाया ग्रह है, उसी प्रकार उसके प्रभाव भी जातक को आंतरिक रूप से समस्या देते हैं! लेकिन, ऐसे जातक की रुचि अध्यात्म में अधिक होती है!

Q. केतु की महादशा के साथ शनि की अन्तर्दशा का क्या प्रभाव होगा?

An. केतु की महादशा के साथ, शनि की अंतर्दशा यदि हो, तो, यह समय जातक के लिए बहुत ही मुश्किल समय होता है! ऐसे जातक को नौकरी और व्यवसाय सम्बन्धी मामलों में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है! साथ ही, ऐसे जातक, सांसारिक अलगाव की भावना से ग्रस्त रहते हैं!

Q. केतु की महादशा के दौरान कौन से देवता का पूजन करना लाभकारी है?

An. गणेश जी की पूजा करना, केतु की महादशा के दौरान अशुभ फलों के नकरात्मक प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ता है! क्योंकि गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं

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