कर्क लग्न में शुक्र ग्रह ! लग्न में होगी, बाधक या मारक, ऐसी स्थिति जो है हानि का संकेत |

कर्क लग्न में शुक्र ग्रह

ज्योतिष शास्त्र में जीवन का कोई ऐसा पहलू छुटा नहीं है जो, हम सभी के भविष्य की जानकारी न रखता हो।

यानी जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी सवाल जो आपको परेशान करते हैं। उनका जवाब आपको ज्योतिष में बहुत ही विस्तृत और सटीक प्रकार से मिल जाएगा। 

आपको बस अपने सही मार्ग दर्शन के लिए एक कदम आगे बढ़ाने की जरुरत है। तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको ऐसे ही एक महत्वपूर्ण पहलू और विशेष स्थिति के बारे में जानकारी देंगे जो, आपके जीवन के लिए एक जरूरी आधार का काम कर सकती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्क लग्न में शुक्र ग्रह की स्थिति कुंडली में भाव और राशि के अनुसार अलग-अलग प्रभाव या फल देने वाली होती है। सामान्यतः शुक्र ग्रह को, धन, कला, सौंदर्य और भौतिक सुख का कारक ग्रह कहा जाता है। लेकिन कर्क लग्न के लिए यह चतुर्थेश (सुखेश) और एकादशेश (लाभेश) होने के कारण कुछ भावों जैसे बारहवें या आठवें भाव में बाधक या मारक भी हो सकता है।

जिससे जातक को रिश्तों में उतार-चढ़ाव या आर्थिक रूप से तंगी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, इस लग्न में दूसरे, पांचवें, दसवें, ग्यारहवें और बारहवें भावों में शुक्र के होने से जातक को धन और करियर में सफलता मिलती है। विशेषकर, जब यह शुभ ग्रहों की शुभ दृष्टि में हो, तब यह जातक को धनवान होने का आशीर्वाद देती है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों   के अनुसार, कर्क लग्न के लिए कुछ विशेष ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति में शुक्र बाधक बनता है। यानी इस लग्न में यह प्रेम और सौन्दर्य का कारक ग्रह शुक्र बाधकेश प्रभाव देने वाला हो सकता है। कर्क एक जलीय राशि है और शुक्र एक अनुकूल व शुभ ग्रह है। चूँकि, कर्क राशि के राशि स्वामी चन्द्र देव हैं जो कि,जल तत्व से सम्बन्धित ग्रह हैं। चंद्रमा के साथ शुक्र के संबंध अनुकूल नहीं माने जाते हैं।

वैसे तो, दोनों ग्रह ही शुभ है, लेकिन इन दोनों ग्रहों का प्रभाव एक-दूसरे के लिए शत्रुतापूर्ण होने के कारण यह कर्क लग्न के लिए बाधक की भूमिका में होता है। इसके अलावा, शुक्र की स्थिति लग्न कुंडली में कई मायनों में अपना प्रभाव शुभ या अशुभ देने वाली हो सकती है। चलिए, हम आपको समझाते हैं, कि शुक्र ग्रह की स्थिति किस प्रकार लग्न के लिए बाधक प्रभाव देने वाली है।

                                                                      लेख में आगे पढ़ें-

  1. यदि लग्न में शुक्र बाधक स्थिति या प्रभाव में हो तो, जातक को अपने जीवन में धन संबंधी पर्शानियों का सामना  करना पड़ता है।
  2. इस प्रभाव से लग्न के जातक को जल तत्व के प्रबल प्रभाव होते हैं और उनमें भावनाओं की भी स्थिति बहुत अधिक जोश से भरी होती है।
  3. शुक्र का प्रभाव जातक को संवेदनशील बनाता है और ऐसे जातक दूसरों से बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं, लेकिन दूसरों से उन्हें, उतना लगाव नहीं मिल पाता है। 
  4. बाधक शुक्र के प्रभाव में जातक प्यार के मामलों में, विशेष रूप से कमजोर होते हैं। क्योंकि, वे आसानी से मीठी-मीठी बातें करके स्वयं आहत हो सकते हैं। दूसरों पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं और प्यार के मामलों में बहुत आशावादी होते हैं।
  5. ऐसे जातकों को दूसरों के प्रति बहुत सहानुभूति और प्रेम की भावना होती है।

ज्योतिष के मुताबिक, इस लग्न कुंडली में शुक्र देवता चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। इस लग्न के लिए शुक्र सम ग्रह माने जाते है, क्योंकि यह कुंडली के दो शुभ भावों के स्वामी हैं। अगर शुक्र देवता लग्न, दूसरा, चौथा, पांचवा, सातवां, नौवें , ( उच्च ), दसवें और ग्यारहवें भाव में विराजमान हो तो अपनी क्षमतानुसार अच्छा फल देते हैं। तीसरा (नीच ), छठा, आठवें, बारहवें भाव में वे अपने गुणों के अनुसार अशुभ फल देते हैं। 

ज्योतिष गणना के अनुसार, यदि शुक्र ग्रह जन्म कुंडली में बलवान हो तो वाहन सुख की प्राप्ति होती है। ऐसे जातक को सुन्दर घर की प्राप्ति होती है। परिवार और समाज में संबंधियों से सहयोग मिलता है। माता का सुख मिलता है। यदि शुक्र निर्बल और पीड़ित हो तो ऐसे जातक को घर का सुख नहीं मिलता। करियर में समस्या आती है। और माता का सुख कम मिलता है ।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्क लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए सबसे अधिक शुभ और धन प्रदाता ग्रह सूर्य ग्रह है। धनेश सूर्य की शुभ स्थिति और ग्रहों की दृष्टि से, जातक के धन संबंधी जानकारी मिल सकती है। लग्नेश चंद्र, पंचमेश व दशमेश मंगल, भाग्येश गुरु बृहस्पति की अनुकूल स्थितियां कर्क लग्न वालों के लिए धन वैभव में वृद्धि देने वाली होती है। वैसे कर्क लग्न के लिए शुक्र, शनि व बुध परम पापी, गुरु बृहस्पति और सूर्य ग्रह शुभ है। इस लग्न के लिए एक मात्र मंगल ग्रह राजयोग कारक ग्रह है।

  1. वाहन, घर, सुंदर मकान, धन और संपत्ति का लाभ।
  2. रिश्तेदार, मित्र और जीवनसाथी से सहयोग, प्रेम और सामंजस्य में वृद्धि।
  3. करियर में सफलता, उच्च पद और मान-सम्मान, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में।
  4. भावनात्मक स्थिरता और सुख-समृद्धि में वृद्धि।
  5. धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि। 
  1. माता से सुख में कमी।
  2. मन अशांत रहता है, रिश्तों में धोखा या असुरक्षा महसूस हो सकती है, प्रेम और वैवाहिक जीवन में समस्याएं।
  3. करियर में बाधा और असफलता मिल सकती है।
  4. स्वास्थ्य समस्याएं और जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव।
  5. अनावश्यक खर्चे बढ़ सकते हैं।

कर्क लग्न में, शुक्र ग्रह चौथे भाव व ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं।  उनको एक केंद्र का भाव व दूसरा लक्ष्मी भाव लग्नेश बुध के प्रभाव से प्रदान किया है क्योंकि लग्नेश बुध और शुक्र का परस्पर मित्रता का संबंध है। इसलिए, शुक्रदेव यहां योगकारक प्रभाव देते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र कर्क लग्न में, लग्न भाव में होने पर जातक को सुंदर व्यक्तित्व और अद्भुत सौंदर्य  प्रदान करने वाले होते हैं। वे अपनी सातवी दृष्टि से सातवें भाव को देखते हैं, जिनके फलस्वरूप जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 

लग्न कुंडली के दूसरे भाव में शुक्र ग्रह जातक को धन संग्रह कुटुंब परिवार वाणी से संबंधित शुभ व अच्छे फल देते हैं। इस भाव में वे सातवी दृष्टि से आठवे भाव को देखते हैं जिससे, वे आठवे भाव से संबंधित बुरे परिणामों को समाप्त कर उन्हें शुभ परिणाम में बदल देते हैं।

लग्न की जन्म कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र ग्रह नीच के हो जाते हैं, अतः यह नीच के होने से शुक्र देव मारक प्रभाव देते हैं। इस भाव में यदि उनका नीच प्रभाव नहीं होता है तो, उस स्थिति में जातक को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। विशेष रूप से इस भाव में, शुक्र के प्रभाव नकारात्मक ही होते हैं।

लग्न कुंडली के चौथे भाव में, शुक्र ग्रह अपनी मूल त्रिकोण राशि में होने से बहुत ही शुभ स्थिति में होते हैं। क्योंकि, यहां उनको दिग् बल प्राप्त होता है, साथ ही वे अपने मूल त्रिकोण राशि में होने से वे यहां पर ‘मालव्य’ नाम का पंच महापुरुष योग  बनाते हैं। अतः जातक को शुक्र के शुभ प्रभाव से मान-सम्मान भवन,वाहन संपत्ति -समृद्धि और सभी प्रकार की भौतिक सुख प्राप्त होते हैं।

लग्न के पांचवे भाव में, शुक्र के होने से जातक को प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है। जातक को शिक्षा में सपोर्ट करने वाले पुत्र आदि का सुख मिलता है।  साथ ही जातक के आय के साधनों में वृद्धि होती है। कुल मिलाकर  इस भाव में,  शुक्र जातक को शुभ फल प्रदान करते हैं।

लग्न कुंडली के छठे भाव में शुक्र के प्रभाव अति मारक हो जाते हैं। इसलिए, छठे भाव के सभी फलों से जातक को अशुभ प्रभाव मिलते हैं। इसके साथ ही शुक्र की सातवीं दृष्टि बारहवें भाव में होने पर जातक को नकारात्मक प्रभाव मिलते हैं।

लग्न कुंडली के सातवें भाव में, शुक्र देव अपने मित्र शनि की राशि में होते हैं। साथ ही, यह इनका कारक  भाव भी होता है। इसलिए, जातक को इस भाव से सम्बन्धित फलों में शुभ प्रभाव मिलते हैं। जिससे जातक को सुन्दर व्यक्तित्व व मोहकता मिलती है।

आठवें भाव में शुक्र देव के विद्यमान होने से शुक्र के प्रभाव जातक के लिए मारक हो जाते हैं। अतः लग्न पर शुक्र की दृष्टि से जातक को दशा-अन्तर्दशा में, नकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

लग्न के इस भाव में शुक्र के प्रभाव विशेष रूप से उच्च के होते हैं। अतः जातक को अति शुभता प्रदान करने वाली फलों की प्राप्ति होती है। इस भाव में, शुक्र सातवीं दृष्टि से तीसरे भाव को देखते हैं और तीसरे भाव के कारक फलों में वृद्धि करते हैं। 

लग्न कुंडली के दसवें भाव में शुक्र ग्रह अच्छे परिणाम देने के कारक होते हैं। ऐसे जातक को राजकीय क्षेत्र में अच्छी सफलता मान-सम्मान प्रदान और संपत्ति का सुख मिलता है। इसके साथ ही, ग्यारहवें भाव के स्वामी होने कारण जातक के आय के स्रोतों में वृद्धि होती है।

कुंडली के ग्यारहवें भाव में शुक्र के होने से जातक को स्वग्रही होने के कारण अच्छे फल मिलते हैं। क्योंकि, सातवीं दृष्टि से पंचम भाव को देखते हैं तो वे लग्न कुंडली के इस भाव के शुभ फलों में वृद्धि करते हैं। हालांकि, जातक के जीवन में, भाग दौड़ व छोटी-मोटी बीमारियां हो सकती हैं।

लग्न कुंडली के बारहवें भाव में शुक्र के प्रभाव सामान्यतः मारक होते हैं, लेकिन, यह भाव शुक्र ग्रह का कारक भाव होने से यह जातक के लिए विदेशी सेटलमेंट विदेश यात्राएं या घर से दूर रहकर धन अर्जन के मामलों में, अच्छे प्रभाव देते हैं। साथ ही जातक को सभी भौतिक सुख सुविधाएं भी मिलती हैं।

कर्क लग्न में शुक्र ग्रह
  • शुक्रवार को सफेद या चमकीले रंग के कपड़े पहने, और घर में भूरे या बेज रंग से बचें।
  • शुक्र को मजबूत करने के लिए “ॐ द्रां द्रीं सः शुक्राय नमः” का जाप करें। इसके अलावा, आप “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप दुर्गा सूक्त का पाठ भी कर सकते हैं।
  • शुक्रवार को देवी लक्ष्मी या माता दुर्गा की पूजा करें और उन्हें सफेद फूल अर्पित करें।
  • घर में शुक्र यंत्र स्थापित करें और उसकी पुरे विधि-विधान से पूजा करें।
  • सफेद गाय को रोटी या चारा खिलाएं।
  • गरीबों और जरूरतमंदों की अपनी यथा सामर्थ्य मदद करें।
  • चांदी धारण करें या सफेद रंग की वस्तुओं का दान करें (जैसे चावल, दूध, चीनी)।
  • किसी ज्योतिषी के परामर्श से आप छह या तेरह मुखी रुद्राक्ष पहन सकते हैं।
  • स्नान के जल में इलायची डालकर स्नान करने से भी शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं लेकिन, ज्योतिष परामर्श के बाद ही ये उपाय करें।
  • पूरी तरह से साफ-सुथरे वस्त्र पहनें, कटे-फटे या जले वस्त्र न पहने। 

Q. कर्क लग्न के लिए शुक्र ग्रह के क्या प्रभाव होते हैं?

An. कर्क लग्न के लिए यह चतुर्थेश (सुखेश) और एकादशेश (लाभेश) होने के कारण कुछ भावों जैसे बारहवें या आठवें भाव में बाधक या मारक भी हो सकता है। जिससे जातक को रिश्तों में उतार-चढ़ाव या आर्थिक रूप से तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

Q. कर्क लग्न में शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. कर्क लग्न में शुक्र के अशुभ प्रभाव में, माता से सुख में कमी, मन अशांत रहता है, रिश्तों में धोखा या असुरक्षा महसूस हो सकती है, प्रेम और वैवाहिक जीवन में समस्याएं। करियर में बाधा और असफलता मिल सकती है।

Q. कर्क लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन सा है?

An. कर्क लग्न के लिए शुक्र, शनि व बुध परम पापी, गुरु बृहस्पति और सूर्य ग्रह शुभ है। इस लग्न के लिए एक मात्र मंगल ग्रह राजयोग कारक ग्रह है।

Q. कर्क लग्न में शुक्र के शुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. कर्क लग्न में शुक्र के शुभ प्रभाव में, वाहन, घर, सुंदर मकान, धन और संपत्ति का लाभ। रिश्तेदार, मित्र और जीवनसाथी से सहयोग, प्रेम और सामंजस्य में वृद्धि। करियर में सफलता, उच्च पद और मान-सम्मान, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में।

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