कन्या लग्न में सूर्य ग्रह के विशेष प्रभाव, स्थिति, फलादेश व नक्षत्र की महत्वपूर्ण जानकारी व सुझाव |

कन्या लग्न में सूर्य ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र में, कुल 12 राशियां होती हैं! जिनमें कन्या राशि छठे स्थान पर आती है। जब यह राशि लग्न में उदय होती है तब उस जातक के जीवन में कई प्रकार की प्रतिस्पर्धा और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए,  कहा  गया है कि, यदि आप कन्या लग्न में जन्में है तो, आपको अपने जीवन में बिना किसी समस्या और प्रतिस्पर्धा का सामना किए बिना कुछ हासिल नहीं होगा। एक बार संघर्ष तो करना पड़ेगा।

 इसके साथ ही, ज्योतिष में, यह भी बताया गया है कि, कन्या लग्न के प्रभाव से इन जातकों में, संघर्षों से लड़ने की बहुत मजबूत क्षमता होती है। क्योंकि यह राशि पृथ्वी तत्व की राशि मानी गई है। इसलिए, इनमें जटिल परिस्थितियों से पार निकलने में श्रेष्ठ क्षमता होती है। 

इस राशि के स्वामी, बुध ग्रह है, जो की बौद्धिक क्षमता के कारक माने जाते हैं।  इसलिए बुध के प्रभाव से इस राशि लग्न के जातकों में, बुद्धिमान व व्यवहार कुशलता के भी श्रेष्ठ गुण पाए जाते हैं। इनका विशेष गुण होता है ये जातक शारीरिक बल के स्थान पर, दिमाग से कार्य को पूरा करने में सक्षम होते हैं।

 तो आइए, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख   में हम आपको कन्या लग्न में सूर्य ग्रह की विशेष स्थिति  और फलादेश की विस्तार से जानकारी देंगे। हम आप सभी पाठकों से आशा करते हैं, लेख में दी गई जानकारी के लिए हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

इस लग्न कुंडली में आत्मा के कारक सूर्य ग्रह बारहवें (द्वादश) भाव के स्वामी है। इसलिए, वह कुंडली के अति मारक ग्रह की भूमिका में होंगे। इसके अलावा, लग्न कुंडली के सभी भावों में, वे अपनी दशा-अंतर्दशा में क्षमतानुसार अशुभ फल देते हैं। 

लेकिन, कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव में स्थित सूर्य ग्रह विपरीत राजयोग में आकर जातक के लिए शुभ फल देने की क्षमता भी रखते हैं। परंतु ज्योतिष की दृष्टि से, इस लग्न में सूर्य के शुभ प्रभाव के लिए बुध ग्रह का बलवान और शुभ प्रभाव में होना जरुरी है। 

ज्योतिष शास्त्र में, कन्या लग्न (Virgo Ascendant) में सूर्य उनके बारहवें भाव (12th House) के स्वामी हैं। यह भाव, खर्च, विदेश यात्रा और मोक्ष का कारक है। इसलिए वे इस लग्न के लिए, एक तटस्थ या मारक ग्रह की तरह व्यवहार कर सकते हैं। साथ ही, बलि या मजबूत सूर्य शुभ फल (विदेश से अच्छा धन लाभ, उच्च पद) देने का कारक होगा, वहीँ, निर्बल या पाप ग्रहों की दृष्टि में सूर्य व्यय, नेत्र संबंधी रोग और पिता के सुख से वंचित प्रभाव देंगे। आये इस तथ्य के मुख्य बिन्दुओं के बारे में जान लेते हैं।

कन्या लग्न में सूर्य की विशेष स्थिति और फलादेश:

  • लग्न के प्रथम भाव (1st House) में-आत्मविश्वास में वृद्धि, लेकिन स्वास्थ्य (विशेषकर सिर दर्द या आंख) में समस्या।
  • लग्न के दसवें भाव (10th House) में- लग्न के लिए, बहुत ही श्रेष्ठ स्थिति। सूर्य को दिशात्मक बल मिलता है, जिससे जातक को करियर में सफलता, सरकारी क्षेत्र से लाभ, और समाज में श्रेष्ठ मान-प्रतिष्ठा मिलती है।
  • बारहवें भाव (12th House) में (स्वराशि – सिंह)- विदेश यात्रा या विदेशी स्रोतों से अच्छा धन लाभ, आध्यात्मिक रुचि में वृद्धि, लेकिन उच्च व्यय और खर्च की अधिकता।
  • पाप ग्रहों की दृष्टि या प्रभाव में-  लग्न में सूर्य का शनि या राहु से प्रभावित होने पर जातक को निद्रा (Insomnia) की समस्या, पिता के स्वास्थ्य में हानि और अनावश्यक धन खर्च के अशुभ प्रभाव का सामना करना पड़ता है। 

इस लग्न में सूर्य देव बारहवें भाव (व्यय भाव) के स्वामी होते हैं, इसलिए इन्हें मारक या प्रतिकूल ग्रह माना जाता है। जो मुख्य रूप से उच्च व्यय, मानसिक अशांति या स्वास्थ्य में कमी या कष्ट देने के अशुभ प्रभाव दे सकते हैं। यदि सूर्य लग्न कुंडली में, अच्छी स्थिति में इन भावों में (6, 8, 12 भावों हो तो, विपरीत राजयोग के प्रभाव से जातक को विदेश से लाभ व सफलता, और अहंकार जैसे परिणाम मिलते हैं।  लेकिन, अशुभ ग्रहों की दृष्टि में, नेत्र कष्ट और पिता से अनबन जैसे अशुभ परिणाम मिलते हैं। 

  1. सूर्य बलवान होने पर राज्य, सेना विभाग या सरकार के उच्चाधिकारियों से संपर्क और लाभ।
  2. बारहवें  भाव का स्वामी होने के कारण सूर्य विदेश से संबंध या यात्रा के प्रबल योग।
  3. धार्मिक और सुदूर स्थानों की यात्राओं पर व्यय होता है। 
  1. सूर्य की दशा व अंतर्दशा के अशुभ प्रभाव में अनावश्यक खर्च और आर्थिक तंगी।
  2. आँख के रोग, सिरदर्द, अनिद्रा (Insomnia) या मानसिक तनाव जैसी समस्याएं।
  3. पिता के सुख में कमी या उनके साथ वैचारिक मतभेद की समस्या।
  4. अहंकार में वृद्धि और पार्टनरशिप में कमी और धोखा मिलने के योग। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि लग्न कुंडली में सूर्य बलवान हो और किसी शुभ भाव में स्थित हो तो उस शुभ भाव के अनुसार जातक को शुभ फल, धन लाभ और मान-प्रतिष्ठा देने का कारक होता है। यानी वे अपनी दशा-अंतर्दशा में जातक को शुभ परिणाम देता है। ऐसे जातक को  राज्य और रक्षा विभाग के बड़े अफसरों से संपर्क और सहायता मिलती है। ऐसे जातक का धन खर्च धार्मिक कार्यों में और शुभ कार्यों में होता है। ऐसे जातक कई धार्मिक स्थलों और और महासागरों के दर्शन होते हैं।

लेकिन, अपनी दशा-अन्तर्दशा में, सूर्य यदि निर्बल और पाप ग्रहों की द्रष्टि में हो तो, ऐसे जातक को फिजूल खर्च और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस अवधि में जातक को आंख में कष्ट रहेगा। सेना विभाग के अधिकारियों से अनबन रहेगी । कुंडली में, जातक को उस भाव से संबंधित बातों से हानि का सामना करना पड़ेगा, जिसमें कि सूर्य ग्रह स्थित हो । यदि शुक्र सहित सूर्य पर राहु, शनि का प्रभाव हो तो उस अवधि में जातक को निद्रा के अभाव की समस्या होगी। पुत्र को विशेष कष्ट का सामना करना पड़ेगा। पिता के सुख में हानि या पिता से अनबन होगी।  

इस लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता ग्रह शुक्र है। जिससे धनेश शुक्र की शुभ स्थिति से, जातक के धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रहों की स्थिति, आर्थिक स्थिति,  आय के स्रोतों और चल-अचल संपत्ति की जानकारी मिलती है। 

इसके अलावा लग्नेश बुध, पंचमेश शनि और लाभेश चंद्रमा की अनुकूल स्थितियां इस लग्न वालों के लिए धन, ऐश्वर्य और वैभव को बढ़ाने में सहायक होती है। वैसे, कन्या लग्न के लिए मंगल व सूर्य ग्रह परम पापी और अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रह हैं। अकेला शुक्र शुभ फलदायक है। चंद्र और बुध योग कारक है। मंगल अष्टमेश होने के कारण सह मारकेश ग्रह की भूमिका में होगा।

ज्योतिष में, नक्षत्र के बारें में बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया गया है। कन्या राशि में तीन नक्षत्र विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं। जिनमें, उतरा फाल्गुनी, हस्त और चित्रा नक्षत्र आते हैं। इसी के साथ सूर्य जब कन्या राशि में होता है तो, जिस नक्षत्र के साथ भी योग बनता है उसके साथ मिलकर जातक को विशेष परिणाम देता है। आइये जान लेते हैं, इन नक्षत्रों के साथ लग्न कुंडली में सूर्य के प्रभाव के बारे में-

इस नक्षत्र का स्वामी भी सूर्य  ग्रह ही है, जिसके कारण जातक को विशेष परिणाम मिलते हैं। कन्या राशि में विराजमान जब, इस नक्षत्र के साथ संबंध बनाता है तो ऐसे जातक का चरित्र और उसका व्यवहार दूसरों को बहुत आकर्षित और मोह लेने वाला होता है। ऐसे जातक अपने काम में दक्ष तो होते ही हैं, साथ ही, वे योग्य होने के साथ-साथ विशेष गुणों से युक्त और सामाजिक प्रतिष्ठा वाले होते हैं।

कन्या लग्न में सूर्य ग्रह

यह नक्षत्र चंद्रमा के आधिपत्य में होता है जिसका सम्बन्ध कुशल हाथों से किए जाने वाले कार्यों, व्यावहारिकता और शारीरिक कार्य से होता है। इस नक्षत्र (हस्त) में, सूर्य का प्रभाव होने से जातक काम को लेकर परिश्रम और लक्ष्य को प्राप्त करने वाले होते हैं। जो अपने कार्य को बहुत ही, उत्कृष्टता से करता है। ऐसे जातक बहुत ही रचनात्मक और व्यवहार कुशल होते हैं। नई-नई चीजों के निमार्ण कार्य में वे बहुत ही श्रेष्ठ होते हैं।

  • चित्रा नक्षत्र (Chitra Nakshatra) 

इस नक्षत्र पर मंगल का आधिपत्य होता है। इसलिए इस नक्षत्र में रचनात्मकता के गुण के साथ, चीजों के विस्तार पर ध्यान देने की प्रवृत्ति भी होती है। इस नक्षत्र में  सूर्य का प्रभाव जातक को हर कार्य में सौन्दर्य बोध की अच्छी समझ और श्रेष्ठ बुद्धि देने वाला होता है।

कन्या लग्न के जातकों को, सूर्य की शुभता  बढ़ाने के लिए ये उपाय करना चाहिए-

  1. कभी भी बिना ज्योतिष परामर्श के कन्या लग्न में सूर्य का रत्न ‘माणिक्य’ नहीं पहनना चाहिए। 
  2. कुंडली में सूर्य की दशा में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ सबसे प्रभावी उपाय है।
  3. गाय को गुड़ खिलाना और रविवार के दिन गुड़ का दान करना भी श्रेष्ठ होता है। 

Q. कन्या लग्न के लिए सूर्य की क्या विशेष स्थिति होती है?

An. इस लग्न कुंडली में आत्मा के कारक सूर्य ग्रह बारहवें (द्वादश) भाव के स्वामी है। इसलिए, वह कुंडली के अतिमारक ग्रह की भूमिका में होंगे। इसके अलावा, लग्न कुंडली के सभी भावों में, वे अपनी दशा-अंतर्दशा में क्षमतानुसार अशुभ फल देते हैं।

Q. कन्या लग्न में सूर्य की दशा के क्या प्रभाव होते हैं?

An. यदि लग्न कुंडली में सूर्य बलवान हो और किसी शुभ भाव में स्थित हो तो उस शुभ भाव के अनुसार जातक को शुभ फल, धन लाभ और मान-प्रतिष्ठा देने का कारक होता है। यानी वे अपनी दशा-अंतर्दशा में जातक को शुभ परिणाम देता है।

Q. कन्या लग्न में सूर्य के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. इस लग्न में यदि सूर्य अशुभ प्रभाव में हो तो जातक को, सूर्य की दशा व अंतर्दशा में अनावश्यक खर्च और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, आँख के रोग, सिरदर्द, अनिद्रा (Insomnia) या मानसिक तनाव जैसी समस्याएं होती हैं।

Q. कन्या लग्न के लिए सूर्य के कौन से विशेष नक्षत्र बताए गए हैं?

An. कन्या राशि में तीन नक्षत्र विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं। जिनमें, उतरा फाल्गुनी, हस्त और चित्रा नक्षत्र आते हैं। इसी के साथ सूर्य जब कन्या राशि में होता है तो, जिस नक्षत्र के साथ भी योग बनता है उसके साथ मिलकर जातक को विशेष परिणाम देता है।

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