कन्या लग्न में राहु ग्रह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या लग्न में राहु ग्रह की स्थिति यह दर्शाती है कि, लग्न में होने से जातक में आत्मविश्वास, पराक्रम और आंतरिक विश्वास में वृद्धि होती है। इतना ही नहीं, शुभ ग्रहों के साथ लग्नेश राहु कन्या राशि के जातकों के लिए ‘राजयोग’ का कारक भी हो सकता है। लेकिन, खासकर जब बुध (लग्नेश) शुभ स्थिति में हो। हालांकि, राहु के प्रभाव कुंडली में अलग-अलग भावों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम कन्या लग्न में राहु ग्रह के शुभ और अशुभ प्रभाव के साथ-साथ अन्य जरूरी जानकारी के बारे में चर्चा करेंगे-पूरी जानकारी के लिए हमारे साथ लेख में बने रहें और हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।
कृपया 01141114242 पर कॉल करें, (पहली कॉल 3 मिनट के लिए निःशुल्क है।)
कन्या लग्न – शारीरिक विशेषताएं और स्वभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या लग्न में जन्म लेने वाले जातक शारीरक रूप से रूपवान, सौन्दर्यवान, विचारशील और संतान से युक्त, होते हैं। स्वभाव और गुणों में ऐसे जातक कफ एवं पित्त प्रकृति वाला, स्त्री द्वारा पराजित, डरपोक, मायावी, काम- वासना से दुखी शरीर वाला, कामक्रीड़ा में निपुण, अनेक प्रकार के गुणों तथा कौशलों से युक्त, सदैव प्रसन्न रहने वाला, सुन्दर स्त्री प्राप्त करने वाला, श्रृंगार प्रिय, स्थूल तथा सामान्य शरीर वाला, बड़ी आँखों वाला, प्रियवादी, अल्पभाषी, गणित तथा धर्म में रूचि रखने वाला, चतुर, नाजुक मिजाज, अपने मन की बात को छिपाने वाले होते हैं।
इन जातकों को अपनी आयु के बाल्यावस्था में सुख, माध्यम अवस्था में सामान्य और अंतिम अवस्था में दुःख मिलते हैं। इनके जीवनकाल में उनका भाग्योदय 24 से 36 वर्ष की आयु के बीच होता है और वे सफलता प्राप्त करते हैं। इस समय काल में वह अपने धन-ऐश्वर्य भौतिक सुखों को प्राप्त करते हैं।
कन्या लग्न में राहु ग्रह के फलादेश- ज्योतिष में
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या लग्न के लिए राहु के परिणाम कुंडली के उस भाव और अन्य ग्रहों की दशा व स्थिति के अनुसार शुभ और अशुभ होता है। यहां लग्नस्थ राहु कन्या (मित्र) राशि में ही होता है। राहु की यह स्थिति राजयोग की कारक है। राहु के शुभ प्रभाव में ऐसे जातक प्रबल इच्छाशक्ति, पराक्रमी और शौर्य वाले होते हैं। इन जातकों का आत्मविश्वास चरम पर होता है। ये जातक अपनी आंतरिक विश्वास की विलक्षण शक्ति से युक्त होते हैं। साथ ही इन जातकों में जादू-टोना व रहस्यमय विद्याओं को जानने व समझने अधिक रुचि होती है।
इसके अलावा, लग्नेश बुध की स्थिति यदि प्रतिकूल हो तो जातक के सभी संबंधी उसके लिए शत्रुता का भाव रखने वाले होते हैं। ऐसे जातक का अपने जीवन के प्रति कोई सटीक उद्देश्य नहीं होता है। जहां तक बात है, कुंडली के भावों की तो, यहां राहु अपनी दशा व अंतर्दशा में अपनी योग्यता के अनुसार परिणाम देते हैं।
मुख्य रूप से कुंडली के तीसरे, छठे और बारहवें भाव में राहु ग्रह की स्थिति जातक के लिए बहुत अनुकूल प्रभाव है। जिसमें जातक हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। लेकिन, अनुकूलता के लिए यहाँ बुध ग्रह का मजबूत और शुभ प्रभाव में होना बहुत जरूरी है। चलिए आगे लेख में हम, कन्या लग्न में राहु के साथ अन्य ग्रहों की युति और प्रभाव के बारे में जान लेते हैं।
कन्या लग्न में राहु व अन्य ग्रहों के साथ प्रभाव
- राहु के साथ सूर्य ग्रह
इस के साथ व्ययेश सूर्य होने से जातक का स्वभाव अधिक गुस्सेल, भड़कीले व उग्र होता है। ऐसे जातक किसी भी बात को समझने से पहले क्रोध करने वाले होते हैं।
- राहु के साथ चंद्र ग्रह
यदि लग्न कुंडली में राहु के साथ लाभेश चंद्र ग्रह की स्थिति हो तो, ऐसे जातक को उसके लाभ प्राप्ति के कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इन जातकों को कोई भी कार्य बहुत ही समझ कर करना चाहिए।
- राहु के साथ बुध ग्रह
लग्न कुंडली में राहु के साथ बुध ग्रह की स्थिति होने पर ‘भद्र योग’ का निर्माण होता है। ऐसे जातक को अपने जीवन में राजा के सामान सुख मिलता है और अपार धन संपदा होती है।
- राहु के साथ मंगल ग्रह
लग्न कुंडली में राहु के साथ अष्टमेश मंगल ग्रह की स्थिति से जातक पराक्रमी और क्रोधी स्वभाव का होता है।
- राहु के साथ गुरु(बृहस्पति) ग्रह
यदि कन्या लग्न कुंडली के पहले भाव में, राहु के साथ गुरु ग्रह हो, और राहु अपनी मित्र राशि व बृहस्पति शत्रु राशि में हो तो, ‘चाण्डाल योग’ बनता है। इस योग के कारण जातक हठी, आध्यात्मिक होते हुए भी कुटिल स्वभाव का होता है। ऐसा जातक प्रायः धार्मिक होने के आडम्बर में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं।
- राहु के साथ शुक्र ग्रह
इस के साथ भाग्येश शुक्र जातक को धनवान और भाग्यशाली बनाता है। ऐसे जातक को उनके भाग्य का बहुत साथ मिलता है।
- राहु के साथ शनि ग्रह
लग्न कुंडली में, राहु के साथ षष्ठेश शनि की स्थिति होने से ऐसे जातक के शत्रु अधिक होते हैं।
कन्या लग्न कुंडली के विशेष भाव व राहु की स्थिति
ज्योतिष शास्त्र में, राहु ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं होती है। राहु देव अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में ही शुभ फल देते हैं। चलिए लग्न कुंडली के सभी भावों में राहु की स्थिति के बारे में जानें-
- कन्या लग्न की कुण्डली में राहु यदि पहले , दूसरे , पांचवें , नौवें और दसवें भाव में हो और दशा या अंतर्दशा में हो तो या जातक के लिए शुभ परिणाम देने वाले होते हैं।
- लग्न कुंडली के तीसरे (नीच राशि ), चौथे (नीच राशि), छठे , सातवें , आठवें , ग्यारहवें और बारहवें भाव में राहु की स्थिति मारक मानी गई है। जिससे जातकों को विभिन्न प्रकार के कष्टों और समस्याओं का सामना कामना करना पड़ता है।
- कन्या लग्न के जातकों के लिए राहु ग्रह के प्रभाव कुंडली के तीसरे, छठे, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ होते हैं। नीचे लेख में हम इसे विस्तार से जानेंगे-
लग्न कुंडली में राहु ग्रह के शुभ प्रभाव में विशेष भाव
- कन्या लग्न का तीसरा भाव
इस लग्न के तीसरे भाव में राहु मिश्रित परिणाम देते हैं। तीसरा भाव छोटे भाई-बहन, लघु यात्रा, संचार, साहस और प्रयासों का कारक है। इस भाव में राहु के प्रभाव से जातक साहसी और निडर होता है। वह जोखिम उठाने से नहीं डरता और अपने प्रयासों से सफलता प्राप्त करता है। साथ ही, ऐसे जातक संवाद कौशल में बहुत श्रेष्ठ होते हैं। वह अपनी बातों से दूसरों को बड़ी आसानी से प्रभावित करने में सक्षम होता है। जातक को छोटे भाई-बहनों का सहयोग मिल सकता है, या उनके भाई-बहन जीवन में सफल होते हैं। छोटी यात्राओं से लाभ मिलता है और यात्रा के दौरान नए अवसर मिल सकते हैं।
- कन्या लग्न का छठा भाव
इस लग्न में छठवें भाव में राहु के प्रभाव शुभ माने जाते हैं, क्योंकि छठा भाव (रिपु स्थान) भी एक उपचय स्थान है, जहाँ राहु, पाप ग्रह होने के कारण, सकारात्मक प्रभाव देते है। जातक अपने शत्रुओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त करते हैं। करियर, नौकरी और सेवा क्षेत्र में जातक को उत्कृष्ट परिणाम मिलते हैं। जातक को सरकारी नौकरी या प्रशासनिक सेवाओं में सफलता मिल सकती है। जातक ऋणों का भुगतान करने में सफल रहता है और उन्हें समय पर चुका देता है। ऐसे जातक को अपने मामा पक्ष या ननिहाल से लाभ या सहयोग मिलता है। साथ ही जातक को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने में भी सहायता मिलती है।
- कन्या लग्न का नौवां भाव
लग्न कुंडली के इस भाव में राहु के प्रभाव सामान्यतः मिले-जुले रहते हैं। ऐसे जातक का भाग्य अचानक बदल सकता है। ऐसा जातक धनी, लोकप्रिय और व्यवहार कुशल होता है। यह स्थान उच्च शिक्षा, लंबी यात्राओं और आध्यात्मिक समझ की ओर रूचि रखने वाला होता है।
- कन्या लग्न का दसवां भाव
कन्या लग्न के दसवें भाव में, राहु की स्थिति से जातक करियर में सफलता प्राप्त करता है। विशेष रूप से तकनीकी, संचार, मीडिया, राजनीति या विदेशी मामलों से संबंधित क्षेत्रों में। ऐसे जातक बहुत महत्वाकांक्षी होते है और उसमें नेतृत्व करने की अच्छी क्षमता होती है। वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करता है।
ऐसे लोग पारंपरिक करियर से हटकर कुछ अलग करने का प्रयास करते है, जिसमें वे सफल भी होते हैं। करियर के संबंध में विदेश यात्रा के अच्छे अवसर मिल सकते हैं या विदेशी कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है।
- कन्या लग्न का ग्यारहवां भाव
लग्न कुंडली के ग्यारहवें भाव में राहु ग्रह की स्थिति जातक के लिए लाभकारी मानी गई है।यह जातक को जीवन में बहुत धन और समृद्धि देती है। यदि कुंडली में सही नक्षत्र हो और राहु की दशा हो तो जातक करोड़पति भी बन सकता है। ऐसे जातकों की मित्रता अक्सर प्रभावशाली और विदेशी लोगो से अधिक होते हैं। वह सामाजिक संगठनों या बड़े समूहों में सक्रिय होता है। इस राशि की शुभ स्थिति जातक की सभी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने वाली होती है। साथ ही ऐसे जातक को विदेश से या विदेशी स्रोतों से धन लाभ होता है। जातक को आय के नए और असामान्य स्रोत मिल सकते हैं, कभी-कभी अनैतिक तरीकों से भी ऐसे जातक धन प्राप्त करते हैं।
कन्या लग्न में राहु ग्रह के शुभ व अशुभ प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या लग्न की कुंडली में, यदि राहु ग्रह की स्थिति शुभ हो तो, ऐसे जातक आकर्षक व्यक्तित्व, साहस, महत्वाकांक्षा और विदेश में सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं। इसके विपरीत, लग्न कुंडली में राहु की अशुभता के प्रभाव से जातक को शारीरिक कष्ट, पेट संबंधी समस्याएं, साझेदारी में धन हानि और वैवाहिक जीवन में कलह होने की समस्या रहती है। इसके अलावा, राहु के अच्छे व बुरे परिणाम कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और गोचर पर भी निर्भर करते हैं।
शुभ प्रभाव
- राहु के शुभ प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व रहस्यमय, प्रभावशाली और आकर्षक होता है।
- ऐसे जातक अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा शक्ति वाले होते हैं, और सफलता के शिखर तक जाते हैं।
- इस के शुभ प्रभाव से प्रभावित जातक तीव्र सोच और योजनाबद्ध तरीके से अपने कार्यों को करने वाला होता है।
- राहु के शुभ प्रभाव से जातक को विदेश यात्रा और वहां कार्य करने के अच्छे अवसर प्राप्त होते हैं।
- राहु के शुभ प्रभाव से जातक समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने और दूसरों से हटकर कार्य करने में सफल होता है।
अशुभ प्रभाव
- इस की प्रतिकूल स्थिति से जातक के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव होता है। ऐसे जातक को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं होती हैं, विशेष रूप से कुंडली में राहु की महादशा में पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
- राहु के अशुभ प्रभाव में जातक को साझेदारी के कार्यों में नुक्सान या हानि उठानी पड़ सकती है।
- राहु की प्रतिकूलता से प्रभावित जातक के पिता से संबंध अच्छे नहीं रहते और दाम्पत्य जीवन में कलह और तनाव रहता है।
- इस के अशुभ प्रभाव से जातक को अचानक धन हानि होने की संभावना होती है।

यह भी जरुर पढ़ें- सिंह लग्न में राहु ग्रह ! सूर्य की राशि में होंगे मिश्रित परिणाम, क्या करें उपाय?
कन्या लग्न में राहु ग्रह के लिए करें ये उपाय-
ज्योतिष में, कन्या लग्न (Virgo) में राहु के लिए उपाय कुंडली में राहु की स्थिति, भाव और अन्य ग्रहों के साथ युति पर निर्भर करते हैं। राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए यहां हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों द्वारा कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं- इन उपायों को करने के पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का व्यक्तिगत विशेष और सलाह जरुर लें-
- राहु के अशुभ प्रभाव में, राहू के बीज मंत्र “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” का नियमित रूप से 108 बार जाप करना बहुत प्रभावी माना जाता है। एस मन्त्र के निरंतर जाप से मानसिक शांति और राहु के बुरे प्रभावों को शांत किया जा सकता है।
- शनिवार के दिन राहु से संबंधित वस्तुओं जैसे उड़द दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, तिल, या कंबल का दान करना शुभ फल देता है।
- कन्या लग्न के जातकों के लिए मां सरस्वती की पूजा विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि यह राहु के कारण होने वाली मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति को शांत करती है ।
- कन्या राशि के जातकों को नियमित रूप से ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करना राहु के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए बेहद लाभकारी है।
- राहु को शांत करने के लिए, भगवान शिव की पूजा और सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाना बहुत लाभकारी है।
- नियमित रूप से पक्षियों को, दाना खिलाने से भी राहु दोष को कम किया जा सकता है।
- किसी भी रत्न को धारण करने से पहले कुंडली का विश्लेषण और ज्योतिषी से सलाह जरुर लें। राहु के लिए गोमेद रत्न का सुझाव दिया जाता है, लेकिन यह केवल तब ही धारण करते हैं जब कुंडली में, राहु की स्थिति शुभ हो, अन्यथा यह नकारात्मक प्रभाव देता है। राहु के शुभ प्रभाव के लिए आप गोमेद रत्न का दान भी कर सकते हैं।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q. क्या, कन्या लग्न में राहु ग्रह के प्रभाव अच्छे व सकारात्मक होते हैं?
An. हां, कन्या लग्न में राहु ग्रह की स्थिति यह दर्शाती है कि, लग्न में होने से जातक में आत्मविश्वास, पराक्रम और आंतरिक विश्वास में वृद्धि होती है। इतना ही नहीं, शुभ ग्रहों के साथ लग्नेश राहु कन्या राशि के जातकों के लिए ‘राजयोग’ का कारक भी हो सकता है।
Q. क्या, कन्या लग्न के जातक को राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए गोमेद रत्न पहनना चाहिए?
An. नहीं, कन्या लग्न के जातक को राहु के अशुभ प्रभाव के लिए गोमेद रत्न का सुझाव नहीं, दिया जाता है। यह रत्न केवल तब ही धारण करते हैं जब कुंडली में, राहु की स्थिति शुभ हो, अन्यथा यह नकारात्मक प्रभाव देता है। लेकिन, राहु के शुभ प्रभाव के लिए आप गोमेद रत्न का दान कर सकते हैं।
Q. कन्या लग्न में राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?
An. राहु की प्रतिकूल स्थिति से जातक के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव होता है। ऐसे जातक को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं होती हैं, विशेष रूप से कुंडली में राहु की महादशा में पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, अशुभ प्रभाव में जातक को आर्थिक हानि भी उठानी पड़ सकती है।
Q. कन्या लग्न में राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए क्या उपाय करना चाहिए?
An. राहु को शांत करने के लिए, भगवान शिव की पूजा और सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाना बहुत लाभकारी है। साथ ही, नियमित रूप से पक्षियों, दाना खिलाने से भी राहु दोष को कम किया जा सकता है।




