गुरु बृहस्पति की महादशा ! इनकी कृपा से बन सकते हो धनवान, बस कर लें ये उपाय

गुरु बृहस्पति की महादशा

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ज्योतिष में, गुरु (बृहस्पति) की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का फलादेश अलग-अलग होता है! गुरु बृहस्पति की महादशा 16 वर्ष तक चलती है और इस दौरान सभी ग्रहों की अंतर्दशा आती है। गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा जो कि 2 वर्ष की होती है यह सबसे पहले आती है! इसके बाद अन्य सभी ग्रह (शनि, बुध, केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्रमा, मंगल और राहु) की अंतर्दशा क्रम से चलती है। तो आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम गुरु बृहस्पति की महादशा और अन्य ग्रहों की अन्तर्दशा के बारे में जानकारी पढेंगे! आशा करते हैं लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयुक्त सिद्ध हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें-

सभी ग्रहों में बृहस्पति ग्रह को गुरु ग्रह की संज्ञा दी जाती है! गुरु के शुभ प्रभाव में, जातक को ज्ञान, बुद्धि, स्वास्थ्य, धन, अधिकार और शक्ति जैसे गुणों का आशीर्वाद मिलता है! इसके अलावा एक मात्र गुरु बृहस्पति एक ऐसे ग्रह भी हैं जो, किसी भी जातक के जीवन में कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं देते हैं! बल्कि, इस ग्रह को, उन ग्रहों में रखा जाता है जिससे जातक को, सबसे अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है! 

इसी प्रकार जब, किसी जातक की जीवन में गुरु बृहस्पति की महादशा चलती है तो, यह उसके जीवन में, सबसे भाग्यशाली, लाभकारी और शुभ समय होता है! गुरु बृहस्पति की महादशा 16 वर्षों तक जातक के जीवन को प्रभावित करती है! आइये जाने कि, गुरु का जीवन पर क्या प्रभाव होता है- 

जैसा कि हम हमारे लेख में, बताया कि बृहस्पति की महादशा के दौरान किसी जातक के जीवन में सबसे सुखद और शुभ प्रभावों को देखा जा सकता है! इसलिए, गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव से जातक के जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव नजर आएंगे! जो इस प्रकार है-  

  1. गुरु बृहस्पति की महादशा के दौरान जातक का मन आध्यात्मिक कार्य और पूजा-पाठ में अधिक लगेगा! 
  2. ऐसे जातक शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा आगे रहेंगे और अव्वल होंगे! 
  3. बृहस्पति की कृपा से जातक के जीवन में कभी भी धन सम्पदा की कमी नहीं होती। ऐसे जातकों को, कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पडता!  
  4. गुरु की कृपा में, शुभ प्रभाव से जातक आशावादी सोच के साथ अपने सभी कार्यों को करने में बहुत प्रभावशाली रूप से सक्षम होते हैं! 
  5. गुरु के शुभ प्रभाव में जातक बहुत ईमानदार और ज्ञानी प्रवृत्ति के होते हैं! और अपने कार्य को पूरी ईमानदारी से करते हैं! 
  6. बृहस्पति की कृपा से जातक को वैवाहिक सुख और संतान का सुख मिलता है। 
  7. गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव में जातक ज्योतिष और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं! 

जिन जातकों की जन्म कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में हो या कोई अशुभ ग्रह के अशुभ प्रभाव में हो तो, जातक को अपने जीवन में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है! जो इस प्रकार है- 

  1. गुरु के अशुभ प्रभाव से जातक का अध्यात्म पर कोई विश्वास नहीं होगा! पूजा-पाठ में मन नहीं लगेगा! बल्कि, अलौकिक और गूढ़ विद्याओं में रुचि होगी! 
  2. गुरु की अशुभ स्थिति में, जातक को स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होंगी! जैसे- पेट से संबंधित रोग, अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, कमजोर पाचन तंत्र, कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहेगा! 
  3. अशुभ स्थिति के गुरु जातक को वैवाहिक सुख से वंचित करते हैं! ऐसे जातक के विवाह में बाधा और और संतान प्राप्ति में भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है!
  4. गुरु बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से जातक को धन हानि और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है! 
  5. ऐसे जातक को, समाज में मान- प्रतिष्ठा की कमी होती है! 
  6. इन जातकों को अपने जीवन में अनेक समस्याओं और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का सामना करना पड़ेगा! जातक को ऐसा महसूस होगा कि,उनके साथ सब कुछ गलत हो रहा है! 
  7. जातक का व्यवहार भी उनके लिए ऐसे बुरे और नकारात्मक अनुभव होने का एक प्रमुख कारण बनेगा। इस प्रकार यह सलाह दी जाती है कि जिस व्यक्ति की बृहस्पति दशा चल रही हो। उसे हमेशा अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए।

जब किसी ग्रह की, महादशा चलती है तो, उसके साथ अन्य सभी ग्रहों की अंतर्दशा भी एक निश्चित समय के लिए चलती है! जो जातक के जीवन को प्रभावित करती है! आइए बृहस्पति की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का समय और प्रभावों की जानकारी लेते हैं-  

ज्योतिष में गुरु बृहस्पति महादशा के साथ गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 2 माह (780 दिन) तक जातक के जीवन में रहता है! जिसमें जातक को यश- वैभव मिलता है! आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है! नए लोगो से सम्पर्क होता है! बुद्धिमत्ता का विकास होता है! स्वास्थ्य में सुधार होता है!

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ बुध की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 3 महीने (828 दिन) तक जातक के जीवन में प्रभावशाली रहता है! जिसके प्रभाव में, जातक ज्ञान और यश के साथ सकारात्मक बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं! 

साथ ही, जातक को व्यावसायिक रूप से सफलता प्राप्त होती है! परिवार के साथ अच्छे और मधुर संबंधों का आनंद मिलता है!  

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ शुक्र ग्रह की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 10 महीने (974 दिन) तक जातक के जीवन को शुभ प्रभाव देता है! ऐसे जातक आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं! ऐसे जातक को शुक्र और गुरु के शुभ प्रभाव से, वैभवशाली जीवन और सभी प्रकार के भौतिक संसाधनों का सुख मिलता है! इन जातकों की संगीत और गायन में रुचि

वैवाहिक जीवन बहुत ही आनंद और सुखपूर्वक व्यतीत होगा! शुक्र के शुभ प्रभाव और गुरु के सकारात्मक प्रभाव से इन जातकों को वित्तीय सुख मिलता है और आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है! 

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ, सूर्य ग्रह की अंतर्दशा का समय  8 महीने और 18 दिन (292 दिन) तक जातक के जीवन को प्रभावित करता है! जातक के जीवन में बृहस्पति के साथ सूर्य की अंतर्दशा बहुत कम समय की होती है! जिसके प्रभाव में जातक को धन और संपदा का लाभ मिलता है! सफलता के साथ यश वैभव की प्राप्ति होती है! इन जातकों के ज्ञान का बहुत विस्तार होता है! साथ ही, सुखी परिवार और सुखी जीवन का आनंद मिलता है! 

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ चन्द्र ग्रह की अन्तर्दशा का समय 1 वर्ष 4 माह (478 दिन) तक जातक के जीवन में रहता है! जिसके प्रभाव में जातक को, माता-पिता और अपनी संतान का अच्छा समर्थन मिलता है! आय में वृद्धि होती है और नए साधनों से आय के मार्ग खुलते हैं! ऐसे जातकों को करियर में स्थिरता और सफलता मिलती है! इन जातकों का वैभवशाली जीवन होता है और ऐसे जातक आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं! 

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ, मंगल ग्रह की अंतर्दशा का समय 11 महीने (341 दिन) तक जातक के जीवन को प्रभावित करता है! जिसके प्रभाव से जातक की रूचि नए-नए कार्यों को सीखने में होती है! इन जातकों को भूमि सम्बन्धी कार्यों में लाभ मिलता है! पारिवारिक संबंध अच्छे रहते हैं! लेकिन ये जातक स्वभाव से कुछ क्रोधी और आक्रामक होते हैं! प्रसिद्धि और सम्मान की प्राप्ति होती है! 

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 7 महीने (925 दिन) तक जीवन को प्रभावित करता है! जिसमें जातक को संपत्ति सम्बन्धी कार्यों में अच्छे परिणाम मिलते हैं! जातक को मेहनत से सफलता मिलती है! शनि कर्मफल दाता माने जाते हैं, तो इस दौरान जातकों को अपने कर्मों के अनुरूप फल भी मिलते हैं! नौकरी करने वाले जातकों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है! स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होंगी!

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ राहु ग्रह की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 5 महीने (877 दिन) तक जातक के जीवन को प्रभावित करता है! जिसके प्रभाव से जातक का स्वभाव  अहंकारी होता है! आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है! 

परिवार से समस्या आती है! स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है! करियर में अचानक बाधाओं और गिरावट की स्थिति आती हैं! 

गुरु बृहस्पति की महादशा

गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ, केतु ग्रह की अंतर्दशा का समय जातक के जीवन में, 11 महीने (341 दिन) तक रहता है! जिसके प्रभाव में जातक आध्यात्मिक रूप से इच्छुक बनते हैं यानी ऐसे जातक की रुचि आध्यात्मिक कार्यों की ओर अधिक रहती है! इन जातकों को कारावास या ऐसी कोई घटना का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें उसे कैद हो ! 

करियर में भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा! स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होंगी! इन जातकों को रिश्तों में तर्क और मुद्दे जैसी गतिविधियों के कारण समस्या आएगी! 

यदि कुंडली में, गुरु बृहस्पति की स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं तो, करना है ये उपाय- 

  1. बृहस्पतिवार के दिन गुरु के लिए व्रत करें और बृहस्पति देव की उपासना करने से लाभ होगा! 
  2. गुरुवार के दिन, नहाने के पानी में हल्दी डालकर, उस पानी से नहाएं!
  3. गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करें, उस पर हल्दी, गुड़ और चने की दाल चढ़ाएं और उसके समक्ष दीप जलाएं!
  4. बृहस्पतिवार के दिन गरीबों या जरूरतमंदों को पीली चने की दाल, केले और पीली मिठाई का दान करें!
  5. इसके अलावा यह भी सलाह दी जाती है। कि व्यक्ति को केले के पेड़ को नियमित रूप से पानी देना चाहिए।
  6. गुरु बृहस्पति ग्रह को ग्रहों में गुरु की संज्ञा दी जाती है जो कि, ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं! इसलिए हमेशा अपने से बड़े, बुजुर्गों और अपने गुरुओं का सम्मान करें!
  7. अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से, बृहस्पति की महादशा और ग्रहों की अंतर्दशा के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए पुखराज रत्न को पूरे विधि और विधान से धारण करें!

Q. गुरु बृहस्पति की महादशा कितने समय की होती है?

An. गुरु बृहस्पति की महादशा 16 वर्षों तक जातक के जीवन को प्रभावित करती है! जब, किसी जातक की जीवन में गुरु बृहस्पति की महादशा चलती है तो, यह उसके जीवन में, सबसे भाग्यशाली, लाभकारी और शुभ समय होता है!

Q. गुरु बृहस्पति की महादशा का जातक के जीवन पर क्या प्रभाव होता है?

An. बृहस्पति की महादशा के दौरान किसी जातक के जीवन में सबसे सुखद और शुभ प्रभावों को देखा जा सकता है! इसलिए, गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव से जातक के जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव नजर आएंगे! जो इस प्रकार है- गुरु बृहस्पति की महादशा के दौरान जातक का मन आध्यात्मिक कार्य और पूजा-पाठ में अधिक लगेगा! ऐसे जातक शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा में आगे रहेंगे और अव्वल होंगे!

Q. गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा कितने समय तक रहती है?

An. गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ शनि की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 7 महीने (925 दिन) तक जीवन को प्रभावित करता है! जिसमें जातक को संपत्ति सम्बन्धी कार्यों में अच्छे परिणाम मिलते हैं! जातक को मेहनत से सफलता मिलती है!

Q. धन संबंधी लाभ के लिए कौन से ग्रह की महादशा प्रभावशाली है?

An. ज्योतिष में गुरु बृहस्पति की महादशा के साथ गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा का समय 2 वर्ष 2 माह (780 दिन) तक जातक के जीवन में रहता है! और जातक के लिए गुरु की महादशा का प्रभाव धन संबंधी लाभ देने वाला होता है! जिसमें जातक को यश- वैभव मिलता है!

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