क्या आप जानते हैं, वृषभ लग्न में शनि ग्रह का शुभ या अशुभ प्रभाव, क्या परिवर्तन करेगा जीवन में!

षभ लग्न में शनि ग्रह

सभी नौ ग्रहों में शनि ग्रह बहुत विशेष महत्वपूर्ण ग्रह माने गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति अच्छी है तो, जातक का जीवन बिना किसी समस्याओं के व्यतीत होता है। लेकिन, इसके विपरीत यदि, कुंडली में शनि कर्मफल दाता शनि ही अशुभ प्रभाव या नीच के हो तो; यह जातक का संपूर्ण जीवन बदल कर रख देते हैं। कुंडली में, फलित में शनि की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

शास्त्रों में, शनि को सूर्यपुत्र और दण्डाधिकारी के नाम से जाना गया है। हमारे पिछले लेख में हमने आपको मेष लग्न में शनि  की स्थिति का वर्णन बताया था। आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख   में हम आपको वृषभ लग्न में शनि ग्रह की शुभ और अशुभ स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। हम आशा करते हैं, आपके लिए यह जानकारी बहुत उपयोगी रहें। लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया हमें जरूर दें। 

ज्योतिष शास्त्र की विशेष गणना में, वृषभ लग्न में शनि की स्थिति जातक के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि शनि इस लग्न में, नौवें और दसवें भाव में हो तो यह बहुत ही योगकारक ग्रह माने जाते हैं। क्योंकि, वृषभ राशि के इन भावों में वे, स्वामी ग्रह होते हैं। जो जातक को भौतिक सुख-समृद्धि, दीर्घायु और कर्मठता का आशीर्वाद देते है। हालांकि, शनि की स्थिति और अन्य ग्रहों के साथ कैसी है, इसके आधार पर प्रभाव सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं। कहने का अर्थ यह है कि, यदि शनि पीड़ित या अशुभ भाव में हो तो यह जातक के करियर में विलंब, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और रिश्तों में तनाव जैसी परेशानियां देंगे।

हमारे मंगल भवन’ के विद्वान् आचार्यों   के अनुसार, वृषभ लग्न में जन्म लेने वाले जातक का शरीर गोरा या गेहुंआ रंग का होता है। ऐसे जातक स्वभाव से स्त्रियों के स्वभाव के समान ही हर एक वस्तु का शौकीन, मीठी भाषा, रजोगुणी, लम्बे दांत, श्रेष्ठ संगत में बैठने वाला, ऐश्वर्यशाली, उदार स्वभाव वाला, भक्त, गुणवान, बुद्धिमान, धैर्यवान, शुर- वीर , साहसी, अत्यंत यशस्वी, अत्यंत शांत प्रकृति का होता है।

लेकिन, ऐसे जातक मुसीबत के समय अपने प्रबल पराक्रम को प्रकट करने वाले होते हैं। साथ ही वे, अपने परिवार वालों से अनाहत, कलहयुक्त, शास्त्र से अभिज्ञात पाने, मानसिक रोग अथवा चिंताओं से पीड़ित एवं दुखी रहने वाला, मित्र- वियोगी तथा पूर्णायु प्राप्त करने वाला होता है। 

  • कुंडली में, पहले केंद्र यानी शरीर, स्वभाव की जानकारी के भाव में वृषभ लग्न में, शनि से प्रभावित जातक सुन्दर होता है। साथ ही, ऐसे जातक भाग्यशाली भी होते हैं। यहाँ से शनि की दृष्टि से राज्य एवं पिता के भाव पर दृष्टि रखते हैं। इसलिए, ऐसे जातक को पिता द्वारा शक्ति और समाज में लाभ और बहुत मान-प्रतिष्ठा मिलती है।
  • इसके साथ ही, ऐसे जातक व्यवसाय में भी बहुत धन लाभ और प्रगति प्राप्त करते हैं। लेकिन, यहां तीसरी शत्रु दृष्टि से कुंडली के तीसरे भाव में होने के कारण जातक भाई- बहनों के सुख से वंचित रहता है। लेकिन, ऐसे जातक तेजस्वी और पराक्रम होते हैं। 
  • यदि शनि की सप्तम दृष्टि शत्रु ग्रह से प्रभावित हो और छठे भाव पर हो तो ऐसे जातक व्यवसाय के मामलों में बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हैं। लेकिन, फिर भी व्यवसाय में वृद्धि होती है। ऐसे जातक शारीरिक शक्ति सम्बन्धी कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिष ज्ञान के मुताबिक, वृषभ लग्न में शनि नवमेश व दशमेश होने के कारण बहुत शुभ होते हैं। इसके अलावा, यदि वृषभ लग्न के जातकों की कुंडली में शनि किसी शुभ भावों (घर) जैसे केंद्र, त्रिकोण या लाभ भाव में स्थित हैं तो यहां भी वे बहुत शुभ फलदायी होते हैं। साथ ही, यदि शनि की स्थिति, वृषभ लग्न में शुभ भावों में हो और उच्च राशि में हो तो, यह भी बहुत श्रेष्ठ स्थिति मानी जाती है। लेकिन, यदि शनि अशुभ भावों में हो या नीच राशिस्थ या निर्बल हैं स्थिति में हो तो, ऐसे में वे अशुभ फलदायी होते हैं। वृषभ लग्न में शनि ग्रह उनके भाग्य के अधिपति कहलाते हैं। अत: वृषभ लग्न वाले जातकों को शुभ शनि भाग्य का साथ व सफलता और सहयोग प्रदान करते हैं। आइये अब जाने, वृषभ राशि में शनि ग्रह के शुभ और अशुभ प्रभाव के महत्वपूर्ण बिंदुओं को-  

  1. वृषभ लग्न में शनि ग्रह की मजबूत स्थिति जातक के लिए दीर्घायु का कारक होती है। जिससे जातक जीवन लंबा और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 
  2. यदि कुंडली के शुभ भाव में शनि हो तो, यह वृषभ लग्न के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में शुभ फलदायी रहता है। ऐसे जातक विशेष रूप से इंजीनियरिंग, मेडिकल, कानून सम्बन्धी क्षेत्र में, और अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए भी बहुत सफलता प्राप्त करते हैं। 
  3. वृषभ लग्न के शुभ भाव का शनि जातक के लिए व्यापार या साझेदारी से अच्छा धन लाभ देने का कारक होता है। 
  4. कुंडली के आठवें भाव में शनि होने पर जातक को आध्यात्मिक कार्यों में अधिक रुचि होती है।
  5. ऐसे जातक अपने सत्कर्मों को ही असली पूजा मानते हैं। 
  1. कुंडली में आठवें भाव के शनि विरासत में मिले धन या दूसरों से धन से संबंधित कार्यों में देरी को दर्शाता है। 
  2. शनि की अशुभ स्थिति के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्या रहती है। 
  3. लग्न भाव में शनि यदि चंद्रमा के साथ युति में हो तो यह स्थिति जातक को मानसिक अशांति और अस्थिरता का देने की कारक होती है। 
  4. शनि के अशुभ प्रभाव से पीड़ित जातक में, आत्मसम्मान की कमी, अवसाद, असुरक्षा और अकेलेपन जैसे भावनात्मक मुद्दों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
  5. शनि के अशुभ प्रभाव से प्रभावित जातक मन में कपट रखने वाला होता है। ऐसे जातक, अपने नजदीकी लोगों से भी मन की बात छुपाते हैं। इन जातकों को समझना आसान नहीं होता है। 

ज्योतिष में सभी राशियों के लिए ग्रह के अशुभ प्रभाव हेतु कुछ आसान उपाय बताए जाते हैं। हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों द्वारा बताए गए, वृषभ लग्न के जातकों को ये उपाय करना चाहिए-

  1. प्रत्येक शनिवार, शाम के समय शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः”  का जाप करें। 
  2. हर शनिवार शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  3. मंगलवार और शनिवार के दिन, भगवान संकटमोचन से मंगल कामना करते हुए, हनुमान चालीसा का पाठ करें। जिससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
  4. शनिवार के दिन विशेष रूप से भगवान शिव का अभिषेक जल में काले तिल डालकर जरूर करें।
  5. वृषभ लग्न के जातकों को माँ दुर्गा की पुरे भाव और श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए। जिससे वे शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्त होंगे।  
  6. गरीबों, मजदूरों और जरूरतमंदों की सहायता करें और उन्हें अनादर की दृष्टि से न देखें।
  7. शनि देव के लिए शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल, उड़द की दाल, काले कपड़े या लोहे का दान करें।
  8. अपने पिता और गुरुजन, अन्य वरिष्ठ जनों का हमेशा सम्मान करें।
  9. अनाथालय या वृद्धाश्रम में जाकर जरूरतमंदों की सेवा करें। 
षभ लग्न में शनि ग्रह
  1. ज्योतिषी की सलाह से शनि देव की शुभता के लिए नीलम रत्न धारण करना लाभकारी है।
  2. आलस्य बेईमानी को छोड़कर ईमानदारी से मेहनत करें।  अपने अच्छे कर्म पर विश्वास रखें, क्योंकि शनि कर्मफल के देवता हैं।

शनि ग्रह को विशेष रूप से कर्म फल दाता की संज्ञा दी जाती है। जो जातक को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। उपरोक्त लेख में हमने जाना कि,  वृषभ लग्न के लिए शनि को एक योगकारक ग्रह माना जाता है। 

क्योंकि, यह नवम (भाग्य) और दशम (कर्म) भाव का स्वामी होता है। फिर भी, कुंडली में कुछ भाव और ग्रह की युति में होने पर शनि अशुभ फल देते हैं। इन अशुभ परिणामों को हम उचित उपाय और मार्गदर्शन से हल कर सकते हैं। ज्योतिष में विश्वास के साथ उपाय करना शुभ फलदायी है।

Q. क्या, वृषभ लग्न में शनि का होना अच्छा है?

An. हां, वृषभ लग्न के लिए शनि को एक योगकारक ग्रह माना जाता है। क्योंकि, यह नवम (भाग्य) और दशम (कर्म) भाव का स्वामी होता है। फिर भी, कुंडली में कुछ भाव और ग्रह की युति में होने पर शनि अशुभ फल देते हैं।

Q. वृषभ लग्न में शनि ग्रह के लिए शुभ स्थिति क्या है?

An. कुंडली में, पहले केंद्र यानी शरीर, स्वभाव की जानकारी के भाव में वृषभ लग्न में, शनि से प्रभावित जातक सुन्दर होता है। साथ ही, ऐसे जातक भाग्यशाली भी होते हैं। यहाँ से शनि की दृष्टि से राज्य एवं पिता के भाव पर दृष्टि रखते हैं।

Q. वृषभ लग्न में शनि के लिए कौन सा रत्न पहन सकते हैं?

An. आप शनि की शुभता के लिए ज्योतिषी की सलाह से नीलम रत्न धारण करना लाभकारी है।

Q. वृषभ लग्न में शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव क्या है?

An. शनि की अशुभ स्थिति के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्या रहती है। लग्न भाव में शनि यदि चंद्रमा के साथ युति में हो तो यह स्थिति जातक को मानसिक अशांति और अस्थिरता का देने की कारक होती है।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *