मेष लग्न में शनि की दशा व स्थिति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष लग्न के लिए शनि की स्थिति का होना जातक के लिए बहुत से प्रभाव देने वाला होता है। जिससे जातक को शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के मिश्रित परिणाम मिलते हैं। वैसे तो, शनि मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह का शत्रु है, लेकिन शुभ भावों यानी (कर्म और लाभ) के स्वामी हैं तो, शुभ फलदायी भी हो सकता है। तो आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको मेष लग्न में शनि ग्रह की सभी प्रकार की स्थितियों के बारे में बताएंगे। इसके साथ ही, कुंडली के बारह भावों में, शनि की स्थिति के साथ उपाय की विस्तृत जानकारी भी हमने इस लेख दी है। हमारे साथ लेख में बने रहिए और लेख में दी गई जानकारी के लिए अपनी प्रतिक्रिया हमें जरूर दें।
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ज्योतिष में- शनि ग्रह मेष लग्न में
ज्योतिष की विशेष गणना के अनुसार, यदि शनि उच्च राशि या शुभ भावों में हो तो शुभ कारक होता है। जैसे आय में वृद्धि होती है, लेकिन यदि अशुभ भावों में या नीच राशिस्थ हो, तो यह जातक के वित्तीय और करियर में बाधा उत्पन्न करता है। यदि हम शनि की स्थिति के आधार पर मेष लग्न के जातकों की बात करें तो, यह जीवन में स्थिरता और विकास तो देगा; लेकिन साथ ही कड़ी मेहनत भी करनी होगी। विशेष रूप से तब जब शनि ग्रह अशुभ भावों में बैठे हो।
मेष लग्न में शनि- स्वभाव और शारीरिक बनावट
हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ट और अनुभवी आचार्यों की गणना के अनुसार, मेष लग्न में जन्म लेने वाला जातक शारीर से दुबले – पतले और अधिक बोलने की प्रव्रत्ति वाले होते हैं। स्वभाव से ये जातक उग्र, रजोगुणी, अहंकारी, चंचल, बुद्धिमान, धर्मात्मा, अत्यंत चतुर, अल्पसंततिवान, अधिक पित्त वाला, सब प्रकार के भोजन करने वाला, उदार, कुल दीपक तथा स्त्रियों से द्वेष रखने वाला (जातक यदि स्त्री हो, तो पुरुषों से कम स्नेह अथवा द्वेष रखने वाली ) होता है। ऐसे जातक का रंग कुछ लालिमा लिए होता है। मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आयु के 6, 8, 15, 21, 36, 40, 45, 56 और 63 वर्ष में शारीरिक कष्ट और धन- हानि का सामना करना पड़ता है। लेकिन, भौतिक सुख की बात करें तो, मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आयु के 16, 20, 28, 34, 41, 48 और 51 वर्ष में धन की प्राप्ति , वाहन सुख , भाग्य वृद्धि और अन्य भौतिक सुख व आनंद प्राप्त होते हैं।
मेष लग्न में शनि- दशा और महादशा अनुसार शुभ व अशुभ प्रभाव
- मेष लग्न में के लिए शनि की उच्च महादशा
कुंडली में, कोई भी ग्रह की दशा या महादशा का प्रभाव उस ग्रह की स्थिति के अनुसार ज्ञात होता है। उसी प्रकार यदि कुंडली में शनि उच्च स्थिति का होगा तो उस दशा में यह जातक के लिए शुभ और अच्छे परिणाम देने वाला होगा। ऐसे जातक को कार्यकुशलता में परिश्रम के साथ शुभ फल मिलते हैं। इतना ही नहीं वह अपने कार्य के लिए सराहना भी प्राप्त करता है। समाज में भी उनके द्वारा किए जाने वाले कामों को प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है। कुल-मिलाकर शनि के प्रभाव से जातक सामाजिक रूप से अपनी पहचान बनाने में सक्षम होता है। यह प्रभाव राशि लग्न के अनुसार, कुंडली के सभी भावों में होते हैं। यानी, यदि मेष लग्न में शनि ग्रह की उच्च स्थिति का प्रभाव सातवें भाव में है तो, यह जीवन साथी और साझेदारी को प्रभावित करता है।
मेष लग्न में शनि- शुभ प्रभाव
अब हम बात करते हैं, मेष लग्न में शनि के शुभ और सकारात्मक प्रभावों की। हमारे मंगल भवन के विद्वान आचार्यों का कहना है कि, यदि शनि की स्थिति उच्च हो और वह शुभ भाव में हो तो यह जातक के लिए अच्छे परिणाम लेकर आता है। मेष लग्न में शनि यदि दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें, या ग्यारहवें भाव में होता है, तो यह शुभ फलदायी होता है। इन भावों में शनि की उच्च स्थिति जातक को आय में वृद्धि और करियर में बहुत सफलता देने वाली होती है।
इसके अलावा, लाभेश और कर्मेश: यानी शनि ग्रह जब कर्म भाव (दसवें भाव) और लाभ (ग्यारहवें भाव) के स्वामी होते हैं। तो परिणाम में, शनि की शुभ स्थिति में यह जातक के जीवन में स्थिरता और सफलता देने वाले होते हैं। साथ ही ऐसे जातक अपनी मेहनत के बल पर हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं।
मेष लग्न में शनि- अशुभ प्रभाव:
यदि शनि, मंगल के साथ हो तो यह मेष लग्न के जातकों को अशुभ फल देते हैं। क्योंकि, मंगल मेष राशि का स्वामी है और शनि व मंगल के बीच शत्रु सम्बन्ध होता है। इसलिए मेष लग्न के जातकों के लिए यह स्वाभाविक रूप से एक विरोधी ग्रह की भूमिका निभाता है। विशेष रूप से तब, जब यह मेष राशि में या मंगल से संबंधित किसी भाव में हो। कुल-मिलाकर मंगल के साथ शनि के प्रभाव जातक के कष्टकारी होते हैं।
इसके अलावा, मेष लग्न एक चर लग्न है, और इसके लिए लाभ भाव (ग्यारहवें भाव) का स्वामी शनि हो तो यह बाधा का कारक भी हो सकता है। जो जातक को लक्ष्यों को पूरा करने में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यदि कुंडली के पहले, तीसरे, छठे, आठवें, या बारहवें भाव में शनि अशुभ फलदायक होते हैं। जिससे जातक को करियर में देरी, वित्तीय और आर्थिक कठिनाइयाँ, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
शनि ग्रह की स्थिति और विशेष प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि का दसवें भाव का स्वामी होना विशेष रुप से कर्म को प्रभावित करने वाला होता है। यह समय जातक के जीवन में बदलाव तथा नई जिम्मेदारियों के लिए होता है। जातक का कर्म किस प्रकार का होगा या जीवन में कैसी परिस्थितियां आएंगी यह सभी कुछ शनि की महादशा के दौरान जातक के लिए सक्रिय होती हैं।
इसके साथ ही, शनि की इस दशा के समय पर जातक को अपने लिए किए जाने वाले कामों को लेकर अधिक चिंता भी होती है। कुंडली का दसवां भाव जीवन की गतिविधियों और नियमित क्रियाओं का कारक होता है। इस भाव में, शनि की महादशा के समय पर जातक को कई तरह से इसके फल मिलते हैं। जो शनि की महादशा के साथ अन्य ग्रहों के साथ संबंधों की स्थिति के अनुसार फलदायी होते हैं। शनि की महादशा के दौरान जातक अपने करियर, व्यवसाय और अपने पद-प्रतिष्ठा को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करता है। इस दशा में जातक को फल प्राप्ति में थोड़ा अधिक समय तो लगता है, लेकिन फल भी कर्म के अनुसार ही मिलते हैं।

मेष लग्न में शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव के लिए करें- ये उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की ऐसी कोई स्थिति या दशा नहीं है, जिनके लिए कोई उपाय न हो। इसी प्रकार यदि मेष लग्न में शनि की अशुभ स्थिति अशुभ प्रभाव दे रही है तो, आपको ये उपाय जरूर करना चाहिए-
- मेष लग्न में यदि पहले, तीसरे, छठे, आठवें और बारहवें भाव में स्थित शनि ग्रह अशुभ फल कारक हैं तो जातक को जरूरतमंदों को दान और शनि मंत्र या पाठ करना चाहिए। जिससे शनि ग्रह को शांत किया जा सकता हैं।
- यदि शनि कुंडली के किसी शुभ भावों में हो और सूर्य के साथ अस्त या बलहीन हो, तो ऐसी स्थिति में जातक को नीलम रत्न पहनना शुभ है।
- मेष लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए जातक के सबसे अधिक श्रेष्ठ उपाय है, हनुमान जी की आराधना करना।जातक को हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंगलवार व शनिवार को तेल-सिंदूर अर्पित करना चाहिए।
- मेष लग्न में शनि की स्थिति जातक के लिए एक परीक्षा के समान है। इसलिए इसके अशुभ प्रभाव से दूर रहने के लिए इस दौरान आप धीरज रखें, पहले देखें, और फिर जिम्मेदारी लें।
- शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर में काला तिल, सरसों का तेल और काले वस्त्र का दान करें।
- शनि की स्थिति के समय झूठ, छल- कपट और अन्याय जैसी बुरी आदतों से दूर रहें।
सारांश
ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, मेष लग्न के लिए शनि ग्रह एक अशुभ ग्रह की भूमिका निभाते हैं। लेकिन वे केंद्र के स्वामी भी है, इसलिए जातक को संघर्ष के तैयार करते हैं। शनि की ऐसी स्थिति के समय जातक को करियर और नौकरी से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मेष लग्न के लिए ये समय आसान नहीं होता है। जातक के जीवन में लगातार संघर्ष बने रहते हैं। कई बार यह स्थिति धन हानि का भी कारक होती है। लेकिन, कई बार लाभ भी मिलता है। इसलिए अशुभ स्थिति में धैर्य बिल्कुल न खोएं और उचित उपाय से समाधान करें।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. मेष लग्न में शनि का प्रभाव कैसा होता है?
An. मेष लग्न के लिए शनि के प्रभाव शुभ और अशुभ दोनों ही रूपों में मिलते हैं। मेष लग्न के लिए शनि ग्रह एक अशुभ ग्रह की भूमिका निभाते हैं। लेकिन वे केंद्र के स्वामी भी है, इसलिए जातक को संघर्ष के तैयार करते हैं। शनि की ऐसी स्थिति के समय जातक को करियर और नौकरी से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मेष लग्न के लिए ये समय आसान नहीं होता है।
Q. शनि की अशुभ स्थिति में मेष लग्न के जातकों को क्या करना चाहिए?
An. मेष लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए जातक के सबसे अधिक श्रेष्ठ उपाय है, हनुमान जी की आराधना करना।जातक को हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंगलवार व शनिवार को तेल-सिंदूर अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा, किसी ज्योतिषी की सलाह से शनि की शुभता के लिए आप ‘नीलम’ रत्न भी पहन सकते हैं।
Q. क्या, मेष लग्न में शनि शुभ प्रभाव भी देते हैं?
An. हां, यदि शनि की स्थिति उच्च हो और वह शुभ भाव में हो तो यह जातक के लिए अच्छे परिणाम लेकर आता है। मेष लग्न में शनि यदि दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें, दसवें, या ग्यारहवें भाव में होता है, तो यह शुभ फलदायी होता है। इन इन भावों में शनि की उच्च स्थिति जातक को आय में वृद्धि और करियर में बहुत सफलता देने वाली होती है।
Q. मेष लग्न में शनि ग्रह जातक के लिए कितने वर्ष की आयु में अशुभ फल देते हैं?
An. भौतिक सुख की बात करें तो, मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आयु के 16, 20, 28, 34, 41, 48 और 51 वर्ष में धन की प्राप्ति , वाहन सुख , भाग्य वृद्धि और अन्य भौतिक सुख व आनंद प्राप्त होते हैं।




