धनु लग्न में केतु ग्रह ! मन में असंतोष की भावना और जीवन में अद्वितीय परिवर्तन करने वाली स्थिति व उपाय की जानकारी |

धनु लग्न में केतु ग्रह

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धनु लग्न (Sagittarius Ascendant) में केतु का प्रभाव लंग कुंडली में उस भाव और भाव में केतु के साथ अन्य ग्रहों की दृष्टि व युति के आधार पर होते हैं। लेकिन केतु को एक मायावी और छाया ग्रह माना जाता है। जो कि, सामान्यतः जातक को आध्यात्मिक, ज्ञानी और अनुभवी बनाता है। लेकिन, अपने गुण के अनुसार, यह जातक को कभी-कभी भ्रम, असंतोष और रिश्तों में कठिनाइयाँ देने का कार्य करता है। 

जैसे- यदि लग्न कुंडली के दूसरे भाव में केतु ग्रह की स्थिति हो तो, यह जातक को धन व्यय, अनुभव विवाह में विलंब; देता है। वहीं, दसवें भाव में केतु जातक के लिए महत्वाकांक्षा और करियर में परिवर्तन का कारक होता है। इसी तरह कुंडली के बारहवें भाव में केतु ग्रह की उपस्थिति से मोक्ष, योग और विदेश यात्रा की लिए रूचि बढ़ती है। तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको और भी अधिक विस्तार बताएंगे, धनु लग्न के लिए केतु ग्रह की स्थिति से क्या-क्या परिणाम मिलते हैं। सम्पूर्ण जानकारी के लिए हमारे साथ लेख में अंत तक बने रहिए। और हमारे लेख पसंद आने पर हमें अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर दे।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धनु लग्न में जन्म लेने वाले जातक का स्वभाव कार्य करने में कुशल, ब्राह्मण तथा देवताओं का भक्त, घोड़ों को रखने वाला, मित्रों के काम आने वाला, राजा के समीप रहने वाला, ज्ञानवान, अनेक कलाओं का ज्ञाता, सत्यप्रतिज्ञ, बुद्धिमान, सुन्दर, सती गुनी, और श्रेष्ठ स्वभाव वाला होता है। साथ ही, ये जातक धनी, ऐश्वर्यवान, कवि, लेखक,व्यवसायी, यात्रा प्रेमी, पराक्रमी, अलप संततिवान, प्रेम ले वशीभूत रहने वाला, पिंगल वर्ण, बड़े दांतों वाला तथा प्रतिभाशाली गुणों से युक्त होते हैं।

 होता है। धनु लग्न के जातकों को बाल्यावस्था में अधिक सुख भोगने वाला, मध्यम अवस्था में सामान्य जीवन व्यतीत करने वाला और तथा अंतिम अवस्था में धन-धान्य और ऐश्वर्य से युक्त जीवन मिलता होता है। इन जातकों को भाग्य का साथ 22 या 23 वर्ष की आयु में मिलता है जब वें, धन का विशेष लाभ प्राप्त करते हैं। आगे हम लेख में जानेंगे कि, धनु लग्न में केतु की स्थिति से क्या-क्या बदलाव आते हैं। और कौन-कौन से ग्रहों के होने से शुभ परिणाम मिलते हैं।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धनु लग्न वालों के लिए केतु लग्नेश गुरु का मित्र है। धनु लग्न में केतु ग्रह कुछ भावों में विशेष फलादेश मिलते हैं। लेकिन, यह परिणाम केतु की अन्य ग्रहों के साथ युति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। तो आइए जान लेते हैं, केतु के ऐसे विशेष प्रभाव के बारे में-

  • केतु की अपनी कोई राशि नहीं होती है। वे अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में होकर जातक के लिए लाभकारी परिणाम देने वाले होते हैं। 
  • लग्न कुंडली में, केतु ग्रह पहले (उच्च राशि ), दूसरे, दसवें और ग्यारहवें भाव में अपनी दशा-अन्तर्दशा में शुभ फलदायक होते हैं।
  • लेकिन, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें (नीच राशि ), आठवें, नौवें और बारहवें भाव में केतु अपनी दशा -अंतर्दशा में अपनी क्षमतानुसार जातक को कष्ट, मानसिक अशांति और रोग देने के कारक होते हैं, इन भावों में केतु का प्रभाव अशुभ होता है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के योग्य और कई वर्षों के अनुभवी ज्योतिष आचार्यों  के अनुसार, धनु लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता और शुभ ग्रह शनि ग्रह को माना गया है। क्योंकि, यहां धनेश शनि की शुभ स्थिति से, धन स्थान से संबंध स्थापित करने वालों ग्रहों की स्थिति और धन स्थान पर पड़ने वाले ग्रहों के दृष्टि से जातक को आर्थिक स्थिति, आय के नए स्रोत तथा धन-संपत्ति के बारे में ज्ञात किया जा सकता है। इसके अलावा, लग्नेश बृहस्पति, भाग्येश सूर्य और लाभेश शुक्र ग्रह की अनुकूल स्थितियां धनु लग्न के जातकों के लिए धन व ऐश्वर्य में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। लेकिन, धनु लग्न के लिए शुक्र षष्ठेश होने से जातक को अशुभ परिणाम  मिलते हैं। कुल-मिलाकर धनु लग्न के लिए शुभ ग्रहों में, बुध व सूर्य शुभ है, शनि मारकेश होते हुए भी मारक नहीं हैं। सप्तमेश होने से चन्द्र सह मारकेश है और पंचमेश मंगल ग्रह शुभ फलदायक है।

अब हम बात करते हैं, धनु लग्न में, केतु गृह के प्रभाव के बारे में- इस लग्न में केतु चतुर्थ भाव का स्वामी होकर जातक के माता, भूमि भवन, वाहन, चतुष्पद, मित्र, साझेदारी, शांति, जल, जनता, स्थायी संपत्ति का कारक होगा। साथ ही, यह जातक के दया, परोपकार, कपट, छल, अंतकरण की स्थिति, जलीय पदार्थों का सेवन, संचित धन, झूठा आरोप, अफवाह, प्रेम संबंध, इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि भी होगा। इसलिए यहां, केतु जातक की जन्मकुंडली में अपने दशाकाल में बलवान या शुभ प्रभाव में होने पर उपरोक्त विषयों में शुभ फल देने का कार्य करेगा। जबकि कमजोर या अशुभ प्रभाव में होने से जातक को समस्याएं और अशुभ फल मिलेंगे।

ज्योतिष गणना के मुताबिक, धनु लग्न में केतु के प्रभाव कुंडली के उस भाव और युति पर निर्भर करते हैं। जो शुभ होने पर जातक को आध्यात्मिक ज्ञान, अचानक सफलता और धन लाभ मिलता है। जबकि, अशुभ होने पर यह वाणी में कठोरता, अनावश्यक झगड़े, अचानक हानि और वैवाहिक जीवन में समस्याएँ देने का कारक होता है। जिससे जातक को करियर व रिश्ते में अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।  लेकिन, शुभ ग्रहों के साथ होने पर यह जातक को भाग्यशाली और पराक्रमी बनाता है, जैसे, दूसरे, चौथे, दसवें, और ग्यारहवें भाव का केतु जातक के लिए शुभ परिणाम देते हैं। आगे हम केतु ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभाव के बारे में जानेंगे-

  1. केतु के शुभ प्रभाव में, जातक को आध्यात्मिक खोज, धर्म के प्रति झुकाव और गहरा ज्ञान मिलता है, लग्न कुंडली के नौवें भाव में केतु के प्रभाव से जातक को श्रेष्ठ आध्यात्मिकता की प्राप्ति होती है।
  2. इस के शुभ प्रभाव में, जातक को अचानक धन लाभ, करियर में अप्रत्याशित सफलता, और धन शुभ कार्यों में खर्च होता है।
  3. केतु के शुभ प्रभाव से जातक को, सगे-सम्बन्धियों का सहयोग, समाज में मान-सम्मान (यदि अन्य ग्रह अनुकूल हों) और सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाला बनाती है।
  4. केतु के शुभ प्रभाव से, जातक में साहस, पराक्रम और धैर्य में वृद्धि होती है। विशेष रूप से जब केतु मंगल या शनि के साथ युति में हो। 
  1. केतु के अशुभ प्रभाव से, जातक का स्वभाव कठोर, अहंकारी या असत्य बोलने की प्रवृत्ति वाला हो सकता है।  ऐसे जातक की वाणी अधिक कठोर होती है।
  2. इस के अशुभ प्रभाव से जातक को मुख, दांतों या पेट से जुड़ी समस्याएं, या दीर्घकालिक रोग की संभावना होती है।
  3. केतु के अशुभ प्रभाव में, जातक के विवाह में देरी, प्रेम प्रसंगों में असफलता, वैवाहिक जीवन में तनाव और कलह (विशेषकर सातवें भाव में) हो।
  4. केतु के अशुभ प्रभाव में जातक के करियर में अस्थिरता, अनावश्यक खर्च, और धन हानि की समस्या हो सकती हैं। ग्रहों में, सूर्य/चंद्रमा/शुक्र के साथ युति होने पर अशुभ फलदायी है।
  5. इस के अशुभ प्रभाव से अचानक दुर्घटनाएं, हिंसात्मक प्रवृत्ति, और पतन की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
धनु लग्न में केतु ग्रह

हमारे ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, रत्न कभी भी राशि के अनुसार नहीं पहनना चाहिए।  रत्न कभी भी लग्न, दशा, महादशा के अनुसार ही धारण किया जाता है। 

  • लग्न के अनुसार धनु लग्न के जातक के लिए पुखराज, मूंगा, और माणिक रत्न श्रेष्ठ है। 
  • लग्न के अनुसार धनु लग्न के जातक को नीलम, हीरा, मोती, और पन्ना रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए।
  • इस के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए लहसुनिया रत्न धारण किया जा सकता है, लेकिन इसे पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से अपनी कुंडली में ग्रहों की दशा और विश्लेषण जरुर कराएं।
  • केतु के अधिपति देवता भगवान गणेश हैं। उनकी नियमित पूजा करें और उन्हें दूर्वा (घास) अर्पित करें। साथ ही, प्रतिदिन “ॐ कें केतवे नमः” या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • इस की शांति के लिए संकट मोचन हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है। 
  • इस का संबंध कुत्तों से माना जाता है। इसलिए,  नियमित रूप से कुत्तों को रोटी या भोजन खिलाएं। विशेषकर काले और सफेद रंग के कुत्ते की सेवा करना शुभ होता है।
  • शनिवार या मंगलवार को काले तिल, काला-सफेद कंबल, नारियल, या ऊनी वस्त्रों का दान करें।
  • किसी मंदिर या धार्मिक स्थान पर ध्वजा (झंडा) चढ़ाएं। 
  • प्रतिदिन माथे पर केसर का तिलक लगाने से बृहस्पति (धनु लग्न के स्वामी) और केतु दोनों के शुभ फल मिलते हैं।
  • लाल किताब के अनुसार केतु की अशुभता दूर करने के लिए कान छिदवाकर उसमें सोने का तार पहनना भी एक प्रभावी उपाय माना गया है। 
  • अपने बुजुर्गों की सेवा करें, पिता, दादा और घर के बड़े-बुजुर्गों की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लें।
  • सात्विक भोजन करें और नशे की वस्तुओं से दूर रहें।

Q. धनु लग्न में केतु ग्रह की क्या स्थिति होती है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धनु लग्न वालों के लिए केतु लग्नेश गुरु का मित्र है। धनु लग्न में केतु ग्रह कुछ भावों में विशेष फलादेश मिलते हैं। लेकिन, यह परिणाम केतु की अन्य ग्रहों के साथ युति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

Q. धनु लग्न में केतु ग्रह के विशेष फलादेश क्या है?

An. केतु की अपनी कोई राशि नहीं होती है। वे अपनी मित्र राशि और शुभ भाव में होकर जातक के लिए लाभकारी परिणाम देने वाले होते हैं। लग्न कुंडली में, केतु ग्रह पहले (उच्च राशि ), दूसरे, दसवें और ग्यारहवें भाव में अपनी दशा-अन्तर्दशा में शुभ फलदायक होते हैं।

Q. धनु लग्न में केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. केतु के अशुभ प्रभाव से, जातक का स्वभाव कठोर, अहंकारी या असत्य बोलने की प्रवृत्ति वाला हो सकता है।  ऐसे जातक की वाणी अधिक कठोर होती है। केतु के अशुभ प्रभाव से अचानक दुर्घटनाएं, हिंसात्मक प्रवृत्ति, और पतन की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

Q. धनु लग्न में शुभ ग्रह और धन योग क्या हैं?

An. धनु लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए धन प्रदाता और शुभ ग्रह शनि ग्रह को माना गया है। यानी, शुभ ग्रहों में, बुध व सूर्य शुभ है, शनि मारकेश होते हुए भी मारक नहीं हैं। सप्तमेश होने से चन्द्र सह मारकेश है और पंचमेश मंगल ग्रह शुभ फलदायक है।

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