7 से २३ जुलाई 2026 से बुध ग्रह वक्री अवस्था में
भाग 2: “पृथ्वी का खजाना (वृषभ, कन्या, मकर) मंदी के बाजार में कारोबारी जंग
प्रस्तावना
जब दुनियां वक्री बुध की चाल के कारण परेशान हो रही होती है और, उपरोक्त राशियों का सिस्टम क्रैश हो गया होता है, तब पृथ्वी तत्व के जातक यानी यह राशि वाले अपना विवेक इस्तेमाल करते हुए आगे की रूपरेखा तैयार करते हुए मुनाफे का दौर चलाने लगते हैं। बुध से उनकी मैत्री और कन्या राशि का स्वयं स्वामी होने के कारण वक्री होकर के जब अपनी चेष्टा शक्ति में इजाफा करता है तो, इन राशि वालों के जीवन में बहुत ही खूबसूरत बदलाव आने लगते हैं। करियर और कार्य के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई नई उपलब्धि इनके लिए हाजिर हो जाती है। बुध इन्हें गुप्त रूप से सहयोग देने के लिए तत्पर दिखाई तो देता है, किंतु इन्हें भी कहीं ना कहीं इस बुध ग्रह के वक्री चाल के कारण शारीरिक और मानसिक परिश्रम करवा करके थका देता है। जिससे उनके पसीने निकलने लगते हैं और यह कहने लगते हैं कि, इस दुनियां में परिश्रम ही एक सहारा है। बिना परिश्रम के यहां कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकताहै।
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वक्री बुध ग्रह का इन राशियों को गुप्त समर्थन
वक्री बुध ग्रह का इन राशियों के द्वारा जो गुप्त सपोर्ट मिलता है, उससे यह तो, अपने हौसलों को बुलंद करते हुए आगे का रास्ता तय करते हैं। लेकिन कहीं ना कहीं बुध बड़ी चालाकी से इनसे अधिक परिश्रम और मेहनत भी करवाता है और इन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं को भी दे जाता है। जिससे यह अपने जीवन में कई बार दुखी हो जाते हैं, इस दौरान उन्हें उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है। यह इनकी परेशानी का प्रमुख करण है, क्योंकि युवराज ने जो चाल चली है, उस चाल को नाकाम करना हर किसी राशि वाले के बस में नहीं है। युवराज ने जो इन राशियों का सिस्टम हैक किया है, वह बार-बार हैंग हो जाता है और उनका नेटवर्क क्रैश होता दिखाई देता है। लेकिन अग्नि के मलबे से सोने की तलाश इनके लिए जारी रहती है और कहीं ना कहीं सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं। वक्री बुध ग्रह का गुप्त समर्थन और उसकी उल्टी चाल कहीं ना कहीं परेशानियों को बढ़ाने वाली दिखाई दे रही है। जिससे इन राशि वालों को कई बार खेल तमाशा की तरह वह नचाता रहेगा।
वृषभ: “तिजोरी का रखवाला” (Taurus)
ज्योतिषीय तत्व: वृषभ का स्वामी शुक्र है। बुध ग्रह यहाँ दूसरे (धन) और पांचवें (बुद्धि-संतान) भाव का यानी धनेश और त्रिकोणेश का स्वामी होकर वक्री होता है। जो इस राशि वालों के लिए बेहद बौद्धिकता और धैर्य के साथ चलने के संकेत दे रहा है। इस राशि का जातक अपनी संपत्ति और वाणी को लेकर काफी सतर्क दिखाई देता है। उसे ऐसा लगता है कि वक्री बुध से उसकी नैया पार लग जाएगी। कोई पुराने लेन-देन और निवेश के मामलों से उसे लाभ मिल जाएगा। जिससे वह गदगद होता है और अपने शांत स्वभाव का परिचय देते हुए समय की प्रतीक्षा करता है। किंतु और मौके पर बुध ग्रह की वक्री अवस्था और अस्त हुई अवस्था इस तरह से बीच में अवरोध डाल देती है। जिससे वह सिर्फ आंशिक रूप से ही सफल होता दिखाई दे रहा है। लेकिन यहां पर वक्री बुध ग्रह की चाल ने एक ऐसा उल्टा गांव चला है जो, पांचवे भाव जो बुद्धि से जुड़ा हुआ है। कहीं-कहीं उसे लॉटरी और सत्ता से भी जोड़कर देखा जाता है। जिसका मतलब है कि, आप जल्दी बाजी में और लालच में आकर अपनी गाढ़ी कमाई की जमा पूंजी को किसी ऐसी योजना में लगा सकते हैं जो, कभी वजूद में नहीं आ सकता है। यानी यहां एक वक्री बुध ग्रह की चाल ऐसी स्थिति को क्रिएट करती है, जहां आपके मन में उत्साह के साथ लालच भी आता है और आपके तिजोरी में सेंध लग जाती है। यानी जिन योजनाओं से आपकी तिजोरी भरनी थी जो, कार्य आपको मिलने थे वह लटक जाते हैं।
प्रेम संबंध और संतान पक्ष
वक्री बुध ग्रह की चाल जो 7 जुलाई 2000 26 से 23 जुलाई 2026 तक रहेगी। वह आपके संतान पुत्र और पुत्री को लेकर आपकी चिताओं को बढ़ा सकता है। साथ ही में निजी संबंधों में कोई ऐसा गुप्त रहस्य उजागर हो सकता है जो, आपके घर परिवार की शांति को बाधित करता हुआ और उसे ग्रहण लगाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस तरह से देखा जाए तो, वक्री बुध ग्रह की चाल आपके प्रेम संबंधों को संतान पक्ष को और धन मामलों को भी कहीं ना कहीं प्रॉब्लम क्रिएट करता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे घर परिवार की शांति भंग होती है और उल्टी चाल के कारण आपकी शांति को यह ग्रह बंधक भी बना सकता है। जिससे निजी संबंधों में बेचैनी और घबराहट उत्पन्न हो सकती है। साथी का घटना हुआ रोमांस आपके मन को मोड़ सकता है। यहां आपको बुध ग्रह की उल्टी चाल से बच कर निकालने की न केवल जरूरत है। बल्कि अपने संबंधों को बरकरार रखने के लिए धैर्य और बौद्धिकता से काम लेना पड़ेगा।
कन्या: “मास्टरमाइंड का शक” (Virgo)
ज्योतिषीय तत्व: कन्या का स्वामी स्वयं बुध है। जो कि ब्रह्मांड की 12 राशियों के जातकों के सॉफ्टवेयर को हैकर की तरह हैंग कर रहा था। इन पुरी राशियों का मास्टरमाइंड वक्री बुध ग्रह खुद फंसा हुआ दिखाई दे रहा है। क्योंकि बुद्ध यहां स्वयं लग्न का स्वामी है। जिससे शरीर का संबंध है और दसवें भाव जिसका संबंध करियर से है, यह है और ही खतरनाक स्थिति बन रही है। वृषभ जो पैसे बचाने की कोशिश कर रहा था। उसका पूरा हिसाब कन्या राशि का स्वामी मास्टरमाइंड वक्री बुध ग्रह रख रहा था। लेकिन बुध ग्रह की वक्री उल्टी चाल खुद ही उसके दिमाग को उल्टा दिशा में ले जा रहा है। और इस गेम का मास्टरमाइंड बुध ग्रह खुद अपने लिए नुकसान कर बैठता है। दिमाग की उल्टी उपज और निर्णय लेने की क्षमताएं इस दीवाने को हैरान और परेशान करने लगती हैं। इसलिए उसे हर काम में कमी दिखने लगती है। इस कमी को वह सिस्टम के तहत नहीं बल्कि निजी दिमाग से ही दुरुस्त करने की कोशिश में लग जाता है। जब इस मास्टरमाइंड बुध ग्रह का शक गहरा होता है तो, यह है रात दिन जाग कर ऑफिस की पुरानी फाइलों को संभलता रहता है। क्योंकि उसकी उल्टी चाल उसके शक को और गहरा बना देती है, कि उसके खिलाफ कोई साजिश रची गई है। किसी ने उसे नीचा दिखाने की कोशिश की है, यह बात तब हकीकत के रूप में प्रकट होती है जब उसका कोई पुराना शत्रु नया मुखौटा पहनकर उसके सामने आ जाता है। जिससे उसकी चाल धारी की धरी रह जाती है।
मकर: “कुर्सी हिलने लगती है (Capricorn)
ज्योतिषीय तत्व: मकर का स्वामी शनि है। बुध यहाँ छठे (शत्रु) और नौवें (भाग्य) भाव का स्वामी होकर भाग्य स्थान पर वक्री गति से संचरण करता है। बुध ग्रह के वक्री होने से कन्या राशि के जातकों की स्थिति पर विपरीत असर पड़ता है। किंतु कन्या राशि के जातकों का इस प्रकार से परेशान होना सीधे मकर राशि के जातकों के करियर और भाग्य पर असर डाल देता है। मकर राशि के जातक अपने साम्राज्य को खड़ा करने में लगे हुए ही थे कि, भाग्य भाव के स्वामी बुध ग्रह का वक्री होने से उसकी कुर्सी अचानक हिलने लगती है। उसे खतरा महसूस होने लगता है। मकर राशि वालों के खिलाफ गुप्त रूप से कोई षड्यंत्र रचा जाता है। राजनीतिक कार्मिक और व्यापारिक तथा सामाजिक मोर्चे पर जिस राजनीति ने उसके करियर को दांव में लगा दिया था। कार्य क्षेत्र और ऑफिस की वह गुट बंदी जिसे मकर राशि के जातकों ने वर्षों पहले ही ठिकाने लगा दिया था, शत्रु भागवत बुध का वक्री होना उसके चेष्टा बल को दोबारा जीवित कर देता है। जिससे यहां दोहरी चाल चलते हुए मकर राशि के जातकों के पुराने शत्रु अचानक प्रभावशाली होकर कानूनी दांव पेंच के साथ आपके सामने आ खड़े होते हैं। जिससे आपका सुप्रीम लीडर आपके खिलाफ ऐसा बयान देता है। जिससे आपके लिए करियर में चुनौतियां आ खड़ी होती है। जिसे कोर्ट कचहरी का एक नया जंजाल आपके सम्मुख उपस्थित हो रहा है। यह मास्टरमाइंड बुध ग्रह के वक्री चाल का ही असर है।
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निष्कर्ष
पृथ्वी तत्व की राशियां बुध ग्रह की इस उल्टी चाल के कारण कई तरह से उलझ जाती हैं। वह अपने खजाने को भरने के लिए सक्रिय तो रहते हैं। लेकिन अपने मान सम्मान को बचाने के लिए कोर्ट कचहरी और कानूनी दांव पेंच यहां फसने लगता है। और फाइलों का एक ऐसा मकड़ जाल जहां यह पृथ्वी तत्व की राशियां फंसी हुई दिखाई देती है। तभी ग्रह मंडल में संन संन की तेज आवाज करती हुई तीन राशियां पर्दे के पीछे से प्रकट होती है। यानी उनके जातक जो गहरे विचारक हैं, जो कि, नया तजुर्बा पेश करते हुए इस पूरी दुनियां में छिड़ी हुई जंग को एक अनूठे मोड पर ले जाने वाली रहेगी। क्या इन तेज हवाओं के सहारे वह अपनी नैना को पार लगा पाएंगे? या फिर वायु का बवंडर उनकी इस चाल को जल की लहरों के मध्य डुबो देगा। क्या वायु तत्व की राशियों का दिमाग इतना मजबूत है जो कि, इस बवंडर को झेलते हुए आगे निकल जाएंगे तो आईए जानते हैं इसी क्रम में तृतीय भाग को यह बवंडर किस तरह का है।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q1. 7 से 23 जुलाई 2026 तक बुध वक्री का पृथ्वी तत्व की राशियों पर क्या प्रभाव रहेगा?
An. इस अवधि में वृषभ, कन्या और मकर राशि के जातकों को करियर, धन, निवेश, निर्णय क्षमता और कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि सफलता के साथ अतिरिक्त मेहनत, मानसिक दबाव और कानूनी या प्रशासनिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
Q2. वृषभ राशि के लिए बुध वक्री क्या संकेत देता है?
An. वृषभ राशि के लिए धन, बचत, निवेश और बुद्धि से जुड़े मामलों में लाभ के अवसर बनेंगे। लेकिन जल्दबाज़ी, लालच, जोखिमभरे निवेश या बिना जांच-पड़ताल के आर्थिक निर्णय लेने से बचना चाहिए।
Q3. क्या बुध वक्री के दौरान प्रेम संबंध प्रभावित होंगे?
An. हाँ। वृषभ राशि सहित कुछ जातकों के प्रेम संबंधों में गलतफहमियां, भावनात्मक दूरी या कोई पुराना रहस्य सामने आने की संभावना बन सकती है। धैर्य और स्पष्ट संवाद संबंधों को मजबूत बनाए रखने में सहायक होगा।
Q4. कन्या राशि के जातकों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
An. कन्या राशि के जातकों को ओवरथिंकिंग, संदेह, हर छोटी गलती पर अत्यधिक ध्यान देने और पुराने विवादों को दोबारा उठाने से बचना चाहिए। कार्यस्थल पर दस्तावेज़ों और महत्वपूर्ण निर्णयों की दोबारा जांच करना लाभदायक रहेगा।
Q5. मकर राशि के लिए बुध वक्री का क्या प्रभाव रहेगा?
An. मकर राशि के लिए करियर, भाग्य, कानूनी मामलों, प्रशासनिक कार्यों और पुराने विरोधियों से जुड़े विषय सक्रिय हो सकते हैं। धैर्य, रणनीति और दस्तावेज़ी सतर्कता से चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।



