बुध की महादशा ! बुद्धि और संचार के लिए प्रभावशाली! जानें,अन्य ग्रहों की अंतर्दशा के बारे में

बुध की महादशा

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ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों की दशा और महादशा एक निश्चित समय के लिए चलती है! हमारे पिछले लेख में हमने मंगल की महादशा के बारे में बताया था! आज के इस मंगल भवन के लेख  में हम बुध की महादशा के बारे में चर्चा करेंगे! आशा करते हैं लेख में दी गई जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी हो! लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें-  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध की महादशा 17 साल तक चलती है। यह जातक के जीवन में, बहुत से सकारात्मक और नकारात्मक बदलाव लाते हैं! यानी बुध के ग्रह की महादशा होने पर जातक के जीवन में संचार, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, और व्यापार जैसे क्षेत्र प्रभावित होते हैं! बुध एक शभु ग्रह है उसकी महादशा में जातक का भाग्य चमक सकता है!  लेकिन बुध की शुभ या अशुभ स्थिति पर भी बुध ग्रह के प्रभाव निर्भर करते हैं! 

कुछ इस प्रकार बुध की महादशा में, जातक के जीवन में बदलाव नजर आते हैं! 

  1. बुध संचार, भाषा, बातचीत, और बुद्धिमत्ता का कारक है!  इस महादशा में, जातक की संचार क्षमता और बुद्धिमत्ता में अच्छा और सकारात्मक प्रभाव होता है! जिससे उनकी ज्ञान और समझ की क्षमता में विकास होता है! 
  2. बुध रचनात्मकता का भी प्रतीक माना गया है इसलिए इनकी महादशा के दौरान जातक में रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का भी विकास होता है! जिससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नए मार्ग आसानी से ढूंढ लेते है! 
  3. बुध का सम्बन्ध व्यापार और अर्थव्यवस्था से भी होता है! इनकी महादशा में, जातक को व्यापार में सफलता और आर्थिक रूप से भी मजबूती आती है!
  4. बुध संचार कौशल को बढ़ाने का काम करते हैं!  
  5. बुध ग्रह के कुंडली में मजबूत है, तो जातक स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है! लेकिन, यदि बुध ग्रह पीड़ित या कमजोर है, तो जातक को पाचन, त्वचा या तंत्रिका संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है!

बुध की महादशा के साथ अन्य ग्रहों की अंतर्दशा भी चलती है! तो आगे लेख में जानेगे, अन्य ग्रहों की अंतर्दशा में बुध जातक को किस प्रकार प्रभावित करेंगे- 

बुध की महादशा के साथ बुध की अंतर्दशा हो तो, यह जातक को धार्मिक प्रवृत्ति का बनाता है! ऐसे जातक धर्म के मार्ग पर चलते हैं! इसके साथ ही जातक शिक्षा व विवेक से जुड़े कार्यों को करने में अधिक विश्वास रखते हैं! कुल-मिलाकर, बुध की महादशा में बुध का ही अंतर्दशा का होना जातकों को विद्वानों से समागम करने के लिए प्रेरित करता है! जिससे उनकी बुद्धि निर्मल और पवित्र होती है! ऐसे जातक प्रत्येक पक्ष को बहुत ही, अच्छे और पवित्र नजरिये से देखते हैं! इसके साथ ही इन जातकों को धन लाभ और विद्या के कारण यश की प्राप्ति होती है! 

बुध के साथ सूर्य की अंतर्दशा जातक में आत्म्वुश्वास को बढ़ती है! क्योंकि, सूर्य और बुध दोनों ही, बहुत शुभ ग्रह हैं! और दोनों के बीच मित्रतापूर्ण संबंध होते हैं! अतः बुध की महादशा और सूर्य की अन्तर्दशा के दौरान, सूर्य से जातक को उग्र और मजबूत आत्मविश्वास मिलता है! और बुध से जातक को, विवेकवान और धार्मिक बुद्धि के प्रभाव मिलते हैं! कुल-मिलाकर इस दशा के दौरान जातक में, ज्ञान और नए कार्य सीखने की क्षमता का विकास होता है! साथ ही, जातकों के लिए सरकारी नौकरी के योग भी बनते हैं! पारिवारिक सम्बन्धों में मधुरता और शांति रहती है! साथ ही, यह बैंकिंग, शिक्षा, प्रशासन, लेखा, कानून और अन्य उच्च नौकरियों के लिए एक अच्छा और शुभ समय होता है!

जब बुध की महादशा और चन्द्र की अन्तर्दशा हो तो, इस स्थिति जातक को, जीवनसाथी और संतान के साथ एक सुखद और खुशहाल पलों का आनंद मिलता है। क्योंकि, बुध के साथ चन्द्र के सम संबंध होते हैं! इसलिए साथ में प्रभाव भी लाभकारी ही होते हैं! यानी दोनों ग्रहों की प्रवृत्ति के अनुसार, ये जातक को अधिकांश परिणाम सकारात्मक ही देते हैं! बुध की महादशा से जातक को, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में विकसित करता है। ऐसे जातक को पारिवारिक सुख मिलता है! हालांकि, कभी-कभी कुछ मानसिक तनाव और थकावट की स्थितियां बन सकती हैं! पर कड़ी मेंहनत से सफलता भी मिलती है!

बुध के साथ, शुक्र की अंतर्दशा होने पर जातक को उसके मित्रों से अच्छा सहयोग मिलने की सम्भावना होती है! साथ ही जातक को इस दौरान व्यापार में बहुत अधिक धन और लाभ मिलता है! हमारे ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, यह एक अच्छा समय है, इससे जातक उनकी बौद्धिक क्षमताओं और कुशलता से एक नयी पहचान बनाने का अवसर मिलता है! जातक अपने पार्टनर के साथ अच्छा रोमांटिक समय बिताता है! साथ ही, इस समय जातक एक रचनात्मक कार्य को करने के लिए प्रेरित रहते हैं! शुक्र के शुभ प्रभाव के कारण, जातक का सौंदर्य और आकर्षण में झुकाव बढ़ जाता है। साथ ही, संगीत, नृत्य, कला, सुगंध जैसी वस्तुओं में रुचि लेते हैं! 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल और बुध के बीच सम्बन्ध तटस्थ होते हैं! यानी यदि हम प्रभावों की बात करें तो यह एक सकारात्मक अवधि नहीं मानी जा सकती हैं! मंगल की यह अंतर्दशा भाषण यानी कि वाणी में आक्रामकता और तर्कशीलता लाने वाली होती है! लेकिन जातक को वाहन सुख प्राप्त होता है। पारिवारिक जीवन के लिए यह समय आनंदमय रहता है। हालांकि, मंगल के प्रभाव में कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है; लेकिन, बुध के साथ इनके नकारात्मक प्रभावों प्रभावी ढंग से निपटने के लिए परिपक्वता के साथ तर्कशील बुद्धि मिलती है! जैसे, विरोधियों के साथ जातक को  नुक्सान उठाना पड़ सकता है! 

बुध और गुरु बृहस्पति की अंतर्दशा बहुत ही लाभकारी प्रभाव देने वाली मानी गई है! क्योंकि, ज्योतिष में, ये दोनों ग्रह  सबसे अधिक शुभ और प्रभावशाली ग्रह माने जाते हैं! जिससे जातक के विवाह के योग बनते हैं! जीवनसाथी और बच्चों के साथ संबंध भी मधुर रहते हैं! ऐसे जातक का आध्यात्मिकता में अधिक झुकाव होता है! जातक इस समय के दौरान धार्मिक स्थानों की यात्रा करते हैं। साथ ही, जातक नए-नए कार्यों जो सीखने में अधिक रुचि लेते हैं! शिक्षा की दृष्टि से यह समय सकारात्मक परिणाम देने वाला होता है! इस समय जातक बैंकिंग, ज्योतिष, कानून, वाद-विवाद, अनुसंधान, आदि जैसे क्षेत्रों में अच्छी सफलता प्राप्त करता है! 

बुधु के साथ शनि के परस्पर मित्रता के सम्बन्ध होते हैं! हालांकि, शनि एक क्रूर ग्रह है, लेकिन यह बुध के साथ एक अच्छे और सकारात्मक परिणाम देने की भूमिका निभाते हैं! यानी समस्याएँ तो आएंगी लेकिन अंत में सब कुछ शुभ और सकारात्मक परिणाम भी मिलेंगे! साथ ही, इस दौरान जातक का जीवन कुछ कठिनाइयों से भरा व्यतीत होगा, कार्य का अधिक दबाव रहेगा, लेकिन आपको अपने प्रयासों और मेहनत का परिणाम अंत में बहुत ही अच्छा मिलेगा! हमारे आचार्यों का मत है कि, जातक को इस समय अवधि के दौरान आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है! जिसके प्रभाव से जातक पुण्य पथ पर रहकर धार्मिक और सही कार्यों को करने के लिए प्रेरित होता है! 

बुध के साथ राहु की अंतर्दशा के दौरान जातक को दूसरों से बहुत अधिक सम्मान मिलता है! हालांकि, मन में भय और भ्रम की स्थिति अधिक होती है! इस दौरान जातक की धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ जाती है! करियर के साथ-साथ जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में समस्याओं का सामना करता है! और दांपत्य जीवन में गलतफहमी के कारण मनमुटाव रहते हैं! यह अवधि जातक के जीवन में, कड़ी मेहनत और तनाव लाने वाली होती है! कई बार जातक उदास और असंतुष्ट महसूस करता है और सफलता में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है! 

बुध की महादशा

बुध के साथ केतु की अंतर्दशा होने पर जातक के जीवन में बहुत सी कठिनाइयाँ और समस्याएं आती हैं! क्योंकि, केतु जातक के मन में,  भ्रम और गलतफहमी पैदा करने का कार्य करता है! जिससे जातक को किसी भी एक ठोस निर्णय लेने के लिए बहुत संघर्ष का सामना करना पड़ता है! यह अवधि जातक के पेशेवर और वित्तीय सफलता में भी बाधक होती है! और इस दशा के दौरान जातक के फिजूल खर्च भी अधिक होते हैं! जातक की एकाग्रता का स्तर भी कम होता है। 

बुध से अच्छे प्रभाव के लिए करें ये उपाय- 

  1. भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें! 
  2. बुध को मजबूत करने के लिए, हरे रंग के कपड़े पहने, और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करें! इससे बुध मजबूत होगा और अच्छे परिणाम देगा!  
  3. अपने संचार और बातचीत में कुशल व्यवहार करें, यानी बातचीत के कौशल में सुधार करें, नई भाषाओं का अध्ययन करें, और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लें!
  4. अपने व्यापार और कार्य करने की अर्थव्यवस्था में, कुशलता से कार्य करें! व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दें और नए वित्तीय योजना और निवेश सावधानी से करें! 
  5. नियमित रूप से व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन करें, और तनाव से दूर रहें!  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध की महादशा जातक के जीवन में बहुत से महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आती है! बुध ग्रह की स्थिति के अनुसार, यह महादशा जातक के लिए भाग्यशाली और कुछ ग्रहों की अंतर्दशा के साथ अशुभ प्रभाव देने वाली हो सकती है! लेकिन, उचित प्रयासों, सही सलाह और  बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए सही उपायों से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं!

Q. बुध की महादशा कितने समय तक चलती है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध की महादशा 17 साल तक चलती है। यह जातक के जीवन में, बहुत से सकारात्मक और नकारात्मक बदलाव लाते हैं! यानी बुध के ग्रह की महादशा होने पर जातक के जीवन में संचार, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, और व्यापार जैसे क्षेत्र प्रभावित होते हैं!

Q. क्या, बुध की महादशा में शनि की अन्तर्दशा का प्रभाव बुरा होता है?

An. नहीं, बुधु के साथ शनि के परस्पर मित्रता के सम्बन्ध होते हैं! हालांकि, शनि एक क्रूर ग्रह है, लेकिन यह बुध के साथ एक अच्छे और सकारात्मक परिणाम देने की भूमिका निभाते हैं! यानी समस्याएँ  तो आएंगी लेकिन अंत में सब कुछ शुभ और सकारात्मक परिणाम भी मिलेंगे!

Q. बुध की महादशा का क्या प्रभाव होता है?

An. बुध संचार, भाषा, बातचीत, और बुद्धिमत्ता का कारक है!  इस महादशा में, जातक की संचार क्षमता और बुद्धिमत्ता में अच्छा और सकारात्मक प्रभाव होता है! जिससे उनकी ज्ञान और समझ की क्षमता में विकास होता है!  बुध रचनात्मकता का भी प्रतीक माना गया है इसलिए इनकी महादशा के दौरान जातक में रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का भी विकास होता है! जिससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नए मार्ग आसानी से ढूंढ लेते है!

Q. बुध को मजबूत करने के लिए क्या उपाय करना है?

An. बुध को मजबूत करने के लिए, भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें! बुध को मजबूत करने के लिए, हरे रंग के कपड़े पहने, और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करें! इससे बुध मजबूत होगा और अच्छे परिणाम देगा! अपने संचार और बातचीत में कुशल व्यवहार करें, यानी बातचीत के कौशल में सुधार करें, नई भाषाओं का अध्ययन करें, और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लें!

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