जानें- बुध इन भावों में देंगे, चमत्कारी प्रभाव, सभी ग्रहों के साथ बुध की युति और राशियां जो बुध से होंगी लाभप्रद

बुध के शुभ प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में सभी ग्रहों का विशेष महत्व है। जिस प्रकार, गुरु बृहस्पति ज्ञान के, मंगल ग्रह  पराक्रम के, सूर्य ग्रह आत्मा के, चंद्र ग्रह  मन के, शनि ग्रह न्याय के और शुक्र ग्रह ऐश्वर्य के कारक है, उसी प्रकार बुध ग्रह बुद्धि और तर्कशक्ति के कारक होते हैं। किसी भी जातक का स्वभाव, चरित्र, गुण-दोष के बारे में जानना हो, तो उसका ग्रह का कुंडली के भावों में शुभ या अशुभ फल जानना होता है। तो आइए, आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम बुध ग्रह  के उन भावों को जानेंगे, जिन पर उनका प्रभाव विशेष रूप से शुभ फलदायी है। इसके साथ ही हम बुध से प्रभावित शुभ राशियों के साथ अन्य ग्रहों के साथ बुध की युति के बारे में भी जानेंगे-

ज्योतिष शास्त्र में, मुख्य रूप से बुध को, मधुर वाणी बोलने वाला ग्रह माना गया है। बुध के शुभ प्रभाव से प्रभावित जातक, मिले-जुले हंसमुख स्वभाव , तर्कशील, श्रेष्ठ बुद्धि के गुणों से युक्त होता है। ऐसे जातक अपने जीवन जीने का भरपूर आनंद उठाते हैं। हंसी-मजाक के साथ वे तर्क-वितर्क करने में बहुत आगे होते हैं। 

कुंडली में उच्च और नीच का होना, मित्र-शत्रु ग्रहों का होना उस राशि में ग्रहों की ताकत के बारे में जानकारी देता है। 

राशियों की बात करें तो, बुध को मिथुन और कन्या राशि का स्वामी माना गया है। इसके अलावा, बुध त्वचा का भी कारक होता है। जिन जातकों को बुध से शुभ प्रभाव मिलते हैं, उनकी त्वचा अच्छी होती है और उन्हें किसी प्रकार की त्वचा रोग की संभावना नहीं होती हैं। आगे लेख में हम बुध के शुभ प्रभाव वाले भावों (घर) के बारे में जानेंगे।

यहां हमने कुंडली के कुछ विशेष भावों के बारे में बताया है, जहां बुध शुभ फलदायी है-ये भाव इस प्रकार हैं..

जन्म कुंडली के पहले भाव में बुध का प्रभाव बहुत ही शुभ माना गया है। इस भाव में अपनी राशि में रहने पर बुद्धि के कारक बुध, जातक को बुद्धि, वाक्चातुर्यता और शारीरिक सुंदरता का वरदान देते हैं। ऐसा जातक सामाजिक पद-प्रतिष्ठा के साथ श्रेष्ठ तर्कशक्ति भी प्राप्त करता है। ऐसे जातकों की बातों को बड़े गौर से सुना जाता है। इसके साथ ही, ऐसे जातक स्वभाव से बहुत मिलनसार और मृदुभाषी होते है।

जन्म कुंडली के दूसरे भाव में, विराजमान बुध जातक को बुद्धिमान, कुशल वक्ता और अपने लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। ऐसा जातक खोया हुआ धन प्राप्त करने वाला होता है। उसके जीवन में उसे अचानक धन प्राप्ति के योग से धन मिलता है। ऐसे जातक को गीत-संगीत के क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा और पद मिलता है। इसके साथ ही, ऐसे जातक न्यायिक स्वभाव में विश्वास करने वाला, दूसरों के लिए सदैव सहायता करने वाला और अपने बाहुबल से धन का संचय करने वाला होता है।

चौथे भाव में बुद्धि के कारक ग्रह के होने से, वे जातक को स्वाभिमानी, कुशल वक्ता, सफल उद्यमी और परिश्रमी होने का आशीर्वाद देते हैं। जातक अपने ही बल पर मकान-वाहन और संपत्ति का सुख प्राप्त करता है। ऐसे जातक के मित्र कम होते हैं। यदि इस भाव बुध कोई पापी ग्रहों के साथ है तो, ऐसे जातक वासनाओं का शिकार भी हो सकता है। लेकिन, शुभ प्रभाव से ऐसे जातक शिक्षण कार्य, लेखन, पठन-पाठन और प्रशासनिक कार्यों में बहुत ऊंची सफलता प्राप्त करते हैं। जातक जनप्रिय बने रहने के साथ-साथ ऐसे जातक की  नेतृत्व शक्ति भी श्रेष्ठ होती है।

पांचवे भाव में, विराजमान बुध ग्रह किसी भी वरदान से कम नहीं है। इनके शुभ प्रभाव में, जातक एक श्रेष्ठ गायक, संगीतज्ञ और  विभिन्न ललित कलाओं का प्रेमी होता है। ये जातक, मध्यम और साधारण परिवार से होने के बाद भी अपनी कुशल बुद्धि के बल पर समाज में बहुत मान-प्रतिष्ठा हासिल करते हैं। साथ ही, उनमें दूसरों से प्रेम करने, शिक्षा देने वाले और समाज में एक अलग उदाहरण बनने की श्रेष्ठ क्षमता होती है।

सातवें भाव में बुध गृह अति शुभ फल देते हैं। यह जातक को व्यापार क्षेत्र में अच्छी सफलता और लाभ देने वाले होते हैं। साथ ही, ऐसे जातक का दांपत्य जीवन बहुत सुखी रहता है, लेकिन शनि के साथ होने पर वें, शुभ फल नहीं देते हैं। लेकिन, यदि बुध अपनी राशि में हो तो, ऐसे जातक को ससुराल पक्ष से सहयोग मिलता है और धन भी मिलता है। ऐसा जातक दीर्घजीवी, प्रसिद्ध, तेज, यशस्वी और कुशल प्रशासनिक अधिकारी बनता है। 

जन्म कुंडली के दसवें भाव में बुध देव की स्थिति जातक को स्वभाव से मिलनसार, न्यायप्रिय, कुशल प्रशासक और समाजसेवी होने का आशीर्वाद देती है। सामान्य परिवार में होने के बाद भी ऐसा जातक अपने जीवन के सर्वोच्च पद और सफलता प्राप्त करता है। यदि इस भाव में अपनी राशि में विराजमान हों या कोई शुभ योग बनाए तो ऐसे जातक दूर-दूर तक प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। साथ ही वे, सभी तरह का निर्णय लेने में कुशल और साहसी प्रकृति के होते हैं। 

कुंडली के ग्यारहवें भाव में, विराजमान बुध जातक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बनाते हैं। ऐसे जातक किसी भी कार्य में सफलता हासिल कर लेते हैं। नौकरी हो या व्यापार सभी जगह अपनी सफलता का मुकाम हासिल कर ही लेते हैं।साथ ही, ये जातक कुशल गणितज्ञ, ज्योतिषी, न्याय प्रिय, लेखक व प्रकाशन के क्षेत्र में अच्छी ख्याति प्राप्त करने वाले होते हैं। इन जातकों की रुचि गीत-संगीत में होने से वे स्वयं की एक अलग पहचान बनाते हैं।

अब हम लेख में जानेंगे, बुद्धि के कारक ग्रह का अन्य सभी ग्रहों के साथ होने पर शुभ\अशुभ फल के बारे में-

ज्योतिष शास्त्र में, बुध ग्रह से जुड़े प्रमुख शुभ योगों में बुधादित्य योग और भद्र योग है। विस्तार में जानें-

यदि कुंडली में बुध के साथ सूर्य हो तो, यह योग विशेष शुभ फल देता है। यदि बुध और सूर्य 10 डिग्री के भीतर हों तो, इसका प्रभाव विशेष रूप से बहुत शुभ माना जाता है। सूर्य के साथ यदि बुध हों और परस्पर 10 अंश की दूरी पर हो तो यह ‘बुधादित्य योग’ का निर्माण होता है। जिससे जातक को जीवन में सफलता मिलती है।

चंद्र के साथ, बुध की युति से जातक की बुद्धि चंचल हो जाती है और उसे निर्णय लेने में देरी की समस्या होती है। लेकिन, किसी शुभ प्रभाव में यदि यह योग कोई राजयोग का निर्माण कर रहा है तो यह जातक को श्रेष्ठ साहित्यकार बनने में सक्षम बनाती है। 

मंगल के साथ बुध ग्रह के होने से जातक क्रोधी और जिद्दी स्वभाव का होता है। शुभ प्रभाव में, यदि हो तो ऐसे जातक तकनीकी क्षेत्र में अच्छे जानकार और प्रदर्शनकारी होते है। 

गुरु बृहस्पति के साथ बुध की युति से जातक ज्ञानी और विद्वान प्रवृत्ति का होता है। इस योग के प्रभाव से जातक को बड़ा राजनीतिक पद मिलता है या वह ज्योतिष विद्या का एक बड़ा जानकार भी हो सकता है। 

शुक्र ग्रह वैभव कारक ग्रह माने गए है। बुध के साथ यह एक शुभ योग का निर्माण करते हैं। जिसमें जातक, कलात्मक कार्यों में विशेष रुचि रखने वाला होता है। साथ ही ऐसा जातक अच्छा लेखक या अभिनेता भी बन सकता है। 

शनि के साथ बुद्धि के कारक ग्रह के होने से जातक खोजी और ज्ञानी प्रवृत्ति का होता है। गणित व विज्ञान में इन जातकों की रुचि विशेष रूप से होती है। साथ ही ऐसे जातक इतिहास का ज्ञान रखने वाले व गूढ़ विद्याओं के  सफल ज्ञाता होते है। 

राहु के प्रभाव बहुत ही कम स्थिति में शुभ होते हैं। लेकिन, यदि बुध राजयोग बना रहा हो, तो यह जातक को राजनीति में अद्भुत सफलता दे सकता है। राहु के साथ बुध होने पर जातक को हवा-हवाई की बातों वाला बनाता है। ऐसे जातक, मित्रों से धोखा खाते हैं। 

केतु एक छाया ग्रह माना जाता है और बुध को वाणी का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में, बुध के साथ केतु है तो यह युति जातक को हकलाने की समस्या दे सकती है। ऐसे जातक को वाणी से सम्बन्धित समस्या रहती है। 

बुध के शुभ प्रभाव

12 राशियों में, बुध को मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व प्राप्त है। इसलिए जब बुध अनुकूल स्थिति में इन राशियों में होते हैं, तो विशेष लाभ देते हैं। इस राशि के जातक मधुर वाणी, सुंदर काया, तर्कशक्ति में निपूर्ण और ज्ञाता होते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, बुध का गोचर या उदित होना वृषभ, सिंह, कर्क और तुला सहित अन्य राशियों के लिए भी शुभ हो सकता है, लेकिन, यह बुध के साथ ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। खासकर यदि वे शिक्षा, लेखन, व्यापार या संचार जैसे क्षेत्रों में कार्य करते हैं तो वे बुध से प्रभावित होते हैं।

  1. सप्ताह में हर बुधवार को विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें मूंग के लड्डू या हरी मिठाई का भोग अर्पित करें।
  2. प्रतिदिन “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने से बुध के शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं।
  3. अपनी यथा शक्ति शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरू कर कम से कम 27 बुधवार का व्रत रखने से बुध गृह मजबूत होंगे। जिससे आप शुभ फल प्राप्त करेंगे।
  4. तुलसी के पौधे में, माता लक्ष्मी का वास होता है, इसमें जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं।
  5.  साथ ही बुधवार के दिन तुलसी के पत्तों का सेवन करने से शुभ फल मिलते हैं।
  6. बुधवार को जरूरतमंदों, गरीबों या ब्राह्मणों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, हरे फल और कांसे के बर्तन दान करना बहुत शुभ फलदायी है।
  7. गायों को हरा चारा खिलाने से बुध ग्रह मजबूत होते हैं और जातक को शुभ प्रभाव देते हैं।
  8. किन्नरों को हरे रंग की चूड़ियां और वस्त्र का दान करने से भी बुध ग्रह की कृपा मिलती है।
  9. बुध के शुभ प्रभाव के लिए हमारे “मंगल भवन के ज्योतिष आचार्यों”  के सलाह से या किसी जानकार की सलाह से आप कम से कम 3 कैरेट का ‘पन्ना रत्न’ धारण करें। 

Q. क्या, बुध कुंडली के दूसरे भाव में शुभ फल देते हैं?

An. हां, बुध का प्रभाव कुंडली के दूसरे भाव में शुभ होता है। दूसरे भाव में, विराजमान बुध जातक को बुद्धिमान, कुशल वक्ता और अपने लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। ऐसा जातक खोया हुआ धन प्राप्त करने वाला होता है। उसके जीवन में उसे अचानक धन प्राप्ति के योग से धन मिलता है।

Q. बुध का शुभ प्रभाव कौन सी राशियों में होता है?

An. 12 राशियों में, बुध ग्रह को मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व प्राप्त है। इसलिए जब बुध अनुकूल स्थिति में इन राशियों में होते हैं, तो विशेष लाभ देते हैं। इस राशि के जातक मधुर वाणी, सुंदर काया, तर्कशक्ति में निपूर्ण और ज्ञाता होते हैं।

Q. ज्योतिष में बुध ग्रह का क्या विशेष महत्व है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में जिस सभी ग्रहों का विशेष महत्व है। जिस प्रकार, गुरु बृहस्पति ज्ञान के, मंगल ग्रह  पराक्रम के, सूर्य ग्रह आत्मा के, चंद्र ग्रह  मन के, शनि ग्रह न्याय के और शुक्र ग्रह ऐश्वर्य के कारक है, उसी प्रकार बुद्धि और तर्कशक्ति के कारक होते हैं बुध ग्रह।

Q. बुध ग्रह को मजबूत करने व शुभ प्रभाव के लिए कौन सा रत्न शुभ है?

An. बुध के शुभ प्रभाव के लिए हमारे ‘मंगल भवन के ज्योतिष आचार्यों’  सलाह से या किसी जानकार की सलाह से आप ‘पन्ना रत्न’ धारण करें।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *