जान लीजिए, शुक्र ग्रह के अद्भुत प्रभाव इन भावों में, अन्य ग्रहों के साथ युति और कुछ आसान उपाय

शुक्र ग्रह

ज्योतिष में, शुक्र को भौतिक संसाधनों के सुख कर्ता माना जाता है। यह एक बेहद चमकीला और नैसर्गिक रूप से सुन्दर ग्रह है। यदि कुंडली में, शुक्र का प्रभाव शुभ हो तो, ऐसे जातक को भौतिक और समस्त सांसारिक सुख मिलते हैं। इतना ही नहीं, शुक्र ग्रह प्रेम, वासना, विवाह, सुन्दर जीवनसाथी, गृहस्थ के सुख और संपत्ति का कारक होता है। यदि किसी जातक के अंदर प्रेम की भावना है तो, इसका अर्थ है कि, शुक्र की कृपा उस पर है। जिसके लिए कोई जातक अपना पैसा, भूमि, संपत्ति सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हो जाता है। 

इसके साथ ही, शुक्र ग्रह को धन की देवी मां लक्ष्मी जी का प्रतीक माना गया है। कुंडली में शुक्र की शुभ स्थिति जीवन को सुखमय और प्रेममय बनाती है। अशुभ या पीड़ित स्थिति चारित्रिक दोष व पीड़ा देने का कार्य करती है। तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम शुक्र के अद्भुत प्रभाव किन भावों में होंगे, इस बारे में विस्तार से जानेंगे-…

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली के पहले यानी लग्न भाव में हो तो, ऐसे जातक कीर्तमान और तेजस्वी आभा को प्राप्त करते हैं। ऐसे जातक का शरीर स्वस्थ व निरोगी रहता है। अच्छे ब्रेंड के कपड़ों पहनने का शौक़ीन होता है। साथ ही, ऐसे जातक गायक और कला प्रेमी होते हैं। ऐसे जातक के पास पर्याप्त मात्रा में आभूषण होते हैं। हर क्षेत्र में ऐसे जातक को, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। मीठी वाणी के साथ उनका स्वभाव भी मृदु होता है।

दूसरे भाव में, शुक्र ग्रह जातक को बहुत धन संपदा देने वाला होता है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी का सम्मान करने वाले होते हैं। ऐसे जातक को, भव्य व सुंदर चीजों के प्रति अधिक रुचि रहती है। सद्गुणों में ऐसे लोग मृदुभाषी के साथ-साथ बहुत बुद्धिमान भी होते हैं। इन जातकों को धार्मिक रूप से अपने कुल देवी की कृपा मिलती है। इन जातकों की रुचि दान-पुण्य के कार्य में अधिक होती है, और चारों तरफ ऐसे जातकों को यश की प्राप्ति होती है। ऐसे जातक को हमेशा उत्तम और स्वादिष्ट भोजन मिलता है और संपन्न लोगों से उनके अच्छे संबंध होते हैं। 

चौथे भाव में शुक्र ग्रह की स्थिति से जातक का व्यापार, उसके भाई-बहन की सहायता से विदेशों में फैलता है। शुक्र के शुभ प्रभाव से ऐसे जातक बुद्धि और विद्या के बहुत धनी होते हैं। और हमेशा आनंद में रहता है। स्वभाव से ऐसे जातक परोपकारी स्वभाव के होते हैं और माता-पिता की बहुत सेवा करते हैं। 

सातवें भाव में शुक्र ग्रह की स्थिति से, जातक को मिला-जुला देने वाली होती है। ऐसा जातक आध्यात्मिकता में अधिक रुचि रखता है। और नए-नए क्रिएटिविटी वाले कार्यों में रुचि रखता है। ऐसे जातक व्यापार में बहुत लाभ और सफलता प्राप्त करता है। अपने उदार स्वभाव से ऐसे जातक लोकप्रिय होते हैं। इन जातकों की रूचि गायन व अभिनय के क्षेत्र में अच्छी रहती है। इन जातकों का भाग्योदय विवाह के बाद होता है और सरकार द्वारा सम्मान भी प्राप्त होता है।

दसवें भाव में, शुक्र ग्रह की स्थिति, जातक को बहुत आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करने वाली होती है। ऐसे जातक का स्वभाव शांत और मिलनसार होता है। साथ ही, व्यर्थ के विवाद से दूर रहते हैं। इन जातकों की रूचि पूजा-पाठ, दान-पुण्य के कार्यों में अधिक होती है। और उन्हें विभिन्न ग्रंथों व शास्त्रों का ज्ञान रहता है। यदि ये जातक, सरकारी नौकरी करते हैं तो, बहुत मान-सम्मान और उच्च पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। धन-संपदा की कमी नहीं रहती और बहुत स्वर्ण आभूषण भी पाते हैं।

कुंडली में बारहवें भाव का शुक्र ग्रह विराजमान हो तो, ऐसे जातक तेजस्वी और वैभव शाली होता है। ये जातक वरिष्ठजनों की बहुत सेवा करते हैं। और अपने परिवार की हर जरूरत का ध्यान रखते हैं। अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने में जरा सा भी संकोच नहीं करते। ऐसे जातक अपने आचरण से सभी को प्रसन्न रखते हैं और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। 

ऊपर लेख में हमने जाना कि, शुक्र ग्रह इन भावों में शुभ परिणाम देते हैं। अब हम शुक्र का अन्य ग्रहों के साथ होने पर प्रभाव के बारे में जानेगे-

सौन्दर्य के कारक ग्रह शुक्र के साथ सूर्य की युति ज्योतिष में, शुभ नहीं मानी जाती है। क्योंकि, शुक्र सूर्य के साथ होने पर अपनी ऊर्जा को खो देते हैं। जिसके कारण जातक को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस युति के कारण जीवन में कई समस्याओं के साथ पत्नी के सुख में कमी भी मिलती है। 

चन्द्र के साथ शुक्र के होने पर जातक, को शुभ फल मिलते हैं। ऐसे जातक शरीर से बहुत सुंदर और कला साहित्य में रूचि रखने वाले होते हैं। साथ ही, उन्हें स्त्रियों में बहुत पसंद किया जाता है। एक अच्छे व्यापारी होने के साथ-साथ ऐसे जातक लेखक, अभिनेता और कवि होते है।

शुक्र ग्रह के साथ मंगल के होने पर यह युति शुभ नहीं मानी जाती है। क्योंकि, मंगल रक्त और शुक्र वीर्य का कारक होता है, जो शुभ नहीं है। यदि इस युति पर राहु का प्रभाव हो तो स्त्री और पुरुष दोनों चरित्रहीन होते हैं। ऐसे जातक को रक्त से जुड़ी बीमारी और यौन सुख में कमी का अनुभव होता है। ऐसे जातक का वैवाहिक जीवन भी अच्छा नहीं रहता है। 

ज्योतिष में, बुध ग्रह वाणी और शुक्र की कला व सौन्दर्य का कारक मन जाता है। इन दोनों ग्रहों के साथ होने पर यह जातक को शानदार परिणाम देने वाली होती है। ऐसे जातक एक प्रसिद्ध लेखक और हास्य नाटक के बड़े निर्देशक होते है। ऐसे जातक अध्ययन में अच्छे परिणाम प्राप्त करते हैं।

गुरु के साथ बुध ग्रह की युति होने पर जातक को, असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ता है। क्योंकि उसे भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही सुख मिलते हैं। इस स्थिति में किसी के चरित्र को समझना आसान नहीं होता है। स्त्री सुख में कमी होने के साथ ऐसे जातक, कई वेद  मंत्रों के ज्ञाता होते हैं। ऐसा व्यक्ति अपनी वाणी से दूसरों का मन मोह लेते हैं। 

शनि के साथ, शुक्र की युति होने पर यह शनि की उर्जा शुक्र के प्रभाव को खत्म कर देती है। ऐसे जातक स्त्री से दूर रहते हैं और यौन सुख में रुचि नहीं रखते हैं। साथ ही ऐसा जातक दार्शनिक प्रवृत्ति का होता है। भौतिक सुख की कामना नहीं होती और साधक जीवन व्यतीत करते हैं।

शुक्र ग्रह

राहु को छाया और छल कपट का कारक ग्रह माना गया है। लेकिन शुक्र एक शुभ ग्रह है, इसलिए यह युति जीवन में कष्टकारी ही साबित होती है। ऐसे जातक, स्त्री के साथ धोखा करते हैं। साथ ही, नशे का आदी और व्यसन में, जीवन व्यतीत करता है। 

शुक्र के साथ केतु की युति होने पर ऐसे जातक की रुचि सिनेमा और साहित्य में अच्छी होती है। ऐसा जातक अपनी स्त्री का सुख कम ही भोगता है। जीवन में किसी ना किसी लड़की आना-जाना बना रहता है। ऐसे जातक की बुद्धि स्थिर नहीं होती और व्यर्थ की बातों में मन लगा रहता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र गृह मुख्य रूप से अपनी स्वराशि वृषभ और तुला के लिए शुभ फलदायी होते हैं। इसके अलावा, मीन राशि उच्च राशि होने के कारण वे यहां भी शुभ परिणाम देते हैं। अन्य राशियों के लिए भी शुक्र का गोचर शुभ फलदायी होता है। 

वृषभ राशि के लिए शुक्र ग्रह शुभ फलदायी होते हैं। यह राशि उनकी स्वराशि है, इसलिए वे सबसे शुभ फल देते हैं। इस राशि के जातक सुख-संपत्ति, धन-संपदा को प्राप्त करते हैं। विद्यार्थी और कला के क्षेत्र से जुड़े जातकों को यह बहुत शुभ परिणाम देते हैं। 

तुला राशि के लिए शुक्र ग्रह मूल फल देने में बहुत शुभ होते हैं। इस राशि में वे अपने मूल स्वभाव में रहते हैं।

जिसके शुभ प्रभाव से जातक आकर्षक होते हैं। साथ ही वें, कला, संगीत, या अभिनय जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं।

मीन राशि शुक्र ग्रह की उच्च राशि है, जहाँ शुक्र के शुभ प्रभाव से इस राशि के जातकों को बहुत सफलता मिलती है। इस राशि के जातकों को धन-धान्य की कमी नहीं होती है।

जीवन में सुख-वैभव और भौतिक संसाधनों की प्राप्ति के लिए, शुक्र ग्रह की कृपा होना बेहद जरूरी है। इसलिए, ये आसान उपाय जरूर करें….  

  1. शुक्र को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए,  मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। माता को सफेद वस्त्र, चांदी, दही, चावल और सुगंधित वस्तुएं अर्पित करें।
  2. शुक्र ग्रह के लिए  अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से आप हीरा या ओपल रत्न धारण कर सकते हैं।
  3.  शुक्रवार के दिन व्रत रखना और मां लक्ष्मी की उपासना करना शुक्र ग्रह को मजबूत करने का एक सबसे अच्छा उपाय है। आप माता को खीर का भोग भी लगा सकते हैं। 
  4. शुक्र के बीज मंत्र ‘ॐ द्रां द्रीं द्रों सः शुक्राय नमः’ या ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। जिससे शुक्र से शुभ फल मिलेंगे।
  5. शुक्रवार के दिन जरूरतमंद या ब्राह्मणों को सफेद वस्त्र, चांदी, दही, चावल, इत्र और सुगंधित वस्तुएं दान करें। जिससे शुक्र से शुभ फल मिलते हैं।
  6. शुक्रवार के दिन सफेद और गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करने से शुभ होता है। 
  7. अपने जीवनसाथी और परिवार की महिलाओं का सम्मान करें और उनसे अच्छा व्यवहार करें। 
  8. अपने घर व बेडरूम को साफ रखें। घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। सोने से पहले हाथ-मुंह धोकर सोना शुभ माना जाता है। 
  9. शराब का सेवन न करें और धूम्रपान से बचें, क्योंकि यह कार्य ग्रह को कमजोर करते हैं। 
  10. नियमित रूप से शिवलिंग पर सफेद फूल चढ़ाने से भी लाभ होता है। 

Q. कुंडली में शुक्र ग्रह को क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?

An. ज्योतिष में, शुक्र को भौतिक संसाधनों के सुख कर्ता माना जाता है। यह एक बेहद चमकीला और नैसर्गिक रूप से सुन्दर ग्रह है। यदि कुंडली में, शुक्र का प्रभाव शुभ हो तो, ऐसे जातक को भौतिक और समस्त सांसारिक सुख मिलते हैं।

Q. शुक्र ग्रह का कुंडली के पहले भाव में होने से क्या प्रभाव होता है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली के पहले यानी लग्न भाव में हो तो, ऐसे जातक कीर्तमान और तेजस्वी आभा को प्राप्त करते हैं। ऐसे जातक का शरीर स्वस्थ व निरोगी रहता है। अच्छे ब्रेंड के कपड़ों पहनने का शौक़ीन होता है।

Q. क्या, शुक्र ग्रह का शनि के साथ अशुभ फल देता है?

An. शनि के साथ, शुक्र की युति होने पर यह शनि की उर्जा शुक्र के प्रभाव को खत्म कर देती है। ऐसे जातक स्त्री से दूर रहते हैं और यौन सुख में रुचि नहीं रखते हैं। साथ ही ऐसा जातक दार्शनिक प्रवृत्ति का होता है। भौतिक सुख की कामना नहीं होती और साधक जीवन व्यतीत करते हैं।

Q. शुक्र को मजबूत करने के लिए कौन सा रत्न सबसे प्रभावशाली है?

An. शुक्र ग्रह के लिए अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से आप हीरा या ओपल रत्न धारण कर सकते हैं। यह शुक्र के शुभ प्रभाव के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली होता है।

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