क्या जानते हैं आप, राहु ग्रह की यह मालामाल कर देने वाली स्थिति, युति के प्रभाव और उपाय के बारे में

राहु ग्रह के शुभ भाव

ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। जो सदैव अपने अशुभ फल या प्रभाव के लिए जाना जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं है, राहु  जब किसी जातक पर मेहरबान होता है तो, वह उसे रंक से राजा बना देता है। कहा जाता है कि, कुंडली में राहु की दशा या महादशा  में जातक का पूरा जीवन बदल सकता है। इसके अलावा राहु केवल अशुभ प्रभाव ही नहीं, बल्कि शुभ प्रभाव भी देते हैं। कुंडली में राहु तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देते हैं। 

आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको ऐसे भावों की जानकारी देंगे। जिसमें राहु ग्रह शुभ परिणाम देते हैं। इन भावों में राहु संचार, वित्तीय लाभ और करियर में सफलता के कारक है। इसके अलावा, राहु ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति और राहू के अशुभ प्रभाव को रोकने हेतु कुछ आसान उपाय। 

ज्योतिष शास्त्र में, हर एक ग्रह महत्वपूर्ण है। जिससे जातक को अच्छे और बुरे दोनों फल मिलते हैं। उसी प्रकार राहु के भी कुछ फल शुभ होते हैं तो, कुछ अशुभ । यदि हम इस ग्रह के अशुभ फल की बात करें तो,  यह गुस्से, बुरी संगत, मांसाहार, चालाकी, क्रूरता, लालच, अपशब्द आदि का कारक होता है। लेकिन, कुंडलियाँ सभी की एक जैसी नहीं होती। सभी जातकों की कुंडली में यह अशुभ फल ही दे ऐसा जरुरी भी नहीं। यही, राहु यदि शुभ प्रभाव या कुंडली में शुभ ग्रहों के साथ हो तो, यह जातक को रहस्यमयी स्वभाव, रहस्यों से पर्दा उठाने वाला, साहसी, भी बनाता है। इसलिए जब भी यह कुंडली में शुभ अवस्था में हो या दशा, प्रत्यंतर दशा में हो, या यह शुभ स्थिति का हो तो, जातक को फर्श से अर्श पर ले जाने का कारक बन सकता है।

आगे लेख में हम राहु के शुभ प्रभाव से प्रभावित कुंडली के कुछ विशेष भाव के बारे में।

पौराणिक कथाओं और हमारे धार्मिक ग्रंथों में, राहु को मुख और केतु को धड़ भाग कहा गया है। मुख हमारे शरीर का वह भाग है जहां हमारी नाक, कान आदि इंद्रियां होती हैं। इन इंद्रियों पर राहु का अधिकार होता है।

और शेष धड़ भाग केतु का होता है। इसलिए राहु का प्रभाव हमारी इंद्रियों पर होने के कारण और बिना धड़ के  इंद्रियां इच्छा करती रहती हैं। 

लेकिन कभी तृप्त नहीं होती। अतः राहु की अतृप्त इच्छाएं सदैव बढ़ते रहती हैं। जब वह पूरी हो जाती हैं तो उससे और बड़ी इच्छाएं करने लगता है। इसीलिए राहु को किसी भी चीज के लिए पागलपन का कारक भी बताया गया है । इतना ही नहीं, यह लगातार कार्य करना भी पसंद नहीं करता है। ऐसा जातक अपना कार्य shortcut में निपटाना पसंद करते हैं। साथ ही, यह अनैतिक कार्य करने से भी पीछे नहीं हटते हैं। यह किसी भी कार्य को करने के लिए साम दाम दंड भेद को अपनाता हैं। राहु को छल, कपट, आडंबर और दिखावा करने का कारक माना जाता है।

तीसरे भाव में, राहु का प्रभाव होने पर यह जातक को तेज, पराक्रमी, शूरवीर और कर्मठ बनाता है। लेकिन, घर-परिवार में ऐसे जातक की भाई-बहनों से कम बनती है। ऐसे जातक बहुत महत्वाकांक्षी होते हैं लेकिन, यदि वे किसी एक वस्तु पर ध्यान केन्द्रित कर ले तो, बहुत आगे जाते हैं। ऐसा जातक बहुत साहसी पराक्रमी तो होता है, लेकिन कई बार कुसंगती भी करता हैं । ऐसा जातक किसी भी स्थिति में भयभीत नहीं होता । और बड़ी से बड़ी विपरीत स्थिति में भी लड़ने का जुनून रखता हैं।

यदि कुंडली के छठे भाव में, राहु ग्रह का प्रभाव हो तो जातक शत्रु पर जीत हासिल करने वाला होता है। ऐसे जातक धनवान होते हैं। अपने ऋण को चुकता करने वाले होते हैं। ऐसे जातक को स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियां रहती है, लेकिन वह रोगों से लड़कर स्वस्थ भी हो जाता है। इन जातकों के कई शत्रु होते हैं, लेकिन वे अपने शत्रुओं पर जीत हासिल कर लेता है। प्रतिस्पर्धा में ऐसे जातक बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं और सफल होते हैं। कुल-मिलाकर, इस भाव में राहु जातक के लिए अरिष्ट निवारक और विशेष कारक फलदायी है।

यदि किसी जातक की कुंडली के दसवें भाव में, छाया ग्रह हो तो यह जातक को राजनीतिक क्षेत्र में सफल बनाता है। ऐसे जातक राजनीति करने में दक्ष होते हैं। ऐसे जातक के पास दूसरों पर अधिकार जताने की कई तरकीब होती है। लेकिन यदि, इस क्षेत्र में जातक सही मार्ग पर चलकर कार्य करे तो, वह जीवन में बहुत आगे जा सकता है। यदि इस भाव में राहु पंचम नवम के स्वामियों के साथ स्थित हो, तो ऐसे जातक बहुत ऊंचाइयों पर जाते हैं।

यदि कुंडली के ग्यारहवें भाव में, राहु ग्रह हो तो ऐसे जातक महत्वाकांक्षी होते हैं। और अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। इस भाव में राहु ग्रह जातक को सभी कार्यों में लाभ दे सकता है। परंतु कई बार जातक गलत मार्ग पर चलकर कुकर्मों से लाभ और धन कमाता है। इस भाव में राहु जातक को धन कमाने के प्रति लालची बनाता है। ये जातक धन कमाने के लिए मेहनत भी बहुत करते हैं। परिवार में अक्सर ऐसे जातकों के भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर नहीं होते हैं। 

कुंडली में किसी भी ग्रह का प्रभाव उस ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति पर भी निर्भर करता है। छाया ग्रह भी अन्य ग्रहों के साथ होने पर कैसा प्रभाव देगा, आइए जानते हैं-

जब सूर्य के साथ छाया ग्रह युति में होता है तो, यह दोनों ग्रहों के संयोजन को ग्रहण योग कहा जाता है। जिससे जातक के स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। ऐसे जातक को नेत्रों से सम्बन्धित समस्या रहती है। इस योग के कारण जातक को जीवन में मानहानि का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के निदान के लिए जातक को नियमित रूप से सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए।

चन्द्र ग्रह के साथ राहु ग्रह के संयोजन से भी ‘ग्रहण योग’ बनता है। इन योग के प्रभाव में जातक को मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक की मानसिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहते हैं। ऐसी इस स्थिति में आपको भगवान शिव जी को जल अर्पित करना चाहिए।

मंगल के साथ राहु के होने पर ‘अंगारक योग’ बनता है। यह जातक को क्रोध और दुर्घटना जैसी समस्याओं देने का कारक है। इस युति का सीधा प्रभाव जातक के व्यवहार पर भी पड़ता है। इस योग के प्रभाव से बचने के लिए जातक को हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ है।

जब राहु के साथ बुध ग्रह का संयोजन हो तो ऐसे जातक को बोलने या वाणी से सम्बन्धित समस्या होती है।

साथ ही, ऐसे जातक को त्वचा से संबंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। इन योग के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए आप सुबह के समय तुलसी के पत्ते का सेवन करना शुरू करें व नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करें।

गुरु बृहस्पति के साथ, राहु के होने पर ’गुरु चण्डाल योग’ बनता है। इस योग के अशुभ प्रभाव से जीवन में नकारात्मकता की वृद्धि होती है। इसके साथ ही, वैवाहिक जीवन में भी समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको धार्मिक मार्ग पर कार्य करना चाहिए। भागवत गीता का पाठ करने से भी इस योग के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

शुक्र और राहु की युति होने पर चरित्र में दोष का योग बनता है, जिसके प्रभाव से जातक को कम आयु में ही गलत संगत में पड़ जाता है। इस योग के प्रभाव में जातक पर गलत आरोप भी लगते हैं। शिव जी को जल अर्पित करने से इस योग के प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

शनि और राहु ग्रह की युति से ‘नंदी योग’ बनता है जो कि अशुभ प्रभाव देने वाला ग्रह है। इस योग के प्रभाव से जातक को जीवन में कई उतार-चढ़ाव और समस्याओं का सामना पड़ता है। इस स्थिति से मुक्ति के लिए जातक को शनि देव की उपासना करना चाहिए। इसके अलावा, दांये हाथ की मध्य ऊँगली में चांदी की अंगूठी पहनना भी शुभ है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु ग्रह के सभी राशियों के लिए एक जैसे प्रभाव नहीं होते हैं। कुछ राशियां ऐसी भी हैं जो, राहु ग्रह की शुभ कृपा प्राप्त करती हैं। जिनमें से मिथुन, सिंह, वृश्चिक, और कन्या राशि पर छाया ग्रह के शुभ प्रभाव देखे जाते हैं। इन राशियों को धन लाभ, करियर में सफलता और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा मिलती है। विशेष रूप से,सिंह राशि राहु की प्रिय राशि है, मिथुन राशि में राहु उच्च स्थान पर होते है। आये इन राशियों के शुभ प्रभाव जान लेते हैं-

इस राशि में राहु ग्रह अपनी उच्च स्थिति में प्रभावशाली होते हैं। और अक्सर सकारात्मक प्रभाव देने के लिए जाने जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप जातक भाग्य का साथ मिलता है और उसके सभी रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। यह छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के कारक भी हैं और धन कमाने के नए अवसर भी मिलते हैं। 

सिंह राशि पर भी राहु के गोचर का शुभ प्रभाव होता है। जिससे इस राशि के जातकों को अचानक धन लाभ और जीवन में कई सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। इस प्रभाव में जातक अपने जीवन में सभी भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करता है।

वृश्चिक राशि के लिए राहु ग्रह बहुत ही शुभ कारक हैं। इस राशि को राहु की सबसे अधिक पसंदीदा राशियों में से एक माना जाता है। इस राशि के जातकों को राहु अपने शुभ प्रभाव में करियर में सफलता और व्यापार में अच्छा लाभ देते हैं।

राहु ग्रह के शुभ भाव

छाया ग्रह जीवन में अशुभ फल दे रहे हैं तो, आपको हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ट आचार्यों द्वारा सुझाए गए ये उपाय जरूर करना चाहिए।

  1. राहु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए बीज मन्त्रों ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’  का जाप करें।
  2. शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल और लोहे जैसी छाया वस्तुओं का दान करें। पक्षियों को दाना डालना, नियमित रूप से दुर्गा चालीसा का पाठ और शिवलिंग पर काले तिल डालकर जल अर्पित करने से राहु शांत होते हैं। 
  3. बहते जल में एक नारियल प्रवाहित करने से राहु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।
  4. गले में चांदी पहनना, या शनिवार को पूर्व दिशा में लोहे की वस्तु रखना राहु के लिए लाभकारी उपाय है। 
  5. अपने घर के पीछे की जगह, बालकनी और जूते-चप्पलों को साफ-सुथरा रखें। 
  6. हमेशा सत्य की राह पर चले झूठ और छल न करें और बोलें और सादगीपूर्ण जीवन जिएं।
  7. मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन ध्यान और योग करें। सुबह खाली पेट तुलसी के दो पत्तों का सेवन करें। 
  8. सप्ताह में किसी भी एक दिन कोई धर्म स्थान या मंदिर जरूर जाएं। इससे मन शांत होता है।

Q. राहु ग्रह को कुंडली में किसका कारक माना गया है?

An.  ज्योतिष शास्त्र में, हर एक ग्रह महत्वपूर्ण है। जिससे जातक को अच्छे और बुरे दोनों फल मिलते हैं। उसी प्रकार राहु के भी कुछ फल शुभ होते हैं तो, कुछ अशुभ । यदि हम इस ग्रह के अशुभ फल की बात करें तो,  यह गुस्से, बुरी संगत, मांसाहार, चालाकी, क्रूरता, लालच, अपशब्द आदि का कारक होता है।

Q. कुंडली के कौन-कौन से भाव में राहु ग्रह के शुभ प्रभाव मिलते हैं?

An. कुंडली में राहु की दशा या महादशा  में जातक का पूरा जीवन बदल सकता है। इसके अलावा राहु केवल अशुभ प्रभाव ही नहीं, बल्कि शुभ प्रभाव भी देते हैं। कुंडली में राहु तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देते हैं।

Q.राहु के अशुभ फल दूर करने के लिए क्या उपाय करना चाहिए?

An. शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल और लोहे जैसी छाया वस्तुओं का दान करें। पक्षियों को दाना डालना, नियमित रूप से दुर्गा चालीसा का पाठ और शिवलिंग पर काले तिल डालकर जल अर्पित करने से राहु शांत होते हैं।

Q. क्या, शनि के साथ राहु की युति अशुभ परिणाम देती है?

An. हां, शनि और राहु ग्रह की युति से ‘नंदी योग’ बनता है जो कि अशुभ प्रभाव देने वाला ग्रह है। इस योग के प्रभाव से जातक को जीवन में कई उतार-चढ़ाव और समस्याओं का सामना पड़ता है। इस स्थिति से मुक्ति के लिए जातक को शनि देव की उपासना करना चाहिए।

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