कुंडली के इन भावों में चन्द्र ग्रह के  मंगलकारी शुभ प्रभाव- कर लीजिए ये अचूक उपाय

कुंडली में चंद्र ग्रह

कुंडली के बारह भावों में, सभी ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभाव होते है। कुछ भाव ऐसे होते हैं, जहां ग्रहों का विशेष शुभ प्रभाव होता है। उसी प्रकार चंद्र ग्रह भी कुंडली के कुछ भावों के लिए शुभ परिणाम देते हैं। हमारे पिछले लेख में, हमने आपको सूर्य ग्रह  विशेष लाभकारी प्रभाव की जानकारी दी थी। आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको चन्द्र ग्रह  से विशेष शुभ प्रभाव में, कुंडली के कुछ शुभ भावों की जानकारी देंगे। साथ ही, कौन सी राशियों के लिए चन्द्र ग्रह शुभ प्रभावशाली हैं, और बाकि राशियों के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहिए? यह जानकारी भी विस्तार से है-हमारे साथ लेख में बने रहे। लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।  

कुंडली में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। जिसका प्रभाव मन पर सबसे अधिक होता है। चंद्रमा को शीतलता का प्रतीक माना जाता है। कुंडली में, चंद्रमा के कमजोर होने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों के साथ मानसिक कष्ट भी मिलते हैं। इसके साथ पीड़ित चन्द्रमा, सर्दी, जुकाम और कफ की समस्याए देता है और माता पक्ष को प्रभावित करता है। 

इसका यह अर्थ है कि, चंद्रमा मन का कारक है। मन के कारक की स्थिति ठीक न हो तो, जातक को मन और मस्तिष्क से संबंधित परेशानियां होती है। साथ ही, चंद्रमा मां का कारक भी है। इतना ही नहीं, प्रत्येक जन्मपत्री या जन्म कुंडली में दो लग्न बनाये जाते हैं। एक जन्म लग्न और दूसरा चन्द्र लग्न। यानी, यदि, जन्म लग्न को देह कहा जाए तो, चन्द्र लग्न को मन की संज्ञा दी जाती है। और बिना मन के देह का कोई अस्तित्व नहीं होता है। उसी प्रकार बिना देह के भी मन का कोई महत्व नहीं है। देह और मन दोनों ही, हर मनुष्य के लिए आवश्यक है। इसलिए शास्त्रों में लग्न और चन्द्र दोनों की स्थिति महत्वपूर्ण है।

वैसे तो कुंडली के सभी बारह भावों में, चन्द्र ग्रह का प्रभाव होता है। लेकिन, कुछ भाव ऐसे होते हैं जहां, चन्द्रमा विशेष रूप से लाभकारी होता है। आइये जाने, ऐसे विशेष भावों में चन्द्र के लाभकारी प्रभावों के बारें में- 

यदि किसी जातक की कुंडली के लग्न यानी पहले भाव में चंद्रमा विराजमान हो और शुभ ग्रह के साथ युति में है। तो,  ऐसे जातक स्वभाव से बहुत सरल और सीधे होते हैं। साथ ही चन्द्र की यह स्थिति जातक को बलशाली सभी प्रकार के सुख देने वाली होती है। ऐसे जातकों की रूचि संगीत, गायन और वादन में विशेष होती है। ऐसे जातक यात्रा करने और नई-नई चीजों को खोज करने में माहिर तो होते ही हैं, शौक़ीन भी होते हैं।

कुंडली में दूसरे भाव को ‘धन भाव’ कहा जाता है। इस भाव में, चन्द्रमा बहुत शुभ कारी माना गया है। जिसके प्रभाव से जातक, मधुरभाषी, सुंदर, और शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं। ऐसे जातक के पास धन-संपदा का कभी अभाव नहीं रहता है। वे एक श्रेष्ठ गायक या कवि होते हैं या  इन क्षेत्रों में अच्छी रुचि रखने वाले होते हैं। कुंडली के दूसरे भाव में, चंद्रमा का होना मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का कारक भी है। क्योंकि, चंद्रमा को धन की देवी माता लक्ष्मी का भाई माना जाता है। और दूसरा भाव धन भाव होने से, ऐसे जातकों पर मां लक्ष्‍मी की विशेष कृपा होती है।

कुंडली के तीसरे भाव को ‘सहज भाव’ कहा गया है। इस भाव में चंद्रमा का होना जातक को पराक्रमी, धनी और बलशाली होने के गुण प्रदान करता है। ऐसे जातक तीव्र स्मरण शक्ति वाले और करियर में बहुत सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं। जीवन में होने वाले हर परिवर्तन को स्वीकार करते हैं। ऐसे जातकों का भाग्योदय उनके विवाह के बाद होता है। साथ ही, देखने में भी बहुत सुंदर, छरहरी व कमनीय काया के होते हैं।

चौथा भाव ’सुख भाव’ कहलाता है। इस भाव में चंद्रमा के होने से जातक स्वभाव से उदार और शांत होते हैं। ऐसे जातक दयालु, बुद्धिमान और व्यवहार में मिलनसार प्रवृत्ति के होते हैं। साथ ही, वे भाग्यशाली और सदा प्रसन्न रहने वाले होता है। इन जातकों को, विवाह के बाद सदाचारी योग्य संतान की प्राप्ति होती है। ऐसे जातकों को व्यवसाय में भी बहुत धन लाभ और सफलता मिलती है। नौकरी में भी उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलता है। अपने जीवन काल में ये जातक, मकान और वाहन का सुख प्राप्त करते हैं।

पांचवें भाव को ‘संतान भाव’ कहा गया है। इस भाव में चंद्रमा के होने से जातक ईमानदार, बुद्धिमान, धैर्यवान और भावुक स्वभाव का होता है। साथ ही, ऐसे जातक मन से थोड़े चंचल तो होते हैं, लेकिन सदाचारी, क्षमावान और खुशमिजाज होते हैं। हर कार्य को तीव्र और शीघ्रता के साथ करने में सक्षम होते हैं। इनकी वाणी मधुर होती है। चंद्रमा के प्रभाव से उन्हें धनवान, लोकप्रिय और दीर्घायु का वरदान मिलता है।

कुंडली के सातवें भाव को ‘साझेदारी भाव’ कहा गया है। इस भाव में चंद्रमा के होने से जातक सभ्य, धैर्यवान और पेशे से व्यापारी या वकील होते हैं। ऐसे जातक स्वभाव से शांत और सभ्य व्यवहार के होते हैं। इन जातकों को सुन्दर और धार्मिक पत्नी मिलती है। साथ ही, ऐसे जातक बहुत आकर्षक व्यक्तित्व के होते हैं। इन जातकों को प्यार और रिलेशनशिप के मामलों में भी अच्छी सफलता मिलती है। 

नौवें भाव को ‘धर्म भाव’ कहा गया है। इस भाव में चंद्रमा होने से जातक को संपत्तिवान, धर्मात्मा, कार्यशील, न्यायप्रिय, विद्वान और साहसी होने के के गुण मिलते हैं। ऐसे जातक साहसी होते हैं। इन जातकों को प्रकृति से विशेष प्रेम होता है। ऐसे जातक जरूरतमंदों की सहायता करने वाले होते हैं। कई समस्याओं के बाद भी ऐसे जातक अपने रास्ते से नहीं हटते और समाधान खोजने में सक्षम होते हैं। ऐसे जातक अपने पराक्रम और परिश्रम के बल पर सफलता प्राप्त करते हैं और यश और धन अर्जित करते हैं।

दसवें भाव को ‘कर्म भाव’ की संज्ञा दी गई है। इस भाव में, में चंद्रमा होने से जातक कार्यकुशल, दयालु, निर्मल बुद्धि, श्रेष्ठ व्यापारी, यशस्वी और संतोषी होते हैं। जो सदैव दूसरों का भला करने वाले परोपकारी और हितेषी होते हैं। साथ ही, ऐसे जातक विशेष रूप से माता की सेवा करने वाले होते हैं। ऐसे जातकों, को जमीन, जायदाद, मकान आदि संपत्ति का सुख मिलता है। एस भाव में, चंद्रमा के प्रभाव से जातक अपने व्यवसाय में बार-बार फेरबदल करते हैं, लेकिन उनका व्यवसाय लाभ और सफल रहता है।

कुंडली के ग्यारहवें भाव को आय, लाभ और इच्छाओं का भाव कहा गया है। इस भाव में चंद्रमा होने से जातक चंचल बुद्धिमान, गुणी और वैभव संपत्ति से युक्त जीवन जीता है। साथ ही वह यशस्वी, दीर्घायु, और सभी कार्यों में दक्ष होता है। यानी जिन जातकों की कुंडली के ग्यारहवें भाव में चन्द्र ग्रह हो वे अनेक गुणों से परिपूर्ण होते हैं। साथ ही, वे व्यावहारिक और कला प्रिय होते हैं। ऐसे जातकों का कम्युनिकेशन स्किल बहुत अच्‍छा होता है। 

हमने यह तो जान लिया कि, कुंडली में ऊपर लेख में बताए गए सभी ग्रहों में चंद्रमा शुभ फलदायी होते हैं। आगे लेख में हम चन्द्र के साथ अन्य ग्रहों के प्रभाव के बारे में भी जानेंगे- 

कुंडली में, चंद्रमा और सूर्य ग्रह की युति होने से प्रभावित जातक में आत्मविश्वास और साहस के गुण आते हैं। यह युति के प्रभाव से जातक को नेतृत्व की श्रेष्ठ क्षमता के साथ मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

कुंडली में चंद्रमा और मंगल ग्रह के साथ होने पर जातक को ऊर्जा और उत्साह के गुण मिलते हैं। इस युति के शुभ प्रभाव से जातक को साहसी और निर्णय लेने की श्रेष्ठ क्षमता मिलती है।

कुंडली में, चंद्रमा और बुध ग्रह के साथ होने से जातक में श्रेष्ठ बुद्धिमत्ता और संवाद क्षमता के गुण मिलते है। इस युति के शुभ प्रभाव से जातक शिक्षा और करियर में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं।

कुंडली में, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह की युति से जातक में ज्ञान और विवेक के गुण आते हैं। इस युति के प्रभाव में, जातक को धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है।

कुंडली में, चंद्रमा और शुक्र ग्रह की युति से जातक में, सौंदर्य और प्रेम की भावना के गुण मिलते हैं। इन दोनों शुभ ग्रहों की युति से जातक में कलात्मक और रचनात्मकता के गुण का विस्तार होता है।

कुंडली में, चंद्रमा और शनि ग्रह के साथ होने पर जातक के जीवन में अनुशासन और जिम्मेदारी का ज्ञान मिलता है। इन ग्रहों की युति से जातक को धैर्य और संयम मिलता है।

कुंडली में, चंद्रमा और राहु की युति साथ हो तो, ऐसे जातक को भ्रम और अस्थिरता की समस्या का सामना करना पड़ता है। चन्द्र के साथ राहु के प्रभाव होने से जातक को मानसिक तनाव और चिंता का सामना करना पड़ता है।

यदि कुंडली में, चंद्रमा और केतु ग्रह साथ हो तो, यह युति जातक को आध्यात्मिक और रहस्यमय स्वभाव का बनाती है। इन दोनों ग्रहों की युति से जातक को अंतर्ज्ञान और दूरदर्शिता के गुण प्राप्त होते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में बारह राशियों में, कुछ राशियां ऐसी हैं, जिन पर चंद्र ग्रह के विशेष शुभ प्रभाव होते हैं। वे राशियां इस प्रकार हैं-

कुंडली में चंद्र ग्रह
  • कर्क राशि- कर्क राशि के लिए, चन्द्रमा उनका राशि स्वामी है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए चंद्रमा बहुत ही शुभ होता है। यदि कर्क राशि में, चंद्रमा किसी शुभ ग्रह के साथ विराजमान हो तो, वे मानसिक शांति, स्थिरता और सुख-समृद्धि प्राप्त करते है।
  • वृषभ राशि- वृषभ राशि के लिए चंद्रमा एक सौम्य और शुभ ग्रह की भूमिका निभाते हैं। इस राशि के जातकों को चंद्रमा की कृपा से आर्थिक लाभ, सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख मिलता है।

यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव में हो तो, ऐसे जातक को ये आसान और प्रभावी उपाय करना चाहिए। 

  1. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा की महादशा दस वर्ष की होती है। इसलिए आपको भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। जिससे उनके शीश पर विराजित, चंद्रमा की भी पूजा होगी। और आपको चंद्र के शुभ प्रभाव मिलेंगे।
  2. आप चंद्रमा को भी जल अर्पित कर सकते हैं और चंद्रमा के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप करने से चंद्रमा की ऊर्जा बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। मन्त्र इस प्रकार है- “ॐ चं चन्द्रमसे नमः”।
  3. सफेद वस्तुओं में, दूध और चावल का दान करने से चंद्रमा की ऊर्जा बढ़ती है और चंद मजबूत होता है।
  4. चन्द्रमा माता का कारक है, अतः माता की सेवा करने से चंद्रमा के शुभ फल मिलते हैं और मन शांत होता है।
  5. पूर्णिमा का व्रत करने से चंद्र ग्रह की कृपा होती है।
  6. चांदी की वस्तुओं को धारण करें इससे चन्द्र ग्रह का प्रभाव बढता है।
  7. योग और ध्यान करने से भी मन शांत होता है।
  8. सफेद मोती चंद्रमा का रत्न माना गया है, जो मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।

Q. कुंडली में चंद्रमा का क्या प्रभाव होता है?

An. कुंडली में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। जिसका प्रभाव मन पर सबसे अधिक होता है। चंद्रमा को शीतलता का प्रतीक माना जाता है। कुंडली में, चंद्रमा के कमजोर होने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों के साथ मानसिक कष्ट भी मिलते हैं। इसके साथ पीड़ित चन्द्रमा, सर्दी, जुकाम और कफ की समस्याए देता है और माता पक्ष को प्रभावित करता है।

Q. कुंडली के दूसरे भाव में चन्द्रमा के क्या प्रभाव होते हैं?

An. कुंडली में दूसरे भाव को ‘धन भाव’ कहा जाता है। इस भाव में, चन्द्रमा बहुत शुभ कारी माना गया है। जिसके प्रभाव से जातक, मधुरभाषी, सुंदर, और शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं। ऐसे जातक के पास धन-संपदा का कभी अभाव नहीं रहता है।

Q. चन्द्रमा के शुभ प्रभाव के लिए क्या उपाय करना चाहिए?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा की महादशा दस वर्ष की होती है। इसलिए आपको भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। जिससे उनके शीश पर विराजित, चंद्रमा की भी पूजा होगी। और आपको चंद्र के शुभ प्रभाव मिलेंगे। आप चंद्रमा को भी जल अर्पित कर सकते हैं और चंद्रमा के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप करने से चंद्रमा की ऊर्जा बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। मंत्र इस प्रकार है- “ॐ चं चन्द्रमसे नमः”।

Q. क्या, चंद्र का शनि के साथ होने पर अशुभ प्रभाव होता है?

An. कुंडली में, चंद्रमा और शनि ग्रह के साथ होने पर जातक के जीवन में अनुशासन और जिम्मेदारी का ज्ञान मिलता है। इन ग्रहों की युति से जातक को धैर्य और संयम मिलता है।

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