क्या? जानते हैं, केतु ग्रह के ऐसे भाव, जो हैं सबसे अधिक प्रभावशाली, अन्य ग्रहों से युति के कुछ आसान और लाभकारी उपाय

केतु ग्रह का महत्व

विभिन्न धार्मिक मान्यताओं में केतु ग्रह  को एक बहुत ही अशुभ ग्रह का दर्जा दिया जाता है। जो कि एक अशुभ छाया ग्रह है। ज्योतिष शास्त्र में, इसे अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष और तंत्र का कारक कहा जाता है। जिसके प्रभाव से जातक अपने भौतिक जीवन से दूर हो जाता है। जिससे उसे मोक्ष की अधिक लालसा होती है। इतना ही नही, छाया ग्रह राहु  के साथ मिलकर केतु ग्रह कालसर्प दोष बनाता है। कुंडली के कुछ ऐसे भाव (घर) होते हैं, जहां मोक्ष के कारक का होना शुभ फल देता है।  तो आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम केतु ग्रह से प्रभावित उन विशेष भावों के बारे में जानेंगे।  इसके साथ ही, केतु ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति के फल और उपाय की जानकारी भी विस्तार से जानेंगे। 

केतु की महादशा  का समय 7 साल का होता है। जो जातक के जीवन में, बुध ग्रह की महादशा के बाद और शुक्र ग्रह की महादशा से पहले आती है। 

हालांकि, ऐसा नहीं है कि केतु के द्वारा हमेशा ही बुरे फल प्राप्त हों। कुंडली के कुछ भाव ऐसे होते हैं जहां केतु से शुभ फल और प्रभाव मिलते हैं। केतु को अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक ग्रह बताया जाता है। 27  नक्षत्रों  में, केतु अश्विनी, मघा और मूला नक्षत्र  के स्वामी है। यह एक छाया ग्रह है,पौराणिक कथाओं में जो स्वर भानु नाम के राक्षस का धड़ है। और इसके सिर के भाग को राहु कहा जाता है।

ज्योतिष के अनुसार केतु ग्रह का प्रभाव जातक के जीवन के सभी क्षेत्र को प्रभावित करता है। राहु और केतु दोनों का होना जन्म कुंडली में काल सर्प दोष का कारण है। वहीं,हमारे आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है। हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ट ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि, केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश और सफलता के शिखर तक भी पहुँच सकता है। राहु और केतु के कारण ही सूर्य और चंद्र ग्रहण की प्रक्रिया होती है। तो चलिए, आगे लेख में जानते हैं कि, केतु के प्रभाव कुंडली के कौन से भाव में प्रभावशाली है। हमारे साथ लेख में बने रहें….

                                                                                आगे पढ़ें-

वैदिक ज्योतिष की प्रमुख गणना में, कुंडली के तीसरे, पांचवें, आठवें, नौवें,ग्यारहवें और बारहवें भाव में केतु ग्रह का प्रभाव होना लाभदायक होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में केतु पीड़ित या अशुभ अवस्था में है तो ऐसे जातक के जीवन में कोई न कोई समस्या बनी रहती है। साथ ही ऐसे जातक की कुंडली में विभिन्न दोष भी होते हैं। चलिए जानते हैं, कुंडली के ऐसे भाव (घर) जहां केतु ग्रह शुभ फलदायी हैं- 

जन्म कुंडली का तीसरा भाव बुध और मंगल से प्रभावित होता है। इन दोनों का प्रभाव केतु के साथ अच्छा नहीं होता है। लेकिन, यदि तीसरे भाव में केतु शुभ है तो, यह जातक की संतान पक्ष के लिए शुभ फलदायी होता है।  इसके अलावा, यदि केतु तीसरे भाव में हो और मंगल बारहवें भाव में हो तो ऐसे जातक को कम आयु में ही संतान हो सकती है।  

कुंडली के तीसरे भाव में केतु के साथ जातक को नौकरी या काम के सम्बन्ध में यात्रा करने के योग बनते हैं।  तीसरे भाव में केतु के अशुभ होने पर जातक को मुकदमेबाजी या कोर्ट-कचहरी धन की हानि का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक अपने परिवार के सदस्य से अलग रहते हैं, उसे अपने भाइयों से परेशानी का सामना करना पड़ता है।  व्यर्थ की यात्राएं होती हैं जिससे धन की हानि होती है। 

जन्म कुंडली का पांचवे भाव का कारक सूर्य ग्रह है और उस पर बृहस्पति का प्रभाव भी होता है। इस भाव में  केतु ग्रह का होना जातक को बौधिकता में विकास देता है। ऐसे जातक 24 वर्ष की आयु के बाद लाभ प्राप्त करते हैं। यदि इस भाव में केतु अशुभ हो तो जातक को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। साथ ही, जातक को संतान होने में विलंब या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। केतु पांच वर्ष की आयु तक अशुभ फल देता है। 

जन्म कुंडली के आठवें भाव में केतु ग्रह शनि- मंगल से प्रभावित होता है। इस भाव में केतु की शुभ दृष्टि हो तो ऐसे जातक के परिवार में नए सदस्य का आगमन होता है। साथ ही अचानक धन लाभ होने के योग बनते हैं। लेकिन, इस भाव में यदि केतु अशुभ हो तो जातक के साथी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। रक्त सम्बन्धी विकार या विष प्रभाव जातक के शरीर को खराब कर सकते हैं।  

नौवें भाव में, केतु का प्रभाव जातक के लिए बहुत शक्तिशाली माना जाता है।  क्योंकि, इस भाव के कारक गुरु बृहस्पति हैं।  इस भाव में केतु के होने से जातक आज्ञाकारी, भाग्यशाली और धनवान होते हैं। यदि इस भाव पर चंद्र ग्रह अपने शुभ प्रभाव में हो तो, ऐसे जातक को मायके पक्ष से बहुत सहायता मिलती है। यदि नवम भाव में केतु अशुभ हो तो ऐसे जातक धर्म के प्रति सीमित बुद्धि वाले होते हैं। इन जातकों को पीठ में दर्द, पैरों में समस्या बनी रहती है। 

जन्म कुंडली के इस भाव में, केतु का प्रभाव बहुत अच्छा और शुभ माना जाता है।  क्योंकि यह भाव बृहस्पति और शनि से प्रभावित होता है। यदि यहां केतु शुभ प्रभाव में हो तो यह जातक को अपार धन देता है। ग्यारहवें भाव में केतु आमतौर पर खुद के बल पर एक कुशल व्यवसायी या उद्यमी बनता है। यह राजयोग का कारक होता है। यदि यहां केतु अशुभ है तो जातक को पाचन तंत्र और पेट सम्बन्धी समस्या होती है। ऐसे जातक अपने भविष्य की चिंता में परेशान रहते हैं। 

कुंडली के बारहवें भाव में केतु को उच्च का माना जाता है। इस भाव में केतु जातक को संपन्न और समृद्ध शाली बना सकता है। ऐसे जातक बहुत धन और सफलता प्राप्त करते हैं। सामाजिक कार्यों और सामुदायिक योगदान में भी इन जातकों की अच्छी छवि बनी रहती है। ऐसे जातक के पास सभी प्रकार की सुख-सुविधाएँ और विलासिताएं होती हैं।  

कुंडली में शुभ और अशुभ फल ग्रहों के आधार पर तो परिणाम देते ही हैं।  लेकिन, वे अन्य ग्रहों के साथ युति में किस प्रकार प्रभाव देंगे, चलिए जानते हैं-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य और केतु की युति शुभ नहीं मानी जाती है। इससे ग्रहण योग बनता है, क्योंकि केतु एक अंधकारमय ग्रह है जबकि सूर्य ग्रह एक प्रकाश युक्त और सकारात्मक ऊर्जा वाला ग्रह है। यह जातक को बहुत से अशुभ फल देती है।

चन्द्रमा मन का कारक है और केतु को मोक्ष का कारक मानते हैं। कुंडली में चन्द्र के साथ मोक्ष के कारक की युति होने पर यह जातक की कल्पनाशीलता को बढ़ाती है। लेकिन, यह स्थिति मानसिक अशांति का कारण भी हो सकती है। ऐसे जातक, गहन अंतर्ज्ञान और भविष्य की चिंता में खोए रहते हैं। 

मंगल को क्रोध का कारक मानते हैं। इसलिए केतु के साथ होने पर यह किसी-किसी क्षेत्र में शुभ फलकारी होता है।  लेकिन, यह जातक की आक्रामकता और क्रूरता की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। हालांकि, यह युति कुछ राशियों के लिए धन लाभ के योग भी देने वाली होती है।

बुध को तीव्र बुद्धि के कारक ग्रह माना जाता है। जिससे जातक की सोचने व समझने की शक्ति का विकास होता है। बुध के साथ केतु के होने पर यह जातक की कल्पनाशीलता में वृद्धि करती है। जिससे जातक की रूचि नई चीजों को खोजने में अधिक रहती है। यदि दोनों ग्रह शुभ स्थिति में हो तो, यह जातक को करियर में बहुत सफल भी बनाती है। 

गुरु बृहस्पति के साथ केतु की युति बहुत फलदायी मानी जाती है। जिसमें जातक को ज्ञान और बुद्धिमत्ता के साथ-साथ आध्यात्मिक गतिविधियों में भी रुचि होती है। ऐसे जातक धार्मिक कार्यों के माध्यम से बहुत सफलता और प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। बृहस्पति के ज्ञान और केतु के शुभ प्रभाव से जातक सच्चे मानवतावादी प्रवृत्ति का अनुसरण करते हैं।

शुक्र के साथ केतु का प्रभाव जातक को तटस्थ प्रभाव देने वाला होता है। लेकिन, शुक्र को सांसारिक सुखों के कारक माना जाता है।  केतु के साथ होने पर यह अलगाव की भावना मन में पैदा कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप जातक वैराग्य में रुचि लेते हैं। 

शनि के साथ केतु की युति होने पर जातक को करियर और व्यवसाय में समस्या मिलती है। ऐसे जातक को  निर्णय लेने में कठिनाई की समस्या होती है। इसके साथ ही यह जातक को स्वास्थ्य समस्याएं देने व मानसिक तनाव भी देती है। 

केतु ग्रह का महत्व

यदि कुंडली में गुरु बृहस्पति के साथ केतु है तो, यह राजयोग बनाता है। ज्योतिष में केतु ग्रह की कोई निश्चित राशि नहीं है। ऐसी स्थिति में केतु जिस राशि में गोचर करता है, वह उसी के अनुरूप परिणाम देय रहता है। केतु जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं का कारक होता है। मीन राशि, केतु की स्वराशि है। मिथुन और कन्या राशि में केतु अच्छा नहीं माना जाता है। वृषभ राशि में भी यह शुभ फल दायक नहीं होता है।

धनु राशि के लिए केतु का प्रभाव आम तौर पर आध्यात्मिक और दार्शनिक क्षेत्र में रूचि देने वाला होता है। जिससे जातक का मन भौतिकवादी चीजों से विमुख होकर उच्च ज्ञान की ओर प्रेरित होता है। आधुनिक ज्योतिष के अनुसार, धनु राशि में केतु उच्च स्थान का होता है। जिससे यह शुभ फलदायी होता है और दर्शन, यात्रा, अध्यापन और अध्यात्म के क्षेत्र में लाभ देने वाला होता है। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए केतु रहस्यवाद और गूढ़ विद्याओं में रुचि देने वाला होता है। 

मिथुन राशि के लिए केतु का प्रभाव शुभ होता है। जिससे धन लाभ और नौकरी में अच्छे परिणाम मिलते हैं।
केतु का कन्या राशि में होना भी शुभ परिणाम देने का कारक है, जिससे जातक को सभी कार्यों में भाग्य का साथ और धन लाभ के अवसर मिलते हैं। सिंह राशि के जातकों के लिए केतु सबसे शुभ माना जाता है। यह धन, लाभ, ज्ञान और ईमानदार होने का सूचक है। लेकिन, सही मार्ग पर चलेंगे तो शुभ प्रभाव का सुख मिलेगा।

यदि जीवन में आप केतु के अशुभ प्रभाव से परेशान हैं तो, हमारे मंगल भवन के अनुभवी आचार्यों के द्वारा बताए गए ये उपाय करें-

  1. यदि आप अपने जीवन में, केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव की समस्या से जूझ रहे हैं तो, मां दुर्गा, संकट मोचन हनुमान जी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की आराधना करें। 
  2. काले और सफेद रंग कुत्ते को रोटी खिलाएं। 
  3. केतु से शुभ प्रभाव के लिए भैरवजी को केले के पत्ते पर चावल का भोग लगाएं। 
  4. अपने घर के पूजा स्‍थल या किसी मंदिर में शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं। 
  5. तिल के लड्डुओं का दान करें। रविवार के दिन छोटी-छोटी कन्याओं को मीठी दही और हलवा खिलाएं। 
  6. माह की दोनों त्रयोदशी तिथि का व्रत करें और जरूरतमंदों को राशन या वस्त्र का दान करें। 
  7. केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति के लिए पके हुए चावल में मीठा दही मिलाकर उसे एक दोने में डाल लें। उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें और पीपल के वृक्ष के नीचे दोने को रखकर केतु दोष से शांति की प्रार्थना करें। मान्यता है कि, कृष्ण पक्ष में नियमित रूप से इस प्रक्रिया को करने से लाभ होता है।

Q. केतु ग्रह का ज्योतिष में क्या महत्व है?

An. हमारे विभिन्न धार्मिक मान्यताओं में केतु ग्रह  को एक बहुत ही अशुभ ग्रह का दर्जा दिया जाता है। जो कि एक अशुभ छाया ग्रह है।  ज्योतिष शास्त्र में, इसे अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष और तंत्र का कारक कहा जाता है। जिसके प्रभाव से जातक अपने भौतिक जीवन से दूर हो जाता है। जिससे उसे मोक्ष की अधिक लालसा होती है।

Q. क्या केतु कुंडली के सभी भावों में अशुभ फल देते हैं?

n. नहीं, वैदिक ज्योतिष की प्रमुख गणना में, कुंडली के तीसरे, पांचवें, आठवें, नौवें,ग्यारहवें और बारहवें भाव में केतु ग्रह का प्रभाव होना लाभदायक होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में केतु पीड़ित या अशुभ अवस्था में है तो ऐसे जातक के जीवन में कोई न कोई समस्या बनी रहती है।

Q. केतु ग्रह का शनि के साथ युति का कैसा प्रभाव है?

An. केतु के साथ शनि की युति होने पर जातक को करियर और व्यवसाय में समस्या मिलती है। ऐसे जातक को  निर्णय लेने में कठिनाई की समस्या होती है। इसके साथ ही यह जातक को स्वास्थ्य समस्याएं देने व मानसिक तनाव भी देती है।

Q मिथुन राशि में केतु के क्या प्रभाव होते हैं?

An. यदि शुभ ग्रह के साथ हो तो, मिथुन राशि के लिए केतु का प्रभाव शुभ होता है। जिससे धन लाभ और नौकरी में अच्छे परिणाम मिलते हैं।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *