बृहस्पति गुरु ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में, नवग्रहों में बृहस्पति गुरु ग्रह का विशेष स्थान है। सभी ग्रहों में, बृहस्पति को गुरु का दर्जा दिया जाता है। क्योंकि यह सभी देवी-देवताओं के गुरु माने जाते हैं। कुंडली में यदि, गुरु ग्रह के प्रभाव से जीवन में सुख-दुख और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, कुंडली में गुरु बृहस्पति की स्थिति पर वैवाहिक जीवन और विवाह सम्बन्धी क्षेत्र भी प्रभावित करते हैं। राशियों में, धनु और मीन राशि का स्वामित्व गुरु ग्रह को प्राप्त है। तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम गुरु बृहस्पति ग्रह के ऐसे भावों के बारे, जानेंगे जो शुभ फलदायक हैं। इसके साथ ही, गुरु बृहस्पति के साथ अन्य ग्रहों की युति के प्रभाव कैसे हैं यह भी जानेंगे। हमारे साथ लेख में, बने रहें और लेख में दी गई जानकारी पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।
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कुंडली में- बृहस्पति गुरु के शुभ प्रभावित भाव (घर)
यदि किसी जातक की कुंडली में, गुरु ग्रह की स्थिति अस्त हो तो, यह शुभ नहीं होता है। ऐसे जातकों को जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीँ, जिन जातकों की कुंडली में गुरु की स्थिति शुभ या मजबूत होती है, उनके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। साथ ही ऐसे जातक सफलता के साथ जीवन का आनंद भी उठाते हैं। तो चलिए, अब हम कुंडली के कुछ ऐसे विशेष भाव के बारें में जानेंगे जिनमे गुरु बृहस्पति की स्थिति शुभ फलदायी होती है।
- कुंडली के पहले (लग्न)भाव में- बृहस्पति गुरु
यदि कुंडली के लग्न भाव यानी पहले भाव में गुरु बृहस्पति की शुभ स्थिति शुभ ग्रहों के साथ है तो ; ऐसे जातक विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। समाज में ऐसे जातक की बहुत मान- प्रतिष्ठा होती है। वे धनवान भी होते है। इस भाव गुरु के होने पर जातक को अपने जीवन में उच्च पद प्राप्त होता है और सद्गुणों से युक्त होता है।
- कुंडली के दूसरे भाव (धन, परिवार) में- गुरु बृहस्पति
दूसरे भाव में, गुरु बृहस्पति का होना जातक को धनी, सुखी और ग्रन्थ काव्यों में रूचि रखने वाला बनाता है। ऐसे जातक किसी प्रशासनिक स्थिति के संचालन कार्य में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। कुंडली का दूसरा भाव वाणी, कुटुंब व धन का भाव होता है। इसलिए ऐसे जातक की वाणी मधुर होती है और वह अच्छा बोलता है। जिससे उसके मित्रों की संख्या अधिक होती है। कभी कभी अहम् भाव के रहते जातक के शुभ फलों कमी रहती है।
- कुंडली के चौथे भाव में (सुख, घर, माता) में- गुरु बृहस्पति
चौथे भाव में, गुरु बृहस्पति की स्थिति जातक को सुखी, सम्मानित, घर, वाहन और भूमि संपदा का मालिक बनाती है। साथ ही, इस भाव में विराजमान बृहस्पति, के शुभ प्रभाव से जातक को अपने जीवन में, राजाओं जैसा सुख प्राप्त होता है। वह हमेशा दूसरों की सहायता के लिए तैयार रहता है। ऐसे जातक, धनवान, यशस्वी, बली, सुखी और वाहन सुख प्राप्त करने वाले होते हैं। अपने कुल और पिता का नाम रोशन करते हैं।
- पांचवे भाव में (बुद्धि, संतान, प्रेम) में- गुरु बृहस्पति
कुंडली के पांचवे भाव में, गुरु-बृहस्पति जातक को, बुद्धिमान, न्यायिक और साहित्य में रूचि रखने वाला बनता है। ऐसे जातक को संतान सुख मिलता है। इस भाव में विराजमान गुरु के प्रभाव से जातक गुणवान, बुद्धिमान, तर्कशील और विद्धानों द्वारा सम्म्न्नित होता है। ऐसे जातक का अपने परिवार में सबसे ऊंचा स्थान होता है और वे सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
- कुंडली के सातवें भाव (विवाह, साझेदारी) में- गुरु बृहस्पति
सातवें भाव में बृहस्पति गुरु का शुभ प्रभाव है तो ऐसे जातक धार्मिक, दयालु, बुद्धिमान और धैर्यवान स्वभाव के होते हैं। इसके साथ ही, कुंडली के सातवें भाव में गुरु ग्रह के होने पर जातक चंचल स्वभाव का होता है। ऐसे जातक भाषण में कुशल होते हैं और पिता से अधिक उच्च पद पर कार्यरत होते हैं। ऐसे जातकों को परिवार में भाइयों का अच्छा सहयोग मिलता है। अपने साहस और तेज के बल पर सफलता अर्जित करते हैं। ऐसे जातकों की आय स्थिर होती है और इनका भाग्योदय विवाह के बाद होता है।
- कुंडली के नौवें भाव (भाग्य, तीर्थ यात्रा) में- गुरु बृहस्पति
नौवें भाव में बृहस्पति की स्थिति होने से जातक तपस्वी, यशस्वी, दयालु और धन-पुत्र की सुख पाता है। ऐसे जातक काफी सुंदर भवन के निर्माणकर्ता होते हैं। परिवार में, भाई-बहनों से स्नेह रखने वाला होता है। साथ ही वे, धर्म अधिक रूचि रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग जहां भी नौकरी करते हैं, वहां अधिकारियों से अच्छा सम्मान प्राप्त करते हैं। विद्वान होने के साथ-साथ वें दूर देश की यात्रा करने वाले होते हैं। ऐसे जातक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में उच्च पद प्राप्त करते हैं।
- ग्यारहवें भाव (आय, लाभ) में- गुरु बृहस्पति
ग्यारहवें भाव में, गुरु बृहस्पति की स्थिति जातक को धनवान, समृद्धशाली, विख्यात और दान-पुण्य करने वाला बनाती है। साथ ही ऐसे जातक निरोगी, चंचल और सुंदर काया से युक्त होते हैं। लेकिन इस भाव में गुरु के फल जातक को सामान्य परिणाम देते हैं यानी ना ज्यादा अच्छा और ना ही बुरा।
बृहस्पति गुरु के साथ अन्य ग्रहों की युति व प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में, गुरु (बृहस्पति) का अन्य ग्रहों के साथ जातक के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है। सूर्य के साथ बृहस्पति का संयोग जातक को आशावादी और दानी बनाता है, वहीं चंद्रमा के साथ होने पर वह शांत और करुण स्वभाव के होते हैं। शनि के साथ होने पर गुरु से जातक को, धन और संपत्ति के मामलों में लाभ देता है। बुध के साथ होने पर जातक के ज्ञान का विकास होता है। मंगल के साथ जातक को नए कार्यों को सीखने की प्रवृत्ति होती है। केतु के साथ होने पर जातक को आध्यात्मिकता की ओर रूचि होती है। शुक्र के साथ होने पर सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। राहु के साथ गुरु की युति होने पर जातक भ्रम की स्थिति और समस्याओं का सामना करता है।
- बृहस्पति गुरु व सूर्य ग्रह
गुरु बृहस्पति के साथ सूर्य ग्रह के होने पर जातक उदार, प्रसन्न और आध्यत्मिक स्वभाव का होता है। साथ ही ऐसे जातक दृढ़ व्यक्तित्व और आशावादी होते है।
- बृहस्पति और चंद्र ग्रह
गुरु बृहस्पति के साथ चंद्र ग्रह की युति होने पर जातक शांत, आत्मसंतुष्ट, करुणावान और ईमानदार प्रवृत्ति का होता है।
- बृहस्पति और बुध ग्रह
गुरु-बृहस्पति के साथ बुध की युति से जातक में ज्ञान और बुद्धिमत्ता का विकास होता है। ऐसे जातक सीखने की क्षमता में कुशल होते हैं।
- बृहस्पति और मंगल ग्रह
गुरु बृहस्पति के साथ मंगल की युति से जातक को ज्ञान और नए-नए कार्य सीखने की क्षमता देने वाली होती है।
- गुरु और शनि ग्रह
बृहस्पति के साथ शनि जातक को, ऋण और संपत्ति के मामलों में लाभ देने वाली मानी जाती है।
- गुरु और शुक्र ग्रह
बृहस्पति और शुक्र बहुत ही शुभ ग्रह है। इनकी युति से जातक को सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
- बृहस्पति और केतु ग्रह
गुरु-बृहस्पति की केतु के साथ युति जातक को, आध्यात्मिक झुकाव और धार्मिक यात्राओं में रुचि देने वाली होती है।
- बृहस्पति और राहु ग्रह
यदि गुरु बृहस्पति राहु के साथ अच्छे प्रभाव में हैं तो, यह राहु के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करते है।
वे राहू के अशुभ प्रभाव, भ्रम और लालच को दूर करता है। इस युति के होने से जातक को टेक्नोलॉजी में बहुत पारंगत ज्ञान मिलता है। लेकिन ऐसे जातक मातृभूमि से संतुष्ट नहीं होता है व विदेश में जाने के शौक़ीन होते हैं।
बृहस्पति गुरु से लाभान्वित प्रिय राशियाँ
- धनु राशि
धनु राशि गुरु बृहस्पति की अपनी स्वराशि है, जिस पर उनकी विशेष कृपा रहती है। इस राशि के जातक ज्ञानी और ऊर्जावान होते हैं। साथ ही वें लेखन, अध्यापन और सरकारी क्षेत्रों में सफल होते हैं।
- मीन राशि
मीन राशि गुरु की एक स्वामित्व प्रधान राशि है। मीन राशि के जातक धैर्यवान होते हैं और आर्थिक रूप से बहुत संपन्न होते हैं। साथ ही समाज में उन्हें, बहुत मान-सम्मान मिलता हैं।
- कर्क राशि
कर्क राशि गुरु बृहस्पति की उच्च राशि है, जिस पर बृहस्पति की विशेष कृपा रहती है। इस राशि के जातक सुख-समृद्धि, धन लाभ और सौभाग्य को प्राप्त करते हैं। साथ ही, ऐसे जातकों को गुरु के शुभ प्रभाव से शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सफलता मिलती है।
- सिंह राशि
ज्योतिष में, सिंह राशि गुरु बृहस्पति की मित्र राशि है। यदि शुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो, यह जातक को ऊर्जावान, सफल और ज्ञानवान होने का आशीर्वाद देते हैं।

बृहस्पति गुरु के शुभ फलों के लिए करें ये उपाय
बृहस्पति गुरु की शुभ प्रभाव के लिए हमारे मंगल भवन के वरिष्ट आचार्यों द्वारा ये आसान उपाय बताए गए हैं। जो इस प्रकार हैं-
- गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनने से गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही आप गुरुवार का व्रत भी कर सकते हैं।
- गुरुवार के दिन पीले वस्तुओं जैसे कि पीले चावल, पीले फल, पीले वस्त्र, पिली मिठाई आदि का दान करने से गुरु बृहस्पति शुभ फल देते हैं।
- भगवान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से बृहस्पति कुंडली में शुभ परिणाम देते हैं और जातक समृद्ध शाली बनता है।
- “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का जाप करने से गुरु बृहस्पति के शुभ फल मिलते हैं।
- गुरुवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।
- गुरुवार का व्रत रखने से गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।
- गुरु बृहस्पति के लिए पुखराज रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज रत्न गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता देता है।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कुंडली में बृहस्पति गुरु का क्या महत्व है?
An. सभी ग्रहों में, बृहस्पति को गुरु का दर्जा दिया जाता है। क्योंकि यह सभी देवी-देवताओं के गुरु माने जाते हैं। कुंडली में यदि, गुरु ग्रह के प्रभाव से जीवन में सुख-दुख और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, कुंडली में गुरु बृहस्पति की स्थिति पर वैवाहिक जीवन और विवाह सम्बन्धी क्षेत्र भी प्रभावित करते हैं।
Q. क्या, कुंडली के पहले भाव में गुरु शुभ प्रभाव देते हैं?
An. हां, यदि कुंडली के लग्न भाव यानी पहले भाव में गुरु बृहस्पति की शुभ स्थिति शुभ ग्रहों के साथ है तो ; ऐसे जातक विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। समाज में ऐसे जातक की बहुत मान- प्रतिष्ठा होती है। वे धनवान भी होते है।
Q. गुरु बृहस्पति के साथ शनि के क्या प्रभाव होते हैं?
An. गुरु बृहस्पति के साथ शनि जातक को, ऋण और संपत्ति के मामलों में लाभ देने वाली मानी जाती है।
Q. गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव के लिए जातक को, कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
An. गुरु बृहस्पति के लिए पुखराज रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज रत्न गुरु बृहस्पति के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता देता है।




