प्रस्तावना
हमारे हिन्दू धर्म में, सनातन काल से ही एकादशी व्रत का विशेष महत्व रहा है। इस व्रत को, भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सबसे अधिक श्रेष्ठ साधन माना गया है। आध्यात्मिक रूप से भी पूरे वर्ष में आने वाली सभी 24 एकादशियों में प्रत्येक का व्रत का अपना एक अलग और बहुत ही विशेष महत्व होता है। इसी प्रकार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली विजया एकादशी भी विशेष रूप से शुभ और फलदायी मानी गई है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी जीवन में विजय और सफलता दिलाने वाली है।
इस व्रत को पूरे नियमों के विधि-पूर्वक करने पर न सिर्फ जातक को जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, बल्कि भगवान श्री हरि का आशीर्वाद भी मिलता है। और वह हर क्षेत्र में जीत हासिल करता है। तो, आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको साल 2026 की सभी एकादशी व्रत की सही तिथियों की जानकारी देंगे।
साथ ही, इस बार एकादशी पर होने वाले सूर्य देव के गोचर के अद्भुत प्रभाव के बारे में विस्तार से बताएंगे। इसलिए हमारे साथ, लेख में अंत तक बने रहिए और हमें अपने जरुरी सुझाव और प्रतिक्रिया देना न भूलें।
आपको हमारे ‘मंगल भवन’ में सभी प्रकार की पूजा, शुभ मांगलिक कार्य, विशेष अनुष्ठान व हवन इत्यादि के लिए पूर्ण रूप से शुद्ध व पवित्र पूजा सामग्री घर बैठे ही बहुत आसानी से मिल जाएगी। हमसे, अभी जुड़ने के लिए click now-
विजया एकादशी 2026- तिथि व शुभ मुहूर्त
इस साल 2026, विजया एकादशी दिनांक 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। इस एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 22 मिनट से होगा और इसका समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता होने के कारण विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। और इस व्रत का पारण अगले दिन 14 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट के मध्य किया जाएगा।
विजया एकादशी व्रत- धार्मिक महत्व व महिमा
हमारे धर्म शास्त्रों में, विजया एकादशी और साल भर आने वाली सभी एकादशी के व्रत का बहुत महत्व होता है। क्योंकि, इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है। साथ ही, यह व्रत न केवल वर्तमान जन्म, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति देने के लिए बहुत ही प्रभावी है।
शास्त्रों में, भी यह उल्लेख है कि इस एकादशी के प्रभाव से साधक को धर्म, अर्थ, काम और अंततः मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इसके अलावा, मान्यता है कि जीवन में बार-बार आने वाली असफलता, शत्रु बाधा, मानसिक कष्ट और किसी प्रकार के भय से मुक्ति पाने के लिए ‘विजया एकादशी’ का व्रत बहुत ही अद्भुत और प्रभावशाली होता है।
यदि हम ग्यारस के व्रत की की महिमा की बात करें तो, विजया एकादशी का वर्णन पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व इस विजया एकादशी का व्रत किया था। और इस व्रत के शुभ प्रभाव से ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।
साथ ही, शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इस दिन व्रत करने से स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्न दान और गौ दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, यह व्रत ‘वाजपेय यज्ञ’ के समान पुण्य देने वाला होता है।
एकादशी व्रत 2026- पूजा विधि
ज्योतिष शास्त्र और धर्म शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पवित्र अनुष्ठान और व्रत को करने की सम्पूर्ण विधि होती है। यदि हम पूरे-विधि-विधान से कोई व्रत करते हैं तो, हमें उस व्रत का सम्पूर्ण फल मिलता है। तो, आइये हम आपको आगे लेख में विजया एकादशी के व्रत की विधि के बारे में जानकारी देंगे-
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, पीले वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद श्री हरि, भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- इसके बाद उन्हें तुलसी दल, पीले पुष्प, फल, दीपक, धूप और चंदन अर्पित करें।
- पूर्ण रूप से षडोपचार विधि-विधान से पूजा कर विजया एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें।
- अंत में भगवान विष्णु को भोग अर्पित कर आरती करें।
- इस दिन आप यथा शक्ति फलाहार और व्रत का आहार ले सकते हैं।
- इसके साथ ही, इस दिन ब्राह्मणों, साधुओं, जरूरतमंदों, दीन-हीन व असहाय लोगों को दान-दक्षिणा देना विशेष पुण्यदायी माना गया है।
एकादशी व्रत के कुछ विशेष नियम
सभी व्रतों की तरह एकादशी व्रत के कुछ विशेष नियम होते हैं। आइए जान लेते हैं, किन नियमों का ध्यान रखना है-
व्रत के दिन आपको किसी भी प्रकार की परनिंदा, छल-कपट, क्रोध और द्वेष नहीं करना है।
- एकादशी के व्रत में, चावल और तामसिक भोजन पूर्ण रूप से निषेध है।
- व्रत के दिन काले व नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
- रात्रि में भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और नाम-स्मरण करें।
- विजया एकादशी पर दान का विशेष महत्व होता है, इसलिए पारण के समय यथा शक्ति दान करना जरूरी है।
- साथ ही, सनातन धर्म में दान को कलयुग का सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। विजया एकादशी जैसे पावन व्रत दिन पर किया गया दान अक्षय पुण्य का फल प्रदान करता है। अन्न, वस्त्र, धन और गौ दान इस दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माने गए हैं।
श्लोक है- मनुस्मृति में कहा गया है-
“ तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते ।
द्वापरे यज्ञं मेवा हर दानमेकं कलौ युगे ॥”
इसका अर्थ यह है कि, सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान ही मनुष्य के कल्याण का मार्ग है। इसलिए दान ही सर्व श्रेष्ठ मानवता भी है कर्म भी है। आगे लेख में हम आपको, साल 2026 में, आने वाली सभी एकादशी व्रत और उनकी सही तिथि की जानकारी देंगे-
| दिनांक | दिन | एकादशी व्रत |
| 14 जनवरी 2026 | बुधवार | षटतिला एकादशी |
| 29 जनवरी 2026 | गुरुवार | जया एकादशी |
| 13 फरवरी 2026 | शुक्रवार | विजया एकादशी |
| 27 फरवरी 2026 | शुक्रवार | आमलकी एकादशी |
| 15 मार्च 2026 | रविवार | पापमोचनी एकादशी |
| 29 मार्च 2026 | रविवार | कामदा एकादशी |
| 13 अप्रैल 2026 | सोमवार | वरूथिनी एकादशी |
| 27 अप्रैल 2026 | सोमवार | मोहिनी एकादशी |
| 13 मई 2026 | बुधवार | अपरा एकादशी |
| 27 मई 2026 | बुधवार | पद्मिनी एकादशी |
| 11 जून 2026 | गुरुवार | परमा एकादशी |
| 25 जून 2026 | गुरुवार | निर्जला एकादशी |
| 10 जुलाई 2026 | शुक्रवार | योगिनी एकादशी |
| 25 जुलाई 2026 | शनिवार | देवशयनी एकादशी |
| 9 अगस्त 2026 | रविवार | कामिका एकादशी |
| 23 अगस्त 2026 | रविवार | श्रवण पुत्रदा एकादशी |
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | अजा एकादशी |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | परिवर्तिनी एकादशी |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | इंदिरा एकादशी |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | पापांकुशा एकादशी |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | रमा एकादशी |
| 20 नवंबर 2026 | शुक्रवार | देवुत्थान एकादशी |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी |
| 20 दिसंबर 2026 | रविवार | मोक्षदा एकादशी |
इस बार , की विजया एकादशी ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ प्रभाव देने वाली मानी जा रही है। क्योंकि, इस माह जो कुंभ राशि में गोचर होने वाला है वह भी इसी दिन होने वाला है जिससे, सूर्य ग्रह की भी कृपा प्राप्त होगी और भगवान श्री हरी का भी आशीर्वाद मिलेगा। और हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों के अनुसार यह संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस संयोग से कुछ राशि के जातकों को विशेष रूप से शुभ परिणाम मिलने वाले है।
विजया एकादशी 2026- सूर्य गोचर कुंभ राशि में
ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों में, सूर्य ग्रह को आत्मा का कारक माना गया है। जो कि आत्मा, सरकारी नौकरी, उच्च मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता के कारक ग्रह है। शास्त्रों में, सूर्य ग्रह को सभी ग्रहों का राजा और देवता की संज्ञा दी जाती है। इसलिए, सूर्य ग्रह का शुभ प्रभाव जातकों के मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करने वाला होता है। ज्योतिष शास्त्र की गणना में, जब भी सूर्य किसी राशि में गोचर या राशि परिवर्तन करते हैं तो, प्रभाव सभी राशियों पर होता है।
लेकिन, कुछ राशियां ऐसी होती है, जिन्हें सूर्य के गोचर से अद्भुत और भाग्य बदलने वाले प्रभाव देखने को मिलते हैं। साथ ही, उन्हें मनचाही सफलता और धन लाभ भी मिलता है। इस बार 13 फरवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 49 मिनट पर सूर्य ग्रह, शनि की राशि कुंभ में राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। इसी दिन विजया एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा। इसलिए, यह संयोग शास्त्रों की दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जा रहा है। सूर्य के इस गोचर से विशेष रूप से तीन राशियाँ लाभान्वित होंगी, आये हम इन राशियों के बारे जान लेते हैं-

- मेष राशि
सूर्य ग्रह का कुंभ राशि में गोचर मेष राशि के जातकों के लिए लाभकारी रहने वाला है। इस कुंडली में सूर्य देव आपके ग्यारहवें भाव में प्रवेश करेंगे।जिसके परिणाम स्वरूप आपको धन लाभ, सफलता और इच्छाओं की पूर्ति होने के योग बन सकते हैं। आपका आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। इसके अलावा इस तिथि पर एकादशी के शुभ व्रत के होने से आपको विष्णु जी की असीम कृपा भी प्राप्त होगी। धन लाभ और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
- सिंह राशि
सूर्य आपकी राशि के स्वामी है। इसलिए, यह गोचर आपके लिए बहुत ही शुभ परिणाम देने वाला साबित होगा। आपकी कुंडली के सातवें भाव में यह गोचर होने वाला है। जिससे आपकी साझेदारी, विवाह और व्यावसायिक संबंधों में प्रभाव होगा। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी और आपसी समझ और प्रेम में वृद्धि होगी। नए व्यापारिक संबंध बनने के भी अच्छे योग हैं, जिससे आपको भविष्य में लाभ मिलेगा। प्रेम संबंध में भी सामंजस्य बना रहेगा। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। सदस्यों में प्रेम और सामंजस्य बना रहेगा।
- तुला राशि
सूर्य देव तुला राशि के जातकों के लिए, उनकी कुंडली के ग्यारहवें भाव के स्वामी है। और कुम्भ राशि में यह गोचर आपकी कुंडली के पांचवे भाव में होने जा रहा है। जिसके प्रभाव से आपको संतान, शिक्षा, बुद्धि और रचनात्मकता से जुड़े कार्यों में, शुभ परिणाम मिलने के योग हैं। इस माह आपकी संतान पक्ष से आपको कोई शुभ समाचार मिलने वाला है। साथ ही, नौकरी के लिए नए अवसर मिलने के योग हैं। सूर्य के शुभ प्रभाव से आपको इस माह मान-सम्मान में वृद्धि मिलने के भी योग हैं। भूमि-भवन से सम्बन्धित कार्य से धन लाभ होगा।
उपाय
- एकादशी के दिन, भगवान विष्णु को केले का भोग लगाने से सभी मनोकामना की पूर्ति होती है।
- इसके साथ ही, इस दिन पीली चीजों जैसे, मिठाई, पीले वस्त्र, या कोई पीली वस्तुओं का दान कर करना शुभ फलदायी होता है।
- सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करने से, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
- इस शुभ दिन पर दान करने से रुके हुए काम भी पूरे होते हैं। साथ ही, धन लाभ और आय के साधनों में वृद्धि होगी।
FAQS\ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-
Q. फरवरी 2026 में, विजया एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?
An. हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता होने के कारण विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। और इस व्रत का पारण अगले दिन 14 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट के मध्य किया जाएगा।
Q. साल 2026, में फरवरी माह में आने वाली एकादशी क्यों विशेष है?
An. इस बार 13 फरवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 49 मिनट पर सूर्य देव शनि की राशि कुंभ में गोचर करने वाले हैं। इसी दिन विजया एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा। इसलिए, यह संयोग बहुत ही शुभ माना जा रहा है।
Q. क्या, कुंभ राशि में होने वाला सूर्य का गोचर सभी राशियों को प्रभावित करेगा?
An. हां, जब भी सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसका असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलता है। लेकिन कुछ राशियां भाग्यशाली हैं, जिन्हें मनचाहा लाभ मिलता है।
Q. विजया एकादशी का व्रत क्यों रखना चाहिए, इस व्रत की क्या महिमा है?
An. विजया एकादशी का वर्णन पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व इस विजया एकादशी का व्रत किया था। और इस व्रत के शुभ प्रभाव से ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।




